कविता अतुल शर्मा सर की

 

कहीं दूर पहाडियों के पीछे छुपा है मेरा घर जाना तो था पर...


बड़ी लम्बी है डगर 

आज दिवाली है, मैं वहीं होता पर -

ये चंद पैसों की नौकरी ना होती अगर --

इस नौकरी के चक्कर में न जाने कितना करना पड़ेगा सबर...

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