Deepakam class 8th Sanskrit all chapters question answers

 अभ्यासात् जायते सिद्धिः


. संज्ञानसूक्तं सस्वरं पठत स्मरत लिखत

(“संज्ञान सूक्त को आवाज़ के साथ पढ़ो, याद करो और लिखो।” )


. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत-

(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखिए।)


() सर्वेषां मनः कीदृशं भवेत् ? (सभी का मन कैसा होना चाहिए?)

उत्तरम् :  सर्वेषां मनः सामञ्जस्ययुक्तं सौहार्दपूर्णं भवेत्। (सभी का मन मेल-जोल से भरा और सौहार्दपूर्ण होना चाहिए।)





() “सङ्गच्छध्वं संवदध्वम्इत्यस्य कः अभिप्रायः ? (“संगच्छध्वं संवदध्वम्का क्या अभिप्राय है?)








उत्तरम् :सङ्गच्छध्वं संवदध्वम्इत्यस्य अभिप्रायः अस्ति यः मानवः समाजे ऐक्यभावेन मिलित्वा गच्छेत् तथा परस्परं सम्यक् विचारविनिमयं कुर्यात्। (“संगच्छध्वं संवदध्वम्का अर्थ है कि सभी मनुष्य समाज में एकता के साथ मिलकर चलें और परस्पर अच्छे विचारों का आदान-प्रदान करें।)

() सर्वे किं परित्यज्य ऐक्यभावेन जीवेयुः? (सभी लोग किसे त्यागकर एकता के भाव से जिएँ?)

उत्तरम् : सर्वे वैमनस्यं परित्यज्य ऐक्यभावेन जीवेयुः। (सभी लोग वैर-भाव को त्यागकर एकता के भाव से जीवन व्यतीत करें।)

() अस्मिन् पाठे का प्रेरणा अस्ति? (इस पाठ में क्या प्रेरणा दी गई है?)

उत्तरम् : अस्मिन् पाठे मानवजातेः ऐक्यभावेन सहकार्यं कृत्वा सुखपूर्वकं जीवनं यापनस्य प्रेरणा अस्ति। (इस पाठ में मानव समाज को एकता के साथ मिलकर कार्य करते हुए सुखपूर्वक जीवन जीने की प्रेरणा दी गई है।)


. रेखा‌ङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

(रेखांकित पदों के आधार पर प्रश्न बनाइए।)


() परमेश्वरः सर्वत्र व्याप्तः अस्ति। (परमेश्वर सर्वत्र व्याप्त है।)

उत्तरम्कः सर्वत्र व्याप्तः अस्ति? (कौन सर्वत्र व्याप्त है?)







() वयम् ईश्वरं नमामः। (हम ईश्वर को नमस्कार करते हैं।)

उत्तरम्: वयं कं नमामः? (हम किसे नमस्कार करते हैं?)

() वयम् ऐक्यभावेन जीवामः। (हम एकता के भाव से जीते हैं।)

उत्तरम्: वयं कथं जीवामः? (हम कैसे जीते हैं?)

() ईश्वरस्य प्रार्थनया शान्तिः प्राप्यते। (ईश्वर की प्रार्थना से शांति प्राप्त होती है।)

उत्तरम्: कस्य प्रार्थनया शान्तिः प्राप्यते? (किसकी प्रार्थना से शांति प्राप्त होती है?)

() अहं समाजाय श्रमं करोमि। (मैं समाज के लिए श्रम करता हूँ।)

उत्तरम्: कस्मै अहं श्रमं करोमि? (मैं किसके लिए श्रम करता हूँ?)

() अयं पाठः ऋग्वेदात् सङ्कलितः। (यह पाठ ऋग्वेद से संकलित है।)

उत्तरम्: अयं पाठः कस्मात् सङ्कलितः? (यह पाठ किससे संकलित है?)

() वेदस्य अपरं नाम श्रुतिः। (वेद का दूसरा नाम श्रुति है।)

उत्तरम्: कस्य अपरं नाम किम्? (किसका दूसरा नाम श्रुति है।)

() मन्त्राः वेदेषु भवन्ति। (मंत्र वेदों में होते हैं।)

उत्तरम्: मन्त्राः कुत्र भवन्ति? (मंत्र कहाँ होते हैं?)


. पट्टिकातः शब्दान् चित्वा अधोलिखितेषु मन्त्रेषु रिक्तस्थानानि पूरयत.

(तालिका से शब्द चुनकर नीचे लिखे मंत्रों में रिक्त स्थान भरें।)


संवदध्वं, समितिः, आकूतिः, भागं, मनः, हृदयानि, जानाना, समानं, मनो, हविषा, सुसहासति, मनांसि

(सङ्गच्छध्वं  संवदध्वं  सं वो  मनांसि  जानताम्।
देवा  भागं  यथा पूर्वे सं  जानाना  उपासते।

हिंदी अनुवाद

एक साथ चलो, एक स्वर में बोलो, तुम्हारे मन एक-दूसरे को जानें।
जैसे प्राचीन काल में देवता अपने-अपने भाग को स्वीकार करके समन्वय के साथ कर्तव्यों का पालन करते थे।

()
समानो मन्त्रः  समितिः  समानी समानं  मनः  सह चित्तमेषाम्।
समानं  मन्त्रमभिमन्त्रये वः समानेन वो हविषा  जुहोमि।

हिंदी अनुवाद

इनका विचार समान हो, लक्ष्य की प्राप्ति समान हो, इनका मन सौहार्दपूर्ण हो, और इनका चित्त एक हो।
मैं तुम्हारे सामूहिक विचार को संस्कारित करके प्रचारित करता हूँ और तुम्हारी सामूहिक प्रार्थना से ज्ञान-यज्ञ को सिद्ध करता हूँ।

()
समानी   आकूतिः  समाना  हृदयानि  वः।
समानमस्तु वो  मनो  यथा वः  सुसहासति

हिंदी अनुवाद

तुम्हारा संकल्प समान हो, तुम्हारे हृदय सामरस्यपूर्ण हों।
तुम्हारा मन एकरूप हो ताकि तुम्हारा संगठन उत्तम और शोभन हो।


4. पाठे प्रयुक्तान् शब्दान् भावानुसारं परस्परं योजयत

(पाठ में प्रयुक्त शब्दों को उनके भाव (अर्थ) के अनुसार परस्पर जोड़ें।)


() संगछध्वम्                            सेवन्ते
() संवदध्वम्                            चित्तम्
() मनः                                      मिलित्वा चलत
() उपासते                                 सङ्कल्पः
() वसूनि                                   समस्तानि
() विश्वानि                              एकस्वरेण वदत
() आकूतिः                               धनानि

उत्तरम्:

संख्या

स्तम्भ (A)

स्तम्भ (B)

()

संगच्छध्वम् (मिलकर चलो)

मिलित्वा चलत (साथ मिलकर आगे बढ़ो)

()

संवदध्वम् (एक स्वर में बोलो)

एकस्वरेण वदत (एकता से बोलना)

()

मनः (मन)

चित्तम् (चित्त / चेतना / बुद्धि)

()

उपासते (उपासना करते हैं)

सेवन्ते (सेवा करते हैं)

()

वसूनि (वस्तुएं / धन)

धनानि (धन / संपत्ति)

()

विश्वानि (सारे जगत की वस्तुएँ)

समस्तानि (सभी वस्तुएँ)

()

आकूतिः (आकांक्षा / इच्छा)

सङ्कल्पः (संकल्प / उद्देश्य)

. उदाहरणानुसारेण लट्-लकारस्य वाक्यानि लोट्-लकारेण परिवर्तयत

(उदाहरण के अनुसार लट् लकार के वाक्यों को लोट् लकार में परिवर्तित करें।)


यथाबालिकाः नृत्यन्ति                      बालिकाः नृत्यन्तु

() बालकाः हसन्ति                              —————–
() युवां तत्र गच्छथः                              —————–
() यूयं धावथ                                        —————–
() आवां लिखावः                                  —————–
() वयं पठामः                                      —————–

उत्तरम्:

संख्या

लट्-लकार

लोट्-लकार

()

बालकाः हसन्ति (बालक हँसते हैं। )

बालकाः हसन्तु (बालक हँसें। (आज्ञा दी जा रही है))

()

युवां तत्र गच्छथः (तुम दोनों वहाँ जाते हो।)

युवां तत्र गच्छतम् (तुम दोनों वहाँ जाओ।)

()

यूयं धावथ (तुम लोग दौड़ते हो।)

यूयं धावत (तुम लोग दौड़ो।)

()

आवां लिखावः (हम दोनों लिखते हैं।)

आवां लिखाव (हम दोनों लिखें। (संकल्प/प्रस्ताव))

()

वयं पठामः (हम पढ़ते हैं।)

वयं पठाम (हम पढ़ें। (संकल्प/आमन्त्रण))

















अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका

(छोटी-छोटी वस्तुओं की एकता भी कार्य को सिद्ध करती है)


अभ्यासात् जायते सिद्धिः


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. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत

(. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखें -)


() मित्राणि ग्रीष्मावकाशे कुत्र गच्छन्ति? (मित्र ग्रीष्मावकाश में कहाँ जाते हैं?)

उत्तरम्: ग्रामम्। (गाँव)

() सर्वत्र कः प्रसृतः? (हर जगह कौन फैला हुआ है?)

उत्तरम्: वृक्षः। (वृक्ष)

() कः सर्वान् प्रेरयन् अवदत्? (सबको प्रेरित करते हुए किसने कहा?)

उत्तरम्: शिक्षकः। (शिक्षक)

() कः हितोपदेशस्य कथां श्रावयति? (हितोपदेश की कहानी कौन सुनाता है?)

उत्तरम्: शिक्षकः। (शिक्षक]

() कपोतराजस्य नाम किम्? (कबूतरों के राजा का नाम क्या है?)

उत्तरम्: चित्रग्रीवः। (चित्रग्रीव)

() व्याधः कान् विकीर्य जालं प्रसारितवान्? (शिकारी ने किस पर जाल फैलाया?)

उत्तरम्: कपोतान्। (कबूतरों पर)

() विपत्काले विस्मयः कस्य लक्षणम्? (विपत्ति के समय चकित हो जाना किसका लक्षण है?)

उत्तरम्: मूर्खस्य। (मूर्ख का)

() चित्रग्रीवस्य मित्रं हिरण्यकः कुत्र निवसति? (चित्रग्रीव का मित्र हिरण्यक कहाँ रहता है?)

उत्तरम्: वने। (जंगल में)

() चित्रग्रीवः हिरण्यकं कथं सम्बोधयति? (चित्रग्रीव हिरण्यक को किस तरह संबोधित करता है?)

उत्तरम्: प्रियसख। (प्रिय मित्र)

() पूर्वं केषां पाशान् छिनत्तु इति चित्रग्रीवः वदति? (चित्रग्रीव सबसे पहले किनके बंधन काटने को कहता है?)






उत्तरम्: शिशूनाम्। (बच्चों के)


. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत

(पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखें)


() प्रश्न: यदा केदारक्षेत्रम् आरोहन्तः आसन् किम् अभवत्?
हिंदी अनुवाद: जब वे लोग केदार क्षेत्र की ओर चढ़ रहे थे, तब क्या हुआ था?

उत्तरम्: यदा ते केदारक्षेत्रम् आरोहन्तः आसन्, तदा पर्वतेषु हिमवृष्टिः अभवत्।
हिंदी अनुवाद: जब वे लोग केदार क्षेत्र की ओर चढ़ रहे थे, तब पर्वतों पर बर्फ़ गिरने लगी थी।

() प्रश्न: सर्वे उच्चस्वरेण किं प्रार्थयन्त?
हिंदी अनुवाद: सभी लोग ऊँचे स्वर में क्या प्रार्थना कर रहे थे?

उत्तरम्: सर्वे जनाः उच्चस्वरेणईश्वरः रक्षतुइति प्रार्थयन्त।
हिंदी अनुवाद: सभी लोग ऊँचे स्वर मेंईश्वर रक्षा करेंऐसा प्रार्थना कर रहे थे।

() प्रश्न: असम्भवं कार्यं कथं कर्तुं शक्यते इति नायकः उक्तवान्?
हिंदी अनुवाद: असंभव कार्य को कैसे किया जा सकता हैऐसा नायक ने क्या कहा?


उत्तरम्: नायकः उक्तवान् – “यत्र इच्छा तत्र मार्गः”, इत्यनेन असम्भव कार्यं अपि सम्भवम् भवति।
हिंदी अनुवाद:नायक ने कहा – “जहाँ इच्छा है, वहाँ रास्ता है”, जिससे असंभव कार्य भी संभव हो सकता है।

() प्रश्न: निर्जने वने तण्डुलकणान् दृष्ट्वा चित्रग्रीवः किं निरूपयति?
हिंदी अनुवाद: निर्जन वन में चावल के दानों को देखकर चित्रग्रीव क्या बताता है?

उत्तरम्: चित्रग्रीवः निर्जने वने तण्डुलकणान् दृष्ट्वा तान् जालस्य संकेतः इति निरूपयति।
हिंदी अनुवाद: चित्रग्रीव चावल के दानों को देखकर उन्हें जाल का संकेत बताता है।

() प्रश्न: किं नीतिवचनं प्रसिद्धम्?
हिंदी अनुवाद: कौन-सा नीतिवचन प्रसिद्ध है?

उत्तरम्:विपत्तौ विवेकः आवश्यकःइति नीतिवचनं प्रसिद्धम्।
हिंदी अनुवाद:विपत्ति के समय विवेक आवश्यक होता हैयह नीति-वचन प्रसिद्ध है।

() प्रश्न: व्याधात् रक्षां प्राप्तुं चित्रग्रीवः कम् आदेशं दत्तवान्?
हिंदी अनुवाद: शिकारी से बचने के लिए चित्रग्रीव ने किसे आदेश दिया?

उत्तरम्: चित्रग्रीवः हिरण्यकं आदेशं दत्तवान् यत् सः व्याधस्य जालं छिन्तु।
हिंदी अनुवाद: चित्रग्रीव ने हिरण्यक को यह आदेश दिया कि वह शिकारी के जाल को काटे।


() प्रश्न: हिरण्यकः किमर्थं तूष्णीं स्थितः?
हिंदी अनुवाद: हिरण्यक चुपचाप क्यों खड़ा रहा?

उत्तरम्: हिरण्यकः दुःखितं मित्रं दृष्ट्वा करुणया तूष्णीं स्थितः।
हिंदी अनुवाद: हिरण्यक अपने दुःखी मित्र को देखकर करुणा से चुपचाप खड़ा रहा।

() प्रश्न: पुलकितः हिरण्यकः चित्रग्रीवं कथं प्रशंसति?
हिंदी अनुवाद: पुलकित हिरण्यक चित्रग्रीव की कैसे प्रशंसा करता है?

उत्तरम्: पुलकितः हिरण्यकः चित्रग्रीवं साहसी, धैर्यशीलः इति प्रशंसति।
हिंदी अनुवाद: पुलकित होकर हिरण्यक चित्रग्रीव को साहसी और धैर्यवान कहकर उसकी प्रशंसा करता है।

() प्रश्न: कपोताः कथं आत्मरक्षणं कृतवन्तः?
हिंदी अनुवाद: कबूतरों ने आत्मरक्षा कैसे की?

उत्तरम्: कपोताः एकत्र मिलित्वा समवेतबलस्य उपयोगेन आत्मरक्षणं कृतवन्तः।
हिंदी अनुवाद: कबूतरों ने मिलकर, सामूहिक बल का उपयोग करके आत्मरक्षा की।

() प्रश्न: नायकस्य प्रेरकवचनैः सर्वेऽपि किम् अकुर्वन्?
हिंदी अनुवाद: नायक के प्रेरक वचनों से सभी ने क्या किया?

उत्तरम्: नायकस्य प्रेरकवचनैः प्रेरिताः सर्वेऽपि कठिन कार्ये अपि साहसं कृतवन्तः।
हिंदी अनुवाद: नायक के प्रेरणादायक वचनों से सभी ने कठिन कार्य में भी साहस किया।


. अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा ल्यप् प्रत्ययान्तेषु परिवर्तयत

(“नीचे लिखे वाक्यों को पढ़कर उन्हें ल्यप् प्रत्यय (तुमुन् / ल्यप् ) में परिवर्तित कीजिए।”)


() छात्रः कक्षां प्रविशति संस्कृतं पठति         “कक्ष प्रविश्य संस्कृतं पठति

() भक्तः मन्दिरम् आगच्छति। पूजां करोति    ——————-

() माता भोजनं निर्माति पुत्राय ददाति        ——————-

() सुरेशः प्रातः उत्तिष्ठति। देवं नमति         ——————-

() रमा पुस्तकं स्वीकरोति। विद्यालयं गच्छति।   ——————-

() अहं गृहम् आगच्छामि। भोजनं करोमि।   ——————-

() तण्डुलकणान् विकिरति। जालं विस्तारयति। ——————-

() व्याधः तण्डुलकणान् अवलोकते। भूमौ अवतरति ——————

उत्तरम्:

ल्यप् प्रत्यय के साथ संस्कृत वाक्यों का हिंदी अनुवाद

मूल संस्कृत

परिवर्तित संस्कृत

छात्रः कक्षां प्रविशति। संस्कृतं पठति। (छात्र कक्षा में प्रवेश करता है। संस्कृत पढ़ता है।)

कक्षां प्रविश्य संस्कृतं पठति। (कक्षा में प्रवेश करके संस्कृत पढ़ता है।)

भक्तः मन्दिरम् आगच्छति। पूजां करोति। (भक्त मंदिर में आता है। पूजा करता है।)

मन्दिरम् आगम्य पूजां करोति। (मंदिर में आकर पूजा करता है।)

माता भोजनं निर्माति। पुत्राय ददाति। (माता भोजन बनाती है। पुत्र को देती है।)

भोजनं निर्माय पुत्राय ददाति। (भोजन बनाकर पुत्र को देती है।)

सुरेशः प्रातः उत्तिष्ठति। देवं नमति। (सुरेश प्रातः उठता है। देव को नमस्कार करता है।)

प्रातः उत्थाय देवं नमति। (प्रातः उठकर देव को नमस्कार करता है।)

रमा पुस्तकं स्वीकरोति। विद्यालयं गच्छति। (रमा पुस्तक स्वीकार करती है। विद्यालय जाती है।)

पुस्तकं स्वीकृत्य विद्यालयं गच्छति। (पुस्तक स्वीकार करके विद्यालय जाती है।)

अहं गृहम् आगच्छामि। भोजनं करोमि। (मैं घर आता हूँ। भोजन करता हूँ।)

गृहम् आगम्य भोजनं करोमि। (घर आकर भोजन करता हूँ।)

तण्डुलकणान् विकिरति। जालं विस्तारयति। (वह चावल के दाने बिखेरता है। जाल फैलाता है।)

तण्डुलकणान् विकीर्य जालं  विस्तारयति। (चावल के दाने बिखेरकर जाल फैलाता है।)

व्याधः तण्डुलकणान् अवलोकते। भूमौ अवतरति। (शिकारी चावल के दानों को देखता है। भूमि पर उतरता है।)

तण्डुलकणान् अवलोक्य भूमौ अवतरति। (चावल के दानों को देखकर भूमि पर उतरता है।)

. उदाहरणानुसारम् उपसर्गयोजनेन क्त्वास्थाने ल्यप्प्रत्ययस्य प्रयोगं कृत्वा पदानि परिवर्तयत

(उदाहरण के अनुसार उपसर्ग जोड़कर क्त्वा प्रत्यय के स्थान पर ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग करके पदों को परिवर्तित करें।)


सम्, , उप, उत्, वि, प्र

() छात्रः गृहं गत्वा भोजनं करोति छात्रः गृहम् आगत्य (+ गम् + ल्यप्) भोजनं करोति
(
) माता वस्त्राणि क्षालयित्वा पचति।  ———————————-
(
) शिक्षकः श्लोकं लिखित्वा पाठयति ———————————-
(
) रमा स्थित्वा गीतं गायति   ———————————-
(
) शिष्यः सर्वदा गुरुं नत्वा पठति ———————————-
(
) लेखकः आलोचनं कृत्वा लिखति ———————————-

ल्यप् प्रत्यय और उपसर्ग के साथ संस्कृत वाक्यों का हिंदी अनुवाद

मूल संस्कृत (Original Sanskrit)

परिवर्तित संस्कृत (Converted Sanskrit)

() छात्रः गृहं गत्वा भोजनं करोति। (छात्र घर जाकर भोजन करता है।)

छात्रः गृहम् आगत्य ( + गम् + ल्यप्) भोजनं करोति। (छात्र घर आकर भोजन करता है।)

() माता वस्त्राणि क्षालयित्वा पचति। (माता वस्त्र धोकर भोजन बनाती है।)

माता वस्त्राणि प्रक्षाल्य (प्र + क्षल् + ल्यप्) पचति। (माता वस्त्र प्रक्षालन करके भोजन बनाती है।)

() शिक्षकः श्लोकं लिखित्वा पाठयति। (शिक्षक श्लोक लिखकर पढ़ाता है।)

शिक्षकः श्लोकं संलिख्य (सम् + लिख् + ल्यप्) पाठयति। (शिक्षक श्लोक संकलन करके पढ़ाता है।)

() रमा स्थित्वा गीतं गायति। (रमा खड़े होकर गीत गाती है।)

रमा उपस्थाय (उप + स्था + ल्यप्) गीतं गायति। (रमा उपस्थित होकर गीत गाती है।)

() शिष्यः सर्वदा गुरुं नत्वा पठति। (शिष्य हमेशा गुरु को नमस्कार करके पढ़ता है।)

शिष्यः सर्वदा गुरुं प्रणम्य (प्र + नम् + ल्यप्) पठति। (शिष्य हमेशा गुरु को प्रणाम करके पढ़ता है।)

() लेखकः आलोचनं कृत्वा लिखति। (लेखक आलोचना करके लिखता है।)

लेखकः आलोचनं विकृत्य (वि + कृ + ल्यप्) लिखति। (लेखक आलोचना विश्लेषण करके लिखता है।)

. पाठे प्रयुक्तेन उपयुक्तपदेन रिक्तस्थानं पूरयत

(पाठ में प्रयुक्त उपयुक्त पद से रिक्त स्थान को पूरा करें।)


() सर्वैः एकचित्तीभूय———————उड्डीयताम्।

उत्तर: आकृष्टाः (आकर्षित होकर)

हिंदी अनुवाद: सभी एक मन होकर आकर्षित होकर उड़ चले।

() जालापहारकान् तान् ——————— पश्चाद् अधावत्।

उत्तर: दृष्ट्वा (देखकर)

हिंदी अनुवाद: जाल ले जा रहे उन कबूतरों को देखकर वह पीछे दौड़ा।

() अस्माकं मित्रं ——————— नाम मूषकराजः गण्डकीतीरे चित्रवने निवसति

उत्तर: हिरण्यकः (चूहे का नाम)

हिंदी अनुवाद: हमारा मित्र हिरण्यक नामक मूषकराज गण्डकी नदी के तट पर चित्रवन में रहता है।

() हिरण्यकः कपोतानाम् ——————— चकितस्तूष्णीं स्थितः

उत्तर: अवस्थाम् (स्थिति / अवस्था)

हिंदी अनुवाद: हिरण्यक कबूतरों की अवस्था देखकर चकित होकर चुपचाप खड़ा रहा।

() यतोहि विपत्काले ———————एव कापुरुषलक्षणम्।

उत्तर: विस्मयः (चकित होना / आश्चर्य करना)

हिंदी अनुवाद: क्योंकि विपत्ति के समय चकित रह जाना ही कायर व्यक्ति का लक्षण होता है।


. पाठे प्रयुक्तेन ल्यप्प्रत्ययान्तपदेन सह उपयुक्तं पदं योजयत

(पाठ में प्रयुक्त ल्यप्-प्रत्ययान्त (ल्यप् प्रत्यय से बने) शब्द के साथ उपयुक्त शब्द को मिलाइए।)


() विकीर्य (बिखरा हुआ)                                                          जालम् (जाल)


(
) विस्तीर्य (विस्तारित)                                                            जालापहारकान् (जाल ले जा रहे पक्षियों की ओर)


(
) अवतीर्य (उतरकर)                                                               उड्डीयताम् (आओ उड़ें)


(
) अवलोक्य (ध्यान से देखना)                                                  तद्वचनम् (यही शब्द है)


(
) एकचित्तीभूय (एक मन होकर)                                             भूमौ (भूमि पर)


(
) प्रत्यभिज्ञाय (पहचानकर)                                                      तण्डुलकणान् (चावल के दाने)

संस्कृत (ल्यप् पद)

उपयुक्त पदम्

हिंदी अनुवाद

() विकीर्य ()

जालम्

जाल को बिखेरकर

() विस्तीर्य

जालापहारकान्

जाल ले जा रहे पक्षियों की ओर फैलकर

() अवतीर्य

भूमौ

भूमि पर उतरकर

() अवलोक्य

तद्वचनम्

उस कथन को देखकर

() एकचित्तीभूय

उड्डीयताम्

एक मन होकर उड़ चलो

() प्रत्यभिज्ञाय

तण्डुलकणान्

चावल के दानों को पहचानकर

. समासयुक्तपदेन रिक्तस्थानं पूरयत

(समासयुक्त शब्द से रिक्त स्थान को भरें।)


() गण्डक्याः तीरम्  = गण्डकीतीरम्         तस्मिन् = गण्डकीतीरे

() तण्डुलानां कणाः = ——————-                तान् = ——————-

() जालस्य अपहारकाः = ——————            तान् = ——————-

() अवपाताद् भयम् = ——————–               तस्मात् = ——————-

() कापुरुषाणां लक्षणम्  = ——————–         तस्मिन् = ———————

उत्तरम्:

() गण्डक्याः तीरम् = गण्डकीतीरम्

तस्मिन् = गण्डकीतीरे

हिंदी : गण्डकी नदी का तट = गण्डकीतीरम्, उसमें = गण्डकीतीरे

() तण्डुलानां कणाः = तण्डुलकणाः

तान् = तण्डुलकणान्

हिंदी : चावल के कण = तण्डुलकणाः, उन्हें = तण्डुलकणान्

() जालस्य अपहारकाः = जालापहारकाः

तान् = जालापहारकान्

हिंदी : जाल के चोर/ले जाने वाले = जालापहारकाः, उन्हें = जालापहारकान्

() अवपाताद् भयम् = अवपातभयम्

तस्मात् = अवपातभयात्
हिंदी : गिरने का डर = अवपातभयम्, उस डर से = अवपातभयात्

() कापुरुषाणां लक्षणम् = कापुरुषलक्षणम्

तस्मिन् = कापुरुषलक्षणे

हिंदी : कायरों का लक्षण = कापुरुषलक्षणम्, उसमें = कापुरुषलक्षणे


. सार्थकपदं ज्ञात्वा सन्धिविच्छेदं कुरुत

(अर्थपूर्ण शब्द को पहचानकर संधि-विच्छेद कीजिए।)


() इत्याकर्ण्य       =     इति   +   आकर्ण्य

() चित्रग्रीवोऽवदत्     = चित्रग्रीवः + अवदत्

() बालकोऽत्र  = ————– + ————— + 

() धैर्यमथाभ्युदये = ————– + ————— + —————–

() भोजनेऽप्यप्रवर्तनम् = ————– + ————— + —————–

() नमस्ते                  =—————- + ——————

() उपायश्चिन्तनीयः          =————— + ——————

() व्याधस्तत्र                 =————— + ——————

() हिरण्यकोऽप्याह                 = ————— +  ———— + ——————

() मूषकराजो गण्डकीतीरे   =  ————— +  – ———— + ——————

() अतस्त्वाम् =  ————— + ————

() कश्चित्  =  ————–  + ————     

उत्तरम्:

() इत्याकर्ण्य = इति + आकर्ण्य
() चित्रग्रीवोऽवदत् = चित्रग्रीवः + अवदत्
() बालकोऽत्र = बालकः + अत्र
() धैर्यमथाभ्युदये = धैर्यम् + अथ + अभ्युदये
() भोजनेऽप्यप्रवर्तनम् = भोजने + अपि + अप्रवर्तनम्
() नमस्ते = नमः + ते
() उपायश्चिन्तनीयः = उपायः + चिन्तनीयः
() व्याधस्तत्र = व्याधः + तत्र
() हिरण्यकोऽप्याह = हिरण्यकः + अपि + आह
() मूषकराजो गण्डकीतीरे = मूषकराजः + गण्डकी + तीरे
() अतस्त्वाम् = अतः + त्वाम्
() कश्चित् = कः + चित्



सुभाषितस्सं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु 

(सुंदर वचनों (सुभाषितों) का सेवन करके अपना जीवन सफल बनाओ।)

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अभ्यासात् जायते सिद्धिः


. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत







(पाठ के आधार पर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखें)


() गीतानि के गायन्ति ? (गीत कौन गाते हैं?)

उत्तर: देवाः (देवता)

() कः बलं वेत्ति ? (कौन बल को नहीं जानता?)

उत्तर: मषूकः (मच्छर)

() कः वसन्तस्य गुणं वेत्ति ? (वसंत ऋतु का गुण कौन जानता है?)

उत्तर: कविः (कवि)

() मषूकः कस्य बलं वेत्ति ? (मच्छर किसके बल को नहीं जानता?)

उत्तर: अनिलस्य (वायु का)

() फलोद्गमैः के नम्राः भवन्ति ? (फलों के भार से कौन झुक जाते हैं?)








उत्तर: वृक्षाः (वृक्ष)

() केन समसख्यं करणीयम् ? (किसके साथ मित्रता नहीं करनी चाहिए?)

उत्तर: दुष्टैः (दुष्टों के साथ)

() केन विना दैवं सिध्यति ? (किसके बिना दैव सफल नहीं होता?)

उत्तर: पुरुषेण (पुरुष के बिना)


. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत

(पाठ के आधार पर नीचे लिखे गए प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखें।)


() तरवः कदा नम्राः भवन्ति ? (वृक्ष कब झुक जाते हैं?)

उत्तर: तरवः फलोद्गमैः नम्राः भवन्ति। (वृक्ष फलों के भार से झुक जाते हैं।)

() समृद्धिभिः के अनुद्धताः भवन्ति ? (समृद्धि (संपन्नता) के बाद कौन घमंडी नहीं होते?)







उत्तर: सत्पुरुषाः समृद्धिभिः अनुद्धताः भवन्ति। (सज्जन व्यक्ति समृद्धि पाकर भी घमंडी नहीं होते।)

() सत्पुरुषाणां स्वभावः कीदृशः भवति ? (सज्जनों का स्वभाव कैसा होता है?)

उत्तर: सत्पुरुषाणां स्वभावः सज्जनता-पूरितः, दयालुः भवति। (सज्जनों का स्वभाव विनम्र और दयालु होता है।)

() सत्यम् कदा सत्यम् भवति ? (सत्य कब सत्य नहीं होता?)

उत्तर: हितं विना उक्तं सत्यम् सत्यम् भवति। (जो सत्य हितकारी नहीं होता, वह सत्य नहीं माना जाता।)

() दैवं कदा सिध्यति ? (दैव (भाग्य) कब सफल नहीं होता?)

उत्तर: पुरुषकारं विना दैवं सिध्यति। (पुरुषार्थ (प्रयास) के बिना दैव (भाग्य) सफल नहीं होता।)


. स्तम्भयोः मेलनंकुरुत -

(दोनों स्तम्भों का मिलान करें)

संख्या

() उक्तिः (संस्कृत में)

() भावार्थः (संस्कृत में)

हिंदी अनुवाद

1

गायन्ति देवाः किल गीतकानि

भारतभूमेः माहात्म्यवर्णनम्

देवता इस भारतभूमि के गीत गाते हैंभारत की महिमा का वर्णन।

2

गुणी गुणं वेत्ति

सज्जनः एव गुणानां मर्मज्ञः

गुणों की पहचान सिर्फ गुणी व्यक्ति ही कर सकता है।

3

भवन्ति नम्राः तरवः फलोद्गमैः

सत्पुरुषाणां स्वाभाविकी नम्रता

जैसे वृक्ष फल आने पर झुक जाते हैं, वैसे ही सज्जनों में स्वाभाविक नम्रता होती है।

4

यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते

सुवर्णं चतुर्भिः प्रकारैः परीक्ष्यते

जैसे सोने की परीक्षा चार तरीकों से होती है।

5

अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति

प्रज्ञा, दमः, दानं, कृतज्ञता इत्यादयः

आठ गुण (जैसे बुद्धि, संयम, दान, कृतज्ञता आदि) मनुष्य को चमकाते हैं।

6

दुर्जनेन समं सख्यं कारयेत्

दुष्टसङ्गः उष्णाङ्गारसदृशः

दुष्टों की संगति जलते अंगारे के समान होती है, इसलिए उनसे मित्रता करें।

7

एकेन चक्रेण रथस्य गतिः

केवलं दैवं प्रयत्नं विना असिद्धम्

जैसे रथ एक पहिए से नहीं चल सकता, वैसे ही प्रयत्न के बिना केवल भाग्य से सफलता नहीं मिलती।

. अधः प्रदत्तमञ्जूषातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत -







(नीचे दी गई मंजूषा से शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरें)


फलोद्गमैः = फलों से / परिणामों से

गुणं = गुण / विशेषता

कृतज्ञता = आभार / उपकार की पहचान

सिध्यति = सिद्ध होता है / पूर्ण होता है

श्रुतम् = सुना हुआ / शिक्षा / विद्या

शीलेन = अच्छे आचरण से / सद्गुण से


() गुणी ———— वेत्ति, वेत्ति निर्गुणः

उत्तर: गुणं

हिंदी अनुवाद: गुणी व्यक्ति गुण को पहचानता है, निर्गुण व्यक्ति नहीं।

() भवन्ति नम्राः तरवः —————

उत्तर: फलोद्गमैः

हिंदी अनुवाद: वृक्ष फलों से लदकर नम्र हो जाते हैं।

() पुरुषः परीक्ष्यते कुलेन, —————-, गुणेन, कर्मणा

उत्तर: शीलेन

हिंदी अनुवाद: मनुष्य की परीक्षा उसके कुल, आचरण, गुण और कर्म से होती है।

() गुणाः पुरुषं दीपयन्तिप्रज्ञा, कौल्यं, दमः, ————–

उत्तर: कृतज्ञता

हिंदी अनुवाद: गुण मनुष्य को प्रकाशित करते हैंबुद्धि, शील, संयम, और कृतज्ञता।

() दानं यथाशक्ति —————- च।

उत्तर: श्रुतम्

हिंदी अनुवाद: सामर्थ्यानुसार दान और अध्ययन (श्रवण/ज्ञान) करना चाहिए।

() एवं पुरुषकारेण विना दैवं —————

उत्तर: सिध्यति

हिंदी अनुवाद: इस प्रकार प्रयत्न के बिना केवल दैव (भाग्य) से सफलता नहीं मिलती।


. समुचितं विकल्पं चिनुत

(उचित विकल्प चुनें)


() “गायन्ति देवाः किल गीतकानि” – इत्यस्य श्लोकस्य मुख्यविषयः कः ?

उत्तरम्: (ii) भारतभूमेः गौरवम्

🔹 हिंदी अनुवाद: इस श्लोक का मुख्य विषय भारत भूमि का गौरव है।

() “गुणी गुणं वेत्ति” – इत्यत्र कः गुणं जानाति ?

उत्तरम्: (ii) निर्गुणः

🔹 हिंदी अनुवाद: ‘गुणी गुण को पहचानता है’, इस कथन में निर्गुण व्यक्ति गुण नहीं जानता।

() “पिको वसन्तस्य गुणं वायसः” – इत्यस्य तात्पर्यं किम् ?

उत्तरम्: (ii) सुजन एव गुणं जानाति

🔹 हिंदी अनुवाद: इस कथन का तात्पर्य है कि सज्जन व्यक्ति ही गुणों को पहचानता है।

() “भवन्ति नम्राः तरवः फलोद्गमैः” – इत्यस्य अर्थः कः?

उत्तरम्: (iii) फलयुक्ताः वृक्षाः नम्राः भवन्ति

🔹 हिंदी अनुवाद: फलों से लदे वृक्ष झुक जाते हैं।

() “ सा सभा यत्र सन्ति वृद्धाः ” – इत्यत्र सभायाः महत्त्वं किम् ?

उत्तरम्: (iii) धर्मोपदेशाय ज्ञानवृद्धाः जनाः आवश्यकाः

🔹 हिंदी अनुवाद: सभा में धर्म का उपदेश देने के लिए ज्ञानी वृद्ध जन आवश्यक होते हैं।

() दुर्जनेन सह सख्यं किमर्थं कार्यम् ?

उत्तरम्: (iv) सः उष्णाङ्गारवद् हानिकरः भवति

🔹 हिंदी अनुवाद: दुष्ट व्यक्ति जलते अंगारे की तरह हानिकारक होता है, इसलिए उससे मित्रता नहीं करनी चाहिए।


Chapter 4 

pastedGraphic_2.png


अभ्यासात् जायते सिद्धिः


. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत






(नीचे लिखे गए प्रश्नों के एक-शब्द में उत्तर लिखो।)


() समाजदिनपत्रिकायाः प्रतिष्ठाता कः? (‘समाजदैनिक समाचार-पत्र का संस्थापक कौन था?)

उत्तरम्: गोपबन्धुः (गोपबंधु)

() गोपबन्धुः कस्मै स्वभोजनं दत्तवान्? (गोपबंधु ने अपना भोजन किसे दिया?)

उत्तरम्: भिक्षुकाय (भिखारी को)

() मरणासन्नः कः आसीत्? (मरणासन्न कौन था?)

उत्तरम्: पुत्रः (पुत्र)

() गोपबन्धुः केन उपाधिना सम्मानितः अभवत्? (गोपबंधु को किस उपाधि से सम्मानित किया गया?)

उत्तरम्: उत्कलमणिः (उत्कलमणि)

() गोपबन्धुः कति वर्षाणि कारावासं प्राप्तवान्? (गोपबंधु को कितने वर्षों तक कारावास मिला?)





उत्तरम्: द्वौ (दो)


. एकवाक्येन उत्तरं लिखत

(एक वाक्य में उत्तर लिखो।)


() गोपबन्धुः किमर्थम् अश्रुपूर्णनयनः अभवत्?

उत्तरम्: मित्रस्य मरणं ज्ञात्वा गोपबन्धुः अश्रुपूर्णनयनः अभवत्।

हिंदी अनुवाद:

प्रश्न: गोपबन्धु आँसू भरी आँखों वाले क्यों हो गए?

उत्तर: अपने मित्र की मृत्यु जानकर गोपबन्धु की आँखें आँसुओं से भर गईं।

() कीदृशं पुत्रं विहाय गोपबन्धुः समाजसेवाम् अकरोत्?

उत्तरम्: रोगपीडितं पुत्रं विहाय गोपबन्धुः समाजसेवाम् अकरोत्।






हिंदी अनुवाद:

प्रश्न: गोपबन्धु ने किस प्रकार के पुत्र को छोड़कर समाजसेवा की?

उत्तर: गोपबन्धु ने रोगग्रस्त पुत्र को छोड़कर समाजसेवा की।

() गोपबन्धोः कृतेउत्कलमणिःइति उपाधिः किमर्थं प्रदत्ता?

उत्तरम्: समाजसेवायाम् अग्रणीभावेन कार्यं कृत्वा गोपबन्धोः कृतेउत्कलमणिःइति उपाधिः प्रदत्ता।

हिंदी अनुवाद:

प्रश्न: गोपबन्धु कोउत्कलमणिकी उपाधि क्यों दी गई?

उत्तर: समाजसेवा में अग्रणी कार्य करने के कारण गोपबन्धु कोउत्कलमणिकी उपाधि दी गई।

() गोपबन्धुः कुत्र जन्म लब्धवान्?

उत्तरम्: गोपबन्धुः ओडिशाराज्ये जन्म लब्धवान्।

हिंदी अनुवाद:







प्रश्न: गोपबन्धु ने कहाँ जन्म लिया?

उत्तर: गोपबन्धु ने ओडिशा राज्य में जन्म लिया।

() गोपबन्धुः सर्वदा केषाम् उपयोगं कृतवान्?

उत्तरम्: गोपबन्धुः सर्वदा जनहिताय स्वजीवनस्य उपयोगं कृतवान्।

हिंदी अनुवाद:

प्रश्न: गोपबन्धु ने सदा किसके लिए अपने जीवन का उपयोग किया?

उत्तर: गोपबन्धु ने सदा जनहित के लिए अपने जीवन का उपयोग किया।


. कोष्ठके दत्तानि पदानि उपयुज्य वाक्यानि रचयत

(कोष्ठक में दिए गए शब्दों का प्रयोग करके वाक्य बनाइए।)


सेवाम् = सेवा (सेवा करना / सेवा)

सुस्वादूनि = स्वादिष्ट (स्वादिष्ट वस्तुएँ / रुचिकर)

सहायताम् = सहायता (मदद)

स्वदेशवस्त्राणि = स्वदेशी वस्त्र (देश में बने कपड़े)

अन्यतमः = किसी एक / उनमें से एक


() ————————————————————
() ————————————————————
() ————————————————————-
() ————————————————————-
() ————————————————————-

उत्तरम्:

() सेवाम् गोपबन्धुः सर्वदा समाजसेवायै सेवाम् अकरोत्।

हिंदी अनुवाद: गोपबन्धु ने सदा समाज की सेवा की।

() सुस्वादूनिमाता सुस्वादूनि भोजनानि पचति।

हिंदी अनुवाद: माँ स्वादिष्ट भोजन पकाती हैं।

() सहायताम्विपत्तौ मित्रात् सहाय्यताम् अपेक्षितव्यम्।

हिंदी अनुवाद: संकट में मित्र से सहायता की अपेक्षा करनी चाहिए।

() स्वदेशवस्त्राणिबालेन स्वदेशवस्त्राणि धारितानि।

हिंदी अनुवाद: बालक ने देशी वस्त्र पहने।

() अन्यतमःगोपबन्धुः देशसेवकानाम् अन्यतमः आसीत्।

हिंदी अनुवाद: गोपबन्धु देशसेवकों में से एक प्रमुख थे।


. चित्रं दृष्ट्वा पञ्च वाक्यानि रचयत -

(चित्र देखकर पाँच वाक्य बनाएँ।)


pastedGraphic_3.png

() ……………………………………………….

() ……………………………………………….

() ……………………………………………….

() ……………………………………………….

() ……………………………………………….

उत्तरम्:

() गोपबन्धुः जलप्लावपीडितान् सहायते। (गोपबंधु बाढ़ पीड़ितों की मदद करते हैं।)

() सः छात्रान् शिक्षति। (वह छात्रों को पढ़ाते हैं।)

() गोपबन्धुः स्वदेशी वस्त्र धारयति। (गोपबंधु स्वदेशी वस्त्र पहनते हैं।)

() सः भिक्षुकाय भोजनं ददाति। (वह भिखारी को भोजन देता है।)

() गोपबन्धुः दयावान् अस्ति। (गोपबंधु दयालु हैं।)


. समुचितेन पदेन श्लोकं पूरयत

(उचित शब्द से श्लोक को पूरा कीजिए।)


() ————————  मम लीयतां तनुः

() उत्कलमणिरित्याख्यः प्रसिद्धो ————————–

() स्वदेशलोकास्तदनु ———————– नु

() स्वराज्यमार्गे यदि ———————,
()———————-परिपूरितास्तु सा

उत्तरम्:

() स्वदेशभूमौ मम लीयतां तनुः

हिंदी अनुवाद: मेरे शरीर को स्वदेश की भूमि में विलीन हो जाना चाहिए।

() उत्कलमणिरित्याख्यः प्रसिद्धो लोकसेवकः

हिंदी अनुवाद: उत्कलमणि के नाम से प्रसिद्ध लोकसेवक।

() स्वदेशलोकास्तदनु प्रयान्तु नु

हिंदी अनुवाद: देशवासी मेरे पीछे चलें।

() स्वराज्यमार्गे यदि गर्तमालिका

हिंदी अनुवाद: स्वतंत्रता के मार्ग में यदि गड्ढों की माला हो।

() ममास्थिमांसैः परिपूरितास्तु सा

हिंदी अनुवाद: मेरे अस्थियों और मांस से वे गड्ढे भर जाएँ।


. उदाहरणानुसारं क्रियापदं स्त्रीलिङ्गे परिवर्तयत

(उदाहरण के अनुसार क्रियापद को स्त्रीलिंग में बदलो।)


(यथागतवान् = गतवती)

संस्कृत (पुंलिङ्ग)

स्त्रीलिङ्ग रूप

हिन्दी अनुवाद

() प्राप्तवान्

प्राप्तवती

प्राप्त हुई

() उपविष्टवान्

उपविष्टवती

बैठी हुई

() भुक्तवान्

भुक्तवती

भोजन कर चुकी

() कृतवान्

कृतवती

किया हुआ

() गृहीतवान्

गृहीतवती

ग्रहण किया हुआ



. समुचितेन पदेन सह स्तम्भौ मेलयत

(उचित शब्द के साथ स्तम्भों का मिलान कीजिए।)

संस्कृत (स्तम्भ )

संस्कृत (स्तम्भ )

हिन्दी अनुवाद

1. समाजः

दिनपत्रिका

समाजएक समाचार-पत्र (अखबार) है।

2. ममास्थिमांसैः

परिपूरितास्तु

मेरी हड्डियाँ और मांस से भरे हुए हों।

3. उत्कलमणिः

गोपबन्धुः

उत्कलमणिउपाधि गोपबन्धु को दी गई थी।

4. आँ आँइति

क्रन्दनध्वनिः

आँ आँएक रोने की ध्वनि है।

5. सुस्वादूनि

व्यञ्जनानि

स्वादिष्ट चीजें = व्यंजन।



. घटनाक्रमेण वाक्यानि पुनः लिखत (क्रम से) –

(वाक्यों को घटनाओं के सही क्रम में फिर से लिखो।)


() भिक्षुकञ्च तद्भोजितवान्। (उन्होंने भिखारी को भोजन कराया।)

() प्रफुल्लचन्द्ररायः गोपबन्धुम् उत्कलमणिः इति उपाधिना सम्मानितवान्। (प्रफुल्लचंद्र राय ने गोपबंधु को उत्कलमणि की उपाधि से सम्मानित किया।)

() गोपबन्धुः अश्रुपूर्णनयनोऽभवत् (गोपबंधु की आँखें आँसुओं से भर गईं।)

() अतिथयो हस्तपादं क्षालयित्वा आसनेषु उपविष्टवन्तः। (अतिथियों ने हाथ-पैर धोकर आसनों पर बैठ गए।)

() दिनत्रयात् किमपि भुक्तम्। (तीन दिन से कुछ भी नहीं खाया गया।)

उत्तरम्

() दिनत्रयात् किमपि भुक्तम्।

() अतिथयो हस्तपादं क्षालयित्वा आसनेषु उपविष्टवन्तः।

() गोपबन्धुः अश्रुपूर्णनयनोऽभवत्।

() भिक्षुकञ्च तद्भोजितवान्।

() प्रफुल्लचन्द्ररायः गोपबन्धुम् उत्कलमणिः इति उपाधिना सम्मानितवान्।







Chapter गीता सुगीता कर्तव्या

(गीता और सुगीता का पालन करना आवश्य है)


pastedGraphic_4.pngअभ्यासात् जायते सिद्धिः


. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत







(नीचे लिखे गए प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखो।)


() श्रद्धावान् जनः किं लभते? (श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति क्या प्राप्त करता है?)

उत्तरम्: ज्ञानम् (ज्ञान)

() कस्मात् सम्मोहः जायते? (मोह (भ्रम) किससे उत्पन्न होता है?)

उत्तरम्: क्रोधात् (क्रोध से)

() सम्मोहात् किं जायते? (भ्रम (मोह) से क्या उत्पन्न होता है? )

उत्तरम्: स्मृतिविभ्रमः (स्मृति का भ्रम)

() अर्जुनाय गीतां कः उपदिष्टवान्? (अर्जुन को गीता किसने उपदेश दी?)

उत्तरम्: श्रीकृष्णः (भगवान श्रीकृष्ण ने)

() हर्षामर्षभयोद्वेगैः मुक्तः नरः कस्य प्रियः भवति? (जो व्यक्ति हर्ष, क्रोध, भय और चिंता से मुक्त होता है वह किसको प्रिय होता है?)








उत्तरम्: भगवतः (भगवान को)


. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत

(पूर्ण वाक्य बनाकर उत्तर लिखें।)


() कीदृशं वाक्यं वाङ्मयं तपः उच्यते ?

उत्तरम्: अनुद्वेगकरं, सत्यं, प्रियहितं वाक्यं वाङ्मयं तपः उच्यते।

हिन्दी अनुवाद:

प्रश्न: किस प्रकार का वाक्य वाणी का तप कहलाता है?

उत्तर: जो वाक्य उद्वेग उत्पन्न करे, सत्य हो, प्रिय और हितकारी होवह वाणी का तप कहलाता है।

() कीदृशः जनः स्थितधीः उच्यते ?

उत्तरम्: यः दुःखेषु अनुद्विग्नमनाः, सुखेषु विगतस्पृहः, वीतरागभयक्रोधः भवति, सः स्थितधीः उच्यते।








हिन्दी अनुवाद:

प्रश्न: किस प्रकार का व्यक्ति स्थिर बुद्धि (स्थितधी) वाला कहा जाता है?

उत्तर: जो व्यक्ति दुःख में विचलित नहीं होता, सुख में स्पृहा (लालच) नहीं करता, और राग, भय, क्रोध से मुक्त होता हैवह स्थितप्रज्ञ (स्थिर बुद्धि वाला) कहलाता है।

() जनः कथं प्रणश्यति ?

उत्तरम्: क्रोधात् सम्मोहः, सम्मोहात् स्मृतिविभ्रमः, स्मृतिभ्रंशात् बुद्धिनाशः, बुद्धिनाशात् प्रणश्यति।

हिन्दी अनुवाद:

प्रश्न: मनुष्य कैसे नष्ट हो जाता है?

उत्तर: क्रोध से मोह उत्पन्न होता है, मोह से स्मृति का भ्रम, उससे बुद्धि का नाश और फिर बुद्धि के नष्ट होने से मनुष्य का विनाश हो जाता है।

() जनः कथम् उत्तमां शान्तिं प्राप्नोति ?

उत्तरम्: श्रद्धावान्, तत्परः, संयतेन्द्रियः जनः ज्ञानं लभते, ततः सः उत्तमां शान्तिं प्राप्नोति।







हिन्दी अनुवाद:

प्रश्न: मनुष्य उत्तम शांति कैसे प्राप्त करता है?

उत्तर: श्रद्धावान, तत्पर तथा संयमित इन्द्रियों वाला व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करता है और ज्ञान के द्वारा वह उत्तम शांति को प्राप्त करता है।

() उपदेशप्राप्तये त्रयः उपायाः के भवन्ति ?

उत्तरम्: प्रणिपातः, परिप्रश्नः, सेवयाएते त्रयः उपायाः भवन्ति।

हिन्दी अनुवाद:

प्रश्न: उपदेश (ज्ञान) प्राप्त करने के तीन उपाय कौन-कौन से हैं?

उत्तर: प्रणाम करना (विनम्रता), उचित प्रश्न पूछना और सेवा करनाये तीन उपाय हैं।


. कोष्ठके दत्तानि पदानि उपयुज्य वाक्यानि रचयत

(कोष्ठक में दिए गए शब्दों का उपयोग करके वाक्य बनाइए।)


                        सेवया, स्मृतिविभ्रमः, योगी, वाङ्मयं, स्थितधीः

() अनुद्वेगकरं सत्यं प्रियहितं वाक्यं वाङ्मयं तपः उच्यते।
(
जो वचन उद्वेगहीन, सत्य, प्रिय और हितकारी हो, वह वाचिक तप कहलाता है।)

() सततं सन्तुष्टः दृढनिश्चयः योगी भवति।
(
जो सदा संतुष्ट और दृढ़ निश्चयी है, वह योगी होता है।)

() अनुद्विग्नमनाः मुनिः स्थितधीः उच्यते।
(
जो अविचलित मन वाला मुनि है, उसे स्थितप्रज्ञ कहा जाता है।)

() तद् आत्मज्ञानं प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया विद्धि।
(
उस आत्मज्ञान को प्रणाम, प्रश्न और सेवा से जानो।)

() सम्मोहात् स्मृतिविभ्रमः भवति।
(
मोह से स्मृति का भ्रम होता है।)


. अधोलिखितानि पदानि उपयुज्य वाक्यानि रचयत

(नीचे लिखे हुए शब्दों का प्रयोग करके वाक्य बनाइए।)


() उच्यते  ————————————————-

()    ——————————————————

()     —————————————————–

() लब्ध्व   ————————————————–

() कुर्यात्   ————————————————–

उत्तरम्:

() उच्यते सत्यं प्रियं हितं वाक्यं वाङ्मयं तपः उच्यते।
(
सत्य, प्रिय और हितकारी वाक्य को वाणी का तप कहा जाता है।)

() अर्जुनः वीरः ज्ञानी आसीत्।
(
अर्जुन वीर भी था और ज्ञानी भी।)

() असत्यं वदेत्।
(
असत्य नहीं बोलना चाहिए।)

() लब्ध्व ज्ञानं लब्ध्व मानवः शान्तिं प्राप्नोति।
(
ज्ञान प्राप्त करके मनुष्य शांति को प्राप्त करता है।)

() कुर्यात् स्वधर्मे स्थितः पुरुषः कार्यं यत्नेन कुर्यात्।
(
अपने धर्म में स्थित मनुष्य को कार्य परिश्रमपूर्वक करना चाहिए।)


. पाठानुसारं समुचितेन पदेन श्लोकं पूरयत

(पाठ के अनुसार उचित शब्द से श्लोक को पूरा कीजिए।)


() श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः —————————————-

() —————————————- चैव वाङ्मयं तप उच्यते

() सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा ——————————-

() ————————————————- भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः

() तद्विद्धि ————————————— परिप्रश्नेन सेवया

उत्तरम्:

() श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः (जो श्रद्धालु और इंद्रियों को वश में रखने वाला है, वह ज्ञान प्राप्त करता है।)
सन्दर्भ: श्लोक ४।

() अनुद्वेगकरं वाक्यं सत्यं प्रियहितं चैव वाङ्मयं तप उच्यते। (जो वचन उद्वेगहीन, सत्य, प्रिय और हितकारी हो, वह वाचिक तप कहा जाता है।)
सन्दर्भ: श्लोक ८।

() सन्तुष्टः सततं योगी यतात्मा दृढनिश्चयः (जो सदा संतुष्ट, योगी, आत्मा को वश में रखने वाला और दृढ़ निश्चयी है।)
सन्दर्भ: श्लोक ६।

() क्रोधात् भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः। (क्रोध से मोह होता है, मोह से स्मृति का भ्रम होता है।)
सन्दर्भ: श्लोक २।

() तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। (इसे प्रणाम, प्रश्न और सेवा से जानो।)
सन्दर्भ: श्लोक ३।


. उदाहरणानुसारं पदानि स्त्रीलिङ्गे परिवर्तयत

(उदाहरण के अनुसार शब्दों को स्त्रीलिंग में बदलो।)


उदाहरणम्:

श्रद्धावान् = श्रद्धावती
बुद्धिमान् = बुद्धिमती
() गुणवान् = —————————————–
() आयुष्मान् = —————————————–
() क्षमावान् = ——————————————
() ज्ञानवान् = —————————————–
() श्रीमान् = ——————————————

उत्तर

() गुणवान् = गुणवती
(
) आयुष्मान् = आयुष्मती
(
) क्षमावान् = क्षमावती
(
) ज्ञानवान् = ज्ञानवती
(
) श्रीमान् = श्रीमती


. समुचितेन पदेन सह स्तम्भौ मेलयत

(उचित शब्द के साथ स्तम्भों का मिलान कीजिए।)

(पद)

(मेल खाने वाला पद)

हिंदी अर्थ

() सर्वभूतानाम्

() सर्वेषां प्राणिनाम्

सभी प्राणियों का

() अनुद्विग्नमनाः

() यस्य मनः विचलितं भवति

जिसका मन विचलित नहीं होता

() स्थितधीः

() स्थिरमतिमान्

स्थिर बुद्धिवाला

() परिप्रश्नेन

() पुनः पुनः प्रश्नकरणेन

बार-बार प्रश्न पूछने के द्वारा

() संयतेन्द्रियः

() इन्द्रियसंयमी

जिसकी इन्द्रियाँ संयमित हैं

: श्रीमद्भगवद्गीतायाः विषये पञ्च वाक्यानि लिखत

(श्रीमद्भगवद्गीता के विषय में पाँच वाक्य लिखिए।)


() —————————————————–
() —————————————————–
() —————————————————–
() —————————————————–
() —————————————————–

उत्तर

() श्रीमद्भगवद्गीता भगवान् श्रीकृष्णस्य अर्जुनाय उपदेशः अस्ति।
(
श्रीमद्भगवद्गीता भगवान श्रीकृष्ण का अर्जुन को दिया हुआ उपदेश है।)

() गीतायां सप्तशतं श्लोकाः सन्ति।
(
गीता में सात सौ श्लोक हैं।)

() अर्जुनस्य संशयं दूरं कर्तुं गीता लिखिता।
(
अर्जुन के संदेह को दूर करने के लिए गीता लिखी गई।)

() महाभारते भीष्मपर्वणि गीता वर्णिता।
(
महाभारत के भीष्म पर्व में गीता का वर्णन है।)

() गीतायाः उपदेशाः जीवनं शोभयन्ति।
(
गीता के उपदेश जीवन को सुशोभित करते हैं।


डिजिभारतम्युगपरिवर्त

(डिजिटल भारतयुग परिवर्तन)


pastedGraphic_5.png

अभ्यासात् जायते सिद्धिः


. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत







(पाठ के आधार पर नीचे लिखे गए प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखो।)


() प्रधानमन्त्रिसङ्ग्रहालये कीदृशी प्रौद्योगिकी प्रयुक्ता अस्ति? (प्रधानमंत्री संग्रहालय में कैसी तकनीक का उपयोग हुआ है?)

उत्तरम् अद्यतनप्रौद्योगिकीः (अत्याधुनिक तकनीक)

() हॉलोग्राम्-द्वारा कस्य भाषणं दृश्यते? (होलोग्राम के माध्यम से किसका भाषण दिखाई देता है?)

उत्तरम् प्रधानमन्त्रिणः (प्रधानमंत्री का)

() कस्याः प्रभावः दैनन्दिनजीवने दृश्यते? (किसका प्रभाव दैनिक जीवन में दिखता है?)

उत्तरम् प्रौद्योगिक्याः (तकनीक का।)

() भारत-सर्वकारस्य महत्त्वाकाङ्क्षिणी योजना का अस्ति? (भारत सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना क्या है?)

उत्तरम् डिजिटलइण्डिया (डिजिटल इंडिया।)





() ‘फास्टॅग्इत्यस्य उपयोगेन कस्य सङ्ग्रहणं भवति? (‘फास्टैगके उपयोग से किसका संग्रह होता है?)

उत्तरम् शुल्कस्य (टोल शुल्क का।)


. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत

(पाठ के आधार पर नीचे लिखे गए प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखो।)


() प्रधानमन्त्रिसङ्ग्रहालये काः डिजिटल प्रौद्योगिक्यः प्रदर्शिताः सन्ति?

उत्तरम्प्रधानमन्त्रिसङ्ग्रहालये होलोग्राम्, वर्धिता-वास्तविकता (AR), आभासीया-वास्तविकता (VR), कृत्रिमबुद्धिः (AI), संवादयन्त्रं, डिजिटल्-प्रक्षेपणं इत्यादयः डिजिटल्-प्रौद्योगिक्यः प्रदर्शिताः सन्ति।

हिंदी अनुवाद

प्रश्नप्रधानमंत्री संग्रहालय में कौन-कौन सी डिजिटल तकनीकें प्रदर्शित की गई हैं?

उत्तर प्रधानमंत्री संग्रहालय में होलोग्राम, संवर्धित वास्तविकता (AR), आभासी वास्तविकता (VR), कृत्रिम बुद्धि (AI), संवाद यंत्र, डिजिटल प्रक्षेपण आदि डिजिटल तकनीकें प्रदर्शित की गई हैं।



() जनाः किमर्थं साङ्गणिक-अपराधेन पीडिताः भवन्ति?

उत्तरम् जनाः प्रायः लोभात् भयात् वा साङ्गणिक-अपराधेन पीडिताः भवन्ति।

हिंदी अनुवाद

प्रश्नलोग साइबर अपराधों से क्यों पीड़ित होते हैं?

उत्तर लोग प्रायः लालच या डर के कारण साइबर अपराधों से पीड़ित होते हैं।

() यशिकाडिजि-लॉकर्इत्यस्य उपयोगं कथं करोति?

उत्तरम् यशिकाडिजि-लॉकर्इत्यस्य उपयोगं आधारपत्रस्य विद्यालयीयप्रमाणपत्रस्य सुरक्षितसंग्रहणाय करोति।

हिंदी अनुवाद

प्रश्न यशिकाडिजी-लॉकरका उपयोग किस प्रकार करती है?

उत्तर यशिकाडिजी-लॉकरका उपयोग आधार कार्ड और स्कूल प्रमाणपत्र को सुरक्षित रूप से संग्रहित करने के लिए करती है।





() डिजिटल भारतस्य वित्तीयसमावेशने काः योजनाः सन्ति?

उत्तरम् डिजिटल भारतस्य वित्तीयसमावेशनेयूपीआई’, ‘रूपे-कार्ड्’, ‘जनधनयोजना’, ‘-रूपीइत्यादयः योजनाः सन्ति।

हिंदी अनुवाद

प्रश्नडिजिटल भारत में वित्तीय समावेशन के लिए कौन-कौन सी योजनाएँ हैं?

उत्तर डिजिटल भारत में वित्तीय समावेशन के लिए यूपीआई, रूपे कार्ड, जनधन योजना और -रूपी जैसी योजनाएँ हैं।

() डिजिटल-भारते शिक्षायाः क्षेत्रे केषां पटलानाम् उपयोगः करणीयः?

उत्तरम् डिजिटल-भारते शिक्षायाः क्षेत्रेदीक्षा’, ‘स्वयम्’, ‘स्वयं-प्रभा’, ‘-पाठशाला’, ‘भारतीय-राष्ट्रीय-डिजिटल्-पुस्तकालयः’, ‘निष्ठा’, ‘पीएम्--विद्याइत्यादीनां पटलानाम् उपयोगः करणीयः।

हिंदी अनुवाद

प्रश्नडिजिटल भारत में शिक्षा के क्षेत्र में किन-किन प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाना चाहिए?

उत्तर डिजिटल भारत में शिक्षा के क्षेत्र में दीक्षा, स्वयं, स्वयं-प्रभा, -पाठशाला, राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय, निष्ठा, पीएम -विद्या जैसे प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाना चाहिए।

() ग्राम्य-क्षेत्रेषु डिजिटल-सेवानां समस्या कथं निराकर्तुं शक्यते?

उत्तरम् ग्राम्य-क्षेत्रेषु डिजिटल-सेवानां समस्या अन्तर्जालस्य उत्तरोत्तरविस्तारेण निराकर्तुं शक्यते।

हिंदी अनुवाद

प्रश्न ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की समस्याओं का समाधान किस प्रकार किया जा सकता है?

उत्तर ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की समस्याओं का समाधान इंटरनेट के निरंतर विस्तार से किया जा सकता है।


. अधः दत्तान् शब्दान् सम्यक् संयोजयततालिका सहित

(नीचे दी गई शब्द-सूची (शब्दकोश) में से उचित शब्द चुनकर खाली स्थानों को भरिए।)

क्रमः

शब्दः

संयोजनीयः शब्दः

हिंदी अनुवाद

.

होलोग्रामः

प्रधानमन्त्रिणः भाषणस्य त्रैवेम-प्रतिबिम्बरूपेण दर्शनम्

होलोग्राम से प्रधानमंत्री का त्रि-आयामी चित्र उपस्थित जैसा दिखता है।

.

यूपीआय (UPI)

शीघ्रं, सुरक्षितं, सुलभं डिज़िटल्-धनदेय-प्रत्यर्पणम्

यूपीआई एक त्वरित, सुरक्षित और सरल डिजिटल भुगतान प्रणाली है।

.

डिजिटल-लॉकः

डिज़िटल-प्रमाणपत्रस्य सुरक्षितसंग्रहणाय उपयुक्तः साधनम्

डिजी-लॉकर डिजिटल प्रमाणपत्रों को सुरक्षित रूप से रखने का एक अच्छा माध्यम है।

.

फास्टैग् (FASTag)

राजमार्गे स्वचालितविधिना मार्गशुल्कस्य शीघ्रं संग्रहणम्

फास्टैग से राजमार्गों पर टोल टैक्स का स्वतः और त्वरित संग्रह किया जाता है।

.

वीआर् (VR)

आभासीया-वास्तविकताया: अनुभवाय प्रयुक्तं यन्त्रम्

वीआर (वर्चुअल रियलिटी) एक ऐसा उपकरण है जो आभासी वास्तविकता का अनुभव कराता है।

. अधः प्रदत्तमञ्जूषातः शब्दान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत

(नीचे दी गई शब्दमंजूषा से शब्द चुनकर रिक्त स्थान भरें)


यूपीआय् (UPI) = यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (डिजिटल भुगतान प्रणाली)

दीक्षा = शिक्षा मंचदीक्षा” (DIKSHA Portal)

प्रधानमन्त्रिणः भाषणं = प्रधानमंत्री का भाषण

स्वचालितं पारदर्शकं = स्वचालित और पारदर्शी भी

जीवन = जीवन


() प्रधानमन्त्रिसङ्ग्रहालये हॉलोग्राम्-द्वारा प्रधानमन्त्रिणः भाषणं दृश्यते।

📘 प्रधानमंत्री संग्रहालय में होलोग्राम के माध्यम से प्रधानमंत्री का भाषण देखा जाता है।

() डिजिटल्-भारतस्य आर्थिकसमावेशनं सुगमं कर्तुं यूपीआय् प्रणाली अस्ति।

📘  डिजिटल भारत के आर्थिक समावेशन को सरल बनाने के लिए यूपीआई प्रणाली है।

() डिजिटल्-शासनं स्वचालितं पारदर्शकं सेवां प्रददाति।

📘 डिजिटल शासन स्वचालित और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करता है।

() डिजिटल-भारतस्य शिक्षाक्षेत्रे दीक्षा नाम डिजिटल्-शैक्षिकमञ्चः अस्ति।

📘 डिजिटल भारत के शिक्षा क्षेत्र मेंदीक्षानामक डिजिटल शैक्षिक मंच है।

() भारतस्य डिजिटल-परिवर्तनं सर्वाणि जीवन क्षेत्राणि स्पृशति।

📘 भारत का डिजिटल परिवर्तन जीवन के सभी क्षेत्रों को प्रभावित करता है।


. अधः अस्मिन् पाठे आगतानां शब्दानाम् आधारेण शब्दजालं प्रदत्तम् अस्ति। अत्र वामतः दक्षिणम् उपरितःअधः आधारं कृत्वा उदाहरणानुसारं शब्दान् रेखाङ्कयत

(नीचे इस पाठ में आए हुए शब्दों के आधार पर एक शब्द-जाल दिया गया है। इसमें बाएँ से दाएँ तथा ऊपर से नीचे आधार बनाकर, उदाहरण के अनुसार शब्दों को रेखांकित कीजिए।)


pastedGraphic_6.pngडिजीलॉकर

यूपीआई

फास्टैग

दीक्षा

स्वयंप्रभा

फास्टग

ज्ञानम्

विज्ञानम्

डिजिटल्

कृत्रिमबुद्धिः

प्रशासनम्

आधारम्

व्यवस्था

स्वयं

नाम

शासनम्

प्रौद्योगिकी

वास्तविकता

शैक्षिकम्


. अधोलिखितान् शब्दान् वर्गद्वये विभजतसङ्गणकसम्बद्धाः, असङ्गणकसम्बद्धाः

(नीचे दी गई शब्द-सूची (शब्दकोश) में से उचित शब्द चुनकर खाली स्थानों को भरिए।)


(शब्दाःअन्तर्जालम्, शिक्षिका, सङ्गणकः, विद्यालयः, -पत्रम्, पाठ्यपुस्तकम्, डिजिटल, लेखनी)

सङ्गणकसम्बद्धाः (कम्प्यूटर से संबंधित शब्द)

असङ्गणकसम्बद्धाः (कम्प्यूटर से असंबंधित शब्द)

अन्तर्जालम् (इंटरनेट)

शिक्षिका (शिक्षिका)

सङ्गणकः (कंप्यूटर)

विद्यालयः (विद्यालय)

-पत्रम् (-पत्र)

पाठ्यपुस्तकम् (पाठ्यपुस्तक)

डिजिटल (डिजिटल)

लेखनी (लेखनी)

. अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा शुद्धं () अशुद्धं () वा इति चिह्नीकुरुत

(नीचे लिखे गए वाक्यों को पढ़कर शुद्ध () अथवा अशुद्ध () के रूप में चिह्न लगाइए।)


() हॉलोग्राम् कृत्रिमबुद्धेः एकः प्रकारः अस्ति।

हिंदी अनुवाद हॉलोग्राम कृत्रिम बुद्धि का एक प्रकार है। (गलत)

() वर्धित-वास्तविकतायाः उपयोगिता ऐतिहासिक-घटनानां प्रत्यक्षानुभवाय।

हिंदी अनुवाद संवर्धित वास्तविकता का उपयोग ऐतिहासिक घटनाओं के प्रत्यक्ष अनुभव के लिए होता है। (सही)

() डिजिटलप्रक्षेपणमानचित्रं भारतस्य विकासयात्रां प्रदर्शयति।

हिंदी अनुवाद डिजिटल मानचित्र भारत की विकास यात्रा को दिखाता है। (सही)

() फ़ास्टॅग् इति राजमार्गेषु स्वचालितविधिना मार्गशुल्कस्य शीघ्रं संग्रहणं करोति।

हिंदी अनुवाद फास्टैग राजमार्गों पर टोल शुल्क का त्वरित संग्रह करता है। (सही)

() डिजी-लॉकर् इत्यस्य माध्यमेन केवलम् आधार-पत्रं सुरक्षितुं शक्यते।

हिंदी अनुवाद डिजी-लॉकर से केवल आधार-पत्र नहीं, अन्य प्रमाणपत्र भी सुरक्षित किए जा सकते हैं। (गलत)

() भारतस्य डिजिटल-परिवर्तनं केवलं शासने प्रभावं करोति, नागरिकजीवने न।

हिंदी अनुवाद डिजिटल परिवर्तन केवल शासन में नहीं, नागरिक जीवन में भी होता है। (गलत)

() उमङ्ग, माय्-गव्, जेम् इत्यादयः -शासन-मञ्चाः सन्ति।

हिंदी अनुवाद उमंग, माय गव, जेम आदि -शासन मंच हैं। (सही)


. अव्यवस्थितान् वर्णान् शब्ददृष्ट्या व्यवस्थितरूपेण लिखत

(अव्यवस्थित अक्षरों को शब्द की दृष्टि से व्यवस्थित रूप में लिखो)


उदाहरणम्वेयवित्तीसमानशम् = वित्तीयसमावेशनम्

() कसङ्गम्ण = सङ्गणकम् (कंप्यूटर)

() कार्वसरः = सरकारः (सरकार)

() लयः विद्या = शिक्षालयः (विद्यालय)

() जिकडिलॉर = डिजीलॉकरः (डिजीलॉकर)

() शक्तसुम् = पुस्तकः (पुस्तक)


. अधोलिखितं परिच्छेदं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत

(नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए।)


अद्यतने विज्ञानयुगे सर्वे मनुष्याः डिजिटल्-प्रौद्योगिक्याः प्रयोगं कुर्वन्ति। जनाः अन्तर्जालस्य, सचलदूरवाण्याः, सङ्गणकस्य साहाय्येन शीघ्रं कार्याणि सम्पादयन्ति। विद्यार्थिनः अपि
-अधिगम-प्रणालीं स्वीकृत्य ज्ञानं वर्धयन्ति

(आधुनिक विज्ञान युग में सभी मनुष्य डिजिटल प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हैं। लोग इंटरनेट, मोबाइल फोन और कंप्यूटर की सहायता से शीघ्रता से कार्यों को पूरा करते हैं। विद्यार्थी भी -लर्निंग प्रणाली को अपनाकर ज्ञान बढ़ाते हैं।)

प्रश्नाः-

() अद्यतनं युगं कीदृशम् अस्ति ? (वर्तमान युग कैसा है?)

उत्तरम् अद्यतनं युगं विज्ञानयुगं अस्ति। (वर्तमान युग विज्ञान युग है।)

() मानवाः केषां साहाय्येन कार्याणि शीघ्रं कुर्वन्ति ? (मनुष्य किनकी सहायता से कार्यों को शीघ्रता से करते हैं?)

उत्तरम् मानवाः अन्तर्जालस्य, सचलदूरवाण्याः, सङ्गणकस्य साहाय्येन कार्याणि शीघ्रं कुर्वन्ति। (मनुष्य इंटरनेट, मोबाइल और कंप्यूटर की सहायता से कार्य शीघ्रता से करता है।)

() -अधिगम-प्रणाल्याः प्रयोगं के कुर्वन्ति ? (-लर्निंग प्रणाली का उपयोग कौन करता है?)

उत्तरम् विद्यार्थिनः -अधिगम-प्रणाल्याः प्रयोगं कुर्वन्ति। (विद्यार्थी -लर्निंग प्रणाली का उपयोग करते हैं।)









F is heमञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा सुंदर

(मनोहारी भाषा की सुंदर मणि-मण्डली)


pastedGraphic_7.pngअभ्यासात् जायते सिद्धिः


. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां एकपदेन उत्तरं लिखत।







(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में लिखें।)


() सुन्दरसुरभाषा कस्य वचनातीता ? (सुंदर-सुगंधित भाषा किसकी वाणी से परे है?)

उत्तरम् पोषणक्षमतायाः। (पालन-पोषण की क्षमता से।)

() संस्कृतभाषा कुत्र विजयते ? (संस्कृत भाषा कहाँ विजय प्राप्त करती है?)

उत्तरम् धरायाम्। (पृथ्वी पर।)

() संस्कृतभाषा कस्य आशा ? (संस्कृत भाषा किसकी आशा है?)

उत्तरम् जीवनस्य। (जीवन की।)

() संस्कृते कति रसाः सन्ति ? (संस्कृत में कितने रस होते हैं?)

उत्तरम् नवरसाः। (नौ रस।)

() कस्याः ध्वनिश्रवणेन सुखं वर्धते ? (किसकी ध्वनि को सुनकर सुख बढ़ता है?)







उत्तरम् संस्कृतभाषायाः। (संस्कृत भाषा की।)


. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत।

(नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखो।)


() संस्कृतभाषा केषां जीवनस्य आशा अस्ति ? (संस्कृत भाषा किनके जीवन की आशा है?)

उत्तरम् संस्कृतभाषा वेदव्यासवाल्मीकि-मुनीनां, कालिदासबाणादिकवीनां, पौराणिकसामान्यजनानां जीवनस्य आशा अस्ति। (संस्कृत भाषा वेदव्यास, वाल्मीकि जैसे मुनियों, कालिदास, बाण आदि कवियों तथा पौराणिक सामान्य जनों के जीवन की आशा है।)

() केषां विचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति ? (किनके विचार लोगों को प्रेरित करते हैं?)

उत्तरम् वेदविषयवेदान्तविचाराः जनान् अभिप्रेरयन्ति। (वेद और वेदान्त विषयक विचार लोगों को प्रेरित करते हैं।)

() कैः रसैः समृद्धा साहित्यपरम्परा विराजते ? (किन रसों से समृद्ध साहित्य परंपरा शोभायमान होती है?)

उत्तरम् नवरसैः समृद्धा साहित्यपरम्परा विराजते। (नौ रसों से समृद्ध साहित्य परंपरा शोभायमान होती है।)






() संस्कृतभाषा केषु शास्त्रेषु विहरति ? (संस्कृत भाषा किन शास्त्रों में विचरण करती है?)

उत्तरम् संस्कृतभाषा वैद्यव्योमशास्त्रादिषु शास्त्रेषु विहरति। (संस्कृत भाषा चिकित्सा, खगोल आदि शास्त्रों में विचरण करती है।)

() संस्कृतभाषायाः कानि कानि सम्बोधनपदानि अत्र प्रयुक्तानि ? (संस्कृत भाषा के कौन-कौन से संबोधन शब्द यहाँ प्रयोग हुए हैं?)

उत्तरम् अयि, मातः, भगिनि इत्येतानि सम्बोधनपदानि अत्र प्रयुक्तानि। (“अयि”, “मातः”, “भगिनिजैसे संबोधन शब्द यहाँ प्रयुक्त हुए हैं।)


. रेखा‌ङ्कितपदानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

(रेखांकित शब्दों के आधार पर प्रश्न बनाइए।)


() मुनिगणाःसंस्कृतभाषायाःविकासं कृतवन्तः। (मुनियों ने संस्कृत भाषा की उन्नति की।)

प्रश्न: मुनिगणाः कस्य विकासं कृतवन्तः? (मुनियों ने किसकी उन्नति की?)

() सामान्यजनानां जीवनंकाव्यैःप्रभावितम् अस्ति।  साधारण लोगों का जीवन काव्यों से प्रभावित है।)








प्रश्न: सामान्यजनानां जीवनं किम् प्रभावितम् अस्ति? (साधारण लोगों का जीवन क्या प्रभावित करता है?)

() कवयः अपिउपादेयानिकाव्यानि रचितवन्तः। (कवियों ने भी उपयोगी काव्य रचे।)

प्रश्न: कवयः अपि किम् काव्यानि रचितवन्तः? (कवियों ने कौन से काव्य रचे?)

() संस्कृतभाषापृथिव्यांविहरति। (संस्कृत भाषा पृथ्वी पर विचरण करती है।)

प्रश्न: संस्कृतभाषा क्व विहरति? (संस्कृत भाषा कहाँ विचरण करती है?)

() संस्कृतभाषाविविधभाषाःपरिपोषयति। (संस्कृत भाषा विविध भाषाओं को पोषित करती है।)

प्रश्न: संस्कृतभाषा काश्चन भाषाः परिपोषयति? (संस्कृत भाषा किन-किन भाषाओं को पोषित करती है?)

() वेद-वेदाङ्गादीनि गभीराणिशास्त्राणिसन्ति। (वेद और वेदांग आदि गंभीर शास्त्र हैं।)

प्रश्न: वेद-वेदाङ्गादीनि गभीराणि किम् सन्ति? (वेद और वेदांग आदि गंभीर क्या हैं?)


. अधः प्रदत्तानां पदानाम् उदाहरणानुसारं विभक्तिं वचनं लिखत







(नीचे दिए गए शब्दों की उदाहरण के अनुसार विभक्ति और वचन लिखो।)


यथा मातः       सम्बोधनम्         एकवचनम्

पदम्

विभक्तिः

वचनम्

तव (तुम्हारा / तुम्हारी)

षष्ठी (सम्बन्धः)

एकवचनम्

मञ्जूषा (पेटी / संदूक / ज्ञान का भंडार)

प्रथमा (कर्ता)

एकवचनम्

संस्कृतिः (संस्कृति)

प्रथमा (कर्ता)

एकवचनम्

जनानाम् (लोगों का / जनों का)

षष्ठी (सम्बन्धः)

बहुवचनम्

जीवनस्य (जीवन का)

षष्ठी (सम्बन्धः)

एकवचनम्

धरायाम् (पृथ्वी पर)

सप्तमी (अधिकरण)

एकवचनम्

शास्त्रेषु (शास्त्रों में)

सप्तमी (अधिकरण)

बहुवचनम्

. अधोलिखितानां पद्यांशानां यथायोग्यं मेलनं कुरुत

(नीचे लिखे गए पद्यांशों का उचित मेल कीजिए।)

कवर्ग:

खवर्गः

() अयि मातस्तव पोषणक्षमता

स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे

() वेदव्यासवाल्मीकि -मुनीनां

विजयते धरायाम्

() पौराणिक-सामान्यजनानाम्

मम वचनातीता, सुन्दरसुरभाषा

() श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे

कालिदासबाणादिकवीनाम्

() वैद्यव्योम-शास्त्रादिविहारा

जीवनस्य आशा, सुन्दरसुरभाष

उत्तरम्

कवर्गः (अर्धपद्य)

खवर्गः (मिलान योग्य अर्धपद्य)

हिंदी अनुवाद (पूर्ण पद्य का)

() अयि मातस्तव पोषणक्षमता

मम वचनातीता, सुन्दरसुरभाषा

हे माता! तुम्हारी पालन-पोषण करने की क्षमता मेरी वाणी से परे है।

() वेदव्यासवाल्मीकि -मुनीनां

कालिदासबाणादिकवीनाम्

यह भाषा वेदव्यास, वाल्मीकि मुनियों और कालिदास-बाण जैसे कवियों की है।

() पौराणिक-सामान्यजनानाम्

जीवनस्य आशा, सुन्दरसुरभाषा

पौराणिक और सामान्य जनों के जीवन की आशा हैयह सुंदर और मधुर भाषा।

() श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे

स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे

हे वह भाषा जो वेदों के श्रवण से सुख देती है, स्मृति से कल्याण और रस से आनंद देती है।

() वैद्यव्योम-शास्त्रादिविहारा

विजयते धरायाम्

जो चिकित्सा, खगोल और अन्य शास्त्रों में विचरण करती हैवह धरती पर विजयी है।

. उदाहरणानुसारम् अधः प्रदत्तानां पदानाम् एकपदेन अर्थं लिखत

(उदाहरण के अनुसार नीचे दिए गए शब्दों के एक-एक शब्द में अर्थ लिखो।)


यथा, देवस्य आलयः   =  ‘देवालयः

() सुराणां भाषा = सुरभाषा (देवों की भाषा)

() सुन्दरी सुरभाषा = सुन्दरसुरभाषा (सुंदर और दिव्य भाषा)

() नवरसैः रुचिरा = नवरसरुचिरा (नव रसों से सुशोभित भाषा)

() पोषणस्य क्षमता = पोषणक्षमता (पालन-पोषण की शक्ति)

() मञ्जुला भाषा = मञ्जुलभाषा (मधुर या मनोहर भाषा)


. पेटिकातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत

(पेटी (बॉक्स) से शब्द चुनकर रिक्त स्थानों को भरिए।)

कालिदासबाणादि, आशा, संस्कृतिः, विजयते, मम, वेदविषय, मञ्जुलमञ्जूषा, सकलप्रमोदे


(यथा) मुनिवरविकसितकविवरविलसितमञ्जुलमञ्जूषा सुन्दरसुरभाषा।

() अयि मातः तव पोषणक्षमता मम वचनातीता।

👉 हिंदी अर्थ हे माँ! तेरी पालन-पोषण की क्षमता मेरी वाणी से परे है।

() वेदव्यासवाल्मीकिमुनीनां कालिदासबाणादि कवीनाम्।

👉 हिंदी अर्थ वेदव्यास, वाल्मीकि मुनियों तथा कालिदास, बाण आदि कवियों की।

() पौराणिकसामान्यजनानां जीवनस्य आशा

👉 हिंदी अर्थपौराणिक सामान्य जनों के जीवन की आशा।

() श्रुतिसुखनिनदे सकलप्रमोदे स्मृतिहितवरदे सरसविनोदे।

👉 हिंदी अर्थ वेदों की मधुर ध्वनि में, सबमें प्रसन्नता देने वाली, स्मृति की हितकारी वरदायिनी।

() गतिमतिप्रेरककाव्यविशारदे, तव संस्कृतिः एषा सुन्दरसुरभाषा।

👉 हिंदी अर्थ गति-बुद्धि प्रेरक, काव्यशास्त्र की विदुषी, तेरी यह संस्कृति सुंदर-सुगंधित भाषा है।

() नवरसरुचिरालङ्कृतिधारा वेदविषयवेदान्तविचारा।

👉 हिंदी अर्थ नव रसों से युक्त अलंकारों की धारा, वेद-विषय और वेदान्त विचारों से भरी।

() वैद्यव्योमशास्त्रादिविहारा विजयते धरायाम्, सुन्दरसुरभाषा।

👉 हिंदी अर्थ चिकित्सा और अंतरिक्ष शास्त्रों में विचरण करती हुई यह सुंदर भाषा धरती पर विजय प्राप्त करती है।


. अधोलिखितविकल्पेषु प्रसङ्गानुसारम् अर्थं चिनुत

(नीचे लिखे गए विकल्पों में से प्रसंग के अनुसार अर्थ चुनो।)


() “मञ्जुलमञ्जूषाइत्यस्य अर्थः कः? (‘मञ्जुलमञ्जूषाका अर्थ क्या है?)

उत्तरम् (iii) मनोहररूपेण संकलिता (मनोहर रूप से संकलित (ज्ञान की सुंदर पेटिका))

() सुन्दरसुरभाषा केषां जीवनस्य आशा उच्यते? (सुंदर-सुगंधित भाषा किसके जीवन की आशा कही गई है?)

उत्तरम् (iii) पौराणिक-सामान्यजनानाम् (पौराणिक और सामान्य जनों के जीवन की।)

() सुन्दरसुरभाषा कुत्र विजयते? (सुंदर-सुगंधित भाषा कहाँ विजय प्राप्त करती है?)

उत्तरम् (iii) धरायाम् (धरती पर (पृथ्वी पर))

() सुन्दरसुरभाषायां किं नास्ति? (सुंदर-सुगंधित भाषा में क्या नहीं है?)

उत्तरम् (iv) अशुद्धिः (अशुद्धि।)

() कविः सुन्दरसुरभाषां केन पदेन सम्बोधयति? (कवि सुंदर-सुगंधित भाषा को किस शब्द से संबोधित करता है?)

उत्तरम् (ii) मातः (हे माता!)


पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्

(देखो, कौन-सा स्थान भारत का सुंदर है।)


pastedGraphic_8.pngअभ्यासात् जायते सिद्धिः


. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखत

(नीचे लिखे गए प्रश्नों के एक शब्द में उत्तर लिखो।)


() अस्माकं देशे कति राज्यानि सन्ति? (हमारे देश में कितने राज्य हैं?)

👉 उत्तरम् अष्टाविंशतिः (अट्ठाईस)

() प्राचीनेतिहासे का स्वाधीनाः आसन्? (प्राचीन इतिहास में कौन स्वतंत्र थीं?)

👉 उत्तरम् सप्तभगिन्यः (सात बहनें (पूर्वोत्तर राज्य))

() केषां समवायःसप्तभगिन्यःइति कथ्यते? (किन राज्यों के समूह कोसात बहनेंकहा जाता है?)

👉 उत्तरम् अष्टराज्यानाम् (आठ राज्यों के समूह का)

() अस्माकं देशे कति केन्द्रशासितप्रदेशाः सन्ति? (हमारे देश में कितने केंद्रशासित प्रदेश हैं?)

👉 उत्तरम् अष्ट (आठ ())

() सप्तभगिनी-प्रदेशे कः उद्योगः सर्वप्रमुखः? (सात बहनों के प्रदेशों में कौन-सा उद्योग सबसे प्रमुख है?)


👉 उत्तरम् वंशोद्योगः (बाँस उद्योग)


. अधोलिखितानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत

(नीचे लिखे गए प्रश्नों के पूर्ण वाक्य में उत्तर लिखो।)


() भ्रातृसहित-भगिनीसप्तके कानि राज्यानि सन्ति
👉 उत्तरम् अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरम्, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डं, त्रिपुरा भगिन्यः; सिक्किमः भ्राता अस्ति।

🔸 हिंदी प्रश्न सात बहनों और भाई के समूह में कौन-कौन से राज्य हैं?
🔸 उत्तर अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिज़ोरम, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा बहनें हैं; सिक्किम भाई है।

() इमानि राज्यानि सप्तभगिन्यः इति किमर्थं कथ्यन्ते?
👉 उत्तरम् एतेषां सामाजिक-सांस्कृतिक-साम्यं भौगोलिकवैशिष्ट्यं दृष्ट्वा, एतानि सप्तभगिन्यः इति कथ्यन्ते।

🔸 हिंदी प्रश्न इन राज्यों कोसात बहनेंक्यों कहा जाता है?
🔸 उत्तर इनकी सामाजिक-सांस्कृतिक समानता और भौगोलिक विशेषताओं को देखकर इन्हेंसात बहनेंकहा जाता है।


() ऐशान्यकोणप्रदेशेषु के निवसन्ति?
👉 उत्तरम् गारो-खासी-नागा-मिजो-लेप्चा-प्रभृतयः जनजातीयाः ऐशान्यप्रदेशेषु निवसन्ति।

🔸 हिंदी प्रश्न उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में कौन लोग निवास करते हैं?
🔸 उत्तर गारो, खासी, नागा, मिजो, लेप्चा आदि जनजातियाँ उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में निवास करती हैं।

() पूर्वोत्तरप्रादेशिकाः केषु निष्णाताः सन्ति?
👉 उत्तरम् पूर्वोत्तरप्रादेशिकाः स्वलीलाकलासु पर्वपरम्परासु निष्णाताः सन्ति।

🔸 हिंदी प्रश्न पूर्वोत्तर राज्यों के लोग किन चीज़ों में दक्ष होते हैं?
🔸 उत्तर पूर्वोत्तर के लोग अपनी लोक-कलाओं और पर्व-परंपराओं में दक्ष होते हैं।

() वंशवृक्षवस्तूनाम् उपयोगः कुत्र क्रियते?
👉 उत्तरम् सप्तभगिनीप्रदेशेषु वंशवृक्षवस्तूनाम् उपयोगः वस्त्राभूषणगृहनिर्माणेषु क्रियते।

🔸 हिंदी प्रश्न बाँस से बनी वस्तुओं का उपयोग कहाँ होता है?
🔸 उत्तर सात बहन राज्यों में बाँस से बनी वस्तुओं का उपयोग वस्त्र, आभूषण और घर बनाने में किया जाता है।


. अधोलिखितेषु पदेषु प्रकृति-प्रत्ययविभागं कुरुत


(नीचे लिखे गए शब्दों में प्रकृति और प्रत्यय का विभाजन कीजिए।)


यथागन्तुम्  =  गम + ‘तुमुन्

() ज्ञातुम् —————— + ——————

() विश्रुतः —————— + ——————

() अतिरिच्य —————— + ——————

() पठनीयम् —————— + ——————

उत्तरम्

🔹 गन्तुम् = गम् (प्रकृति) + तुमुन् (प्रत्यय)

() ज्ञातुम् = ज्ञा + तुमुन्

() विश्रुतः = श्रु + क्त (वि + पूर्वसर्ग)
👉 विश्रुतः = वि (उपसर्ग) + श्रु (धातु) + क्त (कृदन्त प्रत्यय)

() अतिरिच्य = ऋच् + अतिच (उपसर्ग) + यङ् (प्रत्यय)
👉 अतिरिच्य = अति (उपसर्ग) + ऋच् (धातु) + ल्यप् (कृदन्त प्रत्यय)

() पठनीयम् = पठ् + णीय


. रेखाङ्कितम् पदम् आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

(रेखांकित शब्द के आधार पर प्रश्न बनाइए)


() वयं स्वदेशस्य राज्यानां विषये ज्ञातुमिच्छामः (हम अपने देश के राज्यों के बारे में जानना चाहते हैं।)

प्रश्नः कस्य देशस्य राज्यानां विषये यूयं ज्ञातुमिच्छथ? (तुम किस देश के राज्यों के बारे में जानना चाहते हो?)

() सप्तभगिन्यः प्राचीनेतिहासे प्रायः स्वाधीनाः एव दृष्टाः | (प्राचीन इतिहास में कौन स्वतंत्र देखे गए हैं?)

प्रश्नः प्राचीनेतिहासे के स्वाधीनाः का: दृष्टाः? (प्राचीन इतिहास में सात बहनें स्वतंत्र ही देखी गईं।)

() प्रदेशेऽस्मिन् हस्तशिल्पानां बाहुल्यं वर्तते (इस प्रदेश में हस्तशिल्पों की बहुतायत है।)

प्रश्नः प्रदेशे कस्यानां बाहुल्यं वर्तते? (इस प्रदेश में किसका अधिक प्रचार/प्रचलन है?)

() एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थं स्वर्गसदृशानि (ये राज्य भ्रमण के लिए स्वर्ग के समान हैं।)

प्रश्नः एतानि राज्यानि तु भ्रमणार्थं किमसदृशानि सन्ति? (ये राज्य भ्रमण के लिए किसके समान हैं?)


. यथानिर्देशम् उत्तरत

(निर्देशानुसार उत्तर दो।)


() वाक्यःमहोदये ! मम भगिनी कथयति। अत्रममइति सर्वनामपदं कस्यै प्रयुक्तम् ?

उत्तरम्ममइति सर्वनामपदंभगिन्यैप्रयुक्तम्।

🔸 हिंदी अनुवाद
प्रश्नममयह सर्वनाम किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
उत्तरममयह सर्वनामभगिनी’ (मेरी बहन) के लिए प्रयुक्त हुआ है।

() वाक्यःसामाजिक-सांस्कृतिकपरिदृश्यानां साम्याद् इमानि उक्तोपाधिना प्रथितानि। अस्मिन् वाक्येप्रथितानिइति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम् ?

उत्तरम् अत्रइमानिइति कर्तृपदम् अस्ति।

🔸 हिंदी अनुवाद
प्रश्न इस वाक्य मेंप्रथितानिक्रिया का कर्ता शब्द कौन है?
उत्तर इसमेंइमानि’ (ये) शब्द कर्ता है।

(एतेषां राज्यानां पुनः सङ्घटनं विहितम्। अत्रसङ्घटनम्इति कर्तृपदस्य क्रियापदं किम् ?

उत्तरम्विहितम्इति क्रियापदं अस्ति।

🔸 हिंदी अनुवाद
प्रश्न इस वाक्य मेंसंगठनशब्द के लिए कौन-सी क्रिया है?
उत्तरविहितम्’ (किया गया) क्रिया है।

() वाक्यःअत्र वंशवृक्षाणां प्राचुर्यं विद्यते। अस्मात् वाक्यात्अल्पताइति पदस्य विपरीतार्थकं पदं किम् ?

उत्तरम्प्राचुर्यम्इति विपरीतार्थकं पदं अस्ति।

🔸 हिंदी अनुवाद
प्रश्न इस वाक्य मेंअल्पता’ (कमी) शब्द का विपरीत शब्द क्या है?
उत्तरप्राचुर्य’ (अधिकता) उसका विलोम है।

() वाक्यःक्षेत्रपरिमाणैः इमानि लघूनि वर्तन्ते। अस्मिन् वाक्येसन्तिइति क्रियापदस्य समानार्थकं पदं किम् ?

उत्तरम्वर्तन्तेइति समानार्थकं क्रियापदं अस्ति।

🔸 हिंदी अनुवाद
प्रश्न इस वाक्य मेंसन्ति’ (हैं) क्रिया का समानार्थी कौन-सा शब्द है?
उत्तरवर्तन्तेशब्दसन्तिके समान अर्थ में प्रयुक्त हुआ है।


. अधः शब्दजालं प्रदत्तम् अस्ति अस्मिन् उपरितः अधः वामतः दक्षिणं चेति आधारं कृत्वा सार्थक शब्दान् रेखाङ्कयत

(नीचे शब्द-जाल दिया गया है। उसमें ऊपर, नीचे, बाएँ और दाएँ आधार लेकर सार्थक शब्दों को रेखांकित कीजिए।)


pastedGraphic_9.pngजनजातिः

खासी

नागा

मिजोरमः

संस्कृतिः

पूर्वोत्तरम्

देशस्य

भगिन्यः

गारो

प्राकृतिकः

वंशवृक्षः

अरुणाचलः

मेघालयः

भ्राता

भिन्निः


. पट्टिकातः पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत

(पट्टिका से (शब्द) चुनकर रिक्त स्थानों को भरिए।)


सिक्किमः = सिक्किम , पूर्वोत्तरराज्यानि = पूर्वोत्तर राज्य , अष्टाविंशतिः = अट्ठाईस (२८) , स्वदेशस्य राज्यानाम् = अपने देश के राज्यों के , अरुणाचलप्रदेशः = अरुणाचल प्रदेश , असमः = असम ,

मणिपुरं = मणिपुर , मिजोरमः = मिजोरम , मेघालयः = मेघालयनागालैण्डं = नागालैण्ड , त्रिपुरा = त्रिपुराजनजातिः = जनजातिप्राचुर्यम् = प्रचुरता / अधिकता


() छात्राः अद्य स्वदेशस्य राज्यानाम् विषये ज्ञातुमिच्छन्ति।

🔸 हिंदी अनुवाद छात्र आज अपने देश के राज्यों के बारे में जानना चाहते हैं।

() अस्माकं देशे अष्टाविंशतिः राज्यानि तथा अष्ट केन्द्रशासितप्रदेशाः सन्ति।

🔸 हिंदी अनुवाद हमारे देश में 28 राज्य और 8 केंद्रशासित प्रदेश हैं।

() सप्तभगिन्यः एकः भ्राता इति पूर्वोत्तरराज्यानि कथ्यन्ते।

🔸 हिंदी अनुवादसात बहनें और एक भाईकहे जाने वाले राज्य पूर्वोत्तर राज्य हैं।

() सप्तभगिन्यः इत्युक्तानि राज्यानिअरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरं, मिजोरमः, मेघालयः, नागालैण्डं, त्रिपुरा च।

🔸 हिंदी अनुवाद सात बहनों के राज्य हैं: अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा।

() प्रदेशेऽस्मिन् जनजातिः बाहुल्यम् अस्ति।

🔸 हिंदी अनुवाद इस प्रदेश में जनजातियों की बहुतायत है।

() पूर्वोत्तरराज्येषु वंशवृक्षाणां प्राचुर्यम् विद्यते।

🔸 हिंदी अनुवाद पूर्वोत्तर राज्यों में बाँस के वृक्षों की प्रचुरता पाई जाती है।


. भिन्नप्रकृतिकं पदं चिनुत

(भिन्न प्रकृति वाला शब्द चुनो)


() गच्छति, पठति, धावति, अहसत्, क्रीडति

👉 भिन्नपदं अहसत्

🔸 हिंदी अर्थ अहसत्’ (हँसा) भूतकाल में है, शेष सभी वर्तमानकाल (लट् लकार) में हैं।

() छात्रः, सेवकः, शिक्षकः, लेखिका, क्रीडकः
👉 भिन्नपदं लेखिका

🔸 हिंदी अर्थलेखिकास्त्रीलिंग है, बाकी सभी पुल्लिंग शब्द हैं।

() पत्रम्, मित्रम्, पुष्पम्, आम्रः, फलम्
👉 भिन्नपदं आम्रः

🔸 हिंदी अर्थआम्रः’ (आम का पेड़) पुल्लिंग है, शेष सभी शब्द नपुंसकलिंग हैं।

() व्याघ्रः, भल्लूकः, गजः, कपोतः, शाखा, वृषभः, सिंहः
👉 भिन्नपदं शाखा

🔸 हिंदी अर्थशाखा’ (टहनी) जड़ (निर्जीव) वस्तु है, शेष सभी जानवर हैं।

() पृथिवी, वसुन्धरा, धरित्री, यानम्, वसुधा
👉 भिन्नपदं यानम्

🔸 हिंदी अर्थयानम्’ (वाहन) कृत्रिम वस्तु है, शेष सभी पृथ्वी के नाम हैं।


. विशेष्य- विशेषणानाम् उचितं मेलनं कुरुत

(विशेष्य-विशेषणानाम् उचितं मेलनं कुरुत।)

विशेषणपदानि (विशेषण)

विशेष्यपदानि (विशेष्य)

हिंदी अनुवाद

अयम्

प्रदेशः

यह प्रदेश

संस्कृतिविशिष्टायाम्

भारतभूमौ

संस्कृति-विशिष्ट भारतभूमि में

महत्त्वाधायिनी

संस्कृतिः

महत्व प्रदान करने वाली संस्कृति

प्राचीने

इतिहासे

प्राचीन इतिहास में

एकः

समवायः

एक समूह




कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ?

कौन रुका? कौन रुका? कौन रुका?


pastedGraphic_10.pngअभ्यासात् जायते सिद्धिः


. अधोलिखितान् प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरत |


(नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर एक शब्द में दें।)


() शुकरूपं कः धृतवान्? (तोते का रूप किसने धारण किया?)

उत्तरम् धन्वन्तरिः (भगवान धन्वंतरि ने।)

() धन्वन्तरिः (शुकः) कुत्र उपविश्य ध्वनिम् अकरोत्? (धन्वंतरि (तोता) कहाँ बैठकर आवाज़ करने लगा?)

उत्तरम् वृक्षे (वृक्ष पर।)

() अन्ते शुकः कस्य आश्रमस्य समीपं गतवान्? (अंत में वह तोता किसके आश्रम के पास गया?)

उत्तरम् वाग्भटस्य (वाग्भट के आश्रम के पास।)

() ऋतवः कति सन्ति? (ऋतुएँ कितनी होती हैं?)

उत्तरम् षट् (छह (6) ऋतुएँ।)

() वाग्भटः शुकस्य रहस्यं केभ्यः उक्तवान्? (वाग्भट ने तोते का रहस्य किसे बताया?)


उत्तरम् शिष्येभ्यः (शिष्यों को।)


. पट्टिकातः उचितानि पदानि चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयत

(सूची से उचित शब्दों का चयन करके रिक्त स्थानों को भरिए।)


चरकस्य, कुटीरसमीपं, भारतवर्षे, आयुर्वेदज्ञानेन, अतिमात्रं

() भारतवर्षे जनाः कथं निरामयाः भवन्ति?

भारतवर्ष में लोग कैसे निरोग रहते हैं?

() अन्ते सः वैद्यस्य वाग्भटस्य कुटीरसमीपं गतवान्।

अंत में वह वैद्य वाग्भट के आश्रम के पास गया।

() तव उत्कृष्टेन आयुर्वेदज्ञानेन अहम् अतीव सन्तुष्टः अस्मि।

तुम्हारे उत्कृष्ट आयुर्वेद ज्ञान से मैं अत्यंत संतुष्ट हूँ।


() महर्षेः चरकस्य नाम भवन्तः श्रुतवन्तः स्युः।

तुमने महर्षि चरक का नाम अवश्य सुना होगा।

() लघुद्रव्याणि अतिमात्रं सेवनेन हानिकराणि जायन्ते।

हल्के पदार्थ भी यदि अधिक मात्रा में खाए जाएँ तो हानिकारक हो जाते हैं।


. अधोलिखितानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत

(नीचे लिखे गए प्रश्नों के पूर्ण वाक्यों में उत्तर दीजिए।)


() मधुरां वाणीं श्रुत्वा चिकित्सानिरतः वाग्भटः किम् अकरोत्? (मधुर आवाज सुनकर वैद्य वाग्भट ने क्या किया?)

उत्तरम् मधुरां वाणीं श्रुत्वा वाग्भटः प्राङ्गणम् आगत्य सर्वासु दिक्षु अपश्यत्। (मधुर आवाज़ सुनकर वाग्भट प्रांगण में आए और चारों दिशाओं में देखने लगे।)

() वाग्भटः झटिति किम् अकरोत्? (वाग्भट ने तुरंत क्या किया?)


उत्तरम् वाग्भटः झटिति तस्मै विहगाय मधुराणि फलानि समर्पितवान्। (वाग्भट ने तुरंत उस पक्षी को मीठे फल अर्पित किए।)

() छात्राः पुनः जिज्ञासया आचार्यं किम् अपृच्छन्? (छात्रों ने फिर जिज्ञासावश आचार्य से क्या पूछा?)

उत्तरम् छात्राः पुनः आचार्यं अपृच्छन् – “हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक् इतिएतेषां कः आशयः?” (छात्रों ने फिर जिज्ञासा से पूछा – “हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्इनका क्या अर्थ है?”)

() भगवान् धन्वन्तरिः अस्माकं कृते संक्षेपेण किं प्रदत्तवान्? (भगवान धन्वंतरि ने हमारे लिए संक्षेप में क्या प्रदान किया?)

उत्तरम् भगवान् धन्वन्तरिः अस्माकं कृते स्वास्थ्यरक्षणाय सूत्ररूपेण सन्देशम् दत्तवान्। (भगवान धन्वंतरि ने हमारे लिए स्वास्थ्य रक्षा हेतु सूत्र रूप में संदेश दिया।)

() ऋषयः नित्यं कां प्रार्थनां कुर्वन्ति? (ऋषि लोग प्रतिदिन कौन सी प्रार्थना करते हैं?)
उत्तरम्ऋषयः नित्यंसर्वे भवन्तु सुखिनः…” इत्यादि प्रार्थनां कुर्वन्ति। (ऋषि लोग प्रतिदिनसभी सुखी हों…” ऐसी प्रार्थना करते हैं।)


. पाठात् यथोचितानि विशेषणपदानि विशेष्यपदानि वा चिन्त्वा रिक्तस्थानानि पूरयत

(पाठ से उचित विशेषण शब्द या विशेष्य शब्द सोचकर रिक्त स्थान भरें।)

विशेषणम् (विशेषण)

विशेष्यम् (जिसकी विशेषता है)

हिंदी अर्थ

विविधनाम्

व्याधीनाम्

विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ

मनोहरम्

शुकरूपम्

सुंदर तोते का रूप

विशाले

प्राङ्गणे

विशाल प्रांगण में

चिकित्सानिरतः

वाग्भटः

चिकित्सा में लगे हुए वाग्भट

मधुराणि

फलानि

मीठे फल

सुप्रसिद्धस्य

वैद्यस्य

प्रसिद्ध वैद्य का

महर्षेः

चरकस्य

महर्षि चरक का

आयुर्वेदविद्

वैद्याः

आयुर्वेद को जानने वाले वैद्य

प्रख्यातस्य

वृक्षे

प्रसिद्ध वृक्ष पर

मधुरा

वाणीम्

मधुर वाणी

लौकिकः

उत्तरम्

उचित उत्तर

समुचितम्

खगः

सामान्य (संसारिक) पक्षी

आयुर्वेदज्ञस्य

शिक्षायाः

आयुर्वेद संबंधी शिक्षा

सात्त्विकम्

भोजनम्

सात्त्विक भोजन

. पाठं पठित्वा अधोलिखितपट्टिकातः पदानि चित्वा उचितसञ्चिकायां पूरयत

(पाठ पढ़कर नीचे दी गई सूची से शब्दों को चुनकर उचित स्थान पर भरें।)


लौकिकः, व्याधीनाम्, देवः, वृक्षे, त्रीणि, उत्तमस्य, वाणीम्, विस्मितः,

मधुरया, प्रश्नान्, पूज्यः, खगः, विशाले, शुकम्, वाग्भटः


विशेषणपदानि (Adjectives)

विशेष्यपदानि (Nouns)

लौकिकः (सांसारिक)

व्याधीनाम् (रोगियों का / बीमारों का)

मधुरया (मधुर / मीठी (संज्ञा के रूप में))

वाणीम् (वाणी / भाषा / शब्द)

विस्मितः (आश्चर्यचकित / चकित)

वाग्भटः (वाग्मि / वाक्चातुर्य में निपुण व्यक्ति (विशेषतः विद्वान्))

उत्तमस्य (उत्तम का / श्रेष्ठ का)

देवः (भगवान / देवता)

पूज्यः (पूजनीय / सम्माननीय)

शुकम् (तोता)

विशाले (विशाल / बड़ा)

वृक्षे (वृक्ष में / पेड़ में)

त्रीणि (तीन / तीनों)

प्रश्नान् (प्रश्न / सवाल)


खगः (पक्षी)

. अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा तेन सम्बद्धं श्लोकं पाठात् चित्वा लिखत

(नीचे लिखे हुए वाक्यों को पढ़कर, उससे संबंधित श्लोक को पाठ से देखकर लिखो।)


() अस्माभिः नित्यं व्यायामः, स्नानं, दन्तधावनं, बुभुक्षायाञ्च भोजनं कर्तव्यम्।

(हमें प्रतिदिन व्यायाम, स्नान, दाँतों की सफाई और भूख लगने पर भोजन करना चाहिए।)

उत्तरम् :

अस्माभिः नित्यकाले व्यायामः, स्नानम्, दन्तधावनं कर्तव्यं, बुभुक्षायां भोजनं आवश्यकं।

(हमें प्रतिदिन व्यायाम, स्नान, दांतों की सफाई और भूख लगने पर भोजन करना चाहिए।)

() अस्माभिः हितकरः आहारः सेवनीयः येन विकाराणां शमनं स्वास्थ्यस्य रक्षणं भवेत्।

(हमें ऐसा लाभकारी भोजन करना चाहिए जिससे रोगों का नाश हो और स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।)

उत्तरम् :

येन विकाराणां शमनं स्वास्थ्यस्य रक्षणं भवति, तादृशः हितकरः आहारः अस्माभिः सेवनीयः।

(हमें ऐसा लाभकारी भोजन करना चाहिए जिससे रोगों का नाश हो और स्वास्थ्य की रक्षा हो सके।)

() ऋतोः अनुसारं भोजनेन बलस्य वर्णस्य अभिवृद्धिः भवति।

(ऋतु के अनुसार भोजन करने से बल और रंग (तेज) की वृद्धि होती है।)

उत्तरम् :

ऋतूनां अनुसारं भोजनं कुर्वन् जनः बलवर्णयोः अभिवृद्धिं प्राप्नोति।

(जो व्यक्ति ऋतुओं के अनुसार भोजन करता है, उसे बल और तेज (रंग) की वृद्धि प्राप्त होती है।)

सन्निमित्ते वरं त्यागः (-भागः)

सुख-सुविधा मिलने पर श्रेष्ठ वस्तु का त्याग (-भागः)


pastedGraphic_11.png

अभ्यासात् जायते सिद्धिः


. पाठम् आधृत्य उदाहरणानुगुणं लिखतआम्अथवा’-


(पाठ के आधार पर उदाहरण के अनुसारहाँयानहींलिखिए।)

संस्कृत प्रश्न

हिंदी अनुवाद

उत्तर

() किं वीरवरः राजपुत्रः आसीत्?

क्या वीरवर एक राजपुत्र था?

आम्

()किं ते वर्तनम्”? इति किं शूद्रकः अपृच्छत्?

क्या शूद्रक ने पूछा – “तुम्हारा वेतन क्या है?”

आम्

() किं वीरवरं राज्ञः समीपे दौवारिकः अनयत् ?

क्या द्वारपाल वीरवर को राजा के पास ले गया?

आम्

() किं राजा शूद्रकः राजपुत्रं वीरवरं साक्षात् दृष्ट्वा एव वृत्तिम् अयच्छत् ?

क्या राजा शूद्रक ने वीरवर को सीधे देखकर ही वेतन दे दिया?

() किं वीरवरः स्ववेतनस्य चतुर्थं भागम् एव पत्न्यै यच्छति स्म ?

क्या वीरवर अपनी पत्नी को वेतन का एक चौथाई हिस्सा ही देता था?

() किं करुणरोदन-ध्वनिं राजा श्रुतवान्?

क्या राजा ने करुणा से भरी रोने की आवाज सुनी?

आम्

() किं करुणरोदनध्वनिः दिवसे श्रुतः आसीत् ?

क्या वह रोने की आवाज दिन के समय सुनी गई थी?

() किं राजलक्ष्म्या उक्तः उपायः अतीव दुःसाध्यः आसीत् ?

क्या राजलक्ष्मी द्वारा बताया गया उपाय बहुत कठिन था?

आम्

() किं भगवती सर्वमङ्गला उपायं संसूच्य शीघ्रमेव अदृश्या अभवत्?

क्या देवी सर्वमंगल उपाय बताकर तुरंत अदृश्य हो गई?

आम्

. अधोलिखितान् प्रश्नान् पूर्णवाक्येन उत्तरत


(नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में दीजिए।)


() शूद्रकः कीदृशः राजा आसीत्? (शूद्रक कैसा राजा था?)

उत्तरम् शूद्रकः महापराक्रमी, नानाशास्त्रवित्, पूतचरित्रः राजा आसीत्। (शूद्रक एक अत्यंत पराक्रमी, अनेक शास्त्रों का ज्ञाता और शुद्ध चरित्र वाला राजा था।)

() वीरवरः कस्य समीपं गन्तुम् इच्छति स्म? (वीरवर किसके पास जाना चाहता था?)

उत्तरम् वीरवरः राज्ञः समीपं गन्तुम् इच्छति स्म। (वीरवर राजा के पास जाना चाहता था।)

() राज्ञः शूद्रकस्यका ते सामग्री ?” इति प्रश्नस्य उत्तरं वीरवरः किम् अयच्छत् ? (राजा शूद्रक द्वारा पूछे गएतुम्हारी सामग्री क्या है?” इस प्रश्न का उत्तर वीरवर ने क्या दिया?)

उत्तरम् वीरवरः उक्तवान् – “इमौ बाहू, एषः खड्गः मम सामग्री।” (वीरवर ने उत्तर दिया – “मेरी सामग्री ये दोनों भुजाएँ और यह तलवार है।”)

() वीरवरः स्वगृहं कदा गच्छति स्म ? (वीरवर अपने घर कब जाता था?)

उत्तरम् वीरवरः यदा राजा आदेशं ददाति तदा एव स्वगृहं गच्छति स्म। (वीरवर तभी अपने घर जाता था जब राजा उसे आदेश देता था।)


() वीरवरः स्ववेतनस्य अर्धं केभ्यः यच्छति स्म ? (वीरवर अपने वेतन का आधा भाग किसे देता था?)

उत्तरम् वीरवरः स्ववेतनस्य अर्धं देवेभ्यः यच्छति स्म। (वीरवर अपने वेतन का आधा भाग देवताओं को अर्पित करता था।)

() राजलक्ष्मीः कुत्र सुखेन अवसत् ? (राजलक्ष्मी कहाँ सुखपूर्वक निवास करती थी?)

उत्तरम् राजलक्ष्मीः शूद्रकस्य भुजच्छायायां सुमहता सुखेन अवसत्। (राजलक्ष्मी राजा शूद्रक की भुजाओं की छाया में बहुत सुखपूर्वक रहती थी।)

() राजलक्ष्म्याः दुःखस्य कारणं श्रुत्वा बद्धाञ्जलिः वीरवरः किम् अवदत् ? (राजलक्ष्मी के दुःख का कारण सुनकर हाथ जोड़कर वीरवर ने क्या कहा?)

उत्तरम् वीरवरः उक्तवान् – “भगवति ! अस्त्यत्र कश्चिदुपायः येन भगवत्याः पुनः चिरवासः भवेत्?” (वीरवर ने कहा – “माता! क्या कोई उपाय है जिससे आप यहाँ फिर से लंबे समय तक रह सकें?”)


. उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानि वाक्यानि अन्वयरूपेण लिखत

(उदाहरण के अनुसार निम्नलिखित वाक्यों को अन्वय (सुसंगत क्रम) में लिखो।)


() आसीत् शोभावती नाम काचन नगरी
अन्वयः काचित् नगरी शोभावती नाम आसीत्।


हिंदी अनुवाद एक नगरी थी जिसका नाम शोभावती था।

() प्रतिदिनं सुवर्णशतचतुष्टयं देव !
अन्वयः हे देव! प्रतिदिनं सुवर्णशतानां चतुष्टयं भवति।

हिंदी अनुवाद हे देव! प्रतिदिन चार सौ स्वर्ण मुद्राएँ (वेतन) होती हैं।

() देव! दिनचतुष्टयस्य वेतनार्पणेन प्रथममवगम्यतां स्वरूपमस्य वेतनार्थिनो राजपुत्रस्य, किमुपपन्नमेतत् वेतनं वेति।
अन्वयः हे देव! प्रथमं दिनचतुष्टयस्य वेतनस्य अर्पणेन, अयम् वेतनार्थी राजपुत्रः उपपन्नम् अस्ति वा इति स्वरूपं अवगम्यताम्।

हिंदी अनुवाद हे देव! पहले चार दिन का वेतन देकर इस राजपुत्र की योग्यता जानी जाए कि यह वेतन उचित है या नहीं।

() क्रन्दनमनुसर राजपुत्र !
अन्वयः हे राजपुत्र! त्वं क्रन्दनस्य अनुसरणं कुरु।

हिंदी अनुवाद हे राजपुत्र! तुम रोने की आवाज का अनुसरण करो।

() अथ मन्त्रिणां वचनात् ताम्बूलदानेन नियोजितोऽसौ राजपुत्रो वीरवरो नरपतिना
अन्वयः अथ नरपतिना मन्त्रिणां वचनात् ताम्बूलदाने नियोजितः असौ राजपुत्रः वीरवरः।

हिंदी अनुवाद तब राजा ने मंत्रियों की बात मानकर उस राजपुत्र वीरवर को ताम्बूल (पान) देने के कार्य में नियुक्त किया।

() नैष गन्तुमर्हति राजपुत्र एकाकी सूचिभेद्ये तिमिरेऽस्मिन्
अन्वयः अस्मिन् सूचिभेद्ये तिमिरे एकाकी राजपुत्रः गन्तुं अर्हति।

हिंदी अनुवाद इस सघन अंधकार में अकेले राजपुत्र को नहीं जाना चाहिए।

() भगवति! अस्त्यत्र कश्चिदुपायो येन भगवत्याः पुनरिह चिरवासो भवति, सुचिरं जीवति स्वामी ?
अन्वयः हे भगवति! अत्र कश्चित् उपायः अस्ति, येन भगवत्या पुनः अत्र चिरकालं वासः भवति, स्वामी सुचिरं जीवति।

हिंदी अनुवाद हे माता! क्या कोई ऐसा उपाय है जिससे आप यहाँ फिर से लंबे समय तक रह सकें और स्वामी (राजा) भी दीर्घकाल तक जीवित रहें?

() तदा पुनर्जीविष्यति राजा शूद्रको वर्षाणां शतम्
अन्वयः तदा राजा शूद्रकः वर्षाणां शतं पुनः जीविष्यति।

हिंदी अनुवाद तब राजा शूद्रक सौ वर्षों तक फिर से जीवित रहेगा।


. उदाहरणानुगुणं पाठगतानि पदानि अधिकृत्य रिक्तस्थानानि पूरयत

(उदाहरण के अनुसार पाठ से लिए गए शब्दों को तोड़कर रिक्त स्थानों को भरें।)


यथा – (1) अथैकदा = अथ + एकदा

(2) वृत्त्यर्थम् = वृत्तिः + अर्थम्

(3) कस्मादपि = कस्मात् + अपि

(4) कोऽपि = कः + अपि

(5) राजपुत्रोऽस्मि = राजपुत्रः + अस्मि

(6) यथेष्टम् = यथा + इष्टम्

(7) वेतनार्पणेन = वेतन + अर्पणेन

(8) तदालोक्य = तत् + आलोक्य

(9) ततोऽसौ = ततः + असौ

(10) वर्तनार्थिनो = वर्तन + अर्थिनः

(11) तदवशिष्टं = तत् + अवशिष्टम्

(12) राजदर्शनादनन्तरं = राजदर्शनात् + अनन्तरम्

(13) वेत्ति = वेत् + इति

(14) राजलक्ष्मीरुवाच = राजलक्ष्मीः + उवाच

(15) चार्द्धं = + अर्धम्

(16) बहिर्नगरादालोकिता = बाहिः + नगरात् + आलोकिता

(17) कापि = का + अपि

(18) प्रत्युवाच = प्रति + उवाच

(19) राजलक्ष्मीरस्मि = राजलक्ष्मीः + अस्मि

(20) स्थास्यामीति = स्थास्यामि + इति

(21) भुजच्छायायां = भुजः + छायायाम्

(22) अस्त्यत्र = अस्ति + अत्र

(23) कश्चिदुपायः = कश्चित् + उपायः


. अधोलिखितेषु वाक्येषु रक्तवर्णीयपदानि केभ्यः प्रयुक्तानि इति उदाहरणानुगुणं लिखत

(निम्नलिखित वाक्यों में लाल रंग में लिखे गए शब्द किस विभक्ति से प्रयुक्त हुए हैं, यह उदाहरण के अनुसार लिखिए)


यथा अहंभवतःसेवायां नियोजितः राज्ञे (चतुर्थी विभक्ति – ‘के लिए’)

() ततःअसौतद्रोदनस्वरानुसरणक्रमेण प्रचलितः
उत्तरम् अस्मात् (पञ्चमी विभक्ति)

हिंदी अनुवाद तब वह (असौ) उस रोने की आवाज़ का अनुसरण करते हुए चला गया।
असौशब्दअस्मात्’ (उससे) का रूप है, जो पञ्चमी (अपादान कारक) में प्रयुक्त हुआ है।

() तत्अहम्अपि गच्छामि पृष्ठतोऽस्य
उत्तरम् अहम् (प्रथमा विभक्ति)

हिंदी अनुवाद तब मैं भी उसके पीछे-पीछे जाऊँगा।
अहम्शब्द कर्ता को दर्शाता है, इसलिए यह प्रथमा विभक्ति (कर्ता कारक) है।

() चिरम्एतस्यभुजच्छायायां सुमहता सुखेन निवसामि
उत्तरम् एतस्य (षष्ठी विभक्ति)

हिंदी अनुवाद इस (राजा के) भुजाओं की छाया में मैं लंबे समय से बहुत सुख से निवास कर रही हूँ।
एतस्यशब्दएषः’ (यह) का षष्ठी (सम्बन्ध कारक) रूप है, जिसका अर्थ हैइसका

() “साचातीव दुःसाध्या
उत्तरम् सा (प्रथमा विभक्ति)

हिंदी अनुवाद वह (प्रवृत्ति) अत्यंत कठिन है।
सास्त्रीलिंग शब्द है और कर्ता के रूप में प्रथमा विभक्ति में प्रयुक्त है।

() किंतेवर्तनम् ?
उत्तरम् ते (चतुर्थी विभक्ति)

हिंदी अनुवाद तुम्हारा वेतन क्या है?
तेशब्दत्वम्’ (तुम) का चतुर्थी रूप है जिसका अर्थ हैतुझे’, ‘तेरे लिए


. अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा तेन सम्बद्धं श्लोकं पाठात् चित्वा लिखत

(नीचे लिखे वाक्यों को पढ़कर उससे संबंधित श्लोक पाठ से देखकर लिखो।)


() राजलक्ष्मीः वदति यत् यदि वीरवरः स्वस्य सर्वप्रियं वस्तु त्यजति तदा सा पुनः शूद्रकस्य समीपे स्थास्यति।

(राजलक्ष्मी कहती है कि यदि वीरवर अपनी सबसे प्रिय वस्तु का त्याग करता है तो वह फिर से राजा शूद्रक के पास रहेगी।)

उत्तर: परोपकाराय फलन्ति वृक्षाः परोपकाराय वहन्ति नद्यः।

परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकारार्थमिदं शरीरम्॥

हिंदी अनुवाद : परोपकार के लिए वृक्ष फल देते हैं, परोपकार के लिए नदियाँ पानी बहाती हैं। परोपकार के लिए गायें दूध देती हैं, और यह शरीर भी परोपकार के लिए है।

() राजा शूद्रकः प्रथमं वीरवरस्य वृत्त्यर्थं प्रार्थनां स्वीकरोति।

उत्तर: कार्ये कर्मणि निर्वृत्ते यो बहून्यपि साधयेत्।

पूर्वकार्याविरोधेन कार्यं कर्तुमर्हति॥

हिंदी अनुवाद : जो कार्य को पूर्ण करने के बाद भी अनेक कार्य करता है, वह पूर्व कार्यों के विरोध के बिना ऐसा कार्य करने के योग्य है।

() एकदा कोऽपि वीरवरः नाम राजपुत्रः वृत्तिं प्राप्तुं राज्ञः शूद्रकस्य समीपं गच्छति।

उत्तर: कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः।

एवं त्वयि नान्यथेतोऽस्ति कर्म लिप्यते नरे॥

हिंदी अनुवाद : यहाँ कर्म करते हुए सौ वर्ष तक जीना चाहिए। ऐसा करने पर तुम्हारे साथ और कोई उपाय नहीं है, और कर्म मनुष्य को नहीं बांधता।

() सः तस्य कर्तव्यनिष्ठां साक्षात् पश्यति।

उत्तर: यथा छायातपौ नित्यं सुसंबद्धौ परस्परम्।

एवं कर्म कर्ता संश्लिष्टावितरेतरम्॥

हिंदी अनुवाद : जैसे छाया और ताप हमेशा परस्पर जुड़े रहते हैं, वैसे ही कर्म और कर्ता भी परस्पर संबद्ध होते हैं।

() राजा मन्त्रिणां मन्त्रणया वीरवराय वृत्तिं यच्छति।

उत्तर: कार्ये कर्मणि निर्वृत्ते यो बहून्यपि साधयेत्।

पूर्वकार्याविरोधेन कार्यं कर्तुमर्हति॥

हिंदी अनुवाद : जो कार्य को पूर्ण करने के बाद भी अनेक कार्य करता है, वह पूर्व कार्यों के विरोध के बिना ऐसा कार्य करने के योग्य है।


. अधोलिखितानां वाक्यानां पदच्छेदं कुरुत

(नीचे लिखित वाक्यों का शब्द-विभाजन (पदों में पृथक्करण) करें।)


यथाअथैकदा वीरवरनामा राजपुत्रः वृत्त्यर्थं कस्मादपि देशाद् राजद्वारमुपागच्छत्।

अथ एकदा वीरवरनामा राजपुत्रः वृत्त्यर्थं कस्मात् अपि देशात् राजद्वारम् उपागच्छत्।

() वृत्त्यर्थमागतो राजपुत्रोऽस्मि

पदच्छेदः वृत्त्यर्थम् आगतः राजपुत्रः अस्मि।

हिंदी अनुवादमैं नौकरी (सेवा) के लिए आया हुआ राजकुमार हूँ।

() अथैकदा कृष्णचतुर्दश्यामर्धरात्रे राजा श्रुतवान् करुणरोदनध्वनिं कञ्चन

पदच्छेदः अथ एकदा कृष्णचतुर्दश्याम् अर्धरात्रे सः राजा श्रुतवान् करुणरोदनध्वनिम् कञ्चन।

हिंदी अनुवाद एक बार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की अर्धरात्रि में राजा ने कोई करुण क्रंदन की आवाज़ सुनी।

() तदहमपि गच्छामि पृष्ठतोऽस्य निरूपयामि किमेतदिति

पदच्छेदः तत् अहम् अपि गच्छामि पृष्ठतः अस्य निरूपयामि किम् एतत् इति।

हिंदी अनुवाद तब मैं भी इसके पीछे जाता हूँ और पता लगाता हूँ कि यह क्या बात है।

() अस्त्यत्र कश्चिदुपायो येन भगवत्याः पुनरिह चिरवासो भवति।

पदच्छेदः अस्ति अत्र कश्चित् उपायः येन भगवत्याः पुनः इह चिरवासः भवति।

हिंदी अनुवाद यहाँ एक ऐसा उपाय है जिससे देवी (आप) फिर से यहाँ लंबे समय तक निवास कर सकती हैं।

() एकैवात्र प्रवृत्तिः सा चातीव दुःसाध्या

पदच्छेदः एका एव अत्र प्रवृत्तिः सा अतीव दुःसाध्या।

हिंदी अनुवाद यहाँ केवल एक ही प्रक्रिया है और वह अत्यंत कठिन (करने योग्य नहीं) है


सन्निमित्ते वरं त्यागः (-भागः)

अनुकूल अवसर पर श्रेष्ठता का त्याग (भाग-)


pastedGraphic_12.pngअभ्यासात् जायते सिद्धिः


. निम्नलिखितेषु वाक्येषु रक्तवर्णीयानि स्थूलपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत


(निम्नलिखित वाक्यों में से लाल रंग के मोटे शब्दों को ध्यान में रखते हुए प्रश्न निर्माण करें।)


() वीरवरो पत्नीं पुत्रं दुहितरञ्च प्राबोधयत्। (वीरवर ने पत्नी, पुत्र और पुत्री को जगाया।

प्रश्न (संस्कृत): कः पत्नीं पुत्रं दुहितरञ्च प्राबोधयत्? (किसने पत्नी, पुत्र और पुत्री को जगाया?)

() ततस्ते सर्वे सर्वमङ्गलाया आयतनं गताः। (फिर वे सभी मंगलमय देवी के मंदिर को चले गये )

प्रश्न (संस्कृत): ततस्ते सर्वे जनाः कुत्र गताः? (फिर वे सभी सब लोग कहाँ गए?)

() वीरवरः वर्तनस्य निस्तारं पुत्रोत्सर्गेण अकरोत्। (वीरवर ने अपने कर्तव्य का निर्वाह किसके त्याग से किया?)

प्रश्न (संस्कृत): वीरवरः वर्तनस्य निस्तारं केन अकरोत्? (वीरवर ने अपने पुत्र के त्याग से कर्तव्य का निर्वाह किया।)

() राजा स्वप्रासादं प्राविशत्। (राजा ने अपने महल में प्रवेश किया।)

प्रश्न (संस्कृत): राजा कुत्र प्राविशत्? (राजा ने कहाँ प्रवेश किया?)




() महीपतिः वीरवराय समग्रकर्णाटप्रदेशम् अयच्छत्। (राजा ने वीरवर को पूरा कर्नाट प्रदेश दिया।)

प्रश्न (संस्कृत): महीपतिः कस्य समग्रकर्णाटप्रदेशं अयच्छत्? (राजा ने समस्त कर्नाट प्रदेश किसको दिया?)


. अधोलिखितान् प्रश्नान् उत्तरत

(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दें)


() वीरवरः किम् अवर्णयत् ? (वीरवर ने क्या वर्णन किया?)

उत्तरम् वीरवरः अखिलराजलक्ष्मीसंवादं अवर्णयत्। (वीरवर ने सम्पूर्ण राजलक्ष्मी संवाद का वर्णन किया।)

() प्राज्ञः धनानि जीवितञ्च केभ्यः उत्सृजेत् ? (बुद्धिमान व्यक्ति धन और जीवन किसके लिए त्याग दे?)

उत्तरम् प्राज्ञः परार्थे धनानि जीवितञ्च उत्सृजेत्। (बुद्धिमान व्यक्ति परोपकार के लिए धन और जीवन का त्याग कर देता है।)

() केन सदृशः लोके भूतो भविष्यति ? (संसार में किसके समान कोई पहले हुआ और आगे होगा?

उत्तरम्वीरवरेण सदृशः लोके भूतो भविष्यति। (वीरवर के समान संसार में कोई पहले हुआ और आगे होगा।)

() का अदृश्या अभवत्? (कौन अदृश्य हो गई?)

उत्तरम् भगवती सर्वमङ्गला अदृश्या अभवत्। (देवी सर्वमंगल अदृश्य हो गई।)

() सपरिवारः वीरवरः कुत्र गतवान्? (वीरवर अपने परिवार के साथ कहाँ गया?)

उत्तरम् सपरिवारः वीरवरः स्वगृहं गतवान्। (वीरवर अपने परिवार सहित अपने घर गया।)


. अधोलिखितेषु वाक्येषु रक्तवर्णीयपदानि केभ्यः प्रयुक्तानि इति उदाहरणानुगुणं लिखत

(नीचे लिखे गए वाक्यों में लाल रंग से दर्शाए गए शब्दों का किसके द्वारा प्रयोग किया गया है, इसे उदाहरण के अनुसार लिखो।)


() भगवति ! मेप्रयोजनं राज्येन जीवितेन वा
उत्तरम् राज्ञः

हिंदी अनुवाद
हे माँ! मुझे राज्य और जीवन से कोई प्रयोजन नहीं है।
(
यहाँमे” = मम = मेरा; प्रयुक्तः = राजा/राज्ञः)


() वत्स ! अनेनतेसत्त्वोत्कर्षेण भृत्यवात्सल्येन परं प्रीतास्मि
उत्तरम् राज्ञः
हिंदी अनुवाद
बेटा! तुम्हारी इस उत्कृष्ट शक्ति और सेवक-प्रेम से मैं अत्यंत प्रसन्न हूँ।
(
यहाँते” = तव = तुम्हारे; प्रयुक्तः = राजा/राज्ञः)

() धन्याहंयस्याईदृशो जनको भ्राता
उत्तरम् वीरवत्या
हिंदी अनुवाद
मैं धन्य हूँ जिसके ऐसे पिता और भाई हैं।
(
यहाँयस्या” = जिसकी; प्रयुक्तः = वीरवती, पुत्री के लिए)

() तदेतत्परित्यक्तेनममराज्येनापि किं प्रयोजनम् !
उत्तरम् राज्ञः
हिंदी अनुवाद
यह सब त्याग देने के बाद मेरे राज्य का भी क्या उपयोग है?
(
यहाँमम” = मेरा; प्रयुक्तः = राजा/राज्ञः)

() “अयम्अपि सपरिवारो जीवतु
उत्तरम् वीरवरः
हिंदी अनुवाद
यह राजपुत्र भी अपने परिवार सहित जीवित रहे।
(
यहाँअयम्” = यह; प्रयुक्तः = वीरवरः)


. उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानि वाक्यानि अन्वयरूपेण लिखत

(अधोलिखितेषु वाक्येषु रक्तवर्णीयपदानि केभ्यः प्रयुक्तानि इति उदाहरणानुगुणं लिखत)


यथा कृतो मया गृहीतस्वामिवर्तनस्य निस्तारो स्वपुत्रोत्सर्गेण

गृहीतस्वामिवर्तनस्य निस्तारो मया स्वपुत्रोत्सर्गेण कृतः।

() नेदानीं राज्यभङ्गस्ते भविष्यति। (अब तुम्हारा राज्य टूटेगा नहीं।)

अन्वय: ते राज्यभङ्गः अब भविष्यति नहीं। (तुम्हारा राज्य अब नहीं टूटेगा।)

() तेन पातितं स्वशिरः स्वकरस्थखड्गेन। (उसने अपने हाथ में रखे तलवार से अपना सिर काटा।)

अन्वय: तेन स्वकरस्थखड्गेन स्वशिरः पातितम्। (उसने अपने सिर को अपने हाथ में रखे तलवार से काटा।)

() तदा ममायुःशेषेणापि जीवतु राजपुत्रो वीरवरः सह पुत्रेण पत्न्या दुहित्रा च। (तब मेरे शेष जीवन से भी राजकुमार वीरवर अपने पुत्र, पत्नी और पुत्री के साथ जीवित रहे।)

अन्वय: तदा राजपुत्रः वीरवरः मम आयुःशेषेणापि सह पुत्रेण पत्न्या दुहित्रा जीवतु। (तब राजकुमार वीरवर मेरे शेष जीवन से भी अपने पुत्र, पत्नी और पुत्री के साथ जीवित रहा।)

() तत्क्षणादेव देवी गताऽदर्शनम्। (उसी समयदेवी अदृश्य हो गई।)

अन्वय: देवी तत्क्षणादेव गताऽदर्शनम्। (देवी उसी समयअदृश्य हो गई।)

() महीपतिस्तस्मै प्रायच्छत् समग्रकर्णाटप्रदेशं राजपुत्राय वीरवराय। (राजा ने राजकुमार वीरवर को समग्र कर्नाट प्रदेश दिया।)

अन्वय: महीपतिः तस्मै राजपुत्राय वीरवराय समग्रकर्णाटप्रदेशम् प्रायच्छत्। (राजा ने राजकुमार वीरवर को समग्र कर्नाट प्रदेश दिया।)

() जायन्ते म्रियन्ते मादृशाः क्षुद्रजन्तवः। (मेरे जैसे छोटे जीव जन्मते और मरते हैं।)

अन्वय: मादृशाः क्षुद्रजन्तवः जायन्ते म्रियन्ते च। (मेरे जैसे छोटे जीव जन्मते और मरते हैं।)


. उदाहरणानुगुणम् अधोलिखितानां पदानां पदच्छेदं कुरुत

(नीचे लिखे शब्दों का पद विभाजन (शब्दों को उनके अंगों में अलग करना) उदाहरण के अनुसार करो।)


यथा

यद्येवमस्मत्कुलोचितम् = यदि-एवम्-अस्मत्-कुलोचितम्
सत्त्वोत्कर्षेण =सत्त्वउत्कर्षेण

() गृहीतस्वामिवर्तनस्य = गृहीत-स्वामि-वर्तनस्य

हिंदी अनुवाद: स्वामी द्वारा दिए गए वेतन का

() निस्तारोपायः = निस्तार-उपायः

हिंदी अनुवाद: ऋण चुकाने का उपाय

() गृह्यतामेष = गृह्यताम्-एष

हिंदी अनुवाद: इसे ग्रहण करो

() स्वपुत्रोत्सर्गेण = स्व-पुत्र-उत्सर्गेण

हिंदी अनुवाद: अपने पुत्र के त्याग से

() स्वकरस्थखड्गेन = स्व-कर-स्थ-खड्गेन

हिंदी अनुवाद: अपने हाथ में रखे खड्ग से

() तदेतत्परित्यक्तेन = तत्-एतत्-परित्यक्तेन

हिंदी अनुवाद: उस सब को त्यागने वाले द्वारा

() स्वशिरश्छेदनार्थमुत्क्षिप्तः = स्व-शिरः-छेदन-अर्थम्-उत्क्षिप्तः

हिंदी अनुवाद: अपने सिर काटने के लिए उठाया हुआ

() मद्दर्शनाददृश्यताम् = मत्-दर्शनात्-दृश्यताम्

हिंदी अनुवाद: मेरे दर्शन से अदृश्य होना

() तत्क्षणादेव = तत्-क्षणात्-एव

हिंदी अनुवाद: उसी क्षण ही

() लब्धजीवितः = लब्ध-जीवितः

हिंदी अनुवाद: जीवन प्राप्त हुआ


. () उदाहरणानुसार पाठगत पदों से रिक्त स्थानों की पूर्ति सन्धियुक्त शब्दों द्वारा करें

() उदाहरण के अनुसार पाठ में प्राप्त शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति संधि मिलाकर किए गए शब्दों द्वारा करें।

संधि

सन्धियुक्त शब्द

हिंदी अर्थ

तत् + श्रुत्वा

तच्छ्रुत्वा

उसे सुनकर

दुहितरम् +

दुहितरञ्च

पुत्री और

धन्यः + अहम्

धन्याहम्

मैं धन्य हूँ

जीवितम् + + एव

जीवितमेव

केवल जीवन

विलम्बः + तात

विलम्बस्तात

विलंब क्यों, पिताजी?

कः + अधुना

कोऽधुना

अब कौन?

+ आचरितव्यम्

नाचरितव्यम्

आचरण नहीं किया जाना चाहिए

धन्या + अहम्

धन्याहम्

मैं धन्य हूँ

निस्तारः + उपायः

निस्तारोपायः

छुड़ाने का उपाय

वीरवरः + अवदत्

वीरवरोऽवदत्

वीरवर ने कहा

ततः + असौ

ततोऽसौ

तब वह

ततः + ते

ततस्ते

तब वे

() निम्नलिखितपदानां सन्धिच्छेदं कुरुत

(निम्नलिखित शब्दों का संधि-विच्छेद करें।)


शूद्रकोऽपि
शूद्रकः + अपि
(
शूद्रक भी)

पुनर्भूपालेन
पुनः + भूपालेन
(
फिर राजा के द्वारा)

महीपतिस्तस्मै
महीपतिः + तस्मै
(
राजा ने उसे)

प्रायच्छत्
प्रा + अयच्छत्
(
दिया / प्रदान किया)

नृपतिरपि
नृपतिः + अपि
(
राजा भी)

सर्वेषामदृश्य
सर्वेषाम् + अदृश्य
(
सभी के लिए अदृश्य)

वार्ताऽन्या
वार्ता + अन्या
(
कोई अन्य समाचार)

राज्यभङ्गस्ते
राज्यभङ्गः + ते
(
तुझे राज्यभंग नहीं होगा)

गतिर्गन्तव्या
गतिः + गन्तव्या
(
गति प्राप्त करनी चाहिए)

इत्युक्त्वा
इति + उक्त्वा
(
ऐसा कहकर)

नेदानीं
+ इदानीं
(
अब नहीं)

प्रीतास्मि
प्रीता + अस्मि
(
मैं प्रसन्न हूँ)


. अधोलिखितानि कथनानि कथायाः घटनानुसारं लिखत

(नीचे दिए गए कथनों को कहानी की घटनाओं के क्रम के अनुसार लिखो।)


() वीरवरो गृहं गत्वा पत्नीं पुत्रं पुत्रीञ्च प्राबोधयत्, सर्वां वार्ताम् अकथयत्।

() पितुः वार्तां श्रुत्वा शक्तिधरः प्रसन्नतया स्वस्य समर्पणार्थं सिद्धः अभवत्।

() वीरवरः परिवारेण सह सर्वस्वसमर्पणम् अकरोत्।

() सर्वं दृष्ट्वा राजा शूद्रकः अपि सर्वस्वसमर्पणार्थं सिद्धः अभवत्।

() भगवती प्रसन्ना अभवत्। भगवत्याः कृपया सर्वे जीवितवन्तः।

() प्रातः राजा वीरवरम् अपृच्छत्ह्यः रात्रौ किम् अभवत्’?

() वीरवरेण उक्तम्स्वामिन् ! कापि वार्ता सा नारी अदृश्या अभवत्।

घटनानुसार क्रमबद्ध कथन (हिन्दी में):

() वीरवर अपने घर गया, पत्नी, पुत्र और पुत्री को जगाया, और सारा संवाद बताया।

() पिता की बात सुनकर शक्तिधर प्रसन्नतापूर्वक अपने समर्पण के लिए तैयार हुआ।

() वीरवर ने अपने परिवार सहित सम्पूर्ण समर्पण कर दिया।

() यह सब देखकर राजा शूद्रक भी सम्पूर्ण समर्पण के लिए तैयार हो गया।

() भगवती प्रसन्न हुई। भगवती की कृपा से सभी जीवित रहे।

() प्रातः राजा ने वीरवर से पूछा – “कल रात्रि क्या हुआ?”

() वीरवर ने कहा – “स्वामी! कोई विशेष बात नहीं। वह स्त्री अदृश्य हो गई।


सम्यग्वर्णप्रयोगेण ब्रह्मलोके महीयते

(सही वर्णों के प्रयोग से (या शुद्ध उच्चारण द्वारा) व्यक्ति ब्रह्मलोक में प्रतिष्ठित होता है।)


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अभ्यासात् जायते सिद्धिः


. पाठे विद्यमानानां श्लोकानाम् उच्चारणं स्मरणं लेखनं कुरुत


(पाठ में मौजूद श्लोकों का उच्चारण करें, उन्हें याद करें और लिखें।)


. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तराणि लिखत

(नीचे दिए गए प्रश्नों के एक-शब्द में उत्तर लिखो।)


() पाठकाः केषां सम्यक् प्रयोगं कुर्युः ? (पाठक किसका सही प्रयोग करें?)

उत्तरम्: वर्णानाम्। (वर्णों का।)

() किम् अवश्यमेव पठनीयम् ? (क्या अवश्य पढ़ना चाहिए?)

उत्तरम्: व्याकरणम्। (व्याकरण।)

() ब्रह्मलोके केन सम्मानं भवति ? (ब्रह्मलोक में किससे सम्मान मिलता है?)

उत्तरम्: सम्यग्वर्णप्रयोगेण। (वर्णों के शुद्ध प्रयोग से।)

() अधमाः पाठकाः कति भवन्ति ? (अधम पाठक कितने होते हैं?)


उत्तरम्: षट्। (छह।)

() धैर्यं केषां गुणः ? (धैर्य किसका गुण है?)

उत्तरम्: पाठकानाम्। (पाठकों का।)


. अधोलिखितानां प्रश्नानाम् पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत

(नीचे दिए गए प्रश्नों के पूर्ण वाक्य में उत्तर दीजिए।)


() व्याघ्री दंष्ट्राभ्यां कान् नयति ? (व्याघ्री (मादा बाघ) अपने दाँतों से किसे ले जाती है?)

उत्तरम्:  व्याघ्री दंष्ट्राभ्यां पुत्रान् नयति। (व्याघ्री अपने दाँतों से अपने बच्चों को ले जाती है।)

() वर्णाः कथं प्रयोक्तव्याः ? (वर्णों (अक्षरों) का उच्चारण कैसे करना चाहिए?)

उत्तरम्: वर्णाः स्पष्टतया पीडयित्वा प्रयोक्तव्याः। (वर्णों का उच्चारण स्पष्ट रूप से और बिना कठोरता के करना चाहिए।)

() पाठकानां षट्-गुणाः के भवन्ति ? (पाठकों के कौन-कौन से छह गुण होते हैं?)


उत्तरम्: पाठकानां षट् गुणाःमाधुर्यम्, अक्षरव्यक्तिः, पदच्छेदः, सुस्वरः, धैर्यम्, लयसमर्थता भवन्ति। (पाठकों के छह गुण होते हैंमधुरता, स्पष्ट अक्षर उच्चारण, पदों का सही विभाजन, अच्छा स्वर, धैर्य और लय की समझ।)

() के अधमाः पाठकाः भवन्ति ? (कौन अधम (निम्न कोटि के) पाठक होते हैं?)

उत्तरम्: गीती, शीघ्री, शिरःकम्पी, लिखितपाठकः, अनर्थज्ञः, अल्पकण्ठश्च अधमाः पाठकाः भवन्ति। (जो गाने की तरह पढ़ते हैं, बहुत तेज पढ़ते हैं, सिर हिलाकर पढ़ते हैं, लिखकर पढ़ते हैं, अर्थ नहीं समझते और धीमे स्वर में पढ़ते हैंवे अधम पाठक होते हैं।)

() ‘स्वजनः’ ‘श्वजनः इत्यनयोः अर्थदृष्ट्या कः भेदः ? (‘स्वजनऔरश्वजनइन दोनों में अर्थ की दृष्टि से क्या अंतर है?)

उत्तरम्:स्वजनःइत्यस्य अर्थः बान्धवः, ‘श्वजनःइत्यस्य अर्थः शुनकः अस्ति। (‘स्वजनका अर्थ होता है अपना या संबंधी, औरश्वजनका अर्थ होता है कुत्ता।)

() ‘सकलं’ ‘शकलं इत्यनयोः अर्थदृष्ट्या कः भेदः ? (‘सकलंऔरशकलंइन दोनों में अर्थ की दृष्टि से क्या अंतर है?)

उत्तरम्:सकलंइत्यस्य अर्थः सम्पूर्णम्, ‘शकलंइत्यस्य अर्थः खण्डः अस्ति। (‘सकलंका अर्थ है सम्पूर्ण (पूरा), औरशकलंका अर्थ है टुकड़ा (खंडित))


. अधोलिखितानि लक्षणानि पाठकस्य गुणाः वा दोषाः वा इति विभजत


(नीचे लिखे गए लक्षण पाठक के गुण हैं या दोष, इसे विभाजित करें।)


अक्षरव्यक्तिः, शीघ्री, लिखितपाठकः, लयसमर्थम्, अनर्थः, अल्पकण्ठः,
माधुर्यम्, गीती, पदच्छेदः, शिरःकम्पी, अनर्थज्ञः, धैर्यम्, सुस्वरः

गुणाः (अच्छे पाठक के गुण)

दोषाः (अधम पाठक के दोष)

अक्षरव्यक्तिः (स्पष्ट उच्चारण)

शीघ्री (बहुत तेज पढ़ने वाला)

लयसमर्थम् (लय की समझ रखने वाला)

लिखितपाठकः (लिखकर ही पढ़ने वाला)

माधुर्यम् (मधुरता)

अनर्थः (अर्थ का अभाव)

पदच्छेदः (उचित स्थान पर शब्द-विभाजन)

अल्पकण्ठः (धीमे स्वर वाला)

धैर्यम् (धैर्य से पढ़ने वाला)

गीती (गाने की तरह पढ़ने वाला)

सुस्वरः (अच्छे स्वर में पढ़ना)

शिरःकम्पी (सिर हिलाकर पढ़ने वाला)


अनर्थज्ञः (अर्थ जानने वाला)

. श्लोकानुसारं रिक्तस्थानानि उचितैः शब्दैः पूरयत

(श्लोक के अनुसार रिक्त स्थानों को उचित शब्दों से भरें।)


() भीता पतनभेदाभ्यां तद्वद् वर्णान् प्रयोजयेत्।

(श्लोक के अनुसार, बाघिन के बच्चों को संभालने का डर और सावधानी वर्णों के प्रयोग में भी लागू होती है।)

() माधुर्यमक्षरव्यक्तिः पदच्छेदस्तु सुस्वरः धैर्यं लयसमर्थं षडेते पाठका गुणाः।

(श्लोक के अनुसार, पहले पाँच गुणमधुरता, स्पष्टता, शब्द-विभाजन, सुस्वर, धैर्यलय के साथ पढ़ने से पहले आते हैं।)

() गीती शीघ्री शिरःकम्पी तथा लिखितपाठकः।

(श्लोक के अनुसार, खराब पाठक के दोषों में सिर हिलाना अगला है।)

() एवं वर्णाः प्रयोक्तव्या नाव्यक्ता पीडिताः

(श्लोक के अनुसार, वर्ण अस्पष्ट और दबे-कुचले नहीं होने चाहिए।)

() स्वजनः श्वजनो माभूत् सकलं शकलं सकृत् शकृत्।

(श्लोक के अनुसार, गलत उच्चारण सेस्वजनकोश्वजनजैसे अर्थ बदल जाते हैं।)


. अधोलिखितानि वाक्यानि सत्यम् वा असत्यम् वा इति लिखत

(नीचे लिखे वाक्यों को सत्य है या असत्य है, यह लिखो।)


यथा पदच्छेदः पाठकानां गुणः अस्ति। सत्यम् / असत्यम्

सत्यम् (श्लोक में पदच्छेद को अच्छे पाठक का गुण माना गया है।)

() गानसहितपठनं पाठकानां दोषः भवति।

सत्यम् (श्लोक मेंगीतीको खराब पाठक का दोष बताया गया है।)

() माधुर्यं नाम अक्षराणाम् उच्चारणे स्पष्टता अस्ति।

असत्यम् (श्लोक में माधुर्यं मधुरता को दर्शाता है, स्पष्टता अक्षरव्यक्तिः है।)

() शकृत् नाम एकवारम् इति अर्थः अस्ति।

असत्यम् (श्लोक में शकृत् का अर्थ मल है, एकवारम् का अर्थ सकृत् है, जो गलत उच्चारण का उदाहरण है।)

() अव्यक्ताः वर्णाः प्रयोक्तव्याः भवन्ति।

असत्यम् (श्लोक में अस्पष्ट वर्णों के प्रयोग को निषेध किया गया है।)

() व्याघ्री यथा पुत्रान् हरति तथा वर्णान् प्रयोजयेत्।

सत्यम् (श्लोक में बाघिन के बच्चों को सावधानी से ले जाने की तुलना वर्णों के सही प्रयोग से की गई है।)


वर्णोच्चारण-शिक्षा


(अक्षरों का उच्चारण-अभ्यास )

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अभ्यासात् जायते सिद्धिः


. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन द्विपदेन वा उत्तरत

(नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर एक शब्द या दो शब्दों में दीजिए।)


() उरसि किं तन्त्रं भवति? (छाती में कौन-सी प्रणाली होती है?)

उत्तर वायुबलतन्त्रम्। (वायु-बल प्रणाली।)

() नाभिप्रदेशे स्थिताः मांसपेश्यः किं नोदयन्ति? (नाभि क्षेत्र में स्थित मांसपेशियाँ किसे प्रेरित करती हैं?)

उत्तर श्वासप्रवृत्तिम्। (श्वसन की प्रक्रिया।)

() आस्यस्य आभ्यन्तरे वार्णानाम् उत्पत्त्यर्थं द्वितीयं तत्त्वं किम् अस्ति? (मुँह के अंदर वर्णों की उत्पत्ति के लिए दूसरा तत्त्व क्या है?)

उत्तर करणम्। (करण (उच्चारण का साधन))

() आस्ये कति स्थानानि सन्ति? (मुँह में कितने उच्चारण स्थान होते हैं?)

उत्तर षट् स्थानानि। (छह स्थान।)

() स्थानस्य कार्यनिदर्शनार्थं किं समुचितम् उदाहरणम् अस्ति? (उच्चारण-स्थान के कार्य को समझाने के लिए कौन-सा उपयुक्त उदाहरण है?)

उत्तर मुरली। (बांसुरी।)

() करणानि मुरल्याः कस्य भागम् इव व्यवहरन्ति? (मुरली में करण किस भाग के समान कार्य करते हैं?)

उत्तर अङ्गुलीभागस्य। (अंगुलियों के भाग के समान।)


. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत।

(नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्यों में लिखिए।)


() करणं किं भवति? (करण क्या होता है?)

उत्तरम् करणं तदङ्गं भवति, यत् वर्णस्य उच्चारणसमये स्थानं स्पृशति वा समीपं याति। (करण वह अंग होता है, जो वर्ण के उच्चारण के समय स्थान को स्पर्श करता है या उसके समीप पहुँचता है।)

() उरः श्वासकोशस्थितं वायुं कुत्र निःसारयति? (छाती (उरः) फेफड़ों में स्थित वायु को कहाँ बाहर निकालती है?)


उत्तरम् उरः श्वासकोशे स्थितं वायुं ऊर्ध्वं निःसारयति। (छाती फेफड़ों में स्थित वायु को ऊपर की ओर बाहर निकालती है।)

() मुरल्याः अङ्गुलिच्छिद्राणि कीदृशं व्यवहरन्ति? (बांसुरी के छिद्र किस प्रकार कार्य करते हैं?)

उत्तरम् मुरल्याः अङ्गुलिच्छिद्राणि आस्यस्य स्थानानि इव व्यवहरन्ति। (बांसुरी के छिद्र मुँह के उच्चारण स्थानों की तरह कार्य करते हैं।)

() केषां वर्णानाम् उच्चारणे जिह्वा प्रायः निष्क्रिया भवति? (किन वर्णों के उच्चारण में जीभ प्रायः निष्क्रिय रहती है?)

उत्तरम् कण्ठ्यानां, ओष्ठ्यानां, नासिक्यानां वर्णानाम् उच्चारणे जिह्वा प्रायः निष्क्रिया भवति। (गले का, होठों का, नासिका का वर्णों के उच्चारण में जीभ प्रायः निष्क्रिय रहती है।)

() तालव्यानां, मूर्धन्यानां, दन्त्यानां वर्णानाम् उच्चारणार्थं सामान्यं करणं किम् अस्ति? (तालव्य, मूर्धन्य और दन्त्य वर्णों के उच्चारण में सामान्य करण क्या होता है?)

उत्तरम् तालव्यानां, मूर्धन्यानां, दन्त्यानां वर्णानाम् उच्चारणार्थं सामान्यं करणं जिह्वा भवति। (तालव्य, मूर्धन्य और दन्त्य वर्णों के उच्चारण के लिए सामान्य करणजीभहोती है।)

() कण्ठ्यानां, ओष्ठ्यानां, नासिक्यानां वर्णानाम् उच्चारणार्थं स्थानस्य करणस्य मध्ये किं भवति? (कण्ठ्य, ओष्ठ्य और नासिक्य वर्णों के उच्चारण में स्थान और करण के बीच क्या संबंध होता है?)

उत्तरम् कण्ठ्यानां, ओष्ठ्यानां, नासिक्यानां वर्णानाम् उच्चारणे स्थानमेव करणं भवति। (कण्ठ्य, ओष्ठ्य और नासिक्य वर्णों के उच्चारण में स्थान ही करण के रूप में कार्य करता है।)


. अधोलिखितेषु वाक्येषु आम् / इति लिखित्वा उचितभावं सूचयत

(नीचे दिए गए वाक्यों में सही भाव को दर्शाने के लिएहाँयानहींलिखें।)


() श्वासकोशस्थितः वायुः ऊर्ध्वं चरन् पूर्वम् आस्यं प्राप्नोति।

हिन्दी फेफड़ों में स्थित वायु ऊपर चढ़ते हुए पहले मुँह में पहुँचती है।
उत्तरम्


() सर्वप्रथमं नाभि-प्रदेशे स्थिताः मांसपेश्याः कण्ठं नोदयन्ति।


हिन्दी सबसे पहले नाभि क्षेत्र की मांसपेशियाँ कण्ठ को उठाती हैं।
उत्तरम्

() आस्यस्य आभ्यन्तरे वर्णानाम् उत्पत्त्यर्थम् आभ्यन्तर-प्रयत्नः आवश्यकम् अस्ति।

हिन्दी मुँह के अंदर वर्णों की उत्पत्ति के लिए आंतरिक प्रयत्न आवश्यक होता है।
उत्तरम् आम्

() तालव्य-वर्णनाम् उच्चारणार्थं दन्तः स्थानं स्पृशति।

हिन्दी तालव्य वर्णों के उच्चारण के लिए दाँत स्थान को स्पर्श करता है।
उत्तरम्

() मूर्धन्यानां वर्णानाम् उच्चारणार्थं जिह्वा स्थानं स्पृशति।

हिन्दी मूर्धन्य वर्णों के उच्चारण के लिए जीभ स्थान को स्पर्श करती है।
उत्तरम् आम्

() तत्तत्स्थानस्य एव कश्चित् पूर्वभागः, तत्तत्स्थानस्य परभागं स्पृशति।

हिन्दी हर उच्चारण स्थान का ही कोई अगला भाग उसी स्थान के पिछले भाग को स्पर्श करता है।
उत्तरम् आम्


. मुखे उपलभ्यमानानि स्थानानि बहिष्ठात् अन्तः यथाक्रमं (अर्थात् विपरीतक्रमेण) लिखन्तु

(नीचे दिए गए वाक्यों में सही भाव को दर्शाने के लिएहाँयानहींलिखें।)


() मूर्धा तालुकण्ठः

हिन्दी मूर्धा के बाद तालु, फिर कण्ठ आता है।

() दन्तः मूर्धातालुकण्ठः

हिन्दी दाँत के बाद मूर्धा, फिर तालु, फिर कण्ठ।

() तालु कण्ठः

हिन्दी तालु के बाद कण्ठ।

() कण्ठः – (मुँह का सबसे अंदरूनी उच्चारण स्थान)

हिन्दी कण्ठयह सबसे भीतर का उच्चारण स्थान है।

() ओष्ठःदन्तःमूर्धातालुकण्ठः

हिन्दी होंठ के बाद दाँत, फिर मूर्धा, फिर तालु और अंत में कण्ठ।


. यथायोग्यं मेलनं कुरुत

(उचित मेल करें।)

सामान्य-स्थानम्

विशेष-स्थानम्

सामान्य-करणम्

विशेष-करणम्

ओष्ठः

उत्तरोष्ठः

स्वस्थानं करणम्

अधरोष्ठः

दन्तः

दन्तः

जिह्वा करणम्

जिह्वाग्रः

नासिका

नासिकामूलस्य उपरिभागः

स्वस्थानं करणम्

जिह्वामध्यः

कण्ठः

कण्ठस्य पृष्ठभागः

जिह्वा करणम्

कण्ठस्य पृष्ठभागः

मूर्धा

मूर्धा

स्वस्थानं करणम्

नासिकामूलस्य अधोभागः

तालु

तालु

जिह्वा करणम्

जिह्वोपाग्रः

 


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