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                              केन्द्रीयविद्यालयसंगठनम्, चेन्नै संभागः

प्रथमसत्रीया परीक्षा

                       (बहुविकल्पात्मकम्) 2021-2022


कक्ष्यादशमी (X)                                           संस्कृतम्  (कोड 122)

समयःसार्धैकहोराः (1½ होराः)                     सम्पूर्णाङ्काः – 40


अनुप्रयुक्तव्याकरणम्

अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदस्य सन्धिपदं सन्धिच्छेदपदं वा चिनुत- (केवलं प्रश्नचतुष्टयम्

1. शत्रो अपि शिर: + छेद करणीयः।

   () शिरश्चेदः           () शिरछेदः           () शिरोच्छेदः            () शिराछेद

2. आकाश: मेधैः आच्छनः आसीत्।

   () आच् + छन्न:     () आन्छन्न:       () आत् + छन्न:         () आद + छत्र:

3. हे कल्याणि! सर्वदा सत्+मार्गम् अनुसरतु।

   () सन्मार्गम्          () सत्मार्गम्          () सनमार्गम्              () सममार्गम्

4. अयोग्यः पुरुषः नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः।

   () योजक + तत्र    () योजकः + तत्र   () योजकस् + तत्र       () योजका + तत्र

5. इदं विशालं भो + अनम् अस्ति।

   () भोनम्             () भवनम्            () भुवनम्                 () भेवनम्


अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां समासं विग्रहं वा प्रदत्तविकल्पेभ्यः चिनुत-(केवलं प्रश्नचतुष्टयम्) (1x4=4)

6. सर्वोषामेव मत्कृते महत्त्वं विद्यते समयम् अनतिक्रम्य

   () यथासमयम्        () यथासमयः        () उपसमयम्         () अनुसमयम्

7. वानरः सिंहस्य कर्णमाकृष्य पुनः वृक्षोपरि आरोहति

   () वृक्ष उपरि          () वृक्षस्य उपरि।    () वृक्षे उपरि          () वृक्षा उपरि

8. प्रकृतिमाता (सस्नेहम्)-भोः भोः प्राणिनः! यूयं सर्वे एव मे सन्ततिः।

   () स्नेहस्य सहितम्    () स्नेहेन सहितम्    () स्नेहस्य अभावः   () स्नेह अनतिक्रम्य

9. वाक्पटुः केनापि प्रकारेण परैर्न परिभूयते।

   () वाचः पुटः           () वाक्पटुः           () वाचि पटुः          () वचे पटु:

10. कुशलवौ रामम् प्रणमतः।

  () कुश: लव:     () कुश: लवौ     () कुशम् लव:       () लव: कुश:



अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां प्रकृति-प्रत्ययौ संयोज्य विभज्य वा उचितम् उत्तरं विकल्पेभ्यः चिनुत- (केवलं प्रश्नचतुष्टयम्)

11. विद्वांसः एव लोकेऽस्मिन् चक्षुष्मन्तः प्रकीर्तिताः

     () चक्षुस् + मतुप       () चक्षुष् + मतुप्       () चक्षुः + मतुत्       (चक्ष + मतु

12. विचित्रा दैवगतिः।

     () विचित्र - टाप्        () विचित्र + ङीप्       () विचित्र + त्व        () विचित्र + ल्यप्

13. जम्बुक:-स्वामिन् ! यत्रास्ते सा धूर्ता तत्र गम्यताम्।

     () धूर्त + तल्           () धूर्त + टाप्            () धूर्त + त्व            () धूर्ता + क्यप्

14. तस्य भार्या बुद्धि + मतुप् पुत्रद्वयोपेता पितुर्गृहं प्रति चलिता।

     () बुद्धिमान्             () बुद्धिमती             () बुद्धिमत्              () बुद्धित्वा

15. सर्वोषामेव मत्कृते महत् + त्व विद्यते।

     () महत्ता                 () महतवम्              () महत्त्वम्              () महतम्


वाच्यस्य नियमानुगुणम् उचितं विकल्पं चिनुत। (केवलं प्रश्नत्रयम्)

 16. आदित्यः - अभिनव किं ............. क्रीडितुं गच्छसि?

     () त्वया             () त्वम्             () अहम्           () आवाम्

17. अभिनवः - , मया तु स्वपाठः ..............

     () पठ्यते           () पठामि          () पठ्यसे         () पाठ्यम्

18.अभिनव:- , .............. तु गणितस्य अभ्यासः क्रियते।

     () त्वया             () अहम्           () मया             () त्व

19. आदित्य:-शोभनम् ! त्वं ............ अपि लिखसि किम्?

     () निबन्धः          () निबन्धम्।      () निबन्धेन।       () निबंधा


प्रदत्तेभ्यः विकल्पेभ्यः समुचितं कालबोधकशब्दं चिनुत - (केवलं प्रश्नचतुष्टयम्)

20. अहं मध्याह्ने ----------------------------  (12:15) भोजनं करोमि।

          () सपाद-द्वादशवादने () सार्ध- द्वादशवादने

() पादोन-द्वादशवादने () पादोनएकवादने

21.  अद्य सायं  -------------------(5:00) प्रधानमन्त्री देशवासिनः संबोधयति।।

() पञ्चवादने           () अष्टवादने

() सार्ध-पञ्चवादने () सपादपञ्चवादने

22.  अद्य अहं सायं ------------------ (7:30) मम मित्रस्य गृहं गमिष्यामि।

() सपादसप्तवादने () सप्तवादने

(सार्ध-सप्तवादने () पादोनसप्तवादने

23. अहं प्रातः ---------------- (4:30) शयानात् उत्तिष्ठामि।

          () सार्ध-चतुर्वादने                    () सपाद-चतुर्वदने  

          () पादोन-चतुर्वादने                   () चतुर्वादने

24. राजधानीएक्स्प्रेस् इति  रेलयानं चेन्नैतः सायं --------------- (8:45) गच्छति। 

    () सार्ध-अष्टवादन.    () पादोन- नववादने    () सपादअष्टवादने.    (अष्टवादने

वाक्यानुगुणम् उचितम् अव्ययपदं चिनुत- 1x3=3  (केवलं प्रश्नत्रयम्)

25. ............ छात्रा: पादपान् सिञ्चन्ति।

    () श्व:              () ह्यः               () इदानीम               () अत्र

26. दुर्वहम् .............. जीवितं जातम्।

    () तत्र             () अत्र               () अन्यत्र                () कुत्र

27. निर्जनस्थाने रोदनं ............. भवति  

    () श्व:             () वृथा               () एव                    () शनैः

28. .............. गणितस्य परीक्षा अभवत्।

    () उच्चैः          () शनै:               () ह्यः                    () एव


अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदम् अशुद्धम् अस्ति। शुद्धं पदं विकल्पेभ्यः चिनुत- 1x3=3 (केवलं प्रश्नत्रयम्)

29. भवान् फलं खाद

    () खादसि             () खादन्तु          () खादत          () खादन्ति

30. वृक्षाणि हरिता: सन्ति।

    () वृक्षान्               () वृक्षाः            () वृक्षौ             () वृक्षे

31. : ग्रामं गच्छन्ति

    () गच्छसि             () गच्छतः          () गच्छति         () गच्छन्ति

32. आनन्दः ह्यः आगमिष्यति

    () आगच्छत्           () आगच्छति      () आगच्छन्      () आगच्छ


पठितावबोधनम्

रेखाङ्कितपदानि आधृत्य समुचितं प्रश्नवाचकपदं चिनुत 1x5=5 (केवलं प्रश्नपञ्चकम्)

33. महानगरेषु वाहनानाम् अनन्ताः पङ्क्तयः धावन्ति।

    () कस्य               () कुत्र             () केषाम्            () कया

34. बुद्धिमती चपेटया पुत्रौ प्रहतवती।

    () का                  () कदा             () कया             () कुत्र

35. मयूरस्य नृत्यं प्रकृतेः आराधना अस्ति।

    () का:                 () कस्य            () :                () के

36. सुराधिपः ताम् अपृच्छत्।

    () कः                 () किम्              () का               () कस्य

37. करुणापरो गृही तस्मै आश्रयं प्रायच्छत्।

    () कस्मै               () कस्यै             () कै:               () केन

38. पुरा त्वया मह्यं व्याघ्रत्रयं दत्तम्

    () केन                () कस्मै             () कस्य             () का:

अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां  प्रसङ्गानुकूलम् उचितार्थम् चिनुत -1x4=4 (केवलं प्रश्नचतुष्टयम्)

39 नवमालिका रसालं मिलिता।

    () वनम्            () आम्रम्              () वृक्षम्            () पत्रम्

40 राजपुत्रस्य भार्या पुत्रद्वयोपेता पितृगृहं प्रति चलिता।

    () माता           () सखी                 () पत्नि             () भाई

41. वृषः जवेन गन्तुम् अशक्तः आसीत्।

    () तीव्रगत्या     () 'जव' इति अन्नैन    () मन्दं मन्दम्      () शीघ्रम् शीघ्रम्

42.करी सिंहस्य बलं जानाति।

     () करः          () सिंहः                  () गजः             () बलं

43. मां निजगले बद्ध्वा चल सत्वरम्

    () मन्दम्         () शीघ्रम्.                () शनैः             () चल


10. भाषिककार्यसंबद्धानां प्रश्नानां समुचितम् उत्तरं विकल्पेभ्यः चिनुत-1x6=6  (केवलं प्रश्नषट्कम्)

44. पिता यच्छति पुत्राय बाल्ये विद्याधनं महत्" अत्र विशेषणपदं किम्?

     () पिता              () महत्             () विद्याधनम्            () यच्छति

45. "तस्य मृतशरीरं राजमार्ग निकषा वर्तते" अत्र 'निकटे' इत्यर्थे किं पदं दत्तम्?

     () राजमार्गम्        () मृतशरीरम्       () निकषा              () वर्तते

46. 'निरपराधम्' इत्यस्य किं पर्यायपदं अस्ति?

     () दोषभाजनम्      () निर्दोषम्          () सदोषम्            () दोषम्

47. 'सा व्याघ्रमागच्छन्तं दृष्ट्वा जगाद' इत्यत्र किं सर्वनाम पदं प्रयुक्तम्?

     () सा                 () जगाद             (स्) व्याघ्रम्             () दृष्ट्वा

48. 'प्रथमः धर्मः' अनयोः पदयोः किं विशेष्यपदम्?

     () धर्मः               () वचः               () विशेषतः           () कर्म:

49. 'कथनम्' इत्यस्य पदस्य : पर्यायः प्रयुक्तः?

     () धर्म:              () वचः                () सदा                () कर्म:

50. 'मूर्खाणां' इत्यस्य किं विलोमपदं प्रयुक्तम्?

     () वचः.              () इति                () विदुषाम्            () पटु:



SET- A

कक्षा – X  संस्कृतम् ( कोड – 122 )

सामान्यनिर्देशा :- 

  • कृपया सम्यक्तया परीक्षणं कुर्वन्तु यत् अस्मिन् प्रश्नपत्रे 4 पृष्ठानि सन्ति
  • कृपया सम्यक्तया परीक्षणं कुर्वन्तु यत् अस्मिन् प्रश्नपत्रे 10 प्रश्ना: सन्ति |
  • उत्तरलेखनत् पूर्वं प्रश्नस्य क्रमांक: अवश्यं लेखनीय: |
  • प्रश्नसंख्या प्रश्नप्रानुसारम् एव लेखनीया |
  • सर्वेषां प्रशनानाम् उत्तराणि संस्कृतेन एव लेखनीयानि |
  • प्रश्नानां निर्देशा: ध्यानेन अवश्यं पठनीया: | 

* अपठित अवबोधनम् *

प्र. अधोलिखित - गद्यांशं पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतेन लिखत –       5

   अद्यत्वे यत्र तत्र सर्वत्र वयं पश्यामः यत् उष्णतायाः प्रभावः दिनानुदिनं वर्धते। जनसङ्ख्यावृद्धेः कारणात् भवनानां निर्माणस्य आवश्यकता भवति एतस्मात् कारणात् वृक्षाः कर्त्यन्ते, वनानि क्षेत्राणि चाऽपि विनाश्यन्ते, अनेन पर्यावरणे असन्तुलनात् वैश्विकी उष्णता वर्धते जीवाश्म इन्धनस्य ज्वालनेन विषाक्तवायूनाम् उत्सर्जने वृद्धिर्जायते यतः सौरविकिरणं भूमेः वातावरणे निबद्ध इव तिष्ठति, तापमानं निरन्तरं वर्धमानम् एव अस्ति एतादृश्याः स्थितेः निराकरणाय अनियन्त्रितम् औद्योगीकरण निवारणीयम् एतदेव वस्तुत: सम्पूर्ण विश्वस्य कृते समस्याम् उत्पादयति अतः सर्वैः मिलित्वैव स्थितेः संशोधनाय प्रयासः करणीयः एतदर्थम् नेत्रयोः ऊर्जार्थम् उपायान्वेषणं करणीयं, सामान्यविद्युदपेक्षया पवनोर्जसं, सौरोजसं प्रति ध्यान दातव्यम्। वृक्षकर्तनमवरुध्य अधिकाधिकं वृक्षारोपणं कृत्वा वनसंरक्षणं प्रत्यपि ध्यानं दातव्यम्

() कस्मात् कारणात् भवनानां निर्माणस्य आवश्यकता भवति ?

() कस्य ज्वालनेन विषाक्तवायूनाम् उत्सर्जने वृद्धिर्जायते ?

() कीदृशम् औद्योगीकरण निवारणीयम् ?

() वृक्षारोपणं कृत्वा किं प्रत्यपि ध्यानं दातव्यम् ?

() उपरिलिखितस्य अनुच्छेदस्य कृते उचितं शीर्षकं लिखत ?

प्र अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रदत्त - प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत –            5 

  अस्ति देउलाख्यो ग्रामः तत्र राजसिंहः नाम राजपुत्रः वसति स्म एकदा केनापि आवश्यककार्येण तस्य भार्या बुद्धिमती पुत्रद्वयोपेता पितुर्गृहं प्रति चलिता मार्गे गहनकानने सा एकं व्याघ्रं ददर्श सा व्याघ्रमागच्छन्तं दृष्ट्वा धाष्ट्र्यात् पुत्रौ चपेटया प्रहृत्य जगाद-“कथमेकैकशो व्याघ्रभक्षणाय कलहं कुरुथः ? अयमेकस्तावद्विभज्य भुज्यताम् पश्चाद् अन्यो द्वितीयः कश्चिल्लक्ष्यते

) एकपदेन उत्तरत                ( केवलं प्रश्न द्वयम् एव )

1. सा बुद्धिमती कुत्र एकं व्याघ्रं ददर्श ?

2. बुद्धिमती पुत्रद्वयोपेता कुत्र चालिता ?

3. ग्रामस्य नाम किमस्ति ?

) पूर्णवाक्येन उत्तरत             ( केवलं प्रश्न एकम् एव )

1. सा पुत्रौ-चपेटया प्रहत्य किम् जगाद ( अवदात् ) ?

2. एकदा तस्य भार्या कि प्रति चलिता ?

) भाषिककार्यम्                 ( केवलं प्रश्न द्वयम् एव )

1.भार्या इतिपदस्य विशेषणपदं किम् ?

) चलिता         ) प्रहृत्य     ) गहन      ) बुद्धिमती   

2.गच्छन्तम् इति क्रियापदस्य विलोमपदं गद्यांशे किम् अस्ति ?

) आगच्छन्तम्    ) प्रहृत्य     ) कुरुथः     ) ददर्श   

3. अनुच्छेदे राजपुत्रः इति कर्तृपदस्य क्रियापदं किम् ?

) वसति         ) चलिता     ददर्श     कुरुथः   

प्र पद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत –                            5 

कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति शतशकटीयानम्
वाष्ययानमाला संधावति वितरन्ती ध्वानम्
यानानां पङ्क्तयो ह्यनन्ताः कठिनं संसरणम् शुचि

) एकपदेन उत्तरत                  ( केवलं प्रश्न द्वयम् एव )

1. किम् कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति ?

2. का ध्वानं वितरन्ती संधावति ?

3. वाष्पयानमाला किं वितरन्ती अस्ति ?

) पूर्णवाक्येन उत्तरत                     ( केवलं प्रश्न एकम् एव )

1. संसरणम् कठिनम् किमर्थम् भवति ?

2. शतशकटीयानम् किं करोति ?

भाषिककार्यम्                          ( केवलं प्रश्न द्वयम् एव )             1.शतशकटीयानम् कर्तृपदस्य क्रियापदं किम् ?

) चलिता    ) संधावति   ) मुञ्चति    ) वितरन्ती   

2. ‘अनन्ताः इति पदस्य विशेष्यपदं किम् ?

) पङ्क्तय) मलिनम्   ) ध्वानम्    ) ध्वानम् 

3. श्लोके सरलम् इति पदस्य किं विलोमपदं अस्ति ?

) धूमम्   ) मलिनम्   ) कठिनम्     ) ध्वानम् 

प्र योग्यपर्यायं चित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत – ( केवलं प्रश्न पञ्च एव )  5 

1.  व्याघ्रः केन सहितं पुनः आगच्छत् ?

) बालकेन     ) शृगालेन    ) मृगेण   ) गजेन 

2.  भामिनी कया विमुक्ता ?

) याचनया   ) निजबुद्ध्या  ) निवेद्य     ) स्वशक्त्या   

3. अहं कस्मै जीवनं कामये ?

) ज्ञानाय     ) उद्योगाय       ) राष्ट्राय     ) मानवाय  

4. सर्वदा सर्वकार्येषु का बलवती ?

) चपेटिका      ) नदी        ) बुद्धि:     ) महिला  

5. अत्र जीवितं कीदृशं जातम् ? 

) आनन्दायकम्       ) दुर्वहम्         ) सुखकरम्     ) भयानकम् 

6. चक्रम् सदा कथं  भ्रमति ?

) वेगेन       ) मन्दम्     ) वक्रम्   ) इतस्तत:   

प्र उचिताव्ययपदैः सह रिक्तस्थानानि पूरयत-                      5 

    यत्रतत्र ,   यथातथायदितर्हि , यावत्तावत् , यदातदा ,

() _________ पिता कार्यालयात् आगच्छति _________ पुत्री भोजनं करोति
() _________ मेघा: गर्जन्ति _________ मयूर: नृत्यति |
() _________ गुरुः वदति _________ शिष्यः करोति
() _________ वृक्षाः सन्ति  _________ खगाः सन्ति
() _________ आरोग्यं इच्छाति _________  योगाभ्यासं करोतु

प्र अधोलिखित कथनेषु रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं क्रियाताम्-      5 

1. उद्याने पक्षिणां कलरवं चेतः प्रसादयति

2. कविः मानवस्य जीवनस्य कामनां करोति

3. पुरा त्वया मह्यम् त्रय: व्याघ्रा: अयच्छत् 

4. व्याघ्रः शृगालेन सहितं पुनः आगच्छत्

5. व्याघ्रं दृष्ट्वा धूर्तः शृगालः अवदत्

प्र अधोलिखितानां पदानां मञ्जूषात: पर्यायपदं चित्वा लिखत-               3 

           भार्या , तनु: ,   प्रस्तरम् ,     जलम् ,    जम्बुक: ,    रसालम्  

  1. सलिलम् ............ ) आम्रम् ............ ) शरीरम् ...............
  1. पत्नी ..............   ) शृगाल: .............) पाषाणम् ...........

प्र अधोलिखितानां पदानां मञ्जूषात: विलोमपदं चित्वा लिखत-               3 

          तदा ,    दुर्वहम् ,   बुद्धिमती ,   शुचि ,   हानि: , समलम्

  1. सुकरम् ...........      ) दूषितम् ............  ) निर्मलम् ...............
  1. बुद्धिहीना ............... ) अधुना .............   ) लाभ: ..................

प्र   सन्धि / सन्धिविच्छेदं कुरुत –                                  2 

1. एकैक: इत्यस्य विच्छेदं कुरुत ?

) एक + ऐक , ) ऐक + ऐक) एक + एक) एक + कैक 

2. यत्र + आस्ते  सन्धिं कुरुत ?

) यात्रास्ते  , ) यत्रास्ते  ,  ) यत्रएस्ते  ,  ) यत्रआस्ते  

3. यदि + अपि सन्धिं कुरुत ? 

) यद्यपि ,   ) यदपि ,     ) यदापि ,    ) यद्यैपि  

4. गै + अकः सन्धिं कुरुत ?

) गैक: ,   ) गायक: ,     ) गायेक: ,    ) गैअक:  

प्र १० अधोलिखितवाक्येषु उदाहरणानुसारं समयबोधकेषु पदेषु रिक्तस्थानानि पूरयत-    2 

() राहुलः प्रात: भ्रमणाय ___________ (6:15) वादने उद्यानं गच्छति
() राधा ___________ (7:30) वादने प्रातराशं करोति
() महेश: ___________ (5:45) वादने क्रीडति
() सर्वे ___________ (10:00) वादने शयनं कुर्वन्ति

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SET- B

कक्षा – X  संस्कृतम् ( कोड – 122 )

सामान्यनिर्देशा :- 

  • कृपया सम्यक्तया परीक्षणं कुर्वन्तु यत् अस्मिन् प्रश्नपत्रे 4 पृष्ठानि सन्ति
  • कृपया सम्यक्तया परीक्षणं कुर्वन्तु यत् अस्मिन् प्रश्नपत्रे 10 प्रश्ना: सन्ति |
  • उत्तरलेखनत् पूर्वं प्रश्नस्य क्रमांक`: अवश्यं लेखनीय: |
  • प्रश्नसंख्या प्रश्नप्रानुसारम् एव लेखनीया |
  • सर्वेषां प्रशनानाम् उत्तराणि संस्कृतेन एव लेखनीयानि |
  • प्रश्नानां निर्देशा: ध्यानेन अवश्यं पठनीया: | 

* अपठित अवबोधनम् *

प्र. अधोलिखित - गद्यांशं पठित्वा प्रदत्तप्रश्नानाम् उत्तराणि संस्कृतेन लिखत –       5

   एक: अतिदुष्टः वानरः आसीत् प्रतिदिनं सः यथाशक्ति वृक्षे स्थितान् पक्षिणः तुदति स्म उपनीडं गत्वा तेषां श्रमस्य उपहासं करोति स्म एकः पक्षी अवदत्- भो किमर्थम् उपहससि ? अनुवृष्टि नीडम् एव अस्मान् रक्षति वयं परिश्रमं कुर्मः, निर्विघ्नं जीवामः वानरः साट्टहासम् अवदत्मूर्खाः यूयम् अरे ! योगिनां कुतः गृहम् ?’ एवं कथयित्वा तेन दुष्टेन पक्षिणाम् नीडानि भग्नानि एकः पक्षी अवदत्- ‘योगिनः प्रतिजीवम् उपकारमेव कुर्वन्ति किम् इदम् अनुरूपम् साधुजनस्य ? ’इदं कार्यं कृत्वा त्वं असाधुः निर्लज्जः इव प्रतिभासि संसारे कर्मणामेव महत्त्वं वर्तते तु रूपस्य उत्तमं रूपं तु धृत्वा असाधवः राक्षसाः जनान् तुदन्ति पीडयन्ति वा तव कायम् एव तव लक्षणं वर्तते

() पक्षिणः कः तुदति स्म ?

(अनुवृष्टि किं खगान् रक्षति ?

() वानरेण केषां नीडानि भग्नानि ?

() संसारे केषाम् महत्वम् अस्ति ?

() उपरिलिखितस्य अनुच्छेदस्य कृते उचितं शीर्षकं लिखत ?

प्र अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रदत्त - प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत –            5 

   जम्बुक: - स्वामिन् ! यत्रास्ते सा धूर्ता तत्र व्याघ्रात् कथं मुच्यताम् व्याघ्र ! तव पुनः तत्र गतस्य सा सम्मुखमपीक्षते यदि, तर्हि त्वया अहं हन्तव्य: इति
व्याघ्रः - शृगाल ! यदि त्वं मां मुक्त्वा यासि तदा वेलाप्यवेला स्यात्
जम्बुक: - यदि एवं तर्हि मां निजगले बद्ध्वा चल सत्वरम् व्याघ्रः तथाकृत्वा काननं ययौ | शृगालेन सहितं पुनरायान्तं व्याघ्रं दूरात् दृष्ट्वा बुद्धिमती चिन्तितवती-जम्बुककृतोत्साहाद् व्याघ्रात् कथं मुच्यताम् ? परं प्रत्युत्पन्नमतिः सा जम्बुकमाक्षिपन्तयङ्गुल्या तर्जयन्त्युवाच-
रे रे धूर्त त्वया दत्तं मह्यं व्याघ्रत्रयं पुरा
विश्वास्याद्यैकमानीय कथं यासि वदाधुना ।।

) एकपदेन उत्तरत                ( केवलं प्रश्न द्वयम् एव )

1. व्याघ्रजम्बुकौ कुत्र ययौ ?

2. यदि त्वं मां मुक्त्वा यासि तदा का स्यात् ?

3. त्वया पुरा मह्यं कति व्याघ्रा: दत्ता: इति बुद्धिमती वदति ?

) पूर्णवाक्येन उत्तरत             ( केवलं प्रश्न एकम् एव )

1. तव पुनः तत्र गतस्य सा सम्मुखमपीक्षते यदि, तर्हि किं करोतु इति शृगाल: वदति ?

2. शृगालेन सहितं पुनरायान्तं व्याघ्रं दूरात् दृष्ट्वा बुद्धिमती किं चिन्तितवती ?

) भाषिककार्यम्                 ( केवलं प्रश्न द्वयम् एव )

1.सा इति सर्वनापदस्य विशेषणपदं किम् ?

) धूर्ता        ) निजगले      ) बद्ध्वा       ) पुरा  

2.त्याज्यताम् इति क्रियापदस्य विलोमपदं गद्यांशे किम् अस्ति ?

) व्याघ्रात्     ) कथं          ) मुच्यताम्     ) गम्यताम्   

3. अनुच्छेदे चिन्तितवती इति कर्तृपदस्य क्रियापदं किम् ?

) स्यात्       ) बुद्धिमती     ददर्श       कुरुथः   

प्र पद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत –                            5 

कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति शतशकटीयानम्
वाष्ययानमाला संधावति वितरन्ती ध्वानम् ||
यानानां पङ्क्तयो ह्यनन्ताः कठिनं संसरणम् शुचि

) एकपदेन उत्तरत                  ( केवलं प्रश्न द्वयम् एव )

1. किम् कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति ?

2. का ध्वानं वितरन्ती संधावति ?

3. वाष्पयानमाला किं वितरन्ती अस्ति ?

) पूर्णवाक्येन उत्तरत                     ( केवलं प्रश्न एकम् एव )

1. संसरणम् कठिनम् किमर्थम् भवति ?

2. शतशकटीयानम् किं करोति ?

भाषिककार्यम्                          ( केवलं प्रश्न द्वयम् एव )             1.शतशकटीयानम् कर्तृपदस्य क्रियापदं किम् ?

) चलिता    ) संधावति   ) मुञ्चति    ) वितरन्ती   

2. ‘अनन्ताः इति पदस्य विशेष्यपदं किम् ?

) पङ्क्तय) मलिनम्   ) ध्वानम्    ) ध्वानम् 

3. श्लोके सरलम् इति पदस्य किं विलोमपदं अस्ति ?

) धूमम्   ) मलिनम्   ) कठिनम्     ) ध्वानम् 

प्र योग्यपर्यायं चित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत – ( केवलं प्रश्न पञ्च एव )  5 

1.  व्याघ्रः केन सहितं पुनः आगच्छत् ?

) बालकेन     ) शृगालेन    ) मृगेण   ) गजेन 

2.  भामिनी कया विमुक्ता ?

) याचनया   ) निजबुद्ध्या  ) निवेद्य     ) स्वशक्त्या   

3. अहं कस्मै जीवनं कामये ?

) ज्ञानाय     ) उद्योगाय       ) राष्ट्राय     ) मानवाय  

4. सर्वदा सर्वकार्येषु का बलवती ?

) चपेटिका      ) नदी        ) बुद्धि:     ) महिला  

5. अत्र जीवितं कीदृशं जातम् ? 

) आनन्दायकम्       ) दुर्वहम्         ) सुखकरम्     ) भयानकम् 

6. चक्रम् सदा कथं  भ्रमति ?

) वेगेन       ) मन्दम्     ) वक्रम्   ) इतस्तत:   

प्र उचिताव्ययपदैः सह रिक्तस्थानानि पूरयत-                      5 

    यत्रतत्र ,   यथातथायदितर्हि , यावत्तावत् , यदातदा ,

() _________ पिता कार्यालयात् आगच्छति _________ पुत्री भोजनं करोति
() _________ मेघा: गर्जन्ति _________ मयूर: नृत्यति |
() _________ गुरुः वदति _________ शिष्यः करोति
() _________ वृक्षाः सन्ति  _________ खगाः सन्ति
() _________ आरोग्यं इच्छाति _________  योगाभ्यासं करोतु

प्र अधोलिखित कथनेषु रेखांकितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं क्रियाताम्-      5 

1. उद्याने पक्षिणां कलरवं चेतः प्रसादयति

2. कविः मानवस्य जीवनस्य कामनां करोति

3. पुरा त्वया मह्यम् त्रय: व्याघ्रा: अयच्छत् 

4. व्याघ्रः शृगालेन सहितं पुनः आगच्छत्

5. व्याघ्रं दृष्ट्वा धूर्तः शृगालः अवदत्

प्र अधोलिखितानां पदानां मञ्जूषात: पर्यायपदं चित्वा लिखत-               3 

           भार्या , तनु: ,   प्रस्तरम् ,     जलम् ,    जम्बुक: ,    रसालम्  

  1. सलिलम् ............ ) आम्रम् ............ ) शरीरम् ...............
  1. पत्नी ..............   ) शृगाल: .............) पाषाणम् ...........

प्र अधोलिखितानां पदानां मञ्जूषात: विलोमपदं चित्वा लिखत-               3 

          तदा ,    दुर्वहम् ,   बुद्धिमती ,   शुचि ,   हानि: , समलम्

  1. सुकरम् ...........      ) दूषितम् ............  ) निर्मलम् ...............
  1. बुद्धिहीना ............... ) अधुना .............   ) लाभ: ..................

प्र   सन्धि / सन्धिविच्छेदं कुरुत –                                  2 

1. एकैक: इत्यस्य विच्छेदं कुरुत ?

) एक + ऐक , ) ऐक + ऐक) एक + एक) एक + कैक 

2. यत्र + आस्ते  सन्धिं कुरुत ?

) यात्रास्ते  , ) यत्रास्ते  ,  ) यत्रएस्ते  ,  ) यत्रआस्ते  

3. यदि + अपि सन्धिं कुरुत ? 

) यद्यपि ,   ) यदपि ,     ) यदापि ,    ) यद्यैपि  

4. गै + अकः सन्धिं कुरुत ?

) गैक: ,   ) गायक: ,     ) गायेक: ,    ) गैअक:  

प्र १० अधोलिखितवाक्येषु उदाहरणानुसारं समयबोधकेषु पदेषु रिक्तस्थानानि पूरयत-    2 

() राहुलः प्रात: भ्रमणाय ___________ (5:15) वादने उद्यानं गच्छति
() राधा ___________ (7:30) वादने प्रातराशं करोति
() महेश: ___________ (6:45) वादने क्रीडति
() सर्वे ___________ (10:00) वादने शयनं कुर्वन्ति

************


                         केन्द्रीय विद्यालयसंगठनम् भुवनेश्वरसंभाग:

                                                      प्राक् द्वितीयसत्रपरीक्षा (द्वितीयः) 2021-22

                         कक्षा : दशमी                                                       विषयःसंस्कृतम्                    

                         समयः : सार्धैक होराः                                                    पूर्णांक - 40 अङ्काः


                                            अपठितावबोधनम् (10)अङ्काः 

प्रश्नः 1.  अधोलिखितं अपठित गद्यांशान् पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत

एकदा एकः राजा भोजनं वितरति स्म। राजपुरुषाः एकम् ऋषिकुमारं दृष्ट्वा अवदन्- भवान् अपि भोजनं करोतु। इयम् एव राजाज्ञा इति। सः तरुणः ऋषिकुमारः अवदत् - ' भोः ! अहं श्रमं कृत्वा एव भोजनं करोमि। ये जनाःवृद्धाः, असहायाः, तेभ्यः एव भोजनं प्रयच्छत् इति। ' एषः आसीत् रैक्वः ऋषिकुमारः राजा तस्य समीपं गत्वा ज्ञानार्जनम् अकरोत्। 

कालान्तरे एव ऋषिः तस्य नृपस्य दीक्षागुरुः अभवत् तस्मै ज्ञानं दत्त्वा  कृतार्थः अकरोत्। नृपः कृतज्ञताम् अनुभूय आजीवनं तम् असेवत। गुरुसेवया नृपस्य कीर्तिः चतुर्दिक् ज्योत्सनाम् इव प्रासरत्। 

(I) एकपदेन उत्तरत -               (केवलं प्रश्नद्वयम्)                                                1X2=2

() ऋषिकुमारः किं कृत्वा भोजनं करोति स्म

()राजा किं वितरति स्म?

(ऋषिकुमारस्य नाम किं आसीत् ?

पूर्णवाक्येन उत्तरत –                     (केवलं प्रश्नद्वयम्)                 (2×2=4)                                                                                                                                () ऋषिकुमारस्य समीपं गत्वा कः ज्ञानार्जनम् अकरोत् ?                        () केभ्यः एव भोजनं दातव्यम्?

   () राजपुरुषाः ऋषिकुमारं दृष्ट्वा  किम् अवदन् ?

(III) भाषिक कार्यम् –                                                                1X3=3

()'भवान् अपि भोजनं करोतु ' अत्र 'करोतु' इति क्रियापदस्य कर्तुपदं किम्?

       ()अपि           ()भवान् 

       () भोजनं         () भवत्

() 'ये जनाः वृद्धाः ' अत्र 'वृद्धाः ' इत्यस्य किं विपर्ययपदम् ?

     () जनाः।    () बालाः        () युवानः        () प्रजाः

() 'तस्य समीपं गत्वा' अत्र 'तस्य' इति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्

     () ऋषयेः      () मुनये        () ऋषिकुमाराय      () राजपुरुषेभ्यः

() "दूरम्" इति पदस्य किं विपर्ययः अत्र प्रयुक्तम् ?

     () निकषां       () समीपम्     () पार्श्रव    (इति

(iv)  अस्य अनुच्छेदस्य कृते समुचितं शीर्षकं लिखत   (1)


                                      रचनात्मकं कार्यम् (15) अङ्काः 

    प्रश्न: 2. भवान् छात्रावासे निवसति। स्व मित्रैः सह शैक्षिक भ्रमणे गमनाय तदर्थं धनप्रेषणार्थं पितरं प्रति अधः अपूर्णं पत्रं लिखितं मञ्जूषायाः सहायतया उचितशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयित्वा पुनः पत्रम् उत्तरपुस्तिकायाम् लिखत।       1/2X10= 5 

                                                                                                                    चिन्मय छात्रावासः

                                                                                                                          जयपुरम् 

                                                                                                          दिनांक -२०-०१- २०२२

आदरणीयाः ........................

प्रणामाः

अहम् अत्र ............. अस्मि आशा अस्ति तत्रापि कुशलं भवेत्। मम प्रथमसत्रीया .................... अद्यैव समाप्ता। 

मम उत्तरपत्राणि ................. अभवन्। परीक्षाफलं सप्ताहानन्तरम् आगमिष्यति। विद्यालयेन एकस्याः ...............

आयोजनं कृतम्। वयम्  ............... द्रष्टुम्  अमृतसरनगरं गमिष्यामः। चत्वारः  ...................  चापि अस्माभिः  सह गमिष्यन्ति। 

एतदर्थं ...............  रुप्यकाणाम्  पञ्चशतम् प्रेषयतु भवान्।  मातृचरणयोः मम ...................  कथनीयाः। अनुजाय  स्नेहराशिः। 

                                                                                                         भवदीयः ...................

                                                                                                                       अक्षयः


 

( कृपयाशोभनानि, सकुशलःप्रणामाःप्रियपुत्रःसादरम्शैक्षिक -यात्रायाःअध्यापकाः,   परीक्षा,   स्वर्णमन्दिरम्, पितृमहाभागाः )

 प्रश्नः 3. चित्रं दृष्ट्वा मञ्जूषा सहायतया  पञ्च वाक्यानि रचयत –                  1x 5 =5अङ्काः 

मञ्जूषा -

                                                                                                 (पशवः ,परस्परं ,वृक्षः ,तडागस्य ,जलम् ,समीपे ,आगत्य ,पिबन्ति ,पक्षिणः ,अपि ,भल्लुकः , कुरङ्गः )

प्रश्नः 4. अधोलिखित वाक्यानां संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत -               1X5=5

  (I) हम सब संस्कृत पढ़ते हैं |

 (II) बच्चा कलम से लिखता है |

 (III) राम रावण के लिए पर्याप्त थे |

 (IV) यज्ञशाला के चारों ओर वृक्ष हैं।

 (V) छात्र पढ़ने के लिए विद्यालय जाएँगे  |             

(vi)  हमारे राष्ट्रपति महान वैज्ञानिक थे।

(vii)      पिता के सामने बच्चा  खेल रहा है।                                                                                                         प्रश्नः 5. अधोलिखितं गद्यांशान् पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत –                       (3)  

 कश्चन निर्धनो जनः भूरि परिश्रम्य किञ्चिद् वित्तमुपार्जितवान्। तेन वित्तेन स्वपुत्रं एकस्मिन् महाविद्यालये प्रवेशं दापयितुं सफलो जातः तत्तनयः तत्रैव छात्रावासे निवसन् अध्ययने संलग्नः समभूत्। एकदा पिता तनूजस्य रुग्णतामाकर्ण्य व्याकुलो जातः पुत्रं द्रष्टुं प्रस्थितः परमर्थकार्येन पीडितः बसयानं विहाय पदातिरेव प्राचलत्।

       I.  एकपदेन उत्तरत-                                                          1/2X2=1

          () केन पीडितः निर्धनः जनः पदातिः एव प्राचलत्?

          () निर्धनः जनः भूरि परिश्रम्य किम् अर्जितवान्?

        II.   पूर्णवाक्येन उत्तरत-                                                1x1=1

  ()पिता किमर्थं व्याकुलः जातः?

प्रश्नः 6.अधोलिखितान् नाट्याशान् पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-                             (3)

वनस्य दृश्यम् समीपे एवैका नदी वहति। एकः सिंहः सुखेन विश्राम्यते तदैव एकः वानरः आगत्य तस्य पुच्छं धुनोति। क्रुद्धः सिंहः तं प्रहर्तुमिच्छति परं वानरस्तु कूर्दित्वा वृक्षमारूढः। तदैव अन्यस्मात् वृक्षात् अपरः वानरः सिंहस्य कर्णमाकृष्य पुनः वृक्षोपरि आरोहति एवमेव वानराः वारं वारं सिंहं तुदन्ति। क्रुद्धः सिंहः इतस्ततः धावति, गर्जति परं किमपि कर्तुमसमर्थः एव तिष्ठति। वानराः हसन्ति वृक्षोपरि विविधाः पक्षिणः अपि सिंहस्य एतादृशीं दशां दृष्ट्वा हर्षमिश्रितं कलरवं कुर्वन्ति।

I. एकपदेन उत्तरत-                                                                                   1/2X2=1

   () एकः वानरः कस्य पुच्छ धुनोति?

   () के सिंह तुदन्ति?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-                                                                                 1x1=1

()विविधाः पक्षिणः किम् कुर्वन्ति?

प्रश्न -7 अधोलिखितान् श्लोकान् पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि लिखत-                           (3)

क्रोधो हि शत्रुः प्रथमो नराणां,

देहस्थितो देहविनाशनाय।

यथास्थितः काष्ठगतो हि वह्निः,                          एव वह्निर्दहते शरीरम्

I. एकपदेन उत्तरत                                                                                            1/2X2=1

(i) क्रोधः कस्य नाशं करोति?

(ii) क्रोधः केषाम् प्रथमः शत्रुः अस्ति?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत-                                                                                        1x1=1

(I)  शरीरस्थः क्रोधः शरीरं कथम् दहते?

प्रश्नः 8.मञ्जूषातः समुचितपदानि चित्वा  अधोलिखित श्लोकस्य अन्वयं पूरयत-     1/2x4= 2

() यः …………… उद्दिश्य प्रकुप्यति तस्य …………… सः ध्रुवं प्रसीदति। यस्य .............. अकारणद्वेषि अस्ति, …………… तं कथं परितोषयिष्यति

                  मञ्जूषातः-: (जनःनिमित्तम्,अपगमे , मनः)


                                    अथवा

() …………… संसारे खलु ………. निरर्थकम् नास्ति अश्वः चेत् ……….. वीरः, खरः …………… वहने (वीरः) (भवति)

          मञ्जूषातः-: (भारस्य, धावने, किञ्चित्, विचित्रे, )

प्रश्न -9 अधोलिखित कथांश समुचित-क्रमेण लिखत-                                      1/2X8=4

(i) एकः सिंहः सुखेन विश्राम्यते तदैव एकः वानरः आगत्य तस्य पुच्छं धुनोति।

(ii) एवमेव वानरा: वारं वारं सिंह तुदन्ति।

(iii)अहं यदि तव संततिं पालयामि तर्हि कुत्र स्युः पिका:?

(iv) अतः अहम् एव करुणापरः पक्षिसम्राट काकः।

(v) क्रुद्धः सिंहः तं प्रहर्तुमिच्छति परं वानरस्तु कूर्दित्वा वृक्षमारूढः।

(vi) वनस्य दृश्यम् समीपे एवैका नदी वहति।

(vii) क्रुद्धः सिंहः इतस्ततः धावति, गर्जति परं किमपि कर्तुमसमर्थः एव तिष्ठति।

(viii) वानराः हसन्ति वृक्षोपरि विविधाः पक्षिणः अपि सिंहस्य एतादृशीं दशां दृष्ट्वा हर्षमिश्रितं कलरवं कुर्वन्ति।


आदर्शप्रश्नपत्रम्

संस्कृतम् (सम्प्रेषणात्मकम्) 122

कक्षा - दसमी



1) महाकवि कालिदासः केवलं संस्कृतसाहित्यस्य अपितु विश्वसाहित्यस्य श्रेष्ठः कविः अस्ति। अतएव इंगलैण्डदेशवासिनः स्वकीयाभ्यां सर्वश्रेष्ठाभ्यां दान्ते-वर्जिलाभ्यां सह तस्य तुलनां कुर्वन्ति। जर्मनी देशवासिनः तु तंशेक्सपीयरइति कथयन्ति। एषः महान् कवि नाटककारः चासीत्। कालिदासेन विरचिताः सप्त ग्रन्थाः सन्ति। एतेषु रघुवंश कुमारसंभवम् इति द्वे महाकाव्ये, ऋतुसंहार मेघदूतम् नामके द्वे खण्डकाव्ये, अभिज्ञानशाकुन्तलम्, विक्रमोर्वशीयम्, मालविकाग्निमित्रम् चेति त्रीणि नाटकानि सन्ति। सौन्दर्य-वर्णने काव्यप्रतिभायां महाकविः कालिदासः अद्यापि अप्रतिमः वर्तते। भारतीय महाकविषु सःकविकुलगुरुइति उपाधिना विभूषितः।

प्रश्ना :
I.
एकपदेन उत्तरत
(i)
कालिदासः कति नाटकानि अरचय?
(ii)
कः कविकुलगुरुः कथ्यते?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत
(i)
रामायणे कति काण्डानि, कति श्लोकाश्च सन्ति?
(ii)
रामायणे कस्याः विशदं वर्णनं प्राप्यते?

III. निर्देशानुसारम्
(i) ‘
संस्कृतस्य अनेके कवयः ग्रन्थान् अरचयन्।अत्रअरचयन्इति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?
(
) ग्रन्थान्
(
) कवयः
(
) अनेके
(
) संस्कृतस्य

ii) ‘रामायणे मर्यादापुरुषोत्तमस्य रामस्य चरित्रं निबद्धम्अत्ररामस्यइति पदस्य किं विशेषणपदं प्रयुक्तम्?
(
) रामस्य
(
) मर्यादा
(
) मर्यादापुरुषोत्तमस्य
(
) चरित्रम्

iii) ‘निषादेनइति पदस्य पर्यायपदं किम्?
(
) व्याधेन
(
) हर्षेण
(
) करुणा
(
) मर्यादा

iv) ‘ब्राह्मणः आदेशेन सः …’ अत्रसःइति पदं कस्मै प्रयुक्तम्?
(
) रामाय
(
) वाल्मीकये
(
) पुरुषोत्तमाय
(
) मर्यादायै

IV. अस्य अनुच्छेदस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।



2) अधोलिखित चित्रं दृष्ट्वा मञ्जूषायां प्रदत्तपदानां सहायतया पञ्च वाक्यानि लिख्यन्ताम्

3)अध्ययन प्रति मातरं समाश्वासयितुं पुत्र्या लिखितं पत्रं मञ्जूषायां प्रदत्तपदैः पूरयित् वा पुनः लिखत।


कुशलम्, प्रतियोगिताः, कुशलिनी, परिणामः, चिन्तिता, मतिम्, आनन्देन, करणीया, खेलप्रतियोगितासु, काल:

परीक्षाभवनतः
दिनाङ्कः ________

पूज्यमातृचरणा:,
प्रणतीनां शतम्।
अत्र अहं (i) ___________ आशासे भवती पितृमहादेयः (ii) ___________ स्तः। मात:! अहं जानामि यद् भवती मम अर्धवार्षिक परीक्षापरिणामकारणात् (iii) ___________ अस्ति। अत्र चिन्ता (iv) ___________ प्रथमसत्रे तु अहं (vh) ___________ रता आसम्। पठनाय तु (vi) ___________ एव आसीत् परम् अधुना तु सर्वाः (vii) ___________ समाप्ताः। अद्यारभ्य अहं केवल पठने एव (viii) ___________ विधास्यामि। आशासे वार्षिकपरीक्षायां मम (ix) ___________ भवताम् आशानुकूलः भविष्यति। शेषं सर्व (x) ___________ त्याः चरणयोः प्रणामाः
भवत्याः पुत्री
सुकन्या
उत्तरम्:

4) को जानाति तव ध्यानावस्थाम्।स्थितप्रज्ञइति व्याजेन वराकान् मीनान् छलेन अधिगृह्य क्रूरतया भक्षयसि। धिक् त्वाम्। तव कारणात् तु सर्वं पक्षिकुलमेवावमानितं जातम्। (सगर्वम्) अतएव कथयामि यत् अहमेव योग्य: वनराजपदाय। शीघ्रमेव मम राज्याभिषेकाय तत्पराः भवन्तु सर्वे वन्यजीवाः। अरे वानर! तूष्णीं भव। कथं त्वं योग्यः वनराजपदाय? पश्यतु पश्यतु मम शिरसि राजमुकुटमिव शिखां स्थापयता विधात्रा एवाहं पक्षिराजः कृतः अतः वने निवसन्तं मां वनराजरूपेणापि द्रष्टुं सज्जाः भवन्तु अधुना यतः कथं कोऽप्यन्यः विधातुः निर्णयम् अन्यथाकर्तुं क्षमः।

प्रश्नाः
I.
एकपदेन उत्तरत
(i)
बकः कान् छलेन क्रूरतया भक्षयति?
(ii)
कस्य कारणात् पक्षिकुलम् अवमानितं जातम्?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत
विधात्रा मयूरः कथं पक्षिराजः कृतः?

III. निर्देशानुसारम् उचितम् उत्तरम् प्रदत्तविकल्पेभ्यो चित्वा लिखत

  1. अहमेव योग्यः …….अत्रअहम्सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
    (
    ) वानराय
    (
    ) वानरस्य
    (
    ) मयूराय
    (
    ) वकाय

ii) ‘भवन्तुइति क्रियापदस्य कर्तृपदं किम्?
(
) मम
(
) तत्पराः
(
) वन्यजीवाः
(
) अभिषेकाय

iii) ‘मीनान्इति विशेष्य पदस्य विशेषणपदं किम्?
(
) वराकान्
(
) व्याजेन
(
) छलेन
(
) क्रूरतया

iv) ‘अरण्येइत्यर्थे किम् पदं प्रयुक्तम्?
(
) निवसन्तं
(
) विधात्रा
(
) सज्जाः
(
) वने

5)अधोलिखितवाक्येषु रेखांकितपदानि अधिकृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत

  1. तुदन्तं वानरं सिंहः मारयति।
    ii)
    समीपे एका नदी वहति।
    iii)
    अस्माकम् ऐक्यं विश्वप्रथितम्।
    iv)
    राज्ञः सुखे प्रजा सुखम् भवति।

6)अव्ययपदानी लिखत:

प्रश्न .
अहम् अपि आपणं गच्छामिमें अव्यय है
(
) अहम्,
(
) अपि,
(
) आपणं,
(
) गच्छामि।

. ‘इवअव्यय का उचित वाक्य-प्रयोग होगा
(
) अहम् इव करोमि,
(
) बालक: व्याघ्र इव अस्ति,
(
) सः विद्यालयः इव धावति,
(
) रामेशः कन्दुकेन इव क्रीडति।

. ‘त्वं कदा गृहम् आगमिष्यसि?’ में अव्यय पद है
(
) त्वं,
(
) कदा,
(
) गृहम्,
(
) आगमिष्यसि।

. ‘अद्यअव्यय का हिन्दी अर्थ होता है
) आज,
(
) कल,
(
) परसों,
(
) तरसों।

 . ‘कुतःअव्यय का उचित वाक्य प्रयोग होगा
(
) तत् पुस्तकं कुतः अस्ति,
(
) यथा कुतः राजा तथा प्रजा,
(
) त्वं कुतः आगच्छसि?
(
) रामः कुतः पुरुषोत्तमः आसीत्।

7)अधोलिखिताना वाक्यानां हिंदीभाषया आंग्लभाषया स्वभाषया वा अनुवाद कुरुत

.मैं जाता हूँ। 

. हम दोनों दौड़ते हैं।  

. हम लोग बोलते हैं।  

. वह नाचती है।  

. वे दोनों गाती हैं। 

                             …………………………………………


आदर्शप्रश्नपत्रम्

संस्कृतम् (सम्प्रेषणात्मकम्) 122

कक्षा - दसमी

1)संसारे सज्जनाः तथैव दुर्जनाः अपि वर्तन्ते। सज्जनानां संगतिः सत्सङ्गतिः दुर्जनानां संगतिश्च कुसंगतिः भवति। सामाजिकः प्राणी संगतिं विना स्थातुं शक्नोति। अतः मनुष्याय संगतिः अनिवार्या एव। सत्सङ्गत्या मनुष्यः सदैव उन्नतिं करोति कुसङ्गत्या तु सः पतनमार्गे नूनं पतति। गुणं विना कोऽपि मानवः सन्मानवः भवति। सत्संगेन सज्जनः सन्मार्गम् अनुसरति, गुणानभिनन्दति। सत्संगस्य प्रभावेन मनुष्येषु शनैः शनैः गुणाः प्रविश्यन्ति अवगुणाश्च बहिः निर्गच्छन्ति। संगस्य प्रभावः सर्वत्र दृश्यते। उक्तञ्च-‘कोटोऽपि सुमनः संगात् आरोहति सतां शिरःसत्संगत्या मनुष्यः समाजे मानं प्राप्नोति किन्तु कुसंगतौ पतित्वा तु मनुष्यः अपयशः निन्दाम् अपमानमेव प्राप्तनोति किन्तु कुसंगतौ पतित्वा तु मनुष्यः
अपयशः निन्दाम् अपमानवमेव प्राप्नोति। अतः सर्वदा सत्संगतौ एव वस्तव्यम्।

प्रश्ना :
I.
एकपदेन उत्तरत
(i)
केषां संगतिः सत्संगतिः भवति?
(ii)
संगतिः कस्मै अनिवार्या एव अस्ति?
(iii)
कुत्र सज्जनाः दुर्जनाः वर्तन्ते?
(iv)
कया मनुष्यः पतनमार्गे नूनं पतति?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत
(i)
सत्संगेन मनुष्यः किं किं करोति?
(ii)
कुसंगतौ पतित्वा मनुष्यः किं प्राप्नोति?

III. निर्देशानुसारम् उत्तरत
(i) ‘
आरोहतिइति क्रियापदस्य कर्तृपदं गद्यांशात् चित्वा लिखत्?
(
) संगात्
(
) अनुसरति
(
) सुमनः
(
) कीट:

ii) सः पतनमार्गे नूनं पतति अत्रसःइति सर्वनामपदं कस्मै प्रयुक्तम्?
(
) कीटाय
(
) गुणाय
(
) मनुष्याय
(
) प्रभावाय

(iii) ‘कुमार्गम्इत्यस्य विलोमपदं चित्वा लिखत?
(
) सन्मार्गम्
(
) नूनम्
(
) वस्तव्यम्
(
) सत्संगतिः

iv) ‘प्राणीइति पदस्य विशेषणपदं किम्?
(
) सामाजिकः
(
) मनुष्यः
(
) दुर्जनः
(
) कीट:

IV. गद्यांशस्य समुचितं शीर्षकं लिखत।

 2) अधोलिखितं चित्रं वर्णयन् संस्कृतने पञ्चवाक्यानि लिखत
मञ्जूषाउद्यानम्, बालः, खेलतः, द्वौ, बाला करोति, पश्यति, वृक्षः, चित्रम्, रचयति, उपविशति, दोलायाम्, पादकन्दुकम्


4)मित्रं प्रति अधोलिखितम् पत्रं मञ्जूषा -प्रदत्तशब्दैः पूरीयत्वा पुनः लिखत।

सरस्वती -छात्रावासः
तिथिः …………….
प्रियं मित्र। (i)……………..
सस्नेहं नमः।
अत्र कुशलं तत्रास्तु  गतसप्ताहे अस्माकं (ii)…………….. संस्कृतसम्भाषण -शिबिरम् (iii)………………. आसीत्। चतुर्दशदिनानि यावत् वयं संस्कृतसंभाषणस्य (iv)……………….. अकुर्म तत्र एकस्याः लघुनाटिकायाः (v)……………….. अपि अभवत्। अहं तु विदूषकस्य (vi)……………. कृतवान्। सर्वे जनाः हसित्वा हसित्वा (vii)…………….. अकुर्वन्। अहम् इदानी सर्वदा संस्कृतेन एव (viii)………………….. भवान् अपि संस्कृतेन संभाषणस्य अभ्यासं (ix) ………….. पितरौ (x)………………….मम प्रणामाञ्जलिं निवेदयतु।
भवतः मित्रम् ,
रवीन्द्रः।

 

मञ्जूषा

अभिनयम् ,अभ्यासम् ,प्रति ,विद्यालये ,मञ्चनम् ,आयोजितम् ,करतलध्वनिम् ,वदामि ,

रमेश ! करोतु


6)क्रोधो हि शत्रुः प्रथमो नराणां,
देहस्थितो देहविनाशनाय।
यथास्थितः काष्ठगतो हि वह्निः,
एव वह्निर्दहते शरीरम्

प्रश्नाः
I.
एकपदेन उत्तरत
(i)
क्रोधः कस्य नाशं करोति?
(ii)
क्रोधः केषाम् प्रथमः शत्रुः अस्ति?

II. पूर्णवाक्येन उत्तरत
शरीरस्थः क्रोधः शरीरं कथम् दहते?

III. प्रदत्तविकल्पेभ्यो उचितम् उत्तरम् चित्वा लिखत

  1. अग्निःइति पदस्य पर्यायः कः?
    (
    ) काष्ठः
    (
    ) वहिनः
    (
    ) देहः
    (
    ) दहते

ii) ‘शत्रुःइति पदस्य विशेषणपदं किम्?
(
) प्रथमः
(
) देहस्थितः
(
) क्रोधः
(
) नराणाम्

iii) ‘सः एव वह्निः दहते शरीरम्अत्र क्रियापदं किम्?
(
) सः
(
) एव
(
) वह्निः
(
) दहते

iv) ‘यथा काष्ठगतः ………….. वह्निः काष्ठम् दहते।अत्र रिक्तस्थान पूर्तिः कुरुत
(
) हि
(
) यथा स्थितः
(
) स्थितः
(
) शरीरम्

7)अधोलिखिताना वाक्यानां हिंदीभाषया आंग्लभाषया स्वभाषया वा अनुवाद कुरुत

. वे लोग खाना पकाती हैं। 

. लड़का खेलता है।  

. लड़की देखती है। 

. राम जाता है। 

. सीता आती है।  

. हम दोनों भी वहाँ जाते हैं।  




8)निमित्तमुद्दिश्य हि यः प्रकुप्यति,
ध्रुवं तस्यापगमे प्रसीदति।
अकारणद्वेषि मनस्तु यस्य वै,
कथं जनस्तं परितोषयिष्यति।।

अन्वयः- यः निमित्तम् (i) ….. प्रकुप्यति, सः (ii). ………. अपगमे (iii)…………प्रसीदति, वै यस्य मनः तु अकारणद्वेषि तं (iv)………….. कथं परितोषयिष्यति।


मञ्जूषाउद्दिश्य प्रकुप्यति , तस्य अपगमे , ध्रुवं ,जनं कथं 

     ……….…………


केन्द्रीय विद्यालय पारादीप पोर्ट

                                                            मासिक परीक्षा जून 2022

                                                       कक्षा : दशमी  विषयः –संस्कृतम्                    

     समयः : सार्धैक होराः                                                                                    पूर्णाङ्कः – 40

                            अपठितावबोधनम् (5अङ्काः ) 

प्रश्नः 1.  अधोलिखितं अपठितगद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि प्रदत्त  । 

आदर्शरामचरितस्य लेखकः वाल्मीकिः जनमानसस्य हृदये प्रतिष्ठितः। एकदा तमसातीरे भ्रमन् सः निषादेन विध्यमानमेकं क्रौञ्चपक्षिणमपश्यत्। करुणाभिभूतस्य तस्य मुखात् अनुष्टुप् छन्दसि श्लोकः नि:सृतः। तदा ब्राह्मणः आदेशेन सः अस्मिन् छन्दसि रामायणमहाकाव्यम् अलिखत्। रामायणे मर्यादापुरुषोत्तमस्य रामस्य चरित्रं निबद्धम्। पित्रोः आज्ञया रामः चतुर्दशवर्षाणि वने अवसत्। रामायणे तत्कालीन समाज व्यवस्थायाः विशदं वर्णनं प्राप्यते। अस्य ग्रन्थस्य विश्वस्य अनेकासु भाषासु अनुवादः कृतः। अस्य कथानकमाश्रित्य संस्कृतस्य अनेके कवयः ग्रन्थान् अरचयन्। अस्य ग्रन्थस्य पाठं जनाः प्रतिदिनं कुर्वन्ति। रामायणे सप्तकाण्डानि चतुर्विंशतिसहस्त्रश्लोकाश्च सन्ति।

I) एकपदेन उत्तरत -           1×3=3                               

क-  रामायणस्य श्लोकाः कस्मिन् छन्दसि रचिताः  ? ख- रामायणे कतिकाण्डानि सन्ति  ? ग- रामायणे कति श्लोकाः वर्तन्ते  ? 

पूर्णवाक्येन उत्तरत –       2×1=2      

  1. रामायणे कस्याः व्यवस्थायाः वर्णनं वर्तते ?                                                                                                                                               

                                                 रचनात्मकं कार्यम् (13) अङ्काः 

    प्रश्न: 2. भवान् छात्रावासे निवसति। स्व मित्रैः सह शैक्षिक भ्रमणे गमनाय तदर्थं धनप्रेषणार्थं पितरं प्रति पत्रं लिखितम् । मञ्जूषायाः सहायतया उचितशब्दैः रिक्तस्थानानि पूरयत  ।  1/2X10= 5 

मञ्जूषा - ( कृपया,  शोभनानि, सकुशलः,  प्रणामाः,  प्रियपुत्रः,  सादरम्,  शैक्षिक -यात्रायाः,  अध्यापकाः,   परीक्षा,   स्वर्णमन्दिरम्, पितृमहाभागाः )

          

                                                                                                                                                      

                                                                                                                                                                                                                 चिन्मय छात्रावासःजयपुरम् 

                                                                                                                                                                                                                   दिनांक -२०-०१- २०२२

आदरणीयाः ........................

        प्रणामाः, अहम् अत्र ............. अस्मि । आशा अस्ति तत्रापि कुशलं भवेत्। मम प्रथमसत्रीया .................... अद्यैव समाप्ता । मम उत्तरपत्राणि ................. अभवन्। परीक्षाफलं सप्ताहानन्तरम् आगमिष्यति। विद्यालयेन एकस्याः ............... आयोजनं कृतम् । वयम्  ............... द्रष्टुम्  अमृतसरनगरं गमिष्यामः। चत्वारः  ...................  चापि अस्माभिः  सह गमिष्यन्ति । एतदर्थं  ...............  रुप्यकाणाम्  पञ्चशतम् प्रेषयतु भवान्।  मातृचरणयोः मम ...................  कथनीयाः। अनुजाय  स्नेहराशिः।                                                                                    भवदीयः ...................

                                                                                                                                                                                                                                 अक्षयः                                                           

 प्रश्नः 3. चित्रं दृष्ट्वा मञ्जूषा सहायतया  पञ्च वाक्यानि रचयत –                  1x 5 =5

pastedGraphic.png

मञ्जूषा – (प्रकृतेः, वृक्षाः, नदीम्, उभयतः, वातावरणम्, पर्यावरणम्, शान्तम्, अनेके, सेतुः, दृश्यम्, जलम्, शीतलम्, शुद्धम्, सन्ति, अस्ति, नद्याः, उपरि)                                                                                  प्रश्नः 4. अधोलिखित वाक्यानां संस्कृतभाषायाम् अनुवादं कुरुत -               1X3=3

 क- हम सब संस्कृत पढ़ते हैं | ख-  पिता के सामने बच्चा  खेल रहा है।   ग- शिक्षक के दोनों तरफ बच्चे बैठे हैं  । 

                             अनुप्रयुक्त व्याकरणम् (10 अङ्काः) 

5. प्रदत्तेभ्य: विकल्पेभ्यः समुचितं कालबोधकपदं चिनुत - (केवलं प्रश्नचतुष्टयम) 1x2=2

क- सः प्रात: 6:45 अल्पाहारं स्वीकरोति। (क) सपादसप्तवादने (ख) पादोन षड्वादने (ग) पादोन सप्तवादने

ख- सः प्रात: 9:15  हिन्दीभाषां पठति। (क) नव वादने (ख) सार्ध-नववादने (ग) सपाद नववादने

6. वाक्यानुगुणम् उचिताव्ययपदं चिनुत - (केवलं प्रश्नत्रयम्) 1×2=2

(i)................. शनिवासरः आसीत्  ।  (क) श्व:  (ख) ह्यः  (ग) अद्य

ख- प्रकृतिः ……………. शरणम् अस्ति  ।  (क)एव (ख) वृथा (ग) कुत्र                             

7. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदस्य  सन्धिपदं सन्धिविच्छेदपदं वा चिनुत  । 1x2=2

क- सा  व्याघ्रजाद् भयात्  पुनः मुक्ता अभवत्।(क) व्याघ्रजात् + भयात् (ख) व्याघ्रजाद् + भयात् (ग) व्याघ्रजात् + अभयात्

 ख- माम्  अस्मात् + नगरात्  बहुदूरं  नय। (क) अस्मान्नगरात् (ख) अस्मनगरात् (ग)अस्मात्नगरात्

8. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानां प्रकृति-प्रत्ययौ संयोज्य विभज्य वा उचितम् उत्तरं विकल्पेभ्यः चिनुत- 1×2=2

क- यत्र आस्ते सा  धूर्ता  तत्र गम्यताम्। (क) धूर्त+टाप् (ख) धूर्त +मतुप् (ग) धूर्ता+त्व (घ) धूर्ता+टाप् 

ख- बुद्धिः  बल + मतुप्  सदा। (क) बलवान् (ख) बलमान् (ग) बलवती (घ) बुद्धिमती

9– अधोलिखितपदानां विग्रहं समास नाम च चिनुत  । 1×2=2 

क-यथाशक्ति – समुचितं विग्रहं चिनुत  ।   अ-  शक्तेः अतिक्रम्य  ब- शक्ति अनुसारम्  स- शक्तिम् अतिक्रम्य  ड- शक्तिम् अनतिक्रम्य

ख - व्याघ्रं मारयति इति – व्याघ्रमारी – समास नाम लिखत  ।  अ-कर्मधारय    ब- बहुव्रीहि    ड-तत्पुरुष     स- उपपद तत्पुरुष

                       पठित अवबोधनम् (12 अङ्काः) 

10- अधोलिखितं पद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि प्रदत्त  । 1×5=5

वायुमण्डलं भृशं दूषितं न हि निर्मलं जलम्।

कुत्सितवस्तुमिश्रितं भक्ष्यं समलं धरातलम्॥

करणीयं बहिरन्तर्जगति तु बहु शुद्धीकरणम्। शुचि…

एकपदेन उत्तरत  । 

  1. वायुमण्डलं कीदृशं जातम्  ?  ख- भक्ष्यं कीदृशं भवति  ?  ग- कुत्र शुद्धीकरणं करणीयम्  ? 
  2. घ- कुत्रापि निर्मलं जलं नास्ति । विशेषणपदं चिनुत  । ङ - खाद्य – पद्यांशात् पर्यायपदं चिनुत। 

11 – अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तराणि प्रदत्त  । 

अस्ति देउलाख्यो ग्रामः। तत्र राजसिंहः नाम राजपुत्रः वसति स्म। एकदा केनापि आवश्यककार्येण तस्य भार्या बुद्धिमती पुत्रद्वयोपेता पितुर्गृहं प्रति चलिता। मार्गे गहनकानने सा एकं व्याघ्रं ददर्श। सा व्याघ्रमागच्छन्तं दृष्ट्वा धार्ष्ट्यात् पुत्रौ चपेटया प्रहृत्य जगाद-“कथमेकैकशो व्याघ्रभक्षणाय कलहं कुरुथः? अयमेकस्तावद्विभज्य भुज्यताम्। पश्चाद् अन्यो द्वितीयः कश्चिल्लक्ष्यते।”

एकपदेन उत्तरत  । 1×2=2

क-बुद्धिमती पुत्रद्वयोपेता कुत्र चलिता  ? ख – राजसिंहः कस्मिन् ग्रामे वसति स्म  ? 

पूर्णवाक्येन उत्तरत  । 

क – व्याघ्रं दृष्ट्वा वृद्धिमती किम् अकरोत्  ? 2×1=2

भाषिककार्यम्            ½×2=1

  1. सा एकं व्याघ्रं ददर्श  । कर्तृपदं चिनुत  । 
  2. ख- जगाद – समानार्थक क्रियापदं चिनुत  ।  (अकथयत्, अपठत्, अकरोत्)
  1. – रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत । 1x2=2
  1. प्रकृत्याः सन्निधौ वास्तविकं सुखं विद्यते .। ( कस्य,कस्याः,तस्य,कस्मिन्) 
  2. ख - पुरा त्वया मह्यं व्याघ्रत्रयं दत्तम्  । ( कस्यै, कस्मै, केन, कया)








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