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NCERT Solutions for Class 6 Hindi Chapter 1 मातृभूमि





Class 6 Hindi Chapter 1 मातृभूमि Questions Answers NCERT मल्हार

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Chapter 1 मातृभूमि Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

आइए, अब हम इस कविता पर विस्तार से चर्चा करें। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।


मेरी समझ से

() नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए

(1) हिंद महासागर के लिए कविता में कौन-सा शब्द आया है?


  • चरण
  • वंशी
  • हिमालय
  • सिंधु


उत्तर

सिंधु ()


(2) मातृभूमि कविता में मुख्य रूप से

  • भारत की प्रशंसा की गई है।
  • भारत के महापुरूषों की जय की गई है।
  • भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है।
  • भारतवासियों की वीरता का बखान किया गया है।


उत्तर

भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है। ()


() अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

(उत्तर 1) मैंने इस उत्तर को चुना क्योंकि "मातृभूमि" कविता में भारत की प्राकृतिक सुंदरता और उसकी महिमा को सराहा गया है। 

यह कविता भारतीय समय-समय पर बाहरी प्रभावों की बावजूद अपनी स्वाभाविक सुंदरता और विविधिता को साफ़ स्पष्ट करती है| इसमें उल्लेख किया गया है कि भारत एक पुण्यभूमि है, जहाँ नदियाँ, पहाड़ीयाँ, झरने, पेड़-पौधों और प्राकृतिक वातावरण हमेशा मन को शांति और संतोष प्रदान करते हैं।
इसके अलावा कविता में भारतीय धर्म, संस्कृति और इतिहास की भी महिमा गायी गई है जिससे भारत की मातृभूमि के प्रति समर्पण और सम्मान का सन्देश दिया गया है।


(उत्तर 2) हिंद महासागर का प्राचीन नामसिंधु महासागरथा जो प्राचीन भारतीयों द्वारा रखा गया था। भारत के नाम पर इस सागर का नामहिंद महासागररखा गया। कविता में सोहनलाल द्विवेदी ने हिंद महासागर से अपनत्व के कारण इसे सिंधु नाम से पुकारा इसलिएसिंधुशब्द का विकल्प, चयन करना उचित होगा।


(उत्तर 3) ‘मातृभूमिकविता में कवि सोहनलाल जी ने भारत के पर्वतों, नदियों, वृक्षों, मलय, पवन, घनी अमराइयों आदि की चर्चा अधिक की है इसलिए भारत की प्राकृतिक सुंदरता की सराहना की गई है। विकल्प का चयन उचित है।


मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

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शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. हिमालय

1. एक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक।

2. त्रिवेणी

2. वसुदेव के पुत्र वासुदेव

3. मलय पवन

3. भारत की प्रसिद्ध नदियाँ।

4. सिंधु

4. तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।

5. गंगा-यमुना

5. श्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र

6. रघुपति

6. दक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।

7. श्रीकृष्ण

7. एक प्रसिद्ध और प्राचीन ग्रंथश्रीमद्भगवदगीता’, इसमें वे प्रश्न-उत्तर और संवाद हैं जो महाभारत में श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच हुए थे।

8. सीता

8. समुद्र, एक नदी का नाम

9. गीता

7. एक प्रसिद्ध और प्राचीन ग्रंथश्रीमद्भगवदगीता’, इसमें वे प्रश्न-उत्तर और संवाद हैं जो महाभारत में श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच हुए थे।

10. गौतम बुद्ध

10. भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत माला।

उत्तर

शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. हिमालय

10. भारत की उत्तरी सीमा पर फैली पर्वत माला।

2. त्रिवेणी

4. तीन नदियों की मिली हुई धारा, संगम।

3. मलय पवन

6. दक्षिणी भारत के मलय पर्वत से चलने वाली सुगंधित वायु।

4. सिंधु

8. समुद्र, एक नदी का नाम

5. गंगा-यमुना

3. भारत की प्रसिद्ध नदियाँ।

6. रघुपति

5. श्री रामचंद्र का एक नाम, दशरथ के पुत्र।

7. श्रीकृष्ण

2. वसुदेव के पुत्र वासुदेव।

8. सीता

9. जनक की पुत्री जानकी

9. गीता

9. जनक की पुत्री जानकी

10. गौतम बुद्ध

1. एक प्रसिद्ध महापुरुष, बौद्ध धर्म के प्रवर्तक।

1. 10
2. 4
3. 6
4. 8
5. 3
6. 5
7. 2
8. 9
9. 7
10. 1


पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

वह युद्ध-भूमि मेरी, वह बुद्ध-भूमि मेरी।
वह मातृभूमि मेरी, वह जन्मभूमि मेरी।

उत्तर

(उत्तर 1) यह पंक्तियाँ भारत के विभिन्न महापुरुषों और उनके महत्वपूर्ण युद्धों तथा धार्मिक और सांस्कृतिक योगदान को स्मरण कराती हैं। यहां "युद्ध-भूमि मेरी" से भारत के ऐतिहासिक युद्धों दिया गया है, जैसे कि महाभारत युद्ध और विभिन्न राष्ट्रीय स्वंत्रता संग्राम।

"बुद्ध-भूमि मेरी" से भारतीय धर्म और दर्शन के महापुरुष गौतम बुद्ध के शिक्षाओं का सम्मान किया गया है, जिन्होंने अपने ज्ञान और अहिंसा के सिद्धांतो से दुनिया को प्रेरित किया।

इस पंक्तियों से साफ़ होता है कि भारत मातृभूमि के रूप में केवल अपने नागरिकों के लिए एक भौतिक स्थान है, बल्कि यहाँ का धर्म, संस्कृति और ऐतिहासिक योगदान भी उनके लिए महत्वपूर्ण हैं।

यह विचार भारतीय समाज में गहरी भावनाओं और समर्पण के संकेत के रूप में उठाते हैं।

 

(उत्तर 2) कवि ने भारत कोयुद्ध भूमि मेरीकहा क्योंकि भारत की भूमि सदा संघर्ष की भूमि रही है यह हमें हर तरह के अभाव, अज्ञान और दुख से लड़ना सिखाती है। भारत पर कितने ही शासकों ने शासन किया लेकिन भारतीयों ने अपनी सभ्यता एवं संस्कृति पर आँच नहीं आने दी। कवि भारत को बुद्धभूमि कहा क्योंकि महात्मा बुद्ध ने भारतीयों को प्रेम, दया एवं अहिंसा का संदेश दिया ताकि भारत में अखंडता रहे।

आत्मसम्मान आंतरिक लगाव के कारण कवि इसे मातृभूमि की संज्ञा देता है। अंत में कवि इस पावन धरती को जन्मभूमि कहा क्योंकि वह इसी धरती पर जन्मा है और उसे भारत की गौरवमयी धरती पर जन्म लेने पर अत्यधिक गर्व है।


सोच-विचार के लिए

() कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

1. कोयल कहाँ रहती है?

उत्तर

कोयल अमराइयों (आम के बगीचों) में रहती है।


2. तन-मन कौन सँवारती है?

उत्तर

बहती मलय पवन (दक्षिणी भारत से साने वाली सुगन्धित हवा) हमारा तन-मन सँवारती है।


3. झरने कहाँ से झरते हैं?

उत्तर

झरने पहाड़ियों से झरते हैं।


4. श्रीकृष्ण ने क्या सुनाया था?

उत्तर

श्रीकृष्ण ने मधुर बाँसुरी बजाकर सबका मन मोह लिया और गीता का संदेश भी दिया।


5. गौतम ने किसका यश बढ़ाया ?

उत्तर

गौतम ने भारत का यश बढ़ाया पूरे संसार को अहिंसा दया और करुणा का संदेश दिया। प्राणी जगत में सभी से प्रेम करो, संदेश दिया।


() “नदियाँ लहर रही हैं
पग पग छहर रही हैं

लहरका अर्थ होता हैपानी का हिलोरा, मौज, उमंग, वेग, जोश

छहरका अर्थ होता हैबिखरना, छितराना, छिटकना, फैलना कविता पढ़कर पता लगाइए और लिखिए-

  • कहाँ-कहाँ छटा छहर रही हैं?
    उत्तर
    नदियों के किनारों पर नदी में तेज लहर आने पर जल दूर-दूर तक फैल जाता है और नदी तेज़ वेग में हिलोरे लेकर आगे बढ़ती है।
  • किसका पानी लहर रहा है?
    उत्तर
    गंगा, यमुना और त्रिवेणी (गंगा, यमुना एवं सरस्वती का संगम स्थल) में पानी हिलोरे लेकर उमंग, जोश एवं मस्ती से आगे बढ़ता है।


कविता की रचना

"गंगा यमुन त्रिवेणी
नदियाँ लहर रही हैं"

यमुनशब्द यहाँयमुनानदी के लिए आया है। कभी-कभी कवि कविता की लय और सौंदर्य को बढ़ाने के लिए इस प्रकार से शब्दों को थोड़ा बदल देते हैं। यदि आप कविता को थोड़ा और ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको और भी बहुत-सी विशेषताएँ पता चलेंगी। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें आपस में साझा कीजिए और लिखिए। जैसे सबसे ऊपर इस कविता का एक शीर्षक है।

उत्तर

"नीचे चरण टेल झुक,
नित सिंधु झूमता है।"

'सिंधु' शब्द यहाँ 'हिन्द महासागर' के लिए आया है।


अमराइयाँ घनी हैं 
कोयल पुकारती है,

'अमराइयाँ' शब्द यहाँ 'आम के पेड़' के लिए आया है।


बहती मलय पवन है,
तन-मन सँवारती है।

'मलय' शब्द यहाँ 'सुगंधित' लिए आया है।


श्रीकृष्ण ने सुनाई,
वंशी पुनीत गीता।

'पुनीतशब्द यहाँ 'पवित्रअथवा 'शुद्ध' के लिए आया है।


गौतम ने जन्म लेकर,
जिसका सुयश बढ़ाया,

'जिसकाशब्द यहाँ 'भारत देशके लिए आया है।


मिलान

स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा 5 खींचकर जोड़िए

स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी

1. यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्ष आदि पक्षी चहचहा रहे हैं।

2. चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।

2. मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है। वह भूमि मेरी माँ समान है।

3. अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है।

3. वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है। कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं।

उत्तर

स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. वह जन्मभूमि मेरी वह मातृभूमि मेरी

2. मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है। वह भूमि मेरी माँ समान है।

2. चिड़ियाँ चहक रही हैं, हो मस्त झाड़ियों में।

3. वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है। कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं।

3. अमराइयाँ घनी हैं कोयल पुकारती है।

1. यहाँ आम के घने उद्यान हैं जिनमें कोयल आदि पक्ष आदि पक्षी चहचहा रहे हैं।

1. 2
2. 3
3. 1


अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए


() “अमराइयाँ घनी हैं
कोयल पुकारती है

कोयल क्यों पुकार रही होगी? किसे पुकार रही होगी? कैसे पुकार रही होगी?

उत्तर

कोयल वसंत ऋतु के आगमन पर पुकार रही होगी। कोयल प्रकृति को पुकार रही होगी। वह मानो प्रकृति की सुंदरता का गुणगान कर रही हो। कोयल मधुर स्वर में पुकार रही होगी। कोयल की आवाज़ बहुत मीठी होती है।


() “बहती मलय पवन है,
तन मन सँवारती है

पवन किसका तन-मन सँवारती है? वह यह कैसे करती है ?


उत्तर

पवन निम्न चीजों का तन-मन सँवारती है-


  • प्रकृति का: पेड़-पौधों, फूलों, पत्तियों को झक-झोरकर
  • मनुष्यों का: उन्हें ताज़गी और सुकून देकर
  • पशु-पक्षियों का: उन्हें रहत और उल्लास देकर
  • पुरे वातावरण का: ताज़गी और स्फूर्ति भरकर



पवन निम्न तरह से तन-मन सँवारती है-

1. शारीरिक रूप से (तन):


  • ताज़गी प्रदान करके
  • गर्मी में रहत देकर
  • शरीर को ठंडक पहुँचाकर
  • पसीने को सुखाकर


2. मानसिक रूप से (मन):


  • तनाव कम करके
  • मन को बेहतर बनाकर
  • प्रफुल्लित करके
  • नई ऊर्जा से भरकर


3. प्राकृतिक रूप से (प्रकृति):


  • पेड़-पौधों को झक-झोरकर उन्हें नृत्य करने जैसा प्रतीत कराके
  • फूलों की सुगंध को चारों ओर फैलाकर
  • बादलों को विभिन्न आकार देकर
  • जल की लहरों पर कंपन पैदा करके



शब्दों के रूप

नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।

() नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए-

जगमग छटा निराली,
पग पग छहर रही हैं

इन पंक्तियों मेंपगशब्द दो बार आया है। इसका अर्थ हैहर पगयाहर कदम पर।
शब्दों के ऐसे ही कुछ जोड़े नीचे दिए गए हैं। इनके अर्थ लिखिए

घर-घर ……

उत्तर

हर घर या प्रत्येक घर


बाल-बाल ……

उत्तर

बहुत करीब से या मुश्किल से 


साँस साँस …………

उत्तर

लगातार या हर साँस में
(
विशेषएक ओर अर्थ भी है थोड़े से अंतर से बचना। जैसे- वह गिरने को था पर बाल-बाल बच गया।


देश-देश ………

उत्तर

प्रत्येक देश में


पर्वतपर्वत ……

उत्तर

सभी पर्वत या हर पर्वत


() “वह युद्ध-भूमि मेरी
वह बुद्ध-भूमि मेरी

कविता मेंभूमिशब्द में अलग-अलग शब्द जोड़कर नए-नए शब्द बनाए गए हैं। आप भी नए शब्द बनाइए और उनके अर्थ पता कीजिए
(
संकेततप, देव, भारत, जन्म, कर्म, कर्तव्य, मरु, मलय, मल्ल, यज्ञ, रंग, रण, सिद्ध आदि)


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उत्तर

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थोड़ा भिन्न, थोड़ा समान

नीचे दी गई पंक्तियों को पढ़िए-

जग को दया सिखाई,
जग को दिया दिखाया।

दयाऔरदियामें केवल एक मात्रा का अंतर है, लेकिन इस एक मात्रा के कारण शब्द का अर्थ पूरी तरह बदल गया है। आप भी अपने समूह में मिलकर ऐसे शब्दों की सूची बनाइए जिनमें केवल एक मात्रा का अंतर हो, जैसे घड़ा -घड़ी।

उत्तर

चाँदचाँदी,

घटघाट,

चनाचीन,

मेलामैला,

दानदिन

कालकील

रागरोग

मानमौन

दालदिल

पाठपीठ

बालबोल


पाठ से आगे

आपकी बात

() इस कविता में भारत का सुंदर वर्णन किया गया है। आप भारत के किस स्थान पर रहते हैं? वह स्थान आपको कैसा लगता है? उस स्थान की विशेषताएँ बताइए।

(संकेतप्रकृति, खान-पान, जलवायु, प्रसिद्ध स्थान आदि)

उत्तर

मैं भारत के दक्षिण भाग में रहता हूँ। यह स्थान मुझे बहुत अच्छा लगता है क्योंकि -


  • प्रकृति: समुद्र तटों, नारियल के पेड़ों, चाय और कॉफी के बागानों से भरपूर
  • खान-पान: इडली, डोसा, सांभर, रसम, अप्पम जैसे स्वादिष्ट व्यंजन खाने को मिलते हैं।
  • जलवायु: गर्म और आद्र, मानसून का प्रभाव रहता है।
  • प्रसिद्ध स्थान: मैसूर पैलेस, मरीना बीच, मीनाक्षी मंदिर जैसे प्रसिद्ध मंदिर है।



मैं भारत के पश्चिम भाग में रहता हूँ यह स्थान मुझे बहुत अच्छा लगता है क्योंकि -


  • प्रकृति: रेगिस्तान, समुद्र तट, घने जंगल देखने को मिलते है।
  • खान-पान: ढोकला, दाबेली, वड़ा पाव, पुरनपोली जैसे स्वादिष्ट व्यंजन खाने को मिलते हैं।
  • जलवायु: गर्म और शुष्क, मानसून का मध्यम प्रभाव रहता है।
  • प्रसिद्ध स्थान: गेटवे ऑफ इंडिया, ताज महल होटल, गिर वन, जोधपुर, उदयपुर जैसे शहर देखने को मिलते है



मैं भारत के उत्तर भाग में रहता हूँ यह स्थान मुझे बहुत अच्छा लगता है क्योंकि


  • प्रकृति: हिमालय पर्वत श्रृंखला, गंगा और यमुना नदियां देखने को मिलती
  • खान-पान: छोले भटूरे, पराठे, कचौड़ी, लस्सी जैसे स्वादिष्ट
  • जलवायु: गर्मियों में बहुत गर्म, सर्दियों में ठंडा रहता
  • प्रसिद्ध स्थान: श्री राम मंदिर (अयोध्या), काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी), हिल स्टेशन (शिमला, मनाली), ताजमहल, लाल किला, गोल्डन टेंपल जैसे प्रसिद्ध स्थान देखने को मिलते हैं।



मैं भारत के पूर्वी भाग में रहता हूँ यह स्थान मुझे बहुत अच्छा लगता है क्योंकि -


  • प्रकृति: सुंदरबन, चाय बागान, नदियां देखने को मिलती हैं।
  • खान-पान: मछली के व्यंजन, रसगुल्ला, मिष्टी दोई जैसे स्वादिष्ट व्यंजन खाने को मिलते हैं।
  • जलवायु: गर्म और आद्र, भारी वर्षा वाला मौसम रहता है।
  • प्रसिद्ध स्थान: जगन्नाथ मंदिर ( पूरी), कोणार्क सूर्य मंदिर, विक्टोरिया मेमोरियल, हावड़ा ब्रिज, हिल स्टेशन (दार्जिलिंग) जैसे प्रसिद्ध स्थान देखने को मिलते है।



मैं भारत के पूर्वोत्तर भाग में रहता हूँ यह स्थान मुझे बहुत अच्छा लगता है क्योंकि -


  • प्रकृति: पहाड़, झरने, घने जंगल देखने को मिलते हैं।
  • खान-पान: मोमो, थुकपा, बांस में पका मांस जैसे स्वादिष्ट व्यंजन खाने को मिलते हैं।
  • जलवायु: उष्ण और आद्र, भारी वर्षा वाला रहता है।
  • प्रसिद्ध स्थान: कामाख्या मंदिर, उमियाम झील, मज़ूली द्वीप, हैप्पी वैली (मेघालय) जैसे प्रसिद्ध स्थान देखने को मिलते हैं।




() अपने परिवार के किसी सदस्य या मित्र के बारे में लिखिए। उसकी कौन-कौन सी बातें आपको अच्छी लगती हैं?

उत्तर

मेरे परिवार में मुझे मेरे पिताजी सबसे अच्छे लगते हैं। उनकी निम्नलिखित बातें मुझे अच्छी लगती हैं-

  1. वेसादा जीवन उच्च विचारमें विश्वास करते हैं।
  2. प्रातः लंबी सैर पर जाते हैं ताकि स्वस्थ रहें।
  3. देसी खाना खाते हैं, उन्हें पश्चिमी सभ्यता के व्यंजन पसंद नहीं हैं क्योंकि वे पौष्टिक नहीं होते
  4. वे समाजसेवी हैं। अपने कार्यालय के कार्य के बाद समाजसेवी कार्य करते हैं।
  5. परिवार के प्रति पूर्णरूप से समर्पित रहते हैं।
  6. अपने बड़े-बुजुर्गों का बहुत सम्मान करते हैं।
  7. परिवार के प्रत्येक सदस्य की आवश्यकताओं को पूरा करने का भरसक प्रयास करते हैं।
  8. किसी भी कार्य को करने से पूर्व पहले भली-भाँति विचार करते हैं।


वंशीसे

श्री कृष्णा ने सुनाई
वंशी पुनीत गीता

वंशीबाँसुरी को कहते हैं। यह मुँह से फूँक कर बजाया जाने वाला एकवाद्ययानी बाजा है। नीचे फूँक कर बजाए जाने वाले कुछ वाद्यों के चित्र दिए गए हैं। इनके नाम शब्द-जाल से खोजिए और सही चित्र के नीचे लिखिए।

वाद्यों के नामों का शब्द-जाल

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उत्तर

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उत्तर

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आज की पहेली

आज हम आपके लिए एक अनोखी पहेली लाए हैं। नीचे कुछ अक्षर दिए गए हैं। आप इन्हें मिलाकर कोई सार्थक शब्द बनाइए अक्षरों को आगे-पीछे किया जा सकता है यानी उनका क्रम बदला जा सकता है। आप अपने मन से किसी भी अक्षर के साथ कोई मात्रा भी लगा सकते हैं। पहला शब्द हमने आपके लिए पहले ही बना दिया है।

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उत्तर

2. हिमालय

3. गंगा

4. भारत

5. कोयल

6. पवन 


झरोखे से

आप अपने विद्यालय मेंवंदे मातरम्गाते होंगे।वंदे मातरम्बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचा गया था। यह गीत स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत था। भारत में इसका स्थानजन गण मनके समान है। क्या आप इसका अर्थ जानते-समझते हैं? आइए, आज हम पहले इसका अर्थ समझ लेते हैं, फिर समूह में चर्चा करेंगे-

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आप नीचे दी गई इंटरनेट कड़ी पर इसे संगीत के साथ सुन भी सकते हैं

https://knowindia.india.gov.in/hindi/national-identity-elements/national-song.php


साझी समझ

आपनेमातृभूमिकविता को भी पढ़ा औरवंदे मातरम्को भी। अब कक्षा में चर्चा कीजिए और पता लगाइए कि इन दोनों में कौन-कौन सी बातें एक जैसी हैं और कौन-कौन सी बातें कुछ अलग हैं।

उत्तर

मातृभूमि एवं वंदे मातरम् में समानता-

  • नदियों द्वारा जल से परिपूर्ण
  • फलों से परिपूर्ण
  • शीतल मलय पवन का बहना

असमानताएँ-

  • मात्रभूमि कविता
  • हिमालय एवं सागर की चर्चा
  • धरती को मातृभूमि, जन्मभूमि, स्वर्णभूमि, पुण्यभूमि, धर्मभूमि, कर्मभूमि, युद्धभूमि, बुद्धभूमि आदि नामों से पुकारना।
  • बुद्ध, राम-सीता, कृष्ण का वर्णन
  • झरने, पहाड़ियों को दर्शाना
  • पक्षियों की चहक दर्शाना

वंदे मातरम्-

  • भारत माता को प्रणाम
  • अन्न से परिपूर्ण खेत बताना।
  • चंद्रमा के शोभायमान प्रकाश की छटा का चित्रण
  • खिले फूलों से सुसज्जित पेड़ों की शब्द चर्चा
  • सदा हँसने वाली, मधुर भाषा बोलने वाली, वरदान देने वाली भारत माँ को प्रणाम करना

 

पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं, मैं सुरबाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव पर हे हरि डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर चढूँ भाग्य पर इठलाऊँ,


मुझे तोड़ देना वनमाली!
उस पथ में देना तुम फेंक।
मातृ-भूमि पर शीश चढ़ाने,
जिस पथ जावें वीर अनेक
माखनलाल चतुर्वेदी

Chapter 2 गोल Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

() नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए-

(1)  “दोस्त, खेल में इतना गुस्सा अच्छा नहीं। मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है। अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता।मेजर ध्यानचंद की इस बात से उनके बारे में क्या पता चलता है?


  • वे अत्यंत क्रोधी थे।
  • वे अच्छे ढंग से बदला लेते थे।
  • उन्हें हॉकी से मारने पर वे अधिक गोल करते थे।
  • वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।


उत्तर

वे जानते थे कि खेल को सही भावना से खेलना चाहिए।  ()


(2) लोगों ने मेजर ध्यानचंद कोहॉकी का जादूगरकहना क्यों शुरू कर दिया?


  • उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण
  • उनकी हॉकी स्टिक की अनोखी विशेषताओं के कारण
  • हॉकी के लिए उनके विशेष लगाव के कारण
  • उनकी खेल भावना के कारण


उत्तर

उनके हॉकी खेलने के विशेष कौशल के कारण ()


() अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

मेजर ध्यानचंद की सफलता का मूल उनकी उत्कृष्ट खेल भावना थी। यह कई उदाहरणों से स्पष्ट होता है:


  • उन्होंने हिंसा के बदले गोल करके बदला लिया।
  • वे मानते थे कि खेल में गुस्सा अच्छा नहीं।
  • उन्होंने सफलता के मंत्र में खेल भावना को शामिल किया।
  • वे अक्सर गोल का श्रेय साथी खिलाड़ियों को देते थे।
  • उनका मानना था कि जीत-हार व्यक्तिगत नहीं, बल्कि देश की होती है।


इसी खेल भावना के कारण लोगों ने उन्हें 'हॉकी का जादूगर' कहा और वे दुनिया भर के खेल प्रेमियों के चहेते बने। उनकी यह भावना उनके कौशल और व्यक्तित्व का अभिन्न अंग थी।

 

मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. लांस नायक

1. स्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था।

2. बर्लिन ओलंपिक

2. भारतीय सेना का एक पद (रैंक) है।

3. पंजाब रेजिमेंट

3. सैनिकों के रहने का क्षेत्र।

4. सैंपर्स एंड माइनर्स टीम

4. वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल प्रति-योगिता, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया था।

5. सूबेदार

5. स्वतंत्रता से पहले अंग्रेजों की भारतीय सेना का एक दल

6. छावनी

6. अंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल

उत्तर

शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. लांस नायक

2. भारतीय सेना का एक पद (रैंक) है।

2. बर्लिन ओलंपिक

4. वर्ष 1936 में जर्मनी के बर्लिन शहर में आयोजित ओलंपिक खेल प्रति-योगिता, जिसमें 49 देशों ने भाग लिया था।

3. पंजाब रेजिमेंट

5. स्वतंत्रता से पहले अंग्रेजों की भारतीय सेना का एक दल।

4. सैंपर्स एंड माइनर्स टीम

6. अंग्रेजों के समय का एक हॉकी दल

5. सूबेदार

1. स्वतंत्रता से पहले सूबेदार भारतीय सैन्य अधिकारियों का दूसरा सबसे बड़ा पद था।

6. छावनी

3. सैनिकों के रहने का क्षेत्र।


  • 1. 2
  • 2. 4
  • 3. 5
  • 4. 6
  • 5. 1
  • 6. 3



पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

() “बुरा काम करने वाला आदमी हर समय इस बात से डरता रहता है कि उसके साथ भी बुराई की जाएगी।

उत्तर

उपरोक्त पंक्ति एक गहन जीवन सत्य को दर्शाती है। यह उस घटना से उपजी है जब एक प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी ने गुस्से में आकर ध्यानचंद पर हॉकी से वार किया। जब ध्यानचंद ने बदला लेने की बात कही, तो वह खिलाड़ी भयभीत हो गया। परंतु ध्यानचंद ने अपनी श्रेष्ठ खेल भावना का परिचय देते हुए हिंसा के बदले छह गोल करके अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

इस घटना से केवल खेल में, बल्कि जीवन में भी नैतिक मूल्यों और क्षमाशीलता के महत्व का पता चलता है। यह दर्शाता है कि सच्चा खिलाड़ी यह है जो अपने कौशल से जीतता है, कि दूसरों को नुकसान पहुंचाकर।


ध्यानचंद की यह क्रिया उनकी महानता और खेल के प्रति उनके समर्पण को प्रदर्शित करती है, जो उन्हें 'हॉकी का जादूगर' बनने में सहायक रही।

) “मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए। अपनी इसी खेल भावना के कारण मैंने दुनिया के खेल प्रेमियों का दिल जीत लिया।

उत्तर

मेजर ध्यानचंद की असाधारण खेल भावना और नेतृत्व गुण उनके इस कथन में स्पष्ट झलकते हैं। वे अपने व्यक्तिगत प्रदर्शन से ऊपर उठकर टीम के हित को सर्वोपरि रखते थे। उनकी यह रणनीति थी कि वे गेंद को गोल के निकट ले जाकर अपने साथी खिलाड़ियों को गोल करने का अवसर प्रदान करें। इस नि:स्वार्थ दृष्टिकोण से केवल टीम का मनोबल बढ़ता था, बल्कि प्रतिद्वंद्वियों को भी भ्रमित करने में मदद मिलती थी।

एक कुशल नेता की भांति, वे अपनी टीम के सदस्यों को आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका देते थे। यह रवैया खेल के सच्चे मर्म, टीम की सफलता और खेल के आनंद को प्रतिबिंबित करता है। उनकी इस विनम्र और टीम केंद्रित दृष्टिकोण ने उन्हें विश्व भर के खेल प्रेमियों का चहेता बना दिया, जो उन्हें हॉकी का जादूगर' कहलाने में एक महत्वपूर्ण कारक सिद्ध हुआ।


ध्यानचंद का यह व्यवहार केवल उनके खेल कौशल को, बल्कि उनके महान व्यक्तित्व को भी प्रदर्शित करता है, जो आज भी युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत है।


सोच-विचार के लिए

संस्मरण को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

() ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?

उत्तर (1)

ध्यानचंद की सफलता का रहस्य था उनकी खेल के प्रति सच्ची लगन, साधना और खेल भावना। उन्होंने जब हॉकी खेलना शुरू किया तो वे बिल्कुल नौसिखिए थे। धीरे-धीरे अभ्यास से उनके खेल में निखार आता गया और उनको तरक्की भी मिलती गई। हॉकी सीखने के लिए कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी वे निरंतर प्रयासरत रहे। 1936 में वे बर्लिन ओलंपिक टीम के कप्तान बने और अपने हॉकी खेलने के ढंग से लोगों को इतना प्रभावित किया किहॉकी के जादूगरकहलाए।

उत्तर (2)

मेजर ध्यानचंद की सफलता का रहस्य उनके अनूठे गुणों और दृष्टिकोण में निहित था।


  • लग्न और समर्पण: उन्होंने खेल के प्रति पूर्ण समर्पण दिखाया
  • निरंतर अभ्यास: वे लगातार अपने कौशल को निखारते रहते थे।
  • टीम भावना: व्यक्तिगत प्रसिद्धि से ऊपर उठकर टीम के हित को प्राथमिकता देते थे।
  • नेतृत्व कौशलः साधी खिलाड़ियों को गोल करने के अवसर देकर टीम का मनोबल बढ़ाते थे।
  • राष्ट्रीय भावना: उनका मानना था कि जीत हार व्यक्तिगत नहीं, बल्कि देश की होती है।
  • विनम्रता: अपनी प्रसिद्धि के बावजूद विनम्र रहे।
  • सकारात्मक दृष्टिकोण: प्रतिकूल परिस्थितियों में भी सकारात्मक रहते थे।
  • क्षमाशीलता: प्रतिद्वंद्वियों के साथ भी सद्भाव रखते थे।
  • नैतिक मूल्य: खेल में नैतिकता और खेल भावना को महत्व देते थे।
  • रणनीतिक सोच: खेल में कुशल रणनीति का प्रयोग करते थे।
  • अनुशासन: सैन्य पृष्ठभूमि के कारण कड़े अनुशासन का पालन करते थे।
  • प्रेरणादायक व्यक्तित्व: अपने व्यवहार से दूसरों को प्रेरित करते थे।



इन गुणों के समन्वय ने ध्यानचंद को केवल एक महान खिलाड़ी बल्कि 'हॉकी का जादूगर' बना दिया।


() किन बातों से ऐसा लगता है कि ध्यानचंद स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे?

उत्तर (1)

ध्यानचंद के व्यवहार और दृष्टिकोण से यह स्पष्ट होता है कि वे स्वयं से पहले दूसरों को महत्व देते थे।


  • टीम के लिए गोल: "मेरी तो हमेशा यह कोशिश रहती कि मैं गेंद को गोल के पास ले जाकर अपने किसी साथी खिलाड़ी को दे दूँ ताकि उसे गोल करने का श्रेय मिल जाए "
  • राष्ट्रीय भावना: "खेलते समय मैं हमेशा इस बात का ध्यान रखता था कि हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।"
  • क्षमाशीलता: जब एक खिलाड़ी ने उन्हें चोट पहुंचाई, तो उन्होंने बदले में उसे चोट नहीं पहुंचाई, बल्कि खेल से जवाब दिया।
  • साथी खिलाड़ियों का मनोबल: वे अपने साथी खिलाड़ियों को गोल करने का मौका देकर उनका मनोबल बढ़ाते थे।
  • विनम्रता: अपनी प्रसिद्धि के बावजूद, वे हमेशा टीम को श्रेय देना चाहते थे।



उत्तर (2)

यह कथन सत्य है कि ध्यानचंद स्वयं से पहले दूसरों को रखते थे। वे गेंद को अपने साथियों के पास ले जाते थे ताकि वे गोल कर सकें। जीत का श्रेय केवल स्वयं लेकर टीम को देना चाहते थे। दूसरी ओर इस बात का भी सदा ध्यान रखते थे कि हार या जीत उनकी नहीं पूरे देश की हो। जो यह दर्शाता है कि वे सच्चे देशप्रेमी थे।


संस्मरण की रचना

उन दिनों में मैं, पंजाब रेजिमेंट की ओर से खेला करता था

इस वाक्य को पढ़कर ऐसा लगता है मानो लेखक आपसे यानी पाठक से अपनी यादों को साझा कर रहा है। ध्यान देंगे तो इस पाठ में ऐसी और भी अनेक विशेष बातें आपको दिखाई देंगी। इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए

() अपने-अपने समूह में मिलकर इस संस्मरण की विशेषताओं की सूची बनाइए।

उत्तर

गोल संस्मरण की विशेषताएं-


  • प्रेरणादायक कहानी: यह संस्मरण मेजर ध्यानचंद के जीवन से एक प्रेरणादायक घटना बताता है।
  • खेल भावना का महत्व: इसमें खेल में अच्छे व्यवहार और सही भावना का महत्व दिखाया गया है।
  • व्यक्तिगत अनुभव: ध्यानचंद अपने निजी अनुभवों को साझा करते हैं।
  • सरल भाषा: कहानी सरल और समझने योग्य भाषा में लिखी गई है।
  • मूल्य शिक्षा: इसमें क्षमा, धैर्य और टीम भावना जैसे मूल्यों की शिक्षा दी गई है।
  • ऐतिहासिक जानकारी: इसमें ओलंपिक और भारतीय हॉकी के इतिहास की झलक मिलती है।
  • आत्मकथात्मक शैली: ध्यानचंद पहले व्यक्ति के दृष्टिकोण से कहानी सुनाते हैं।
  • संक्षिप्त और रोचक: कहानी छोटी पर दिलचस्प है, जो बच्चों के लिए उपयुक्त है।





() अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तर

विद्यार्थी के स्वयं करने योग्य।


शब्दों के जोड़े, विभिन्न प्रकार के

() जैसे-जैसे मेरे खेल में निखार आता गया, वैसे-वैसे मुझे तरक्की भी मिलती गई।

इस वाक्य मेंजैसे-जैसेऔरवैसे-वैसेशब्दों के जोड़े हैं जिनमें एक ही शब्द दो बार उपयोग में लाया गया है। ऐसे जोड़ों कोशब्द-युग्मकहते हैं। शब्द-युग्म में दो शब्दों के बीच में छोटी-सी रेखा लगाई जाती है जिसे योजक चिह्न कहते हैं। योजक यानी जोड़ने वाला। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए।

उत्तर

() धीरे-धीरे

() बार-बार

() जल्दी-जल्दी

() कभी-कभी

() देखते-देखते

) “खेल के मैदान में धक्का-मुक्की और नोंक-झोंक की घटनाएँ होती रहती हैं।

इस वाक्य में भी आपको दो शब्द-युग्म दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इन शब्द-युग्मों के दोनों शब्द भिन्न-भिन्न हैं, एक जैसे नहीं हैं। आप भी ऐसे पाँच शब्द-युग्म लिखिए जिनमें दोनों शब्द भिन्न-भिन्न हों।

उत्तर

() ज्यों-ज्यों नदी का जल बढ़ता गया, त्यों-त्यों लोग गाँव छोड़कर जाते रहे।

() ध्यानचंद के लिए हार-जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण था खेल भावना को बनाये रखना। 

() मेजर तिवारी बार-बार मुझे हॉकी खेलने के लिए कहते।

() जब-जब देश पर विपदा आती है, तब-तब सरकार सहायता अवश्य करती है।

() ध्यानचंद झटपट-झटपट गोल करके विरोधी टीम को हैरान क्र देते थे।


() हार या जीत मेरी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।
आज मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे बूढ़े मुझे घेर लेते हैं।

इन वाक्यों में जिन शब्दों के नीचे रेखा खिंची है, उन्हें ध्यान से पढ़िए। हम इन शब्दों को योजक की सहायता से भी लिख सकते हैं, जैसे- हार-जीत, बच्चे-बूढ़े आदि

आप नीचे दिए गए शब्दों को योजक की सहायता से लिखिए

उत्तर

  • अच्छा या बुरा
    उत्तर
    अच्छा-बुरा
  • छोटा या बड़ा
    उत्तर
    छोटा-बड़ा
  • अमीर और गरीब
    उत्तर
    अमीर-गरीब
  • उत्तर और दक्षिण
    उत्तर
    उत्तरदक्षिण
  • गुरु और शिष्य
    उत्तर
    गुरु-शिष्य
  • अमृत या विष
    उत्तर
    अमृत-विष


बात पर बल देना

मैंने तो अपना बदला ले ही लिया है।
मैंने तो अपना बदला ले लिया है।

इन दोनों वाक्यों में क्या अंतर है? ध्यान दीजिए और बताइए। सही पहचाना ! दूसरे वाक्य में एक शब्द कम है। उस एक शब्द के होने से वाक्य के अर्थ में भी थोड़ा अंतर गया है।


हम अपनी बात पर बल देने के लिए कुछ विशेष शब्दों का प्रयोग करते हैं जैसे— ‘ही’, ‘भी’, ‘तोआदि। पाठ में से इन शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए। ध्यान दीजिए कि यदि उन वाक्यों में ये शब्द होते तो उनके अर्थ पर इसका क्या प्रभाव पड़ता।

उत्तर

बात पर बल देने वाले शब्दनिपातकहलाते हैं।

() मेरे इतना कहते ही खिलाड़ी घबरा गया।
(
) अब हर समय मुझे ही देखते रहना
(
) अगर तुम मुझे हॉकी नहीं मारते तो शायद मैं तुम्हें दो ही गोल से हराता
(
) तो देखा आपने मेरा बदला लेने का ढंग
(
) उसके साथ भी बुराई की जाएगी।
(
) मैं जहाँ भी जाता हूँ बच्चे बूढ़े मुझे घेर लेते हैं।
(
) लगन, साधना और खेल भावना ही सफलता का सबसे बड़ा मूलमंत्र है।

यदि वाक्यों मेंही’ ‘भी’ ‘तोआदि शब्दों का प्रयोग किया जाए तो ये सामान्य वाक्य का रूप ले लेते हैं और ये शब्द वाक्य को प्रभावी बनाते हैं।

पाठ से आगे

आपकी बात

() ध्यानचंद के स्थान पर आप होते तो क्या आप बदला लेते? यदि हाँ, तो बताइए कि आप बदला किस प्रकार लेते?

उत्तर

यदि मैं ध्यानचंद के स्थान पर होता तो मुझे अपने प्रतिद्वंदी पर क्रोध तो आता और पलटकर बदला लेने की इच्छा भी होती। एक खिलाड़ी होने के नाते स्वयं पर संयम रखता क्योंकि हार-जीत होना खेल का नियम होता है।

मैं भी ऐसा ही करता

  1. शांत रहकर अपने खेल पर ध्यान देता।
  2. टीम के साथ मिलकर अच्छा प्रदर्शन करता
  3. ज्यादा गोल करके अपनी योग्यता साबित करता।
  4. खेल के बाद उस खिलाड़ी से दोस्ती से बात करता।
  5. उसे समझाता कि गुस्सा करना अच्छा नहीं होता।


इस तरह मैं बिना किसी को चोट पहुंचाए अपनी श्रेष्ठता दिखा सकता था। यह तरीका खेल भावना के अनुकूल होता और दूसरों के लिए एक अच्छा उदाहरण बन सकता था।


() आपको कौन-से खेल और कौन-से खिलाड़ी सबसे अधिक अच्छे लगते हैं? क्यों?

उत्तर

मुझे फुटबॉल, एथलेटिक्स, और भाला फेंक खेल बहुत पसंद हैं। इन खेलों में सुनील छेत्री, हिमा दास और नीरज चोपड़ा

मेरे पसंदीदा खिलाड़ी हैं।

सुनील छेत्री:


  • वे भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान हैं।
  • उन्होंने कड़ी मेहनत से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाया है।
  • वे युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा हैं।


हिमा दास:


  • वे 400 मीटर दौड़ की चैंपियन हैं।
  • उन्होंने छोटी उम्र में ही कई पदक जीते हैं।
  • वे असम से आकर पूरे देश का नाम रोशन कर रही हैं।


नीरज चोपड़ा


  • उन्होंने 2020 के टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता, जो एथलेटिक्स में भारत का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक है।
  • वे दिखाते हैं कि कड़ी मेहनत और समर्पण से कोई भी अपने लक्ष्य को पा सकता है।
  • उन्होंने भारत को एथलेटिक्स में नई पहचान दिलाई
  • वे युवाओं को खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।


मुझे ये खिलाड़ी इसलिए पसंद हैं क्योंकि वे अपने लक्ष्य के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और देश का नाम ऊंचा करते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि अगर हम अपने सपनों के लिए मेहनत करें, तो हम भी सफल हो सकते हैं।


समाचार-पत्र से

() क्या आप समाचार-पत्र पढ़ते हैं? समाचार-पत्रों में प्रतिदिन खेल के समाचारों का एक पृष्ठ प्रकाशित होता है। अपने घर या पुस्तकालय से पिछले सप्ताह के समाचार पत्रों को देखिए। अपनी पसंद का एक खेल-समाचार अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

() मान लीजिए कि आप एक खेल संवाददाता हैं और किसी खेल का आँखों देखा प्रसारण कर रहे हैं। अपने समूह के साथ मिलकर कक्षा में उस खेल का आँखों देखा हाल प्रस्तुत कीजिए। (संकेतइस कार्य में आप आकाशवाणी या दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले खेल-प्रसारणों की कमेंटरी की शैली का उपयोग कर सकते हैं। बारी-बारी से प्रत्येक समूह कक्षा में सामने डेस्क या कुर्सियों पर बैठ जाएगा और पाँच मिनट के लिए किसी खेल के सजीव प्रसारण की कमेंटरी का अभिनय करेगा।)

उत्तर

मनोरंजन एवं बौद्धिक भाग विद्यार्थियों के स्वयं करने योग्य


डायरी का प्रारंभ

कुछ लोग प्रतिदिन थोड़ी-थोड़ी बातें किसी स्थान पर लिख लेते हैं। जो वे सोचते हैं, या जो उनके साथ उस दिन हुआ या जो उन्होंने देखा, उसे ईमानदारी से लिख लेते हैं या टाइप कर लेते हैं। इसे डायरी लिखना कहते हैं।
क्या आप भी अपने मन की बातों और विचारों को लिखना चाहते हैं? यदि हाँ, तो आज से ही प्रारंभ कर दीजिए

  • आप जहाँ लिखेंगे, वह माध्यम चुन लीजिए। आप किसी लेखनपुस्तिका में या ऑनलाइन मंचों पर लिख सकते हैं।
  • आप प्रतिदिन, कुछ दिनों में एक बार या जब कुछ लिखने का मन करे तब लिख सकते हैं।
  • शब्दों या वाक्यों की कोई सीमा नहीं है चाहे दो वाक्य हों या दो पृष्ठ आप जो मन में आए उसे उचित और शालीन शब्दों में लिख सकते हैं।

आज की पहेली

यहाँ एक रोचक पहेली दी गई है। इसमें आपको तीन खिलाड़ी दिखाई दे रहे हैं। आपको पता लगाना है कि कौन-से खिलाड़ी द्वारा गोल किया जाएगा-

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उत्तर

नीली स्कर्ट पहने हुए लड़की गोल करेगी।


झरोखे से

आपने भारत के राष्ट्रीय खेल हॉकी के बारे में बहुत-कुछ बात की होगी। अब हम हॉकी जैसे ही अनोखे खेल के बारे में पढ़ेंगे जिसे आप जैसे लाखों बच्चे अपने गली-मुहल्लों में खेलते हैं। इस खेल का नाम हैडाँडी या गोथा।


डाँडी या गोथा

यह भील-भिलाला बच्चों का खेल है।डाँडीऔरगोथाशब्द का अर्थ एक ही है- खेलने की हाथ-लकड़ी। देखा जाए तो यह खेल काफी-कुछ हमारे राष्ट्रीय खेल हॉकी जैसा है। अंतर बस इतना है कि हॉकी में गोल करने के लिए गोलपोस्ट होते हैं, जबकि इस खेल में ऐसा कोई निर्धारण नहीं है। दूसरा अंतर यह है कि भील-भिलाला बच्चों की यह गेंद, हॉकी की अपेक्षा एकदम साधारण होती है। यह बाँस की बनी होती है।

खेल सामग्री

  1. बाँस के गुट्टे की गेंद जिसेदुईतकहते हैं।
  2. गोथायानी अंग्रेजी के ‘L’ अक्षर की तरह नीचे से मुड़ी हुई बाँस की डंडियाँ।
  3. राख से खेल के मैदान में सीमांकन करना और घेरे के भीतर एक छोटा वृत्त बनाना।

कैसे खेलें

  1. वैसे तो इसे चाहे जितने खिलाड़ी खेल सकते हैं, मगर दोनों दलों में कम से कम दो-दो खिलाड़ी हों।
  2. टॉस करना। टॉस जीतने वाला दल खेल प्रारंभ करेगा।
  3. गेंद को छोटे घेरे या वृत्त में रखना। हमला करने वाले दल के खिलाड़ी खेल प्रारंभ होते ही बॉल को पीटते हुए बचाव दल के दायरे में दूर तक ले जाना चाहते हैं।
  4. दोनों दलों के एक-एक खिलाड़ी अपनी-अपनी तरफ कीडीमें खड़े रहते हैं। वे प्रयास करते हैं कि गेंद रेखा पार करे।
  5. खिलाड़ी डाँडी या गोथा के दोनों ओर से खेल सकते हैं, जबकि ऐसी सुविधा हॉकी के खेल में नहीं है।
  6. बाकी सारा खेल हॉकी के खेल के समान होता है। प्रश्न उठता है कि इस खेल में गोलपोस्ट नहीं होते यानी गोल करने का मामला नहीं बनता, तो हार-जीत निर्णय कैसे किया जाता है? उत्तर यह है कि जो दल गेंद को अधिक से अधिक बार विरोधी के पाले में ढकेलता है, वही बलवान है और इसलिए विजयी भी।
  7. खेल के दो विशेष नियम हैं। पहला, गेंद को शरीर के किसी भी अंग से छूना, रोकना। दूसरा, गेंद को हवाई शॉट मारना और उसे हवा में शॉट खेलकर साथी खिलाड़ी को पास देना। बाकी लकड़ी से आप गेंद को रोक सकते हैं या हिट कर सकते हैं। आगे जैसा कि बता चुके हैं, जो दल बीच की रेखा को पार करके विरोधी दल के क्षेत्र में अधिक से अधिक दबाव या प्रवेश बनाए रखता है, वह विजयी होता है।
    विशेषयह खेल होली का त्योहार आने के कुछ दिन पहले से खेला जाता है। अंत में जिस दिन होलिका जलाई जाती है, उस दिन ये दुइत और गोथे (गेंद और डंडे) आग में डाल दिए जाते हैं।



साझी समझ

() आपने इस खेल के नियम पढ़कर अच्छी तरह समझ लिए हैं। अब अपने मित्रों के साथ मिलकरडाँडीयागोथाखेल खेलिए


() आप भीडाँडीयागोथाजैसे अनेक स्वदेशी खेल अपने मित्रों के साथ मिलकर अपने विद्यालय, घर या मोहल्ले में खेलते होंगे। अब आप ऐसे ही किसी एक खेल के नियम इस प्रकार से लिखिए कि उन्हें पढ़कर कोई भी बच्चा उस खेल को समझ सके और खेल सके।

उत्तर

खेल - कबड्डी और उसके नियम

खिलाड़ी:


  • दो टीमें, प्रत्येक में 7 खिलाड़ी।
  • 5 अतिरिक्त खिलाड़ी बदलने के लिए।


मैदान:


  • आयताकार मैदान, बीच में एक रेखा
  • हर टीम का अपना आधा हिस्सा।


समय:


  • दोहा, प्रत्येक 20 मिनट का
  • बीच में 5 मिनट का विश्राम।


खेल का तरीका:


  • एक टीम से एक 'रेडर' दूसरी टीम के क्षेत्र में जाता है।
  • रेडर को "कबड्डी-कबड्डी" बोलते रहना होता है। 
  • रेडर को विरोधी खिलाड़ियों को छूना है।
  • विरोधी टीम रेडर को पकड़ने की कोशिश करती है।


अंकः


  • रेडर छूकर वापस आए- 1 अंक प्रति छुए खिलाड़ी।
  • रेडर पकड़ा गया- विरोधी टीम को 1 अंक।
  • सभी विरोधी खिलाड़ी आउट- 2 अतिरिक्त अंक


आउट होना:


  • रेडर बिना छुए या पकड़े जाए।
  • खिलाड़ी मैदान से बाहर जाए।
  • सांस रोकना बंद करे।


जीत:


  • अधिक अंक वाली टीम जीतती है।



खोजबीन के लिए

नीचे ध्यानचंद जी के विषय में कुछ सामग्री दी गई है जैसेफिल्में, साक्षात्कार आदि, इन्हें पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें समझें।

  • हॉकी के जादूगरमेजर ध्यानचंदप्रेरक गाथाएँ
  • हॉकी के जादूगर- मेजर ध्यानचंद
  • ओलंपिक
  • मेजर ध्यानचंद से साक्षात्कार


पढ़ने के लिए


एक दौड़ ऐसी भी

कई साल पहले ओलंपिक खेलों के दौरान एक विशेष दौड़ होने जा रही थी। सौ मीटर की इस दौड़ में एक आश्चर्यजनक घटना हुई। नौ प्रतिभागी आरंभिक रेखा पर तैयार खड़े थे। उन सभी को कोई--कोई शारीरिक विकलांगता थी।

सीटी बजी, सभी दौड़ पड़े। बहुत तीव्र तो नहीं, पर उनमें जीतने की होड़ अवश्य तेज़ थी। सभी जीतने की उत्सुकता के साथ आगे बढ़े। सभी, बस एक छोटे से लड़के को छोड़कर। तभी छोटा लड़का ठोकर खाकर लड़खड़ाया, गिरा और रो पड़ा।

उसकी पुकार सुनकर बाकी प्रतिभागी दौड़ना छोड़ देखने लगे कि क्या हुआ? फिर एक-एक करके वे सब उस बच्चे की सहायता के लिए उसके पास आने लगे। सब के सब लौट आए। उसे दोबारा खड़ा किया। उसके आँसू पोंछे, धूल साफ़ की। वह छोटा लड़का एक ऐसी बीमारी से ग्रस्त था, जिसमें शरीर के अंगों की बढ़त धीमी होती है और उनमें तालमेल की कमी भी रहती है।


फिर तो सारे बच्चों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़ा और साथ मिलकर दौड़ लगाई और सब के सब अंतिम रेखा तक एक साथ पहुँच गए। दर्शक मंत्रमुग्ध होकर देखते रहे, इस प्रश्न के साथ कि सब के सब एक साथ यह दौड़ जीते हैं, इनमें से किसी एक को स्वर्ण पदक कैसे दिया जा सकता है? निर्णायकों ने सबको स्वर्ण पदक देकर समस्या का बढ़िया हल ढूँढ़ निकाला। उस दिन मित्रता का अनोखा दृश्य देख दर्शकों की तालियाँ थमने का नाम नहीं ले रही थीं।


Chapter 3 पहली बूँद Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

() नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए-

1. कविता मेंनव-जीवन की ले अँगड़ाईकिसके लिए प्रयुक्त हुआ है?


  • बादल
  • अंकुर
  • बूँद
  • पावस


उत्तर

अंकुर ()


2. ‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली से ये जलधरमेंकाली पुतलीहै-

  • बारिश की बूँदें
  • वृद्ध धरती
  • नगाड़ा
  • बादल

उत्तर


बारिश की बूँदें


() अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर क्यों चुने?

उत्तर

"अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई" - यह पंक्ति स्पष्ट रूप से अंकुर के बारे में बात करती है।


"काली पुतली-से ये जलधर" - यहाँ जलधर का अर्थ बादल है, जो काली आँखों की पुतली के समान दिखते हैं।


मिलकर करें मिलान

कविता की कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों में कुछ शब्द रेखांकित हैं। दाहिनी ओर रेखांकित शब्दों के भावार्थ दिए गए हैं। इनका मिलान कीजिए।

कविता की पंक्तियाँ

भावार्थ

1. आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर

1. मेघ गर्जना

2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई

2. बादल

3. नीले नयनों सा यह अम्बर, काली पुतली-से ये जलधर

3. हरी दूब

4. वसुंधरा की रोमावलि -सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई।

4. आकाश

उत्तर

कविता की पंक्तियाँ

भावार्थ

1. आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर

2. बादल

2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई

1. मेघ गर्जना

3. नीले नयनों सा यह अम्बर, काली पुतली-से ये जलधर

4. आकाश

4. वसुंधरा की रोमावलि -सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई।

3. हरी दूब

1 2
2 1
3 4
4 3


पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर,
जा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई

उत्तर

बादलों का विशाल समूह आकाश में सागर की तरह फैला हुआ दिखता है। जैसे सागर में पानी होता है, वैसे ही बादलों में भी पानी भरा होता है।

बिजली की चमक को सुनहरे (स्वर्णिम ) पंखों के रूप में दर्शाया गया है। मानो बादल रूपी सागर में सुनहरे पंख वाली मछलियाँ तैर रही हों।

बादलों की गड़गड़ाहट को नगाड़े के बजने से तुलना दी गई है। यह ध्वनि प्रभाव को दर्शाता है, जो बारिश के आगमन की घोषणा करता है।

बादल धरती की युवावस्था को जगा रहे हैं। यह दर्शाता है कि बारिश धरती को नया जीवन और ताजगी देती है।

समग्र भावः


  • ये पंक्तियाँ बारिश के आगमन के दृश्य को बहुत जीवंत तरीके से चित्रित करती हैं।
  • आकाश में छाए बादल, चमकती बिजली, और गरजते मेघ - ये सब मिलकर एक रोमांचक माहौल बनाते हैं।
  • यह दृश्य केवल आँखों को आनंद देता है, बल्कि प्रकृति के नवीनीकरण का संकेत भी देता है।




नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर।
करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की चिर-प्यास बुझाई।

उत्तर

नीला आसमान नीली आँखों के समान है और काले बादल उन नीली-नीली आँखों की काली पुतली के समान है। मानो बादल धरती के दुःखों से दुखित होकर वर्षा रूपी आँसू बहा रहा हो। इस प्रकार धरती की प्यास बुझ जाती है।


समग्र भाव और विश्लेषणः


  • मानवीकरण: कवि ने प्राकृतिक तत्वों को मानवीय गुण दिए हैं। आकाश को आँख, बादलों को पुतली, और बारिश को आँसू के रूप में दर्शाया गया है।
  • भावनात्मक संबंध: इन उपमाओं के माध्यम से कवि प्रकृति और मानव के बीच एक भावनात्मक संबंध स्थापित करता है। प्रकृति का चक्र: ये पंक्तियाँ प्रकृति के चक्र को दर्शाती हैं - कैसे आकाश, बादल और बारिश मिलकर धरती की प्यास बुझाते हैं।
  • करुणा का भाव: बारिश को 'करुणा-विगलित अश्रु' कहकर कवि यह दर्शाता है कि प्रकृति धरती के प्रति दयालु है।
  • चित्रात्मक प्रस्तुति: कवि ने शब्दों के माध्यम से एक जीवंत दृश्य प्रस्तुत किया है, जिसमें पाठक आकाश, बादल और बारिश का चित्र अपने मन में साकार कर सकता है।



सोच-विचार के लिए

कविता को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए

बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है?

उत्तर

धरती के सूखे होंठों पर बारिश की बूँद अमृत के समान गिरती है, मानो वर्षा होने से बेजान और सूखी पड़ी धरती को नवीन जीवन ही मिल गया हो। इस प्रकार बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष प्रकट होता है।


कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?

उत्तर

प्रस्तुत कविता के अनुसार, नीले आकाश को नीली आँखों के समान और काले बादल को उन नीली-नीली आँखों की काली पुतली के समान बताया गया है।

कविता की रचना

आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर कविता की इस पंक्ति का सामान्य अर्थ देखें तो समुद्र का आकाश में उड़ना असंभव होता है। लेकिन जब हम इस पंक्तिका भावार्थ समझते हैं तो अर्थ इस प्रकार निकलता हैसमुद्र का जल बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है। ऐसे प्रयोग केवल कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि उसे आनंददायक भी बनाते हैं।

इस कविता में ऐसे दृश्यों को पहचानें और उन पर चर्चा करें।

उत्तर

'अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई"

धरती से अंकुर का निकलना और उसे नव-जीवन की अंगड़ाई लेते हुए दिखाया गया है। यह दृश्य प्रकृति में नए जीवन के जन्म और विकास को मानवीय क्रियाओं के माध्यम से दर्शाता है।

"हरी दूब पुलकी-मुसकाई"

हरी घास को मुस्कुराते हुए दिखाया गया है। यह दृश्य प्रकृति के जीवंत होने और खुशी व्यक्त करने का भाव प्रस्तुत करता है।

"नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर"

आकाश को नीली आँखों के रूप में और बादलों को काली पुतलियों के रूप में चित्रित किया गया है। यह दृश्य प्राकृतिक तत्वों को मानवीय अंगों से जोड़कर एक अनूठा और कल्पनाशील चित्र प्रस्तुत करता है।

"करुणा-विगलित 'अश्रु बहाकर"

बारिश की बूँदों को करुणा से भरे आँसुओं के रूप में दर्शाया गया है। यह दृश्य बारिश को एक भावनात्मक रूप देता है, जो धरती के प्रति सहानुभूति दर्शाता है।

"बूढ़ी धरती शस्य-श्यामला बनने को फिर से ललचाई"

धरती को एक बूढ़ी महिला के रूप में दर्शाया गया है जो फिर से युवा और हरी-भरी होने के लिए लालायित है। यह दृश्य प्रकृति के पुनर्जन्म और नवीनीकरण की प्रक्रिया को मानवीय इच्छाओं के रूप में प्रस्तुत करता है।


शब्द एक अर्थ अनेक

अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाईकविता की इस पंक्ति मेंफूटनेका अर्थ पौधे का अंकुरण है।फूटका प्रयोग अलग-अलग अर्थों में किया जाता है, जैसेफूट डालना, घड़ा फूटना आदि। अब फूट शब्द का प्रयोग ऐसे वाक्यों में कीजिए जहाँ इसके भिन्न-भिन्न अर्थ निकलते हों, जैसेअंग्रेज़ों की नीति थी फूट डालो और राज करो।

उत्तर

  1. दोस्तों में फूट पड़ गई।
  2. उसका सिर फूट गया।
  3. धरती से जल की धारा फूट पड़ी।
  4. दीवार से टकराते ही उसकी एक आँख फूट गई।


अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली से ये जलधरकविता की इस पंक्ति मेंजलधरशब्द आया है।जलधरदो शब्दों से बना है, जल और धर इस प्रकार जलधर का शाब्दिक अर्थ हुआ जल को धारण करने वाला। बादल और समुद्र; दोनों ही जल धारण करते हैं। इसलिए दोनों जलधर हैं। वाक्य के संदर्भ या प्रयोग से हम जान सकेंगे कि जलधर का अर्थ समुद्र है या बादल।

शब्दकोश या इंटरनेट की सहायता सेधरसे मिलकर बने कुछ शब्द और उनके अर्थ ढूँढ़कर लिखिए।

उत्तर

शब्दअर्थ
चक्रधरचक्र को धारण करने वाला अर्थात विष्णु
हलधरहल को धारण करने वाला अर्थात बलराम
गिरिधरपर्वत को धारण करने वाला अर्थात कृष्ण
मुरलीधरमुरली को धारण करने वाला अर्थात कृष्ण


शब्द पहेली

दिए गए शब्दजाल में प्रश्नों के उत्तर खोजें-

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उत्तर

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. एक प्रकार का वाद्य यंत्र ……
उत्तर
नगाड़ा

. आँख के लिए एक अन्य शब्द ……
उत्तर
नयन

. जल को धारण करने वाला ……
उत्तर
जलधर

. एक प्रकार की घास ……
उत्तर
दूब

. आँसू का समानार्थी ……
उत्तर
अश्रु

. आसमान का समानार्थी शब्द ……
उत्तर
अंबर

पाठ से आगे

आपकी बात

बारिश को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव भिन्न होता है। बारिश आने पर आपको कैसा लगता है ? बताइए |

उत्तर

मुझे बारिश का मौसम बहुत पसंद है। जब पहली बूँदें गिरती हैं, तो मिट्टी की सुगंध मुझे बहुत भाती है। बारिश की रिमझिम ध्वनि मन को शांत करती है। हालाँकि, कभी-कभी तेज बारिश से सड़कों पर पानी भर जाता है, जो चलने-फिरने में परेशानी पैदा करता है। फिर भी, बारिश के बाद का ताजा माहौल और हरी-भरी प्रकृति देखकर मन प्रसन्न हो जाता है।


आपको कौन-सी ऋतु सबसे अधिक प्रिय है और क्यों? बताइए।

उत्तर

मुझे वसंत ऋतु सबसे अधिक प्रिय है। इसके कई कारण हैं:


  • मौसम बहुत सुहावना होता है, ज्यादा गर्मी और ही ज्यादा ठंड
  • चारों रंग-बिरंगे फूल खिलते हैं, जो प्रकृति को सुंदर बना देते हैं।
  • पेड़ों पर नई कोंपलें निकलती हैं, जो नए जीवन का संकेत देती हैं।
  • इस मौसम में कई त्योहार जैसे होली आते हैं, जो खुशियाँ लाते हैं।
  • पक्षियों का कलरव सुनाई देता है, जो मन को प्रसन्न कर देता है।



समाचार माध्यमों से

प्रत्येक मौसम समाचार के विभिन्न माध्यमों (इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंट या सोशल मीडिया) के प्रमुख समाचारों में रहता है। संवाददाता कभी बाढ़ तो कभी सूखे या भीषण ठंड के समाचार देते दिखाई देते हैं। आप भी बन सकते हैं संवाददाता या लिख सकते हैं समाचार |

  • अत्यधिक गर्मी, सर्दी या बारिश में आपने जो स्थिति देखी है का आँखों देखा हाल अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए
    उत्तर
    पिछले गर्मियों में, जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया था, मैंने देखा
    सड़कें सूनी थीं, लोग घरों में ही रहना पसंद कर रहे थे।
    कुछ लोग जो बाहर थे, वे छाते या टोपी का उपयोग कर रहे थे।
    पशु-पक्षी छाया में आराम कर रहे थे, कुत्ते जीभ बाहर निकाले हाँफ रहे थे।
    गर्म हवाएँ चल रही थीं, जो धूल भी उड़ा रही थीं।
    लोग ठंडे पेय पदार्थों और आइसक्रीम की दुकानों पर भीड़ लगा रहे थे।
    कई जगहों पर बिजली की कटौती के कारण लोग परेशान दिख रहे थे।


सृजन

नाम देना भी सृजन है। ऊपर दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और इसे एक नाम दीजिए


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उत्तर

रेगिस्तानी लिली या मरुस्थल का जीवन


इन्हें भी जानें

इस कविता में नगाड़े की ध्वनि का उल्लेख है- “बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई नगाड़ा भारत का एक पारंपरिक वाद्ययंत्र है। कुछ वाद्ययंत्रों को उन पर चोट कर बजाया जाता है, जैसेढोलक, नगाड़ा, डमरू, डफली आदि नगाड़ा प्रायः लोक उत्सवों के अवसर पर बजाया जाता है। होली जैसे लोकपर्व के अवसर पर गाए जाने वाले गीतों में इसका प्रयोग होता है। नगाड़ों को जोड़े में भी बजाया जाता है जिसमें एक की ध्वनि पतली तथा दूसरे की मोटी होती है।

उत्तर

परीक्षोपयोगी नहीं


खोजबीन

आपके यहाँ उत्सवों में कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं? उनके बारे में जानकारी एकत्र करें और अपने समूह में उस पर चर्चा करें।

उत्तर

ढोलक, नगाड़ा, डमरू, डफली, तबला, हारमोनियम, गिटार आदि


आइए इंद्रधनुष बनाएँ

बारिश की बूँदें केवल जीव-जंतुओं को राहत पहुँचाती हैं बल्कि धरती को हरा-भरा भी बनाती हैं। कभी-कभी ये बूँदें आकाश में बहुरंगी छटा बिखेरती हैं जिसेइंद्रधनुषकहा जाता है। आप भी एक सुंदर इंद्रधनुष बनाइए और उस पर एक छोटी-सी कविता लिखिए। इसे कोई प्यारा सा नाम भी दीजिए।

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उत्तर

"सात रंगों की सीढ़ी,

आसमान में दिखी।

लाल, नारंगी, पीला,

हरा, नीला, जामुनी, बैंगनी,

हर रंग अपनी कहानी कहे,

बारिश के बाद यह दृश्य महके

इंद्रधनुष ने मन मोह लिया,


प्रकृति ने अद्भुत चित्र बनाया।"


झरोखे से

एक बूँद

ज्यों निकल कर बादलों की गोद से
थी अभी एक बूँद कुछ आगे बढ़ी
सोचने फिर-फिर यही मन में लगी
आह! क्यों घर छोड़कर मैं यों बढ़ी।
अयोध्या सिंह उपाध्यायहरिऔध


Chapter 4 हार की जीत Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

() नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए

1. सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ?

  • बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया।
  • बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया।
  • बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया।
  • बाबा भारती असावधान हो गए।


उत्तर

बाबा भारती असावधान हो गए। ()


2. “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है?


  • बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया।
  • बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे।
  • बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था।
  • बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।


उत्तर

बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया। ()


() अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

बाबा भारती ने घोड़े को खो दिया, तो अब उन्हें चोरी का डर नहीं रहा  प्रशंसा चाहना एक सामान्य मानवीय भावना है, जो यह दर्शाता है कि बाबा भारती भी सामान्य मनुष्यों की तरह भावनाओं से युक्त थे।


शीर्षक

() आपने अभी जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम सुदर्शन नेहार की जीतरखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।

उत्तर

यह शीर्षक इसलिए उपयुक्त है क्योंकि :


  • खड्गसिंह की हार (उसके द्वारा घोड़े को वापस करना) वास्तव में उसकी नैतिक जीत थी।
  • बाबा भारती की भौतिक हार (घोड़े को खोना) उनकी आध्यात्मिक जीत में बदल गई।
  • यह दर्शाता है कि कभी-कभी हार में भी जीत छिपी होती है।




() यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए

उत्तर

1. डाकू का हृदय परिवर्तन

कारण: बाबा भारती ने कहा था कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट करना। लोगों को यदि इस घटना का पता चला तो वे किसी गरीब पर विश्वास करेंगे। तभी खड्गसिंह का हृदय परिवर्तन हुआ और पुन: घोड़े को बाबा भारती को वापस दे दिया।


2. 'परिवर्तन का चमत्कार' या 'करुणा की शक्ति'


कारण: ये शीर्षक खड्गसिंह के चरित्र में आए बदलाव और बाबा भारती की करुणा के प्रभाव को दर्शाते हैं।


() बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?

उत्तर

बाबा भारती ने खड्गसिंह से वचन लिया कि वह इस घटना को किसी के सामने प्रकट नहीं करेगा। उन्होंने कहा, "मेरी प्रार्थना केवल यह है कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट करना। "


पंक्तियों पर चर्चा

कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए-

  • भगवत भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।
  • बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से
  • वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।
  • बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।
  • उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।

उत्तर


  • भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।
    अर्थ - यह पंक्ति बाबा भारती के घोड़े के प्रति गहरे लगाव को दर्शाती है। वे अपना अधिकांश समय भगवान की भक्ति में बिताते थे, और शेष समय पूरी तरह से घोड़े की देखभाल में।
  • "बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से "
    अर्थ - यह वाक्य दोनों पात्रों की मनोदशा को दर्शाता है। बाबा को अपने घोड़े पर गर्व था, जबकि खड्गसिंह घोड़े की असाधारण सुंदरता से चकित था।
  • "वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।"
    अर्थ- यह वाक्य खड्गसिंह के चरित्र की मूल प्रवृत्ति को दर्शाता है। वह अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था।
  • "बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।"
    अर्थ - यह वाक्य बाबा भारती की असहायता और दुःख को व्यक्त करता है। वे जानते हैं कि वे खड्गसिंह को रोक नहीं सकते, इसलिए वे अपने प्रिय घोड़े को खोने की पीड़ा महसूस कर रहे हैं।
  • "उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।"
    अर्थ - यह वाक्य बाबा भारती की आदत और वर्तमान स्थिति के बीच के अंतर को दर्शाता है। वे अनजाने में घोड़े की देखभाल करने जा रहे थे, लेकिन फिर उन्हें याद आया कि घोड़ा अब उनके पास नहीं है।



 

सोच-विचार के लिए

कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।

() किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था?

उत्तर

बाबा भारती और खड्गसिंह के आँसुओं का मेल हो गया था।


() दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था ?

उत्तर

दोनों के आँसुओं में यह अंतर है कि बाबा भारती के आँसू खुशी के आँसू थे और खड्गसिंह के आँसू दुख के आँसू थे।


दिनचर्या

() कहानी पढ़कर आप बाबा भारती के जीवन के विषय में बहुत कुछ जान चुके हैं। अब आप कहानी के आधार पर बाबा भारती की दिनचर्या लिखिए। वे सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक क्या-क्या करते होंगे, लिखिए। इस काम में आप थोड़ा-बहुत अपनी कल्पना का सहारा भी ले सकते हैं।

उत्तर

बाबा भारती की दिनचर्या:


  • सुबह जल्दी उठना और स्नान करना
  • भगवान का भजन करना
  • घोड़े की देखभाल करना
  • दोपहर में विश्राम करना
  • शाम को घोड़े पर सवारी करना
  • रात को फिर से भजन और ध्यान




() अब आप अपनी दिनचर्या भी लिखिए।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।





कहानी की रचना

() इस कहानी की कौन-कौन सी बातें आपको पसंद आई? आपस में चर्चा कीजिए।

उत्तर

इस कहानी से मुझे निम्न बातें पसंद आई:


  • बाबा भारती का घोड़े के प्रति प्रेम और समर्पण।
  • खड्गसिंह का चरित्र परिवर्तन - एक डाकू से दयालु व्यक्ति बनना।
  • बाबा भारती की निःस्वार्थ सोच - वे अपने घोड़े से ज्यादा मानवीय मूल्यों की चिंता करते हैं।
  • कहानी का अप्रत्याशित अंत - जहाँ खड्गसिंह घोड़े को वापस लौटा देता है।
  • 'हार की जीत' का संदेश कैसे एक प्रतीत होने वाली हार वास्तव में एक नैतिक जीत बन जाती है।
  • कहानी की भाषा और वर्णन शैली - जैसे घोड़े और प्रकृति का सुंदर चित्रण।
  • मानवीय भावनाओं का सटीक चित्रण जैसे डर, प्रेम, करुणा, पश्चाताप।
  • कहानी में प्रयुक्त उपमाएँ और अलंकार - जैसे "नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली से ये जलधर"
  • कहानी का नैतिक संदेश - दया, क्षमा और मानवता की जीत।
  • पात्रों के बीच संवाद और उनकी मनोदशा का प्रभावी चित्रण।




() कोई भी कहानी पाठक को तभी पसंद आती है जब उसे अच्छी तरह लिखा गया हो। लेखक कहानी को अच्छी तरह लिखने के लिए अनेक बातों का ध्यान रखते हैं, जैसे- शब्द, वाक्य, संवाद आदि। इस कहानी में आए संवादों के विषय में अपने विचार लिखें।

उत्तर

 संवाद सरल, स्वाभाविक और पात्रों के अनुरूप हैं। वे कहानी को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं और पात्रों के चरित्र को उजागर करते हैं। उदहारण के लिए, खड़गसिंह और बाबा भारती का संवाद दोनों के व्यक्तित्व को दर्शाता है।


मुहावरे कहानी से

() कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैंलट्टू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।

() अब इनका प्रयोग करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।

उत्तर

लट्टू होना- किसी चीज़ या व्यक्ति पर बहुत मोहित होना

वाक्य: राम अपनी नई साइकिल पर लट्टू हो गया है।

हृदय पर साँप लोटना - बहुत ईर्ष्या या जलन होना
वाक्य: अपने मित्र की सफलता देखकर उसके हृदय पर साँप लोट गया।

फूले समानाबहुत खुश या गर्वित होना
वाक्य: बेटी के पहले स्थान पर आने की खबर सुनकर माता-पिता फूले नहीं समा रहे थे।

मुँह मोड़ लेना - किसी से संबंध तोड़ लेना या ध्यान देना
वाक्य: अपमान के बाद उसने अपने पुराने मित्रों से मुँह मोड़ लिया।

मुख खिल जाना - बहुत प्रसन्न होना
वाक्य: बच्चे को देखते ही दादी का मुख खिल गया।

न्योछावर कर देना - किसी के लिए सब कुछ त्याग देना
वाक्य: माँ ने अपना सारा जीवन बच्चों पर न्योछावर कर दिया।


कैसे-कैसे पात्र

इस कहानी में तीन मुख्य पात्र हैंबाबा भारती, डाकू खड्गसिंह और सुलतान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द चित्रों को पूरा कीजिए

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आपने जो शब्द लिखे हैं, वे किसी की विशेषता, गुण और प्रकृति के बारे में बताने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं। ऐसे शब्दों को विशेषण कहते हैं।

उत्तर

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विशेषण- विशेषण वे शब्द हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं। इस कहानी में प्रयुक्त कुछ विशेषण हैं:


  • सुंदर (घोड़ा)
  • बलवान (घोड़ा)
  • प्रसिद्ध (डाकू)
  • छोटा-सा (मंदिर)
  • बूढ़ी (धरती)


पाठ से आगे

सुलतान की कहानी

मान लीजिए, यह कहानी सुलतान सुना रहा है। तब कहानी कैसे आगे बढ़ती ? स्वयं को सुलतान के स्थान पर रखकर कहानी बनाइए
(
संकेत- आप कहानी को इस प्रकार बढ़ा सकते हैंमेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ…..)

उत्तर

मेरा नाम सुलतान है। मैं एक घोड़ा हूँ, लेकिन मामूली घोड़ा नहीं। मेरे मालिक बाबा भारती मुझे बहुत प्यार करते हैं। वे कहते हैं कि मेरे जैसा सुंदर और ताकतवर घोड़ा पूरे इलाके में नहीं है।

एक दिन एक अजनबी आया। उसने मुझे देखा और मुझे पाने की इच्छा जताई। मुझे लगा, “कुछ गड़बड़ है रे बाबाअगले दिन वह फिर आया, इस बार एक अपाहिज के रूप में। बाबा ने उसे मेरी पीठ पर बिठाया और तभी वह मुझे लेकर भाग गया।

मैं बहुत डर गया था। मुझे लगा कि अब मैं कभी बाबा से नहीं मिल पाऊँगा। लेकिन कुछ दिनों बाद, रात के अंधेरे में, वह अजनबी मुझे वापस ले आया। मुझे समझ नहीं आया कि ऐसा क्यों हुआ, पर मैं बहुत खुश था कि मैं फिर से अपने प्यारे बाबा के पास गया।


इस घटना से मैंने सीखा कि दुनिया में अच्छाई अभी भी मौजूद है। लोग बदल सकते हैं, और प्यार की ताकत बहुत बड़ी होती है।


मन के भाव

() कहानी में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। बताइए, कहानी में कौन, कब, ऐसा अनुभव कर रहा था

  • चकित
  • अधीर
  • डर
  • प्रसन्नता
  • करुणा
  • निराशा

उत्तर

  • चकितखड्गसिंह ने जब घोड़े को देखा तो वह चकित रह गया।
  • अधीरबाबा भारती और खड्गसिंह के बीच संवाद के दौरान इसे बाबा भारती अनुभव कर रहे थे।
  • डरजब खड्गसिंह ने बाबा भारती से कहा कि घोड़ा आपके पास रहने दूँगा, तब बाबा भारती इसे अनुभव कर रहे थे।
  • प्रसन्नताजब बाबा भारती सुलतान की पीठ पर सवार होकर घूमने जा रहे थे तो उस समय उनके मुख पर प्रसन्नता थी।
  • करुणासहसा एक आवाज़ आई। उस आवाज़ में करुणा थी।
  • निराशाफाटक पर पहुँचकर बाबा भारती को अपनी भूल प्रतीत हुई।


() आप उपर्युक्त भावों को कब-कब अनुभव करते हैं? लिखिए।
(
संकेतजैसे गली में किसी कुत्ते को देखकर डर या प्रसन्नता या करुणा आदि का अनुभव करना)

उत्तर

  • चकितआश्चर्यजनक कार्य को देखकर
  • अधीर- किसी कहानी या घटना सुनने के लिए।
  • डरगली में कुत्ते को देखकर |
  • प्रसन्नताअतिथि के आने पर
  • करुणा-किसी अपाहिज को देखकर |
  • निराशाकिसी कार्य की असफलता पर

 

झरोखे से

आप जानते ही हैं कि लेखक सुदर्शन ने अनेक कविताएँ भी लिखी हैं। आइए, उनकी लिखी एक कविता पढ़ते हैं

उत्तर


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वह चली हवा

वह चली हवा,
वह चली हवा |
ना तू देखे
ना मैं देखूँ

पर पत्तों ने तो देख लिया
वरना वे खुशी मनाते क्यों?
वह चली हवा,
वह चली हवा |
सुदर्शन


साझी समझ

आपको इस कविता में क्या अच्छा लगा ? आपस में चर्चा कीजिए और अपनी लेखनपुस्तिका में लिखिए।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


खोजबीन के लिए

सुदर्शन की कुछ अन्य रचनाएँ पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड या इंटरनेट या पुस्तकालय की सहायता से पढ़ें, देखें समझें।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।




Chapter 5 रहीम के दोहे Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही (सटीक) उत्तर कौन-सा है ? उसके सामने तारा () बनाइए

1. “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल। आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।

दोहे का भाव है-

  • सोच-समझकर बोलना चाहिए।
  • मधुर वाणी में बोलना चाहिए।
  • धीरेधीरे बोलना चाहिए।
  • सदा सच बोलना चाहिए।

उत्तर


सोच-समझकर बोलना चाहिए। ()


2. “रहिमन देखि बड़ेन को, लघु दीजिये डारि जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।इस दोहे का भाव क्या है?

  • तलवार सुई से बड़ी होती है।
  • सुई का काम तलवार नहीं कर सकती।
  • तलवार का महत्व सुई से ज्यादा है।
  • हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।


उत्तर

हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है।()


() अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने यही उत्तर क्यों चुने?

उत्तर

मैंने यह उत्तर सुना क्यूंकि:

  1. सोच-समझकर बोलना चाहिए ताकि बाद में पछतावा पड़े।
  2. हर छोटी-बड़ी चीज़ का अपना महत्व होता है अर्थात किसी को उसके रूप, आकार या आर्थिक स्थिति से नहीं आंकना चाहिए क्योंकि प्रत्येक का अपनी-अपनी जगह महत्व होता है।

 

मिलकर करें मिलान

पाठ में से कुछ दोहे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके भाव स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही भाव से मिलान कीजिए।

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स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय

टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय ।।

1. सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं।

2. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत

बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत।।

2. सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं।

3. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं पान।

कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।

3. प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।

उत्तर

उत्तर

स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय

टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय ।।

3. प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए।

2. कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत

बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत।।

2. सच्चे मित्र विपत्ति या विपदा में भी साथ रहते हैं।

3. तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं पान।

कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।

1. सज्जन परहित के लिए ही संपत्ति संचित करते हैं।

1. 3

2. 2

3. 1


पंक्तियों पर चर्चा

नीच दिए गए दोहों पर समूह में चर्चा कीजिए और उनके अर्थ या भावार्थ अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए

() “रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय
हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय ।।

उत्तर

रहीमदास का मानना है कि थोड़े दिन की विपदा भी भली होती है जो हमें यह बता देती है कि संसार में कौन हमारा हितैषी है और कौन अहितैषी अर्थात कौन हमारा मुश्किल में साथ देने वाला है और कौन नहीं।


() “रहिमन जिह्वा बावरी, कहि गइ सरग पताल।
आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल

उत्तर

रहीमदास का कहना है कि हमारी जीभ बिलकुल बावरी अर्थात पागल जैसी होती है यह कई बार ऐसा कुछ बोल देती है कि दिमाग को जूते खाने पड़ते हैं अर्थात मनुष्य को पछताना पड़ता है।


सोच-विचार के लिए

दोहों को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

1. “रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।।


() इस दोहे मेंमिलेके स्थान परजुड़ेऔरछिटकायके स्थान परचटकायशब्द का प्रयोग भी लोक में प्रचलित है। जैसे

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाय ।।

इसी प्रकार पहले दोहे मेंडारिके स्थान परडार’, ‘तलवारके स्थान परतरवारऔर चौथे दोहे में ‘’मानुषके स्थान परमानसका उपयोग भी प्रचलित हैं। ऐसा क्यों होता है?

उत्तर

'मिले' के स्थान पर 'जुड़े' और 'छिटकाय' के स्थान पर 'चटकाय' का प्रयोग भाषा के क्षेत्रीय भेद या बोली के कारण हो है। भाषा समय के साथ बदलती है और अलग-अलग क्षेत्रों में शब्दों के उच्चारण और प्रयोग में थोड़ा अंतर जाता है।


() इस दोहे में प्रेम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया है? क्या आप धागे के स्थान पर कोई अन्य उदाहरण सुझा सकते हैं? अपने सुझाव का कारण भी बताइए।

उत्तर

कवि ने प्रेम के टूटने को धागे द्वारा दर्शाया है कि जिस प्रकार धागा एक बार टूट जाए तो उसे जोड़ने के लिए गाँठ लगानी पड़ती है। ऐसे ही प्रेम संबंधों में दरार जाए तो भले ही उन्हें फिर से जोड़ लिया जाए परंतु मन-मुटाव रह ही जाता है। इसे हम अन्य उदाहरणों द्वारा भी समझ सकते है जैसे-

  1. नदी के जल से एक लोटा पानी ले लिया जाए तो उन्हें दोबारा नदी में मिलाया तो जा सकता है परंतु उसे उसकी सहोदर (मित्र) बूँदों से नहीं मिलाया जा सकता। ऐसे ही किसी से संबंध अगर टूट जाए तो दोबारा वैसे नहीं बन पाते।
  2. एक टूटे हुए लकड़ी के डंडे को प्रयत्न करके सिल भी लिया जाए तो हम पहले की भाँति उसका प्रयोग नहीं कर सकते। हर बार ध्यान से प्रयोग करना पड़ता है।
  3. एक कीमती कपड़े के फट जाने पर उसे कितना भी सिल लिया जाए लेकिन मन में उसका फटा होना खटकता ही रहता है


2. “तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिँ पान

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कहि रहीम पर काज हित, संपति सँचहि सुजान।।


इस दोहे में प्रकृति के माध्यम से मनुष्य के किस मानवीय गुण की बात की गई है? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?

उत्तर

दोहे "तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं पान|" में परोपकार और निःस्वार्थ सेवा का गुण दर्शाया गया है।

प्रकृति से हम कई अन्य गुण सीख सकते हैं, जैसे:

  • धैर्य (बीज से पेड़ बनने की प्रक्रिया)
  • लचीलापन (तूफान में झुकने वाले पेड़)
  • निरंतरता (नदी का बहना)
  • समन्वय (पारिस्थितिक तंत्र में सभी जीवों का सहअस्तित्व)



शब्दों की बात

हमने शब्दों के नए-नए रूप जाने और समझे। अब कुछ करके देखें-

  • शब्द-संपदा

कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए।

कविता में आए शब्द

मातृभाषा में समानार्थक शब्द

तरुवर


बिपति


छिटकाय


सुजान


सरवर


साँचे


कपाल


उत्तर

कविता में आए शब्द

मातृभाषा में समानार्थक शब्द

तरुवर

पेड़, वृक्ष

बिपति

मुसीबत, संकट

छिटकाय

तोड़ना, खींचकर

सुजान

सज्जन, विद्वान

सरवर

तालाब, पोखर

साँचे

सच्चे, वास्तविक

कपाल

दिमाग, माथा

विशेष- विद्यार्थी अपनी-अपनी मातृभाषा के शब्द भी लिख सकते हैं।


शब्द एक अर्थ अनेक

रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सून।
पानी गए ऊबरै, मोती, मानुष, चून।

इस दोहे मेंपानीशब्द के तीन अर्थ हैंसम्मान, जल, चमक।

इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। आप भी इन शब्दों के तीन-तीन अर्थ लिखिए। आप इस कार्य में शब्दकोश, इंटरनेट, शिक्षक या अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं।

कल – ____, ____,_____
उत्तर
कलआने वाला कल, चैन या शांति, पुर्जा/मशीन

पत्र –_____,_____, _____
उत्तर
पत्रपत्ता, चिट्ठी, दल

कर – _____, _____, _____
उत्तर
करहाथ, टैक्स, किरण

फल – ____, ____, _____
उत्तर
फलपरिणाम, एक खाने का फल (आम), हल का अग्र भाग


पाठ से आगे

आपकी बात

रहिमन देखि बड़ेन को, लघु दीजिये डारि
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि

इस दोहे का भाव है कोई बड़ा है और ही कोई छोटा है। सबके अपने-अपने काम हैं, सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्ता है। चाहे हाथी हो या चींटी, तलवार हो या सुई, सबके अपने-अपने आकार-प्रकार हैं और सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्व है। सिलाई का काम सुई से ही किया जा सकता है, तलवार से नहीं। सुई जोड़ने का काम करती है जबकि तलवार काटने का। कोई वस्तु हो या व्यक्ति, छोटा हो या बड़ा, सबका सम्मान करना चाहिए।


अपने मनपसंद दोहे को इस तरह की शैली में अपने शब्दों में लिखिए | दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो सकता है।

उत्तर

"रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चिटकाय

टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।"

इस दोहे में रहीम प्रेम और रिश्तों की नाजुकता के बारे में बात करते हैं। वे कहते हैं कि प्रेम के धागे को जल्दबाजी या गुस्से में नहीं तोड़ना चाहिए। क्योंकि एक बार टूट जाने पर यह फिर से वैसा नहीं जुड़ पाता, और अगर किसी तरह जुड़ भी जाता है तो उसमें गाँठ पड़ जाती है। यहाँ 'गाँठ' का अर्थ है रिश्ते में आई कटुता या दरार


यह दोहा हमें सिखाता है कि रिश्तों को बहुत सावधानी और धैर्य से संभालना चाहिए। चाहे वह पारिवारिक संबंध हों, दोस्ती प्रेम संबंध, हर रिश्ता नाजुक होता है। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करके या जल्दबाजी में कोई निर्णय लेकर हम अक्सर अपने रिश्तों को नुकसान पहुँचा देते हैं। एक बार टूटा हुआ विश्वास या बिगड़ा हुआ रिश्ता फिर से पहले जैसा नहीं हो पाता। इसलिए हमें हमेशा अपने शब्दों और व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए, ताकि हमारे रिश्ते मजबूत और स्वस्थ बने रहें।


"बड़े बड़ाई करै; बड़ो बोले बोल।
रहिमन हीरा कब कहैं, लाख मेरो टकै का मोल।।"

रहीमदास जी कहते हैं कि जिनमें बड़प्पन होता है वे अपनी बड़ाई स्वयं कभी नहीं करते। उनके कार्य ही उनके कौशल को दर्शा देते हैं। जैसे हीरा कितना भी बहुमूल्य क्यों हो लेकिन कभी अपने मुँह से अपने बारे में नहीं कहता। हमें भी अपने गुणों को दर्शाना नहीं चाहिए। वे स्वतः ही हमारे कार्यों के माध्यम से सबके समक्ष जाते हैं। जैसे- कुशल खिलाड़ी अपने खेल से, बावर्ची अपने स्वादिष्ट पकवानों से अच्छा नर्तक अपने नृत्य से श्रेष्ठ गायक अपने गायन से प्रतिभाशाली विद्यार्थी अपने परिणाम से ही जाना जाता है।


सरगम

  • रहीम, कबीर, तुलसी, वृंद आदि के दोहे आपने दृश्य-श्रव्य (टी.वी. रेडियो) माध्यमों से कई बार सुने होंगे। कक्षा में आपने दोहे भी बड़े मनोयोग से गाए होंगे। अब बारी है इन दोहों की रिकॉर्डिंग (ऑडियो या विजुअल) की। रिकॉर्डिंग सामान्य मोबाइल से की जा सकती है। इन्हें अपने दोस्तों के साथ समूह में या अकेले गा सकते हैं। यदि संभव हो तो वाद्ययंत्रों के साथ भी गायन करें। रिकॉर्डिंग के बाद दोहे स्वयं भी सुनें और लोगों को भी सुनाएँ
  • रहीम, वृन्द, कबीर, तुलसी, बिहारी . आदि के दोहे आज भी जनजीवन में लोकप्रिय हैं। दोहे का प्रयोग लोग अपनी बात पर विशेष ध्यान दिलाने के लिए करते हैं। जब दोहे समाज में इतने लोकप्रिय हैं तो क्यों इन दोहों को एकत्र करें और अंत्याक्षरी खेलें। अपने समूह मिलकर दोहे एकत्र कीजिए। इस कार्य में आप इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों या अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं।


आज की पहेली

  1. दो अक्षर का मेरा नाम, आता हूँ खाने के काम
    उल्टा होकर नाच दिखाऊँ, मैं क्यों अपना नाम बताऊँ।
    उत्तर
    चम (उलटा करने पर 'मच' हो जाता है, जो नाचने से संबंधित है)
  2. एक किले के दो ही द्वार, उनमें सैनिक लकड़ीदार
    टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।
    उत्तर
    दाँत (दरवाजे जैसे दिखने वाले, लकड़ी जैसे सैनिक यानी दाँत, टकराने पर जल उठना यानी दर्द होना)


खोजबीन के लिए


रहीम के कुछ अन्य दोहे पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से पढ़ें, देखें समझें।

उत्तर

1. "रहिमन निज मन की विधा, मन ही राखो गोय |

सुनि अठिले हैं लोग सब, वाँटि लैहैं कोय।। "


2. "जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंगा

चंदन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग।। "


3. "रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय

टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ परि जाय।।"


4. "खीरा मुख तें काटिये, मलिये नमक लगाय।

रहिमन करुआ कंद को, कौन मीठो करि खाया।"


5. 'रहिमन ऐसी जग बसो, ज्यों दादुर पानी माहिं।

जहँ तहँ रहो सुखी सदा, काहे को फिरि जाहि ।।"





Chapter 6


Chapter 6 मेरी माँ Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

() नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए-

1. ‘किंतु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती।
बिस्मिल को अपनी किस इच्छा के पूर्ण होने की आशंका थी?


  • भारत माता के साथ रहने की
  • अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहने की
  • अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने की
  • भोग विलास तथा ऐश्वर्य भोगने की


उत्तर

अपनी माँ की जीवनपर्यंत सेवा करने ()


2. रामप्रसाद बिस्मिल की माँ का सबसे बड़ा आदेश क्या था?

  • देश की सेवा करें
  • कभी किसी के प्राण लेना
  • कभी किसी से छल करना
  • सदा सच बोलना


उत्तर

कभी किसी के प्राण लेना ()


() अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?

उत्तर

पहले प्रश्न का उत्तर पाठ में स्पष्ट रूप से दिया गया है जहाँ बिस्मिल कहते हैं कि उनकी इच्छा है कि वे अपनी माँ की सेवा कर सकें, लेकिन यह पूरी होती नहीं दिखाई देती।


दूसरे प्रश्न का उत्तर भी पाठ में स्पष्ट है जहाँ लिखा है कि उनकी माँ का सबसे बड़ा आदेश था कि किसी की प्राणहानि हो।


पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर समझिए और इन पर विचार कीजिए आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? कक्षा में अपने विचार साझा कीजिए और लिखिए।

() “यदि मुझे ऐसी माता मिलतीं, तो मैं भी अति साधारण मनुष्यों की भाँति संसार-चक्र में फँसकर जीवन निर्वाह करता।

उत्तर

  • बिस्मिल की माँ के प्रति अटूट श्रद्धा
  • बिस्मिल को क्रांतिकारी जीवन की प्रेरणा और सहयोग अपनी माँ से प्राप्त हुआ।
  • बिस्मिल ने स्वयं को देश की स्वतंत्रता के लिए पूर्णतया समर्पित कर दिया


() “उनके इस आदेश की पूर्ति करने के लिए मुझे मज़बूरन दो-एक बार अपनी प्रतिज्ञा भंग भी करनी पड़ी थी।

उत्तर

  • माता जी ने सबसे बड़ा आदेश बिस्मिल को दिया था कि कभी किसी की प्राणहानि हो। माता ने शिक्षा दी थी कि शत्रु को भी प्राणदंड मिले।
  • बिस्मिल ने कुछ लोगों को प्राणदंड देने की प्रतिज्ञा ली थी किंतु माँ ने वादा लिया कि वे प्राणदंड के रूप में बदला नहीं लेंगे।


मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. देवनागरी

1. सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।

2. आर्यसमाज

2. इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल का सेनापति इटली का मसीहा था जिसने लोगों को एक सूत्र में बाँधा

3. मेजिनी

3. महर्षि दयानंद द्वारा स्थापित एक संस्था

4. गोबिंद सिंह

4. भारत की एक भाषा लिपि जिसमें हिंदी, संस्कृत, मराठी आदि भाषाएँ लिखी जाती हैं।

उत्तर

शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. देवनागरी

4. भारत की एक भाषा लिपि जिसमें हिंदी, संस्कृत, मराठी आदि भाषाएँ लिखी जाती हैं।

2. आर्यसमाज

3. महर्षि दयानंद द्वारा स्थापित एक संस्था

3. मेजिनी

2. इटली के गुप्त राष्ट्रवादी दल का सेनापति इटली का मसीहा था जिसने लोगों को एक सूत्र में बाँधा

4. गोबिंद सिंह

1. सिखों के दसवें और अंतिम गुरु थे। उन्होंने खालसा पंथ की स्थापना की।


सोच-विचार के लिए


पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

1. बिस्मिल की माता जी जब ब्याह कर आईं तो उनकीआयु काफ़ी कम थी।

() फिर भी उन्होंने स्वयं को अपने परिवार के अनुकूल कैसे ढाला?

() उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को कैसे शिक्षित किया?

उत्तर

() बिस्मिल की माता जी ने अपनी दादी जी से गृहकार्य की शिक्षा ली। थोड़े दिनों में उन्होंने घर के सब काम-काज को समझ लिया और भोजनादि का ठीक-ठीक प्रबंध करने लगीं।

() उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को शिक्षित किया:


  • मुहल्ले की शिक्षित सखी-सहेलियों से अक्षर-बोध किया
  • घर का काम करने के बाद बचे समय में पढ़ना-लिखना करती थीं
  • परिश्रम से थोड़े दिनों में ही देवनागरी पुस्तकों का अध्ययन करने लगीं



2. बिस्मिल को साहसी बनाने में उनकी माता जी ने कैसे सहयोग दिया?

उत्तर

बिस्मिल के व्यक्तित्व निर्माण में उनकी माता ने बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने जीवन के हर कदम पर अपने सुपुत्र बिस्मिल को प्रोत्साहित किया। छोटी उम्र में ही अपनी माता जी से प्रेरणा लेकर बिस्मिल साहस, वीरता और देश सेवा के पथ पर चले जन्मभूमि पर न्योछावर होने वाले पुत्र पर उन्हें गर्व था। संकटों में भी उन्होंने अपने पुत्र को अधीर नहीं होने दिया


3. आज से कई दशक पहले बिस्मिल की माँ शिक्षा के महत्व को समझती थीं, बताइए कैसे?

उत्तर

बालक बिस्मिल में प्रेम, साहस और दृढ़ता के भाव उनकी माँ ने भरे थे। कम उम्र में विवाह हो जाने के बाद भी उनकी माँ अपनी इच्छाशक्ति के बल पर स्वयं को शिक्षित करती रहीं। कुछ वर्षों बाद उन्होंने बिस्मिल और उनकी छोटी बहनों को भी पढ़ाया-लिखाया। अपनी शिक्षा और वाणी से बिस्मिल के जीवन मूल्यों मैं सुधार किया। माँ के प्रोत्साहन का ही परिणाम था कि रामप्रसाद धर्म के मार्ग पर चलकर उत्तम शिक्षा ग्रहण कर सके।

अथवा 

बिस्मिल की माँ ने स्वयं पढ़ना-लिखना सीखा और अपनी बेटियों को भी शिक्षा दी। वे बिस्मिल के विवाह को टालकर शिक्षा को प्राथमिकता देती थीं।



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4. हम कैसे कह सकते हैं कि बिस्मिल की माँ स्वतंत्र और उदार विचारों वाली थीं?

उत्तर

बिस्मिल की माँ उन्हें देश-सेवा और क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करती थीं। वे स्वयं भी शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहीं और अपने बच्चों को भी शिक्षा दिलवाना चाहती थीं। वे बिस्मिल के विचारों का समर्थन करती थीं, भले ही इसके लिए उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों की नाराजगी झेलनी पड़ती।


आत्मकथा की रचना

यह पाठ रामप्रसादबिस्मिलकी आत्मकथा का एक अंश है। आत्मकथा यानी अपनी कथा। दुनिया में अनेक लोग अपनी आत्मकथा लिखते हैं, कभी अपने लिए, तो कभी दूसरों के पढ़ने के लिए।

() इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की ऐसी पंक्तियों की सूची बनाइए जिनसे पता लगे कि लेखक अपने बारे में कह रहा है।

उत्तर

आत्मकथा की रचना के लिए पाठ से पंक्तियाँ चुनना:

  • "मेरी माताजी देवी हैं।"
  • "मुझमें जो कुछ जीवन तथा साहस आया, वह मेरी माताजी तथा गुरुदेव श्री सोमदेव जी की कृपाओं का ही परिणाम है।"
  • "अपने जीवन में हमेशा सत्य का आचरण करता था, चाहे कुछ हो जाए, सत्य बात कह देता था।"
  • "लखनऊ कांग्रेस में जाने के लिए मेरी बड़ी इच्छा थी।"



() अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तर

अध्यापक की सहायता से विद्यार्थीगण इस गतिविधि को पूर्ण करेंगे।


शब्द-प्रयोग तरह-तरह के

() “माता जी उनसे अक्षर-बोध करतीं।इस वाक्य में अक्षर-बोध का अर्थ है- अक्षर का बोध या ज्ञान।
एक अन्य वाक्य देखिए— “जो कुछ समय मिल जाता, उसमें पढ़ना-लिखना करतीं।इस वाक्य में पढ़ना-लिखना अर्थात पढ़ना और लिखना।

प्रश्न: हम लेखन में शब्दों को मिलाकर छोटा बना लेते हैं जिससे समय, स्याही, कागज़ आदि की बचत होती है। संक्षेपीकरण मानव का स्वभाव भी हैं। इस पाठ से ऐसे शब्द खोजकर सूची बनाइए।

उत्तर

  1. डाँट-फटकार
  2. काम-काज
  3. उठना-बैठना
  4. अंदर-बाहर
  5. देश सेवा
  6. पालन-पोषण


पाठ से आगे

आपकी बात

() रामप्रसादबिस्मिलके मित्रों के नाम खोजिए और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भागीदारी पर कक्षा में चर्चा कीजिए।

उत्तर

रामप्रसाद 'बिस्मिल' के कुछ प्रसिद्ध मित्र थे:


  • शफाकउल्ला खान - काकोरी षड्यंत्र में साथी, क्रांतिकारी गतिविधियों में सहयोगी
  • चंद्रशेखर आजाद - हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य, साथी क्रांतिकारी
  • भगत सिंह - युवा क्रांतिकारी, बिस्मिल से प्रेरित
  • राजेंद्र लाहिड़ी - काकोरी षड्यंत्र में साथी




() नीचे लिखे बिंदुओं को आधार बनाते हुए अपनी माँ या अपने अभिभावक से बातचीत कीजिए और उनके बारे में गहराई से जानिए कि उनका प्रिय रंग, भोज्य पदार्थ, गीत, बचपन की यादें, प्रिय स्थान आदि कौन-कौन से थे?

उदाहरण के लिए-

  • आपका जन्म कहाँ हुआ था?
  • आपकी प्रिय पुस्तक का नाम क्या है?


पुस्तकालय या इंटरनेट से

आप पुस्तकालय से रामप्रसादबिस्मिलकी आत्मकथा खोजकर पढ़िए।
देशभक्तों से संबंधित अन्य पुस्तकें, जैसेउनके पत्र, आत्मकथा, जीवनी आदि पढ़िए और अपने मित्रों से साझा कीजिए।

उत्तर

रामप्रसादबिस्मिलकी आत्मकथा "निज जीवन की एक छटा"

अन्य देशभक्तों की आत्मकथाएँ या जीवनियाँ, जैसे:


  • 'मेरे संस्मरण' - भगत सिंह
  • 'आत्मकथा' - जवाहरलाल नेहरू
  • 'सत्य के प्रयोग' - महात्मा गाँधी



शब्दों की बात

आप अपनी माँ को क्या कहकर संबोधित करते हैं? अन्य भाषाओं में माँ के लिए प्रयुक्त संबोधन और माँ के लिए शब्द ढूँढ़िए।
क्या उनमें कुछ समानता दिखती है? हाँ, तो क्या?

उत्तर


  • हिंदी: माँ
  • अंग्रेजी: Mother, Mom
  • संस्कृत: मातृ, जननी
  • बंगाली: मा
  • तमिल: आई
  • पंजाबी: माँ
  • गुजराती: बा
  • कश्मीरी: मोज
  • उड़िया: आई 
  • तेलुगु: अम्मा
  • मलयालम: अम्मा


अधिकांश शब्दों में '' ध्वनि की समानता दिखाई देती है।


आज की पहेली

यहाँ दी गई वर्ग पहेली में पाठ से बारह विशेषण दिए गए हैं। उन्हें छाँटकर पाठ में रेखांकित कीजिए।


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उत्तर

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झरोखे से

मातृभूमि !
मातृभूमि! तेरी जय हो, सदा विजय हो
प्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कांतिमय हो।
अज्ञान की निशा में, दुख भरी दिशा में;
संसार के हृदय में, तेरी प्रभा उदय हो।
तेरा प्रकोप सारे जग का महाप्रलय हो।
तेरी प्रसन्नता ही आनंद का विषय हो।
वह भक्ति दे किबिस्मिलसुख में तुझे भूले,
वह शक्ति दे कि दुख में कायर यह हृदय हो।
रामप्रसादबिस्मिल

व्याख्या

यह कविता देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना को व्यक्त करती है। कवि मातृभूमि की जय और विजय की कामना करता है। वह चाहता है कि मातृभूमि का प्रकाश अज्ञान और दुःख को दूर करें। कवि प्रार्थना करता है कि वह सुख में मातृभूमि को भूलें और दुःख में कायर हो।


खोजबीन के लिए

माँ से संबंधित पाँच रचनाएँ पुस्तकालय से खोजें और अपनी पत्रिका बनाएँ।


पाठ पर आधारित गतिविधियों को छात्रछात्राएँ मिलकर अपने शिक्षकों की सहायता से पूर्ण करें।

उत्तर

माँ से संबंधित पाँच रचनाएँ हैं, जैसे:

  • 'माँ' - मुंशी प्रेमचंद की कहानी
  • 'माँ कह एक कहानी' - सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता
  • 'मेरी माँ' - सुमित्रानंदन पंत की कविता
  • 'माँ का आँचल' - शिवमंगल सिंह 'सुमन' की कविता
  • 'माँ की याद' - रामधारी सिंह 'दिनकर' की कविता


Chapter 7


Chapter 7 जलाते चलो Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

(नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए-

(1) निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?

  • भलाई के कार्य करते रहना
  • दीपावली के दीपक जलाना
  • बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना
  • तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहना

उत्तर

भलाई के कार्य करते रहना ()


(2) “ जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थीयह वाक्य किससे कहा गया है?

  • तूफ़ान से
  • दीपकों से
  • मनुष्यों से
  • तिमिर से

उत्तर

मनुष्यों से ()


() अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण . सहित बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

(1) मैंनेभलाई के कार्य करते रहनाउत्तर इसलिए चुना क्योंकि कविता का शीर्षक भीजलाते चलोहै। पूरी कविता में बुराई, अनाचार, पाप, लोभ आदि बुराइयों को मिटाकर भलाई के कार्य करने की प्रेरणा दी गयी है।

(2) मैंनेमनुष्यों सेउत्तर इसलिए चुना क्योंकि मानव नेही प्रेम रूपी प्रकाश का दीपक जलाकरतिमिरअर्थात अंधकार, बुराइयों आदि की चुनौती को स्वीकार किया था।


मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ शब्द यहाँ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

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शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. अमावस

1. पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है।

2. पूर्णिमा

2. विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण।

3. विद्युतदिये

3. समय, काल, युग संख्या में चार माने गए हैं- सत्ययुग (सतयुग), त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग

4. युग

4. अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता

उत्तर

शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. अमावस

4. अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता

2. पूर्णिमा

1. पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है।

3. विद्युतदिये

2. विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण।

4. युग

3. समय, काल, युग संख्या में चार माने गए हैं- सत्ययुग (सतयुग), त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग


पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

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उत्तर

कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी जी ने जीवन की सच्चाई को बहुत सटीक शब्दों और प्रभावमयी भाषा में प्रकट किया है। दिये को ज्ञान, अच्छाई, सत्य, प्रेम, प्रकाश आदि के लिए प्रयोग किया जाता है। दूसरी तरफ तूफ़ान संकट, मुसीबतों, दुराचार, छल-कपट, बुराई आदि को अंधकार का प्रतीक माना जाता है।

अच्छाई और बुराई की कहानी तो युगों-युगों से चलती रही है। यह भविष्य में भी चलती रहेगी। असंख्य बार सत्य की असत्य पर, अहिंसा की हिंसा पर अच्छाई की बुराई पर विजय हुई है, किंतु बुराई कभी समाप्त नहीं होती। इसका यह अर्थ तो नहीं है कि अच्छाई अपना मार्ग ही छोड़ दे। सत्य की, त्याग की, प्रेम की जो लौ एक बार जल गई है, वह हमेशा जलती रहेगी। वह सोने के समान अपना उज्ज्वल प्रकाश फैलाती रहेगी। यदि धरती पर प्रेम और सत्य की रक्षा करने वाला, दीपक के समान प्रकाश देने वाला व्यक्ति / समाज रहेगा तो यह तो निश्चित ही है कि कभी तो इस बुराई रूपी रात का सवेरा होगा। अंधकार को मिटाकर ज्ञान प्रेम पृथ्वी को प्रकाशित करेगा


सोच-विचार के लिए

कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

() कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?

उत्तर

कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए अमावस, तूफ़ान, निशा, शिला आदि के उदाहरण दिए गए हैं।


() यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है ? यह आशा क्यों की गई है?

उत्तर

यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें पृथ्वी से सभी बुराइयों जैसे- अनैतिकता, अज्ञान, निराशा, स्वार्थ, लालच, द्वेष आदि को समाप्त करने तथा इस दिशा में प्रयत्न करने की आशा की गई है।
आशा अच्छे भविष्य की कल्पना करके उसे प्राप्त करने के लिए की जाती है। जब हम इसे अपने जीवन में उतारकर आगे बढ़ना चाहते हैं तो प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में इससे मदद मिलती है। इसलिए कवि ने कहा है कि पृथ्वी पर यदि आशा का एक दीपक भी जलता रहेगा तो कभी तो प्रेम और ज्ञान का प्रकाश फैलेगा


() कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है ?

उत्तर

कविता में स्नेह भरा ज्ञान का दीपक जलाने और बुराइयों का अँधेरा मिटाने की बात कही गई है।


कविता की रचना

जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा

इन पंक्तियों को अपने शिक्षक के साथ मिलकर लय सहित गाने या बोलने का प्रयास कीजिए। आप हाथों से ताल भी दे सकते हैं। दोनों पंक्तियों को गाने या बोलने में समान समय लगा या अलग-अलग? आपने अवश्य ही अनुभव किया होगा कि इन पंक्तियों को बोलने या गाने में लगभग एक-समान समय लगता है। केवल इन दो पंक्तियों को ही नहीं, इस कविता की प्रत्येक पंक्ति को गाने में या बोलने में लगभग समान समय ही लगता है। इस विशेषता के कारण यह कविता और अधिक प्रभावशाली हो गई है।

आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देंगी।

() इस कविता को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस कविता की पंक्तियों को 2–4, 2-4 के क्रम में बाँटा गया है आदि।

() अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तर

विद्यार्थी पढ़कर स्वयं कविता की विशेषतओं की सूची बनाएँ और उसे कक्षा में साझा करें।


मिलान


स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए-

pastedGraphic_26.png


स्तंभ- 1

स्तंभ-2

1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।

1. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा।

2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर

2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है?

3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी रही है अमावस निशासी

3. विश्व की समस्याओं से एक एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा।

4. बिना स्नेह विद्यत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों पथ मिल सकेगा।

4. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।

उत्तर

स्तंभ- 1

स्तंभ-2

1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।

3. विश्व की समस्याओं से एक एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा।

2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर

4. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।

3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी रही है अमावस निशासी

2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है?

4. बिना स्नेह विद्यत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों पथ मिल सकेगा।

1. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा।


अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

() “ दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली रही और चलती रहेगी

दीपक और तूफ़ान की यह कौंनसी कहानी हो सकती है जो सदा से चली रही है?

उत्तर

दिये और तूफ़ान की कहानी से अभिप्राय-अमीर-गरीब, सत्य-असत्य, हिंसाअहिंसा, पाप-पुण्य आदि अच्छाई और बुराई से है।
अच्छाइयों और बुराइयों का टकराव होना स्वाभाविक है। इनके टकराव की कहानी युगों-युगों से चली रही है और आगे भी ऐसे ही चलती रहेगी।


() “जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी

दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?

उत्तर

दीपक की यह सोने जैसी लौ आशा और उम्मीद का प्रतीक है। यह लौ अनगिनत सालों से जल रही है। हमारा जीवन अच्छे भविष्य की आशा का सहारा लेकर ही चलता है। यदि किसी कारणवश किसी की आशा और उम्मीद समाप्त हो जाए तो वह व्यक्ति सकारात्मक विचारों को छोड़कर निराशावादी बन जाता है। ऐसा व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार हो जाता है। इसलिए सभी के जीवन में आशा और उम्मीद की लौ जलाना और जलना दोनों आवश्यक है चाहे वह लौ मंद-मंद ही जले।


शब्दों के रूप

"कि जिससे अमावस बने पूर्णिमासी"
अमावसका अर्थ हैअमावस्या इन दोनों शब्दों का अर्थ तो समान है लेकिन इनके लिखने-बोलने में थोड़ा-सा अंतर है। ऐसे ही कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनसे मिलते-जुलते दूसरे शब्द कविता से खोजकर लिखिए। ऐसे ही कुछ अन्य शब्द आपस में चर्चा करके खोजिए और लिखिए।

1. दिया – _____
2. उजेला – _____
3. अनगिन – _____
4. सरित – ______
5. धरा – _____
6. स्वर्ण – _____

उत्तर

1. दिया – "दीप"
2.
उजेला – "उजाला"
3.
अनगिन – "अनगिनत"
4.
सरित – "सरिता"
5.
धरा – "धरती"
6.
स्वर्ण – "सोना"



अर्थ की बात

() “जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर

इस पंक्ति मेंचलोके स्थान पररहोशब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर रहा है? अपने समूह में चर्चा कीजिए

उत्तर

"जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर" पंक्ति मेंचलोके स्थान पररहोशब्द रखकर पढ़ने से पंक्ति के अर्थ में बदलाव जाता है।जलाते चलोसे अभिप्राय है कि आप जा रहे है। स्नेह भर-भर के दीपक जलाते चलो किंतुरहोशब्द का प्रयोग करने से कार्य की निरंतरता का बोध हो रहा है। अर्थात आप हमेशा ही स्नेह के दिये जलाते रहें। यह प्रक्रिया रुके नहीं, सतत चलती रहे।


() कविता में प्रत्येक शब्द का अपना विशेष महत्व होता है। यदि वे शब्द बदल दिए जाएँ तो कविता का अर्थ भी बदल सकता है और उसकी सुंदरता में भी अंतर सकता है।

नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। पंक्तियों के सामने लगभग समान अर्थों वाले कुछ शब्द दिए गए हैं। आप उनमें से वह शब्द चुनिए, जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा-

1. बहाते चलो _________ तुम वह निरंतर (नैया, नाव, नौका)
कभी तो तिमिर का _________ मिलेगा। (तट, तीर, किनारा)

2. रहेगा _________ पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि)


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Larm.se

Rätt hemlarm snabbt och enkelt


Rätt hemlarm snabbt och enkelt





कभी तो निशा को _________ मिलेगा। (प्रातः, सुबह, सवेरा)


3. जला दीप पहला तुम्हीं ने _________ की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे)
चुनौती _________ बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली)

उत्तर

1. बहाते चलो नौका तुम वह निरंतर कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा ।।
2.
रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।
3.
जला दीप पहला तुम्हीं ने अंधकार की चुनौती पहली बार स्वीकार की थी।

प्रतीक

() "कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा"
निशा का अर्थ हैरात।
सवेरा का अर्थ हैसुबह
आपने अनुभव किया होगा कि कविता में इन दोनों शब्दों का प्रयोगरातऔरसुबहलिए नहीं किया गया है। अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए किनिशाऔरसवेराका इस कविता में क्या-क्या अर्थ हो सकता है।
(
संकेतनिशा से जुड़ा हैअँधेराऔर सवेरे से जुड़ा हैउजाला’)

उत्तर

इस पंक्ति में निशा का अर्थरातऔर सवेरा का अर्थसुबहके रूप में नहीं किया गया है। अपितु निशा का प्रयोग दुख, बुराई, अंधकार जैसी खराब प्रवृत्तियों के लिए किया गया है। निशा का प्रयोग नकारात्मक संदर्भ में किया गया है जबकि सवेरा शब्द उजाला अर्थात सकारात्मक सोच जैसे कार्यों के संदर्भ में किया गया है।


() कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह मिलकर इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें उपयुक्त स्थान पर लिखिए।


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उत्तर

सवेरा

निशा

1. उजेला

1. शिला

2. पूर्णिमा

2. अँधेरा

3. दिवस

3. अमावस

4. स्वर्ण

4. तूफ़ान

5. नाव

5. दिये

6. किनारा

6. तिमिर

7. ज्योति

7. लौ

8. जलना

8. बुझना



() अपने समूह में मिलकरनिशाऔरसवेराके लिए कुछ और शब्द सोविए और लिखिए।
(
संकेतनिचे दिए गए चित्र देखिए और इन पर विचार कीजिए )


pastedGraphic_29.png


उत्तर

1. सूर्योदय

1. प्रभातकाल

2. अमावस्या की रात्रि

2. रजनी की सुंदरता

3. सुबह की ताजगी

3. उषां-सौंदर्य

4. पूर्णिमा की रात्रि

4. बादलों भरी यामिनी


पंक्ति से पंक्ति

"जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी"

कविता की इस पंक्ति को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिख सकते हैं-
तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी
अब नीचे दी गई पंक्तियों को इस प्रकारे वाक्यों के रूप में लिखिए-


कविता की इस पंक्ति को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिख सकते हैं-
तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी

अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यों के रूप में लिखिए-

1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर
2.
जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
3.
बुझाओ इन्हें, यों पथ मिल सकेगा।
4.
मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी रही है अमावस निशा-सी।

उत्तर

1. तुम स्नेह से भरे दीपकों की नाव अर्थात प्रयास निरंतर करते चलो, कभी तो इसे अंधकार का किनारा अर्थात इसके समाप्त होने का स्थान मिलेगा। कभी तो प्रयास सफल होगा।

2. विश्व में प्रेम बढ़ाने के लिए तुम इनमें स्नेह रूपी तेल को भर-भर कर जलाते चलो।

3. इन प्रेमविहीन बिजली के दियों को बुझाकर प्रेम रस से भरे हुए दिये जलाओ, तभी जीवन का सुनहरा मार्ग मिलेगा।

4. आज ईर्ष्या, द्वेष, स्वार्थ आदि बुरी प्रवृत्तियों के बढ़ने के कारण विश्व में सुख-शांति कम हो रही है और विश्व युद्ध की विभीषिका की ओर बढ़ रहा है।


सा/सी/से का प्रयोग

"घिरी रही है अमावस निशा-सी
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी"

इन पंक्तियों में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची है। इनमेंसीशब्द पर ध्यान दीजिए। यहाँसीशब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग किया गया है।सा/ सी / सेका प्रयोग जब समानता दिखाने के लिए किया जाता है तो इनसे पहले योजक चिह्न (–) का प्रयोग किया जाता है।

अब आप भी विभिन्न शब्दों के साथसा/ सी / सेका प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य अपनी लेखनपुस्तिका में लिखिए।

उत्तर

1. वह लाल किरण-सी चोंच खोल कर खा रहा था

2. उसका हृदय नील गगन-सा शांत था

3. हरि के पद कोमल कमल-से हैं।

4. उसका हृदय सागर-सा गंभीर है।

5. गंगा-जल अमृत-सा होता है।


पाठ से आगे

आपकी बात

() “रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।

यदि हर व्यक्ति अपना कर्तव्य समझ ले और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुंदर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिए प्रतिदिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कार्यों के बारे में बताइए

उत्तर

मेरे द्वारा किए जाने वाले कुछ अच्छे कार्य-

  • मैं प्रातःकाल उठकर अपने घर के बड़ों के चरण-स्पर्श करता हूँ।
  • इसके पश्चात नहा-धोकर मैं घर के पौधों को पानी देता हूँ।
  • विद्यालय से आकर मैं अपना लंच बॉक्स और पानी की बोतल रसोई घर में रखता हूँ।
  • हमारे घर के पास एक वृद्ध आश्रम है। मेरी माँ और हम दोनों भाई-बहन वहाँ जाकर कुछ समय उन लोगों के साथ व्यतीत करते हैं।
  • शाम के समय मैं अपनी माँ के गृह कार्य में मदद करता हूँ। रात के समय सभी के कमरों में पानी रखकर आना मेरा काम है।



() इस कविता में निरश होने, चुनौतियों का सामना करने और सबके सुख के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। यदि आपको अपने किसी मित्र को निराश होने के लिए प्रेरित करना हो तो आप क्या करेंगे? क्या कहेंगे? अपने समूह में बताइए

उत्तर

मेरी ही कक्षा में पढ़ने वाला मेरा मित्र अमित काफी समय से विद्यालय नहीं रहा था अध्यापिका से पूछने पर पता चला कि उसके पापा काफ़ी समय से बीमार चल रहे थे। बीमारी के चलते वे अपने व्यापार पर ध्यान नहीं दे पाए और उनके व्यापार के साझीदार उनके मित्र ने ही उन्हें धोखा दे दिया। नया सत्र आरंभ हुए दो महीने हो गए थे। नए पाठ्यक्रम का अमित को कुछ पता नहीं था। वह काफी होनहार छात्र है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका जी ने उसकी फ़ीस माफ़ कर दी। पुस्तकों अन्य सामान हम सहपाठियों ने उसे लेकर दे दिए। अपने पिता की बीमारी के कारण वह जीवन से निराश हो गया था। हमारे अध्यापक मंडल हम मित्रों ने उसका हौंसला बढ़ाया। जो पाठ्यक्रम हो चुका था, उसकी फोटो कॉपी करवा कर हमने उसे दी। वह मेरे घर के पास ही रहता है। मेरे पापा हम दोनों को विद्यालय छोड़कर आते हैं और लाते भी हैं। मेरे पापा ने मुझे कुछ पुस्तकें लाकर दी थीं, जिनमें संकट के समय हार मानने की प्रेरणा दी गई है। मैं प्रतिदिन उन पुस्तकों की कुछ पंक्तियाँ अमित को समझाता हूँ और लिखकर भी देता हूँ। अब उसके पापा काफ़ी ठीक हो गए हैं। मेरे मित्र में भी हिम्मत का संचार हो रहा है।


() क्या आपको कभी किसी ने कोई कार्य करने के लिए प्रेरित किया है? कब? कैसे? उस घटना के बारे में बताइए।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


अमावस्या और पूर्णिमा

() “भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी

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आप अमावस्या और पूर्णिमा के बारे में पहले ही पढ़ चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि अमावस्या और पूर्णिमा के होने का क्या कारण है?

आप आकाश में रात को चंद्रमा अवश्य देखते होंगे। क्या चंद्रमा प्रतिदिन एक-सा दिखाई देता है? नहीं। चंद्रमा घटता-बढ़ता दिखाई देता है। आइए जानते हैं कि ऐसा कैसे होता है।

आप जानते ही हैं कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है जबकि पृथ्वी सूर्य की आप यह भी जानते हैं कि चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं होता। वह सूर्य के प्रकाश से ही चमकता है। लेकिन पृथ्वी के कारण सूर्य के कुछ प्रकाश को चंद्रमा तक जाने में रुकावट जाती है। इससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जो प्रतिदिन घटती-बढ़ती रहती है। सूरज का जो प्रकाश बिना रुकावट चंद्रमा तक पहुँच जाता है, उसी से चंद्रमा चमकदार दिखता है। इसी छाया और उजले भाग की आकृति में आने वाले परिवर्तन को चंद्रमा की कला कहते हैं।

चंद्रमा की कला धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और पूर्णिमा की रात चंद्रमा पूरा है। इसके बाद कला धीरे-धीरे घटती रहती है और अमावस्या वाली रात चाँद दिखाई नहीं देता। चंद्रमा की कलाओं के घटने के दिनों कोकृष्ण पक्षको कहते हैं।कृष्णशब्द का एक अर्थ काला भी है। इसी प्रकार चंद्रमा की कलाओं के बढ़ने के दिनों कोशुक्ल पक्षकहते हैं।शुक्लशब्द का एक अर्थउजलाभी है।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


() अब नीचे दिए गए चित्र में अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को पहचानिए और ये नाम उपयुक्त स्थानों पर लिखिए-
(
यदि पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।)


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उत्तर

संकेतपाठयपुस्तक के पृष्ठ-71 पर दिए गए चित्रपहली की दो पंक्तियाँ शुक्ल पक्ष की तथा अंतिम दो पंक्तियाँ कृष्ण पक्ष को दर्शा रही हैं।


तिथिपत्र

आपने तिथिपत्र (कैलेंडर ) अवश्य देखा होगा। उसमें साल के सभी महीनों की तिथियों की जानकारी दी जाती है।
नीचे तिथिपत्र के एक महीने का पृष्ठ दिया गया है। इसे ध्यान से देखिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

pastedGraphic_32.png

(तिथिपत्र के एक महीने के पृष्ठ के लिए पाठ्यपुस्तक का पेज 72 देखें।)

() दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
(
) पूर्णिमा और अमावस्या किस दिनांक और वार को पड़ रही है?
(
) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में कितने दिनों का अंतर है ?
(
) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल कितने दिन हैं ?
(
) ‘वसंत पंचमीकी तिथि बताइए

उत्तर

() दिए गए महीने में कुल 31 दिन हैं।

() पूर्णिमादिनांक 6 जनवरी शुक्रवार को पड़ रही है। अमावस्यादिनांक 21 जनवरी शनिवार को पड़ रही है।

() कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में चौदह दिन का अंतर है।

() इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल 15 दिन हैं।

() वसंत पंचमी 26 जनवरी की है।


आज की पहेली

"समय साक्षी है कि जलते हुए दीप
अनगिन तम्हारे पवन ने बुझाए "

पवनशब्द का अर्थ है हवा
नीचे एक अक्षरजाल दिया गया है। इसमेंपवनके लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग नाम या शब्द छिपे हैं। आपको उन्हें खोजकर उन पर घेरा बनाना है, जैसा एक हमने पहले से बना दिया है। देखते हैं, आप कितने सही नाम या शब्द खोज पाते हैं।

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उत्तर

पवन, मारुत, बयार, समीर, हवा, वायु, वात, अनिल


खोजबीन के लिए


कविता संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई हैं, इन्हें पुस्तक में दिए गए क्यू. आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें समझें।
हम सब सुमन एक उपवन के
बढ़े चलो
रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 1
रोज़ बदलता कैसे चाँद भाग 2

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।

Chapter 8

Chapter 8 सत्रिया और बिहू नृत्य Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

आइए, अब हम इस कविता पर विस्तार से चर्चा करें। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

(नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए-

(1) माँ एलेसेंड्रा के बारे में कौन-सा कथन सत्य है?

  • वे असम के जीवन के बारे में बहुत-कुछ जानती थीं।
  • उन्हें असम, बिहू और सत्रिया नृत्य से बहुत प्रेम था।
  • उन्होंने एंजेला को कुछ असमिया शब्द भी सिखाए
  • वे अपने कार्य में सहायता के लिए बेटी कोलाई थीं।

उत्तर

वे असम के जीवन के बारे में बहुत कुछ जानती थीं। ()


(2) “अनु और एंजेला ने तुरंत एक-दूसरे की तरफ देखा।क्यों?

  • अनु के पास खिलौने थे।
  • दोनों की आयु एक समान थी
  • दोनों को अंग्रेज़ी भाषा आती थी
  • एंजेला अनु से असमिया भाषा सीखना चाहती थी

उत्तर

दोनों की आयु एक समान थी। ()


() अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

मैंने यह उत्तर चुना क्यूंकि:


  1. यात्रा के दौरान माँ एलेसेंड्रा ने एंजेला को असम की खूबसूरती, व्यवसाय, संस्कृति आदि के बारे में बताया था। उनकी डॉक्यूमेंट्री का विषय असम के जन-जीवन में नृत्य के महत्व को तलाशना था। इन बातों से यह पता चलता है कि माँ एलेसेंड्रा असम के जीवन के बारे में बहुत कुछ जानती थीं।
  2. समान उम्र के बच्चे सहज ही एक-दूसरे की ओर आकर्षित हो जाते हैं। उनमें बहुत सारी समानताएँ भी होती हैं, इसलिए दोनों ने तुरंत एक-दूसरे की ओर देखा।



मिलकर करें मिलान

पाठ में से कुछ शब्द चुनकर स्तंभ 1 में दिए गए हैं। उनसे संबंधित वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर शब्दों का मिलान उपयुक्त वाक्यांशों से कीजिए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

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स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. सत्र

1. ग्रेगरी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी 1901 से 31 दिसंबर 2000 तक का समय।

2. बोहाग बिहू

2. ‘यूनाइटेड किंगडमऔरइंग्लैंडकी राजधानी।

3. लंदन

3. ‘यूनाइटेड किंगडमदेश की एक सरकारी संस्था |

4. गुवाहाटी

4. असम में मनाया जाने वाला एक त्योहार यह असम में नए साल की शुरुआत और बसंत के आगमन का प्रतीक है।

5. ब्रिटिश अकादमी

5. भारत के असम राज्य का एक प्राचीन और सबसे बड़ा नगर है।

6. बीसवीं शताब्दी

6. ये असम के मठ हैं। इनकी संख्या पाँच सौ से भी ज्यादा है। ये पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के स्थान हैं। सत्रिया नृत्य की उत्पत्ति इन्हीं सत्रों में हुई है।

उत्तर

स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. सत्र

6. ये असम के मठ हैं। इनकी संख्या पाँच सौ से भी ज्यादा है। ये पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के स्थान हैं। सत्रिया नृत्य की उत्पत्ति इन्हीं सत्रों में हुई है।

2. बोहाग बिहू

4. असम में मनाया जाने वाला एक त्योहार यह असम में नए साल की शुरुआत और बसंत के आगमन का प्रतीक है।

3. लंदन

2. ‘यूनाइटेड किंगडमऔरइंग्लैंडकी राजधानी।

4. गुवाहाटी

5. भारत के असम राज्य का एक प्राचीन और सबसे बड़ा नगर है।

5. ब्रिटिश अकादमी

3. ‘यूनाइटेड किंगडमदेश की एक सरकारी संस्था |

6. बीसवीं शताब्दी

1. ग्रेगरी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी 1901 से 31 दिसंबर 2000 तक का समय।


पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए और लिखिए।


() “असम, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, जिसे अपने वन्य जीवन, रेशम और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है। इसके साथ असम में नृत्य की भी एक समृद्ध परंपरा है।

उत्तर

भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित असम राज्य विशिष्ट प्रकार के उल्लेखनीय वन्य-जीवों और वनस्पतियों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ पर अनेक वन और राष्ट्रीय उद्यान हैं। रेशम और चाय के खास बागानों के लिए असम दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसके साथ ही साल भर चलने वाले नृत्य भी यहाँ की सांस्कृतिक परंपरा को समृद्ध बनाते हैं असम भारत का वह गौरवशाली राज्य है जो प्रत्येक दृष्टि से समृद्ध और संपन्न है।


() “पूरी दुनिया की संस्कृतियों में लोग नृत्य और संगीत से अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं।

उत्तर

नृत्य और संगीत हर्ष उल्लास को प्रकट करने का एक तरीका है। कई बार ईश्वर, प्रकृति या व्यक्ति विशेष के प्रति आभार प्रकट करने के लिए भी नृत्य और संगीत को माध्यम बनाया जाता है। आज दुनिया भर के देशों में नृत्य और संगीत की समृद्ध परंपराएँ विकसित हैं जो कि मानव समाज की भावनाओं को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम हैं।


सोच-विचार के लिए

निबंध को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

() “एंजेला के मन में कई तरह के विचार चल रहे थे।
उसके मन में कौन-कौन से विचार चल रहे होंगे?

उत्तर

एंजेला एक अलग सांस्कृतिक, सामाजिक वातावरण को देखकर कभी हतप्रभ थी तो कभी आनंदित। उसके मन में और भी बहुत कुछ जानने, देखने-समझने की जिज्ञासाओं से संबंधित विचार चल रहे थे। वह अपने साथ अनेक

स्मृतियों को सहेजने और लंदन जाकर अपने मित्रों के साथ बाँटने के बारे में विचार कर रही थी।


() “बिहू एक कृषि आधारित त्योहार है।कैसे

उत्तर

असम मेंबिहूसाल में तीन बार मनाया जाता हैसबसे पहले जब किसान खेतों में बीज बोते हैं, दूसरी बार तब जब वे खेतों में धान रोपते हैं और तीसरी बार तब जब खेतों में अनाज पक कर तैयार हो जाता है। इस प्रकारबिहूकृषि के विभिन्न सोपानों पर मनाया जाने वाला त्योहार है।


() ऐसा लगता है कि भारत से जाने के बाद भी एंजेला के मन में असम ही छाया हुआ था। पाठ से इस कथन के समर्थन के लिए कुछ उदाहरण खोजकर लिखिए।

उत्तर

एंजेला लंदन वापस जाने के बाद भी चलने खाना खाने और यहाँ तक कि खेलने के दौरान भी नृत्य करती रही, सभी वीडियो रिकॉर्डिंग को देखती रही और मन में असम की नृत्य परंपरा को याद कर आनंदित होती रही।


() समय के बदलने के साथ-साथ सत्रिया नृत्य की परंपरा में क्या बदलाव आया है?

उत्तर

पहले सत्रिया नृत्य सिर्फ़ लड़कों और पुरुषों द्वारा किया जाता था लेकिन आधुनिक दौर में महिला सत्रिया कलाकारों द्वारा भी नृत्य किया जाने लगा। इस प्रकार समय बदलने के साथ-साथ सत्रिया नृत्य की परंपरा में भी क्रांतिकारी बदलाव आया है।


निबंध की रचना

"गुवाहाटी के एक होटल में सामान्य होने के बाद वे उसी शाम पास के एक गाँव मलंग में गए। गाँव पहुँचने पर माँ ने एंजेला को बताया कि बिहू एक कृषि आधारित त्योहार है। असम में बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है।"

इन वाक्यों में बिहू और असम का ऐसा रोचक और सरस वर्णन किया गया है कि लगता है मानो हम कोई कहानी पढ़ रहे हैं। इस निबंध में वस्तु, घटना, प्रदेश आदि का वर्णन किया गया है। इसमें जो कुछ भी स्वयं देखा गया है, उसका वर्णन किया गया है। इस प्रकार के निबंधों में घटनाओं का एक क्रम होता है। इनमें आम जीवन की बातें होती हैं। इनकी भाषा सरल होती है। उदाहरण के लिए होली, दीपावली आदि के बारे में बताना।

इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और इसकी बनावट पर ध्यान दीजिए। इस पाठ की विशेषताएँ पहचानिए और अपनी कक्षा में साझा कीजिए और लिखिए, जैसे इस पाठ में लंदन से यात्रा शुरू करने से लेकर वापस लंदन पहुँचने तक के अनुभवों का वर्णन किया गया है।

उत्तर

सत्रिया और बिहू नृत्यपाठ निबंधात्मक शैली में लिखा गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं-


  1. रोचकता इस पाठ में लेखक ने एंजेला (10 वर्षीय बालिका) और उसकी माँ की असम यात्रा का वर्णन बहुत ही रोचक विवरण के साथ प्रस्तुत किया है।
  2. वातावरण का चित्रांकन- लेखक ने ऐंजेला के निवास स्थान, मित्र, स्कूल और पारिवारिक पृष्ठभूमि, उसकी अभिरुचियों आदि को बताते हुए पाठ का आरंभ किया पाठक को पाठ की मुख्य पात्र के साथ ही संपूर्ण घटनाक्रम से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  3. रोचक लेखन शैली- निबंध के घटनाक्रम को एक कहानी की भाँति क्रमशः आगे बढ़ाना, इसकी रोचकता को बढ़ाता है। पाठक एंजेला के साथ-साथ स्वयं को इस यात्रा, महोत्सव तथा प्रत्येक गतिविधि में संलग्न महसूस करने लगता है।
  4. सरल भाषा- निबंध की भाषा सरल और कक्षा के विद्यार्थियों की दृष्टि से पूर्णतया उपयुक्त है। नए-नए क्षेत्रीय शब्दों से विद्यार्थियों का परिचय उपयोगी और रुचिकर है।
  5. वस्तु और दृश्यों का वर्णन- अनु के खिलौनों की विशेषताएँ, बरगद के वृक्ष के नीचे एकत्रित जनसमूह का दृश्य, त्योहार की विशेषताएँ, नृत्यों की विशेषताएँ, पृष्ठभूमि प्रस्तुतिकरण आदि का वर्णन प्रभावशाली है।

इस प्रकार इस निबंध में प्रत्येक वस्तु, घटना पाठको के समक्ष चित्र उपस्थित कर देती है। जिससे पाठक एंजेला, उसकी माँ, उनकी यात्रा, विभिन्न घटनाएँ उनकी प्रसन्नता उत्सुकता सभी से स्वयं को जुड़ा हुआ महसूस करता है।



अनुमान या कल्पना से

अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए-

() “बिहू नृत्य और इसके उत्सव से अचंभित एंजेला और उसके परिवार ने इसके साथ-साथ लजीज पकवानों का पूरा आनंद लिया।

एंजेला और उसका परिवार बिहू नृत्य और उसके उत्सव को देखकर अचंभित क्यों हो गया?

उत्तर

असम का सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिवेश लंदन से बिल्कुल अलग था। बसंत ऋतु के आगमन पर किया जाने वाला नृत्य और उत्सव बहुत बड़ा था। एंजेला और उसके परिवार ने एक पेड़ के नीचे एक साथ इतने लोगों को कभी नहीं देखा था। यह दृश्य उन्हें एक स्वप्न की भाँति लग रहा था। समारोह का विहंगम दृश्य उन्हें अचंभित कर रहा था।



() “जब तक एंजेला कुछ समझ पाती, तब तक वह लंदन से नई दिल्ली होते हुए गुवाहाटी की उड़ान पर थी एंजेला और उसकी माँ एलेसेंड्रा ने भारत की यात्रा से पहले कौन-कौन सी तैयारियाँ की होंगी?

उत्तर

एंजेला की माँ ने स्कूल से उसकी बसंत की छुट्टियों को एक हफ़्ते और बढ़ाने की अनुमति ले ली और समय कम होने और जल्दबाजी में बनाई गई योजना के कारण वे सब जल्दी से जल्दी पैकिंग करके तैयार हो गए। उन्होंने असम .के नृत्य और संस्कृति के विषय में जानकारी एकत्रित की।


() “वहाँ एक बड़े से बरगद के पेड़ के नीचे मंच बनाया गया था बिहू नृत्य के लिए बरगद के पेड़ के नीचे मंच क्यों बनाया गया था।

उत्तर

बिहू नृत्य एक बड़ा महोत्सव है। किसी सभागार में महोत्सव करने पर सीमित व्यक्ति ही इसका आनंद ले पाते। महोत्सव का आनंद ज्यादा से ज्यादा लोग ले सकें इसलिए बिहू नृत्य के लिए बरगद के छायादार पेड़ के नीचे मंच बनाया गया था। परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण और धार्मिक स्थलों में ही इस प्रकार के महोत्सव मनाए जाते हैं।


शब्दों की बात

नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और मित्रों की सहायता भी ले सकते हैं।

असम से जुड़े शब्द

इस पाठ में अनेक शब्द ऐसे हैं जो असम से विशेष रूप से जुड़े हैं | अपने समूह में मिलकर उन शब्दों की पहचान कीजिए। इसके बाद उन्हें नीचे दिए गए स्थान पर लिखिए-
(
संकेत- असम के नृत्य, त्योहार, भाषा आदि )

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उत्तर

1. सत्रिया नृत्य
2.
बिहू नृत्य और त्योहार
3.
असमिया भाषा



4. वन्य- – जीवन

5. रेशम की खेती, चाय बागान

6. मलंग गाँव



तीन बिहू

असम में बिहू साल में तीन बार मनाया जाता है।

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  1. रोंगाली या बोहाग (बैसाख, सामान्यतया अप्रैल में )
  2. भोगाली या माघ ( माघ, सामान्यतया जनवरी में ),
  3. कोंगाली या काटी (कार्तिक, सामान्यतया अक्टूबर में)


() एंजेला और उसकी माँ एलेसेंड्रा कौन-से बिहू के अवसर पर भारत आए थे? लिखिए।

उत्तर

एंजेला उसकी माँ एलेसेंड्रा और पिता ब्रायन अप्रैल माह में नए साल के अवसर पर भारत आए थे। बसंत के आने के खुशी में बिहू त्योहार मनाया जाता है। यह वह अवसर होता है जब किसान खेतों में बीज बोते हैं।


() तीनों बिहू के लिए लिखिए कि उस समय किसान खेतों में क्या कर रहे होते हैं?

उत्तर

साल में तीन बार मनाया जाने वाला त्योहार बिहू सबसे पहले तब मनाया जाता है जब किसान खेतों में बीज बोते हैं। दूसरी बार तब जब किसान खेतों में धान रोपते हैं और तीसरी बार तब जब खेतों में अनाज तैयार हो जाता है।


पाठ से आगे

आपकी बात

अपने समूह में चर्चा कीजिए-

() ” रीना आंटी की एक बिटिया थी- अनु

बिटियाका अर्थ हैबेटी बेटी को प्यार से बुलाने के लिए और स्नेह जताने के लिएबिटियाशब्द का प्रयोग भी किया जाता है।बिटियाजैसा ही एक अन्य शब्दबिट्टोभी है।

आपके घर में आपको प्यार से किन-किन नामों से पुकारा जाता है? .

उत्तर

लाडो, छोटी, किट्टू, छुटकी, सोना, रानी, गुड़िया आदि


() आपके नाम का क्या अर्थ है? आपका नाम किसने रखा? पता करके बताइए

उत्तर

मेरा नाम पुनीता है। मेरा नाम मेरे बाबा ने रखा। मेरे नाम का अर्थपवित्रतायापवित्रता को समेटे हुएहै।


() “वे एक साथ खेल रहे थेआप कौन-कौन से खेल अपने मित्रों के साथ मिलकर खेलते हैं? बताइए

उत्तर

कबड्डी, पकड़म-पकड़ाई, चोर-सिपाही, ऊँच-नीच आदि


() “असम में नृत्य की भी एक समृद्ध परंपरा है।
आपने इस पाठ में बिहू और सत्रिया नृत्यों के बारे में तो पढ़ा है।

आपके प्रांत में कौन-कौन से नृत्य प्रसिद्ध हैं? आपको कौन-सा नृत्य करना पसंद हैं?

उत्तर

रासलीला, कजरी, चरकुला
(
सभी विद्यार्थियों के उत्तर अलग-अलग होंगे )


पूर्वोत्तर की यात्रा

असम भारत के पूर्वोत्तर भाग में स्थित है। असम के अतिरिक्त पूर्वोत्तर भारत में सात अन्य राज्य भी हैं। आपको अवसर मिले तो इनमें से किसी राज्य की यात्रा कीजिए। आठ राज्यों के नाम हैंअरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड, मणिपुर और असम

उत्तर

यात्रा स्वयं करके अनुभव प्राप्त करें।


टाइम मशीन


उसे ऐसा लग रहा था, जैसे वह आश्चर्यजनक रूप से किसी टाइम मशीन में आकर बैठ गई हो ! ” क्या आपने पहले कभीटाइम मशीनका नाम सुना है? टाइम मशीन ऐसी काल्पनिक मशीन है, जिसमें बैठकर बीते हुए या आने वाले समय की दुनिया में पहुँचा जा सकता है।टाइम मशीनको अभी तक बनाया नहीं जा सका है। लेकिन अनेक लेखकों नेटाइम मशीनके बारे में कहानियाँ लिखी हैं, अनेक फ़िल्मकारों ने इसके बारे में फ़िल्में बनाई हैं।


() यदि आपको टाइम मशीन मिल जाए तो आप उसमें बैठकर कौन-से समय में और कौन-से स्थान पर जाना चाहेंगे? क्यों?

उत्तर

मुझे यदि टाइम मशीन मिल जाए तो मैं वैदिक काल में जाना चाहूँगी और उस समय के ऋषि-मुनियों से लोक कल्याण हेतु अनेक विद्याएँ सीखना चाहूँगी।


() आपको यदि कोई ऐसी वस्तु बनाने का अवसर मिले जो अभी तक नहीं बनाई गई है तो आप क्या बनाएँगे? क्यों बनाएँगे?

उत्तर

मैं भविष्य को स्पष्ट देखने वाली मशीन बनाना चाहूँगी जिससे बिना इधर-उधर समय गँवाए, भटके और परेशान हुए बिना निश्चित दिशा की ओर व्यक्ति आगे बढ़ सके।


() क्या आपने कभी किसी संग्रहालय की यात्रा की है?

संग्रहालय ऐसा स्थान होता है जहाँ विभिन्न कालों की प्राचीन वस्तुएँ देखने को मिलती हैं। कभी-कभी संग्रहालय की यात्रा भीटाइम मशीनकी यात्रा जैसी लगती है।
अवसर मिले तो आप भी किसी संग्रहालय की यात्रा अवश्य कीजिए और उसके बारे में कक्षा में बताइए |

उत्तर

हाँ, मैंने पटना स्थित राज्य संग्रहालय की यात्रा की है, पर खुदाई से प्राप्त प्राचीन भारत के कई अवशेष संग्रहित हैं।


खिलौने विभिन्न प्रकार के

"एंजेला को अनु के खिलौने बहुत अच्छे लगे, जो थोड़े अलग तरह के थे।"

() अनु के खिलौने कैसे थे? लंदन में एंजेला के खिलौने कैसे रहे होंगे?

उत्तर

अनु के खिलौने लकड़ी और नारियल की जटाओं से बने थे, जो एंजेला के खिलौनों से अलग थे। एंजेला के पास लंदन में बैटरी और चाबी से चलने वाली प्लास्टिक की गुड़िया, जोकर आदि खिलौने होंगे।


() आप घर पर कौन-कौन से खिलौनों से खेलते रहे हैं? उनके नाम बताइए

उत्तर

हम घर में कपड़ों से बनाई गई गुड़िया, लकड़ी के डंडों, लकड़ी के बर्तनों आदि से खेलते रहे हैं। गुड़िया की शादी, चाय बनाना, पेड़ पर चढ़ना, चोर सिपाही, घर-घर आदि खेलों के नाम हैं।


() भारत के प्रत्येक प्रांत में हाथ से बच्चों के अनोखे खिलौने बनाए जाते हैं। आपके यहाँ बच्चों के लिए हाथ से बने कौन-कौन से खिलौने मिलते हैं?

उत्तर

हमारे यहाँ हाथ से बने कुत्ते, बिल्ली, खरगोश, सिपाही, चिड़िया, धनुष-बाण, जहाज आदि खिलौने मिलते हैं।


() भारत के बच्चे स्वयं भी अपने लिए अनोखे खिलौने बना लेते हैं। आप भी तो कागज़, मिट्टी आदि से कोई कोई खिलौना बनाना जानते होंगे? आप अपने हाथों से बनाए किसी खिलौने को कक्षा में लाकर दिखाइए और उसे बनाने का तरीका सबको सिखाइए।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।

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पत्र

() मान लीजिए आप एंजेला है। आप लंदन लौट चुकी हैं और आपको भारत की बहुत याद रही है। अपनी सखी अनु को पत्र लिखकर बताइए कि आपको कैसा अनुभव हो रहा है।

उत्तर

प्रिय अनु,

नमस्ते!

आशा है तुम ठीक होगी। अनु, मैं लंदन वापस गई हूँ पर ऐसा लगता है जैसे असम मेरे साथ ही गया है। वहाँ तुम्हारे साथ खेले गए खेल, तुम्हारे खिलौनें, तुम्हारी बातें, नृत्यमहोत्सव सब कुछ बहुत याद आते हैं। मैं प्रायः वहाँ की वीडियो देखती हूँ। मैंने अपने स्कूल में बिहू नृत्य की प्रस्तुति दी थी। सभी को नृत्य बहुत पसंद आया जबकि मुझे अभी बहुत अच्छा नृत्य करना नहीं आता।
मुझे जब कभी असम आने का अवसर मिलेगा मैं तुमसे मिलने जरूर आऊँगी। अगर तुम्हें लंदन आने का मौका मिले तो जरूर आना, मुझे तुम्हें बहुत कुछ दिखाना है और बताना भी है। मैंने अपने दोस्तों को तुम्हारे बारे में बताया, वे सब भी तुमसे मिलकर जरूर प्रसन्न होंगे।
रीना आंटी को नमस्ते कहना

तुम्हारी सखी
एंजेला


() आप जानते होंगे कि पत्र लिखने के लिए आवश्यक सामग्री जैसेपोस्टकार्ड, अंतर्देशीय लिफाफे आदि डाकघर से खरीदे जा सकते हैं। संभव हो तो आप भी अपने घर के पास के डाकघर में जाइए और एक पोस्टकार्ड खरीदकर पत्र लिखने के लिए उसका उपयोग कीजिए।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


() क्या आपने कभी डाक टिकट देखा है ?

संसार के सभी देश डाक टिकट जारी करते हैं। भारत का डाक विभाग भी समय-समय पर डाक टिकट जारी करता है। डाक-टिकट किसी देश की संस्कृति के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी उपलब्ध कराते हैं। इसलिए अनेक लोग देश-विदेश के डाक टिकटों को एकत्रित करना पसंद करते हैं।

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नीचे भारत के विभिन्न लेखकों के सम्मान में जारी किए गए कुछ डाक टिकटों के चित्र दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से देखिए – (डाक टिकटों के चित्र के लिए पाठ्यपुस्तक की पृष्ठ संख्या 90 पर देखें।)


() आपको इनमें से कौन-सा डाक टिकट सबसे अच्छा लगा और क्यों?

उत्तर

मुझे इनमें से सुभद्रा कुमारी चौहान जी पर जारी एक डाक टिकट सबसे अच्छा लगा क्योंकि वे मेरी प्रिय कवयित्री हैं। मुझे उनकी रचनाएँ पढ़ना बहुत पसंद है।


() डाक टिकटों पर लेखकों के बारे में कौन-कौन सी जानकारी दी गई है ?

उत्तर

डाक टिकटों पर लेखकों का छायाचित्र है तथा हिंदी और अंग्रेजी में उनका नाम लिखा हुआ है। इसके साथ ही टिकट जारी होने के वर्ष तथा लेखकों के जन्म और मृत्यु के वर्ष की जानकारी भी दी गई है।


आज की पहेली

आज हम आपके लिए लाए हैं, कुछ असमिया पहेलियाँ। इनमें कुछ पहेलियों को पढ़कर आपको लगे, अरे! ये पहेली तो मेरे घर पर भी बूझी जाती है ! तो कुछ पहेलियाँ आप पहली बार बूझेंगे। तो आइए, आनंद लेते हैं इन रंग-बिरंगी पहेलियों का-

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उत्तर

विद्यार्थी पढ़कर स्वयं समझें


झरोखे से

असम, भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में है, जिसे अपने वन्य-जीवन, रेशम और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है।
आपने पढ़ा है कि असम का रेशम (जिसे मूँगा सिल्क भी कहा जाता है) बहुत प्रसिद्ध है। क्या आप जानना चाहते हैं, यह क्या है, कैसे बनता है और क्यों प्रसिद्ध है? हाँ? तो पढ़िए आगे

असम का सुप्रसिद्ध मूँगा सिल्क

कुछ वर्ष पूर्व मेरी नियुक्ति गुवाहाटी हवाई अड्डे पर हुई थी। वहाँ पर प्रायः मैं महिलाओं को एक विशेष प्रकार की आकर्षक साड़ी पहने देखता था। यह साड़ी सदैव भूरे-सुनहरे रंग की झिलमिली- सी होती थी। उस पर अधिकतर पारंपरिक ढंग से लाल या काली बार्डर तथा हरे, लाल अथवा पीले रंग से बूटों आदि की कढ़ाई रहती थी। कुछ समय पश्चात जब मैं असम के एक विवाह समारोह में गया, तो वहाँ भी अधिकतर महिलाएँ उसी प्रकार की अन्य चमकीली भूरी-सुनहरी साड़ियाँ पहन कर आई थीं। अनेक पुरुषों ने भी उसी प्रकार के भूरे-सुनहरे रंग के कुर्ते पहने हुए थे। बस केवल रंगों में हल्के या गहरे का अंतर था। मैंने अपने एक असमी मित्र से कि यह कैसा भूरा- I-चमकीला कपड़ा है।

मित्र ने बताया कि यह भूरा नहीं बल्कि सुनहरा है। यह असम का सुप्रसिद्ध मूँगा सिल्क है जो सभी प्रकार के रेशमों में सबसे महँगा होता है। मूँगा का असमिया भाषा में अर्थ है पीला या गहरा भूरा। और इसकी सबसे बड़ी विशेषता है कि सम्पूर्ण विश्व में यह केवल असम तथा देश के पूर्वोत्तर राज्यों में ही तैयार होता है। यह असम को प्रकृति द्वारा दिया गया अनमोल और अद्वितीय उपहार है।

मित्र ने यह भी बताया कि मूँगा सिल्क की साड़ियों की एक खूबी यह है कि अन्य रेशमी कपड़ों के विपरीत इनकोड्राई क्लीनकराने की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि उन्हें घर पर ही धोया जा सकता है। हर धुलाई के बाद इनका निखार बढ़ता ही जाता है। एक साड़ी औसतन 50 वर्ष तक खराब नहीं होती है। ऐसा माना जाता है कि
मूँगा रेशम सभी प्रकार के प्राकृतिक रूप से तैयार किए जाने वाले कपड़ों में सबसे मज़बूत होता है। इसके अलावा इसे गर्मी या सर्दी किसी भी मौसम में पहना जा सकता है। असम के लोगों का मानना है कि मूँगा सिल्क के कपड़ों में अनेक औषधीय गुण भी होते हैं।
बिमल श्रीवास्तव, स्रोत पत्रिका, अप्रैल 2008

उत्तर

विद्यार्थी पढ़कर स्वयं समझें


साझी समझ

आपको इस लेख में दी गई कौन-सी जानकारी सबसे अच्छी लगी? क्यों? अपने समूह में बताइए

उत्तर

इस लेख में मूँगा सिल्क के संबंध में दी गई जानकारी ज्यादा अच्छी लगी। असम का मूँगा सिल्क सभी प्रकार के रेशमों से सबसे महँगा होता है और यह असम तथा देश के पूर्वोत्तर राज्यों में ही तैयार होता है। यह जानकर बहुत आश्चर्य हुआ कि इससे बनी साड़ी लगभग 50 वर्ष तक खराब नहीं होती और हर धुलाई के बाद इसका निखार बढ़ता ही जाता है। इसे सर्दी-गर्मी किसी भी मौसम में पहना जा सकता है।


खोजबीन के लिए

असम सहित पूर्वोत्तर भारत के बारे में आप और जान सकते हैं और भारत के पारंपरिक लोक संगीत का आनंद भी ले सकते है, जिन्हें इंटरनेट कड़ियों तथा क्यू. आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें समझें-

  • असम-बिहू लोकगीत
  • सत्रिया नृत्य मणिपुरी नृत्य
  • भारत के लोक नृत्य
  • पूर्वोत्तर राज्यों के लोक नृत्य
  • भाषा संगम असमिया
  • मुकोली बिहू


उत्तर

विद्यार्थी व्यक्तिगत रूप से करें।


Chapter 9

Chapter 9 मैया मैं नहिं माखन खायो Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

() नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है ? उसके सामने तारा () बनाइए-

(1) मैं माखन कैसे खा सकता हूँ? इसके लिए श्रीकृष्ण क्या तर्क दिया?

  • मुझे तुम पराया समझती हो
  • मेरी माता, तुम बहुत भोली हो
  • मुझे यह लाठी- कंबल नहीं चाहिए
  • मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?

उत्तर

मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं? ()


(2) श्रीकृष्ण माँ के आने से पहले क्या कर रहे थे?

  • गाय चरा रहे थे।
  • माखन खा रहे थे।
  • मधुबन में भटक रहे थे।
  • मित्रों के संग खेल रहे थे।

उत्तर

माखन खा रहे थे। ()


() अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइएं कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

प्रश्न एक का यह उत्तर हमने इसलिए चुना क्योंकि पहले दो विकल्पों में बाल कृष्ण अपनी माँ को उनके भोलेपन और पराया समझने की बात कर रहे हैं। तीसरे में नाराज़गी दिखा रहे हैं और चौथे विकल्प में माखन के छीके तक अपने छोटे हाथ नहीं पहुँचने का बहाना बना रहे हैं। उनका यह बहाना तर्कसंगत प्रतीत होता है

प्रश्न दो का यह विकल्प हमने इसलिए चुना है क्योंकि कान्हा के मुँह पर माखन लगा हुआ था।

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मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर यहाँ कुछ शब्द दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

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शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. जसोदा

1. समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दिवस में आठ पहर होते हैं)

2. पहर

2. एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते।)

3. लकुटि कमरिया

3. गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीज़ों (जैसे- दूध, दही आदि ) को कुत्ते, बिल्ली आदि पा सकें।

4. बंसीवट

4. यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था।

5. मधुबन

5. जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ।

6. छीको

6. गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी

7. माता

7. मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन।

8. ग्वाल-बाल

8. लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटिकमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)

उत्तर

शब्द

अर्थ या संदर्भ

1. जसोदा

4. यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था।

2. पहर

1. समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दिवस में आठ पहर होते हैं)

3. लकुटि कमरिया

8. लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृष्ण लकुटिकमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)

4. बंसीवट

2. एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृक्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वनि से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते )

5. मधुबन

7. मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन

6. छीको

3. गोल पात्र के आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीने की चीज़ों (जैसे- दूध, दही आदि ) को कुत्ते, बिल्ली आदि पा सकें।

7. माता

5. जन्म देने वाली, उत्पन्न करने वाली, जननी, माँ।

8. ग्वाल-बाल

6. गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृष्ण के संगी साथी


पंक्तियों पर चर्चा


पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए

() ‘भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो

उत्तर

यशोदा मैया से ग्वालिनों ने शिकायत की थी कि कान्हा रोज़ उनका माखन खा जाते हैं और ज़मीन पर भी गिराते हैं। श्रीकृष्ण हमेशा मना कर देते थे। आज कान्हा के मुँह पर माखन लगा हुआ था तो माता यशोदा उनसे पूछती हैं कि उन्होंने माखन चुरा कर क्यों खाया? कान्हा मना कर देते हैं और अपनी बात के पक्ष में दलील देते हुए कहते हैं कि मुझे तो आप सुबह से ही गायों के पीछे, उनके साथ मधुबन में भेज देती हैं। मैं दिनभर वही रहता हूँ, तो फिर मैं यहाँ आकर माखन कैसे खा सकता हूँ?


() ” सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो

उत्तर

ग्वालिनों के शिकायत करने पर माँ यशोदा परेशान हो जाती हैं कि जब घर में इतना माखन होता है, फिर भी कान्हा माखन चुराकर क्यों खाते हैं। कान्हा के मुँह पर माखन लगा देखकर वे उनसे पूछती हैं कि उन्होंने माखन क्यों चुराया ? कान्हा विभिन्न बहाने बनाकर मना कर देते हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया वे कहते हैं कि तू बहुत भोली है जो इनकी बातों में गई है, मुझे पराया जानकर तेरे मन में मेरे लिए भेदभाव उत्पन्न हो गया है। फिर नाराज़ होकर कहते हैं कि मैं अब गाय चराने नहीं जाऊँगा, तुम अपनी ये लकुटि कमरिया ले लो। सूरदास जी कहते हैं कि बाल कृष्ण की दलीलें और उनके भोलेपन को देखकर माता यशोदा को उन पर प्यार जाता है।


सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर ढूँढ़कर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

() पद में श्रीकृष्ण ने अपने बारे में क्या-क्या बताया है?

उत्तर

इस पद में श्रीकृष्ण से माँ यशोदा पूछ रही हैं कि उन्होंने माखन चुराकर क्यों खाया ? श्रीकृष्ण माखन चुराने की बात से साफ़ इंकार करते हुए कहते हैं- माँ, मैंने माखन नहीं खाया है। वे कहते हैं कि मैं तो यहाँ था ही नहीं, मुझे तो प्रतिदिन सुबह ही आप गाय चराने के लिए मधुबन भेज देती हैं। पूरा दिन वहाँ रहकर मैं शाम को घर आता हूँ। मैं तो बहुत छोटा हूँ। ये ग्वाल-बाल झूठ बोल रहे हैं। इन्होंने ज़बरदस्ती ये माखन मेरे मुँह पर लगा दिया है। इस प्रकार अपने विषय में तर्क देकर उन्होंने अपनी माँ को समझाने का प्रयत्न किया।


() यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?

उत्तर

सभी माताएँ अपने बच्चों से अटूट प्रेम करती हैं। बच्चों की भोली और प्यारी बातों पर माँबाप का स्नेह उमड़ पड़ता है। यहाँ भी बालक कृष्ण बड़ी-बड़ी बातें करते हुए कह रहे हैं कि माँ, तुम बहुत भोली हो जो इनकी बातों में गई हो और मुझे पराया जानकर तुम भेद-भाव कर रही हो। नाराज़ होने का नाटक करते हुए लकुटिकमरिया वापस करते हुए श्रीकृष्ण कहते हैं कि आपने मुझे अपनी बातों से बहुत तंग किया है। पुत्र- प्रेम से व्याकुल होकर, उनकी प्यारी-प्यारी बातें सुनकर यशोदा मैया उन्हें गले से लगा लेती हैं।


कविता की रचना

"भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर यो ।।"


इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए पठायोऔरआयोदोनों शब्दों की अंतिम ध्वनि एक जैसी है। इस विशेषता कोतुककहते हैं। इस पूरे पद में प्रत्येक पंक्ति के अंतिम शब्द का तुक मिलता है अनेक कवि अपनी रचना को प्रभावशाली बनाने के लिए तुक का उपयोग करते हैं।


() इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस पद की अंतिम पंक्ति में अपना नाम भी दिया है आदि

उत्तर

इस पद की सभी पंक्तियों के अंतिम शब्द एक जैसी ध्वनि वाले हैं, यथा- खायो, पठायो, आयो, पायो, लपटायो, पतियायो, जायो, नचायो, लगायो। यह विशेषतातुककहलाती है। इससे पाठक श्रोता को कविता प्रभावशाली लगती है कविसूरदासजी ने बहुत बारीकी से जाँच-परख कर बाल-सुलभ बातों को कविता का रूप दिया है। बालक अपनी बात को सिद्ध करने के लिए पहले वह तर्क देता है जो उसकी आयु कद के अनुरूप होते हैं। वह अपना दोष दूसरे पर डालने का प्रयत्न करता है। यदि फिर भी बात बने तो नाराज़गी दिखाता है। इन सब बातों का बखूबी वर्णन करते हुए कवि ने बहुत सुंदरता से अंतिम पंक्ति में अपना नाम भी दे दिया है।


() अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

() श्रीकृष्ण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यों दे रहे होंगे ?

उत्तर

सभी बालक शरारती होते हैं। इन शरारतों में उनसे कुछ ऐसी गलतियाँ हो जाती हैं, जिनके कारण उन्हें डाँटा जाता है और डाँटना आवश्यक भी होता है। छोटे बच्चों को तो सही-गलत का ज्ञान नहीं होता। सही-गलत से बच्चों का परिचय परिवार के बड़े सदस्य ही करवाते हैं। बच्चे नासमझ होते हुए भी इतने ज्ञानी अवश्य होते हैं कि अपनी बात को तर्कसंगत साबित करते हुए कई तरह के बहाने बना सकें। श्रीकृष्ण भी छोटे बच्चे ही हैं, अत: स्वयं को निर्दोष साबित करने के लिए वे अपनी माँ यशोदा को तर्क देते हैं।


() जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्या हुआ होगा?

उत्तर

जब माता यशोदा ने श्रीकृष्ण को गले लगा लिया, तब माँ-बेटे प्रसन्नता से झूम उठे होंगे। यशोदा माता भी अपने पुत्र से नाराज़ नहीं रह सकती थीं। श्रीकृष्ण भी यह नहीं चाहते थे। वे भी माता यशोदा को हर्षित देखना चाहते थे जिस बात को लेकर प्रश्न-उत्तर चल रहे थे, वह बात भी समाप्त हो गई होंगी


शब्दों के रूप

नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।

() "भोर भयो गैयन के पाछे"

इस पंक्ति मेंपाछेशब्द आया है। इसके लिएपीछेशब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते लिखते हैं, उस प्रकार से लिखिए।

  • परे – _____
  • कछु – _____
  • छोटो – _____
  • लै – ____
  • बिधि – ____
  • नहिं – ____
  • भोरी – ______

उत्तर

  • परेपड़े
  • कछुकुछ
  • छोटोछोटा
  • लैलेना
  • बिधिविधि, प्रकार
  • नहिंनहीं
  • भोरीभोली





() पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अर्थों से मिलान कीजिए-


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स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. उपजि

1. मुसकाई, हँसी

2. जानि

2. उपजनना, उत्पन्न होना

3. जायो

3. जानकर, समझकर

4. जिय

4. विश्वास किया, सच माना

5. पठायो

5. बाँह, हाथ, भुजा

6. पतियायो

6. प्रकार, भाँति, रीति

7. बहियन

7. मन, जी

8. बिधि

8. जन्मा

9. बिहँसि

9. मला, लगाया, पोता

10. भटक्यो

10. इधर-उधर घूमा या भटका

11. लपटायो

11. भेज दिया

उत्तर

स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. उपजि

8. जन्मा

2. जानि

2. उपजनना, उत्पन्न होना

3. जायो

3. जानकर, समझकर

4. जिय

7. मन, जी

5. पठायो

11. भेज दिया

6. पतियायो

4. विश्वास किया, सच माना

7. बहियन

5. बाँह, हाथ, भुजा

8. बिधि

6. प्रकार, भाँति, रीति

9. बिहँसि

1. मुसकाई, हँसी

10. भटक्यो

10. इधर-उधर घूमा या भटका

11. लपटायो

9. मला, लगाया, पोता


वर्णपरिवर्तन

तू माता मन की अति भोरी

भोरीका अर्थ हैभोली यहाँऔरवर्ण परस्पर बदल गए हैं। आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दों में भीयाड़औरमें वर्ण- परिवर्तन हुआ है। ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर

  • परेपड़ना
  • भोरीभोली

 

पंक्ति से पंक्ति


नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं और स्तंभ 2 में उनके भावार्थ दिए हैं। रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए।

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स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो

1. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?

2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आये।

2. तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।

3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।

3. माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में गई हो।

4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।

4. सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।

5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।

5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।

6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो

6. ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।

उत्तर

स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो

4. सुबह होते ही गायों के पीछे मुझे मधुबन भेज दिया।

2. चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आये।

5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया।

3. मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।

1. मैं छोटा बालक हूँ, मेरी बाँहें छोटी हैं, मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हूँ?

4. ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो।

6. ये सब सखा मुझसे बैर रखते हैं, इन्होंने मक्खन हठपूर्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया।

5. तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो।

3. माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी बातों में गई हो।

6. जिय तेरे कछु भेद उपजि है, जानि परायो जायो

2. तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो मुझे पराया समझ लिया।


पाठ से आगे

आपकी बात

मैया मैं नहिं माखन खायो

यहाँ श्रीकृष्ण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन महीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ जाता है कि यह कार्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद्ध करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए।

उत्तर

हाँ, जीवन में कई बार ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं जब हम सत्य कह रहे होते हैं तब भी लोग उस पर विश्वास नहीं कर पाते और यदि ऐसे में साक्ष्य हो तो अच्छा-खासा सच भी झूठ की शंका के नीचे दबकर दम तोड़ देता है। इसके लिए काफी हद तक दोषी हम सभी हैं क्योंकि अधिकतर लोग अपनी आदत के कारण झूठ का सहारा लेते हैं।

मैं विद्यालय अपनी साइकिल से जाता हूँ। आज मेरी वार्षिक परीक्षा थी। वर्षा हो रही थी मैं घर से थोड़ी दूर ही गया था कि मैंने देखा कि एक वृद्ध व्यक्ति सड़क के किनारे दुर्घटनाग्रस्त पड़े हैं। उनके पाँव से खून बह रहा था। मैंने उन्हें अस्पताल पहुँचाने का निश्चय किया। मैंने उन्हें अपनी साइकिल पर बिठाया और सरकारी अस्पताल ले गया। अधिक खून बह जाने के कारण वे अर्ध-मूर्च्छित से हो रहे थे। उन्हें अस्पताल छोड़कर मैं विद्यालय आया उस समय तक मैं आधा घंटा देर से विद्यालय पहुँचा था देर से आने के कारण मुझे विद्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया। मेरी बात पर स्कूल के गेट पर खड़े गार्ड ने विश्वास ही नहीं किया। उन्होनें कहा कि वे विद्यालय के नियम के विरुद्ध नहीं जा सकते। तभी वहाँ पर हमारे पी.टी. सर गए। उन्हें मेरी बात पर विश्वास हो गया। उन्होंने प्रधानाध्यापक से बात की। विद्यालय से जब अस्पताल फ़ोन करके पूछा गया तो मेरी बात सत्य सिद्ध हुई। मुझे मेरे काम की शाबासी देते हुए प्रधानाचार्य जी ने मुझे परीक्षा पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय भी दिया और अगले दिन मेरे कार्य की प्रशंसा प्रात:कालीन प्रार्थना सभा में भी की गई।


घर की वस्तुएँ

मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।

छीकाघर की एक ऐसी वस्तु है जिसे सैकड़ों वर्ष से भारत में उपयोग में लाया जा रहा है।

नीचे कुछ और घरेलू वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? चित्रों के नीचे लिखिए। यदि किसी चित्र को पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।

उत्तर

  • घड़ा, कुंभ
  • इस्त्री, प्रेस
  • चौकी
  • सिलाई मशीन
  • चारपाई
  • मूर्तबान
  • सूप
  • जाँता
  • सीलवट्टा
  • मथानी
  • पंखा
  • छलनी
  • डलिया
  • ओखली
  • बिलौनी

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आप जानते ही हैं कि श्रीकृष्ण को मक्खन बहुत पसंद था। दूध से दही, मक्खन बनाया जाता है और मक्खन से घी बनाया जाता है। नीचे दूध से घी बनाने की प्रक्रिया संबंधी कुछ चित्र दिए गए हैं| अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या इंटरनेट आदि की सहायता से दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए।

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उत्तर

दूध से घी बनाने की प्रकिया


समय का माप

"चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो।"

() ‘पहरऔरसाँझशब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया जाता है। समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपने समूह में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए
(
संकेत- कल, ऋतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि)

उत्तर

एक दिन-रात के 24 घंटों को 8 पहर में विभक्त किया गया है।
दिन के चार पहर- पूर्वाह्न, मध्याह्न, अपराह्न, सायंकाल रात के चार पहरप्रदोष, निशिथ, त्रियामा, उषा 3 घंटे का एक पहर होता है।

  • कलआने वाला अथवा बीता हुआ
  • ऋतुविभिन्न ऋतुएँ
  • वर्ष – 365 दिन
  • पखवाड़ा – 15 दिन
  • दशक- दस वर्ष
  • वेलासमय
  • अवधिसमय-सीमा


() श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?

उत्तर

श्रीकृष्ण के अनुसार वे चार पहर अर्थात 12 घंटे गाय चराते थे।


() मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे। वे सुबह कितने बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे?

उत्तर

यदि श्रीकृष्ण शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे हैं तो वे सुबह छह बजे गाय चराने चले गए होंगे।



() ‘दोपहरका अर्थ है- ‘दो पहरका समय जब दूसरे पहर की समाप्ति होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता है। यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूर्य सिर पर जाता है बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?

उत्तर

सुबह 6 बजे दिन के पहले पहर का आरंभ होता है।


हम सब विशेष हैं

() महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्ति और कविता रचने की कुशलता
हम सभी में कुछ कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए-

आपकी ________

आपके किसी परिजन की _______

आपके शिक्षक की ________

आपके मित्र की _______

उत्तर

आपकीमुझे कहानियाँ और पुस्तकें पढ़ने-लिखने का शौक है।

आपके किसी परिजन की- मेरे दादा जी एक कुशल व्यापारी हैं। वे अपने बल, बुद्धि और मेहनत के बूते एक सफल व्यापारी हैं। मेरे पापा और मेरे चाचा जी भी अब उनके साथ व्यापार में उनका सहयोग करते हैं। व्यापार में दादा जी से सीखकर अब वे दोनों भी कुशल व्यापारी बन गए हैं।

आपके शिक्षक की- हमारे शिक्षक हमारे आदर्श हैं। वे हमारी पूरी कक्षा के आदर्श हैं। वे हम छात्रों को बहुत प्रेम से पढ़ाते हैं। अपने विषय पर उनका पूरा अधिकार है। वे हमें सरल और रोचक ढंग से पढ़ाते हैं। वे सभी छात्रों पर एक समान ध्यान देते हैं यहाँ तक कि यदि हममें से किसी छात्र को कोई समस्या हो तो उस पर भी उनकी नज़र रहती है।

आपके मित्र की- वैसे तो मेरे सारे सहपाठी मेरे मित्र हैं किंतु हम चार विद्यार्थियों का समूह अपनी मित्रता के लिए प्रसिद्ध हैं। हम चारों के परिवारिक संबंध भी बहुत अच्छे हैं। हम चारों हर समय एक-दूसरे की सहायता करने के लिए तत्पर रहते हैं।


() एक विशेष क्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है वह क्षमता है सबकी सहायता करना, सबके भले के लिए सोचना तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे-

  • एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं रहा है।
  • एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता।
  • एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
  • एक सहपाठी बहुत अटकअटक कर बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है।
  • एक सहपाठी को चलने में कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है।
  • एक सहपाठी प्रतिदिनं विद्यालय आता है और उसे सुनने में कठिनाई है।

उत्तर

  • मेरा एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं रहा है। मेरे परिवार से मुझे एक-दूसरे की सहायता करने के संस्कार मिले हैं। इसलिए उस पाठ को पहले मैं दो बार पढूँगा ताकि अपने उस सहपाठी को भली-भाँति समझा सकूँ। इसके पश्चात मैं अपने उस सहपाठी को पाठ समझाऊँगा।
  • एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता। अपने उस सहपाठी की पढ़ने में मैं मदद करूँगा। उसे पढ़कर पाठ सुनाऊँगा और उसके लिए ब्रेल लिपि की पुस्तक लाऊँगा
  • एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है। इसके लिए हमें भरसक प्रयत्न करना है। उसे हम धीरे-धीरे बोलने का अभ्यास करवाकर कक्षा के भाषण को बोलने का भी अभ्यास करवाएँगे। बार-बार का अभ्यास उसे सफल बनाएगा और उसमें आत्मविश्वास की भावना बढ़ेगी और वह जीवन में सफलता की ओर अग्रसर होगा।
  • एक सहपाठी अटकअटक कर बोलता है और उसे भाषण देना है। कहावत प्रसिद्ध है- ‘करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।उसे एक ही वाक्य बार-बार बोलने का अत्यधिक अभ्यास करवाया जाएगा ताकि उसकी यह कमी दूर हो जाए और वह भाषण देने में सफल हो जाए
  • एक अन्य सहपाठी को चलने में कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है। ऐसे सहपाठी को दौड़ने में कठिनाई तो बहुत होगी, किंतु बार-बार के अभ्यास से उसमें कुछ-- कुछ सुधार अवश्य होगा।
  • एक सहपाठी प्रतिदिन विद्यालय आता है और उसे सुनने में कठिनाई है। हम उसे सुनने का उपकरण खरीदकर देकर उसकी सहायता कर सकते हैं।

 

आज की पहेली

दूध से मक्खन ही नहीं बल्कि और भी बहुत कुछ बनाया जाता है | नीचे दूध से बनने वाली कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं | दी गई शब्द पहेली में उनके नाम के पहले अक्षर दे दिए हैं। (चित्र के लिए पाठ्यपुस्तक देखें) नाम पूरे कीजिए-

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उत्तर


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खोजबीन के लिए

सूरदास द्वारा रचित कुछ अन्य रचनाएँ खोजें पढ़ें।

उत्तर

संकेत


  • सूरसागर
  • सूरसारावली
  • नागलीला
  • भागवत
  • साहित्यलहरी
  • नल दमयंती


Chapter 10

Chapter 10 परीक्षा Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

() आपकी समझ से नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है ? उसके सामने तारा () बनाइए

(1) महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा ?

  • उदारता
  • सादगी
  • बल
  • नीति कुशलता

उत्तर

नीति कुशलता ()


(2) दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने के निश्चय का क्या कारण था?

  • परमात्मा की याद
  • राज-काज सँभालने योग्य शक्ति रहना
  • बदनामी का भय
  • चालीस वर्ष की नौकरी पूरा हो जाना

उत्तर

परमात्मा की याद ()


() अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

छात्र स्वयं करें।


शीर्षक

() आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम प्रेमचंद नेपरीक्षारखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी का यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर के कारण भी लिखिए।

उत्तर

चूँकि प्रेमचंद द्वारा लिखितपरीक्षाशीर्षक कहानी का केंद्रीय भाव एक रियासत के दीवान के पद हेतु हर दृष्टि से योग्य, उदार, दयालु तथा नीतिकुशल व्यक्ति का चयन है, अतएव इन्हीं कारणों से प्रेमचंद ने इस कहानी का शीर्षकपरीक्षारखा होगा।


() यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए?

उत्तर

यद्यपि इस कहानी का प्रेमचंद द्वारा दिया गया शीर्षकपरीक्षासर्वथा उपयुक्त है, तथापि यदि मुझे इस कहानी का कोई अन्य नाम देना होता तो मैं इसका शीर्षकपरखदेता। इसका कारण यह है कि सुजानसिंह ने एक जौहरी के रूप में दया, आत्मबल तथा नीतिकुशलता को धारण करने वाले एक व्यक्ति की परख की।


पंक्तियों पर चर्चा

कहानी में से चुनकर यहाँ कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया अपने विचार ? अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल हृदय वह जो उदार हो, आत्मबल वह जो आपत्ति का वीरता के साथ सामना करे। ऐसे गुणवाले संसार में कम हैं और जो हैं, वे कीर्ति और मान के शिखर पर बैठे हुए हैं

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें


सोच-विचार के लिए

कहानी को एक बार फिर से पढ़िए, निम्नलिखित के बारे में पता लगाइए और लिखिए-

() नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी पाने के लिए कौन-कौन से प्रयास किए?

उत्तर

नौकरी की चाह में आए लोगों ने नौकरी प्राप्त करने के लिए कई प्रकार के प्रयत्न किए। मिस्टरजो नौ बजे दिन तक सोया करते थे, प्रातः काल में टहलने का उपक्रमक करने लगे। मिस्टर’, ‘औरसे उनके घर के नौकर परेशान रहते थे, किंतु अब वे नौकरों सेआपऔरजनाबसंबोधन के साथ बातचीत कर रहे थे। मिस्टरको किताब से घृणा थी, किंतु वे बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने में मशगूल थे। हर कोई अपने तरीके से स्वयं को योग्य सिद्ध करने की कोशिश कर रहा था।


() “उसे किसान की सूरत देखते ही सब बातें ज्ञात हो गईंखिलाड़ी को कौन-कौन सी बातें पता चल गईं?

उत्तर

खिलाड़ी की निगाह किसान की गाड़ी पर पड़ी, जो नाले में फँसी हुई थी। उसे किसान की सूरत देखते ही इस बात का अंदाज़ा हो गया कि बहुत प्रयास करने के बाद भी गाड़ी को नाले के कीचड़ और गड्ढे से नहीं निकाल पाया है।


() “मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या किनकी आँखों में सत्कार था और किनकी आँखों में ईर्ष्या थी? क्यों?

उत्तर

जब सरदार सुजानसिंह ने राजदरबार में दीवान के पद पर जानकीनाथ के चयन की घोषण की, तो रियासत के कर्मचारियों और रईसों ने जानकीनाथ की तरफ़ देखा। उन आँखों में जानकीनाथ के प्रति आदर और सत्कार का भाव था। इसके ठीक विपरीत, दीवान के पद की प्राप्ति हेतु पधारे अन्य उम्मीदवारों की आँखों में जानकीनाथ के प्रति ईर्ष्या का भाव था


खोजबीन

कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए, जिनसे पता चलता है कि-

() शायद युवक बूढ़े किसान की असलियत पहचान गया था।

उत्तर

युवक ने किसान की तरफ़ गौर से देखा। उसके मन में एक संदेह उत्पन्न हुआ, कहीं ये सुजान सिंह तो नहीं हैं ? आवाज़ मिलती है, चेहरा मोहरा भी वही है।


() नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे।

उत्तर

जिससे बात कीजिए, वह नम्रता और सदाचार का देवता बना मालूम होता था। लोग समझते थे कि एक महीने का झंझट है, किसी तरह काट लें, कहीं कार्य सिद्ध हो गया तो बाद में कौन पूछता है ?


कहानी की रचना

लोग पसीने से तर हो गए। खून की गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी।

इन वाक्यों को पढ़कर आँखों के सामने थकान से चूर खिलाड़ियों का चित्र दिखाई देने लगता है। यह चित्रात्मक भाषा है। ध्यान देंगे तो इस पाठ में ऐसी और भी अनेक विशेष बातें आपको दिखाई देंगी। कहानी को एक बार ध्यान से पढ़िए। आपको इस कहानी में और कौन-कौन सी विशेष बातें दिखाई दे रही हैं? अपने समूह में मिलकर उनकी सूची बनाइए

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


समस्या और समाधान


इस कहानी में कुछ समस्याएँ हैं और उनके समाधान भी हैं। कहानी को एक बार फिर से पढ़कर बताइए कि

() महाराज के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

उत्तर

महाराज के दीवान सुजानसिंह अपनी उम्र और परमात्मा की याद के कारण अपना पद छोड़ना चाहते थे। सुजानसिंह जैसे अनुभवी एवं नीतिकुशल दीवान को राजा छोड़ना नहीं चाहते थे। उन्होंने उन्हें बहुत समझाया, किंतु वे नहीं माने। अंततः उन्होंने दीवान की बात मान ली, लेकिन शर्त यह लगा दी कि नया दीवान सुजानसिंह को ही खोजना होगा।


() दीवान के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

उत्तर

दीवान जी के समक्ष योग्य उम्मीदवार के चयन की समस्या थी। इसके लिए उन्होंने समाचार-पत्र में विज्ञ. ापन प्रकाशित कराए, जिसमें उक्त पद हेतु आवश्यक योग्यता का उल्लेख था। उम्मीदवारों के क्रियाकलापों का गुप्त रूप से आकलन कर उन्होंनें योग्य उम्मीदवार के चयन को अंजाम दिया।


() नौकरी के लिए आए लोगों के सामने क्या समस्या थी ? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा?

उत्तर

नौकरी के लिए आए लोगों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या थीनीति कुशलता, ईमानदारी, आत्मबल और दयालुता के मापदंड पर खरा उतरने की अधिकांश उम्मीदवार इस मापदंड को पूरा नहीं करते थे। किंतु उन्होंने सीमित समय के लिए छद्म सद्व्यवहार को अपनाना प्रारंभ कर दिया, ताकि उनका चयन दीवान के पद के लिए हो जाए


मन के भाव

"स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी था।"

इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची हुई है। ये सभी नाम हैं, लेकिन दिखाई देने वाली वस्तुओं, व्यक्तियों या जगहों के नाम नहीं हैं। ये सभी शब्द मन के भावों के नाम हैं। आप कहानी में से ऐसे ही अन्य नामों को खोजकर नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।

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उत्तर

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अभिनय

कहानी में युवक और किसान की बातचीत संवादों के रूप में दी गई है। यह भी बताया गया है कि उन दोनों ने ये बातें कैसे बोलीं। अपने समूह के साथ मिलकर तैयारी कीजिए और कहानी के इस भाग को कक्षा में अभिनय के द्वारा प्रस्तुत कीजिए प्रत्येक समूह से अभिनेता या अभिनेत्री कक्षा में सामने आएँगे और एक-एक संवाद अभिनय के साथ बोलकर दिखाएँगे।

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उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


विपरीतार्थक शब्द


विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा।
कमका विपरीत अर्थ देने वाला शब्द हैअधिक इसी प्रकार कुछ विपरीतार्थक शब्द नीचे दिए गए हैं लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए-

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स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. आना

1. निर्दयी

2. गुण

2. निराशा

3. आदर

3. जीत

4. स्वस्थ

4. अवगुण

5. कम

5. अस्वस्थ

6. दयालु

6. अधिक

7. योग्य

7. जाना

8. हार

8. अयोग्य

9. आशा

9. अनादर

उत्तर

स्तंभ 1

स्तंभ 2

1. आना

7. जाना

2. गुण

4. अवगुण

3. आदर

9. अनादर

4. स्वस्थ

5. अस्वस्थ

5. कम

6. अधिक

6. दयालु

1. निर्दयी

7. योग्य

8. अयोग्य

8. हार

3. जीत

9. आशा

2. निराशा


कहावत

गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।
यह वाक्य एक कहावत है। इसका अर्थ है कि कोशिश करने पर ही सफलता मिलती है। ऐसी ही एक और कहावत है,“जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठअर्थात परिश्रम का फल अवश्य मिलता है।
कहावतें ऐसे वाक्य होते हैं जिन्हें लोग अपनी बात को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। आपके घर और पास-पड़ोस में भी लोग अनेक कहावतों का उपयोग करते होंगे।

नीचे कुछ कहावतें और उनके भावार्थ दिए गए हैं। आप इन कहावतों को कहानी से जोड़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए

  • अधजल गगरी छलकत जाएजिसके पास थोड़ा ज्ञान होता है, वह उसका दिखावा करता है।
  • अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेतसमय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ होता है।
  • एक अनार सौ बीमारकोई ऐसी एक चीज़ जिसको चाहने वाले अनेक हों।
  • जो गरजते हैं वे बरसते नहीं हैंजो अधिक बढ़-चढ़कर बोलते हैं, वे काम नहीं करते हैं।
  • जहाँ चाह, वहाँ राहजब किसी काम को करने की इच्छा होती है, तो उसका साधन भी मिल जाता है।


(संकेतविज्ञापन में तो एक नौकरी की बात कही गई थी, लेकिन उम्मीदवार गए हज़ारों। इसे कहते हैं, एक अनार सौ बीमार)


पाठ से आगे

अनुमान या कल्पना से

() “दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकलादेश के प्रसिद्ध पत्रों में नौकरी का विज्ञापन किसने निकलवाया होगा? आपको ऐसा क्यों लगता है?

उत्तर

देवगढ़ के राजा ने सरदार सुजानसिंह को नए दीवान के चयन की ज़िम्मेदारी दी थी। हर दृष्टि से सुयोग्य उम्मीदवार की नियुक्ति हेतु दीवान सुजानसिंह ने ही यह विज्ञापन निकलवाया होगा
इस पद के लिए शैक्षणिक योग्यता से अधिक नीतिशीलता, दयालुता और आत्मबल से युक्त उम्मीदवार की आवश्यकता थी। संभवत: इसलिए ही इस पद के लिए आवश्यक शर्तों का उल्लेख करते हुए विज्ञापन निकलवाया गया होगा, ताकि इन मापदंडों को पूरा करने वाले ही आवेदन कर सकें।



() “इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया।”’
विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका क्यों मचा दिया होगा?

उत्तर

दीवान का पद ओहदे की दृष्टि से काफ़ी बड़ा और महत्वपूर्ण था। पैसे के साथ-साथ इसमें रसूख और रुतबा भी था। इस पद के लिए कोई विशिष्ट शैक्षणिक योग्यता की भी दरकार नहीं थी। इसलिए इस पद का विज्ञापन निकलते ही पूरे देश में तहलका मच गया।


विज्ञापन

दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकला कि देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की जरूरत है।

() कहानी में इस विज्ञापन की सामग्री को पढ़िए। इसके बाद अपने समूह में मिलकर इस विज्ञापन को अपनी कल्पना का उपयोग करते हुए बनाइए
(
संकेत- विज्ञापन बनाने के लिए आप एक चौकोर कागज़ पर हाशिया बनाइए। इसके बाद इस हाशिए के भीतर के खाली स्थान पर सुंदर लिखाई, चित्रों, रंगों आदि की सहायता से सभी आवश्यक जानकारी लिख दीजिए। आप बिना रंगों या चित्रों के भी विज्ञापन बना सकते हैं )

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।

) आपने भी अपने आस-पास दीवारों पर, समाचार- – पत्रों या पत्रिकाओं में, मोबाइल फोन या दूरदर्शन पर अनेक विज्ञापन देखे होंगे। अपने किसी मनपसंद विज्ञापन को याद कीजिए। आपको वह अच्छा क्यों लगता है? सोचकर अपने समूह में बताइए | अपने समूह के बिंदुओं को लिख लीजिए।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।

() विज्ञापनों से लाभ होते हैं, हानि होती हैं, या दोनों? अपने समूह में चर्चा कीजिए और चर्चा के बिंदु लिखकर कक्षा में साझा कीजिए

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


आगे की कहानी

परीक्षाकहानी जहाँ समाप्त होती है, उसके आगे क्या हुआ होगा। आगे की कहानी अपनी कल्पना से बनाइए

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


आपकी बात

() यदि कहानी में दीवान साहब के स्थान पर आप होते तो योग्य व्यक्ति को कैसे चुनते ?

उत्तर

यदि दीवान साहब के स्थान पर मैं होता, तो योग्य व्यक्ति के चयन हेतु सैद्धांतिक तथा व्यावहारिक ज्ञान का परीक्षण करता सैद्धांतिक ज्ञान के अंतर्गत उम्मीदवार की देश, दुनिया, समाज, व्यक्ति और विभिन्न परिस्थितियों की समझ का मूल्यांकन करता, तो व्यावहारिक क्रियाकलापों के सूक्ष्म एवं सतत निरीक्षण से उसके मानवीय गुण-अवगुण का पता लगाता। इन्हीं मापदंडों के आधार पर मैं योग्य उम्मीदवार का चयन करता


() यदि आपको कक्षा का मॉनिटर चुनने के लिए कहा जाए तो आप उसे कैसे चुनेंगे? उसमें किन-किन गुणों को देखेंगे? गुणों की परख के लिए क्याक्या करेंगे?

उत्तर

यदि मुझे कक्षा का मॉनिटर चुनने के लिए कहा जाएगा तो मैं ऐसे लड़के को चुनूँगा जो शैक्षणिक दृष्टिकोण से होनहार होने के साथ-साथ सामंजस्यपूर्ण व्यवहार करने वाला, अनुशासनप्रिय, नेक तथा ईमानदार हो। इसके लिए मैं उसके विद्यालय में उपस्थिति का रिकॉर्ड देखूँगा तथा छात्रों और शिक्षकों के बीच उसके प्रति अवधारणा का भी मूल्यांकन करूँगा।


नया-पुराना

इन्हीं बिंदुओं के आधार पर मैं अपनी कक्षा के मॉनिटर का चुनाव करूँगा।

'कोई नए फैशन का प्रेमी, कोई पुरानी सादगी पर मिटा हुआ ' हमारे आस-पास अनेक वस्तुएँ ऐसी हैं, जिन्हें लोग नया फैशन या पुराना चलन कहकर दो भागों में बाँट देते हैं। जो वस्तु आपके माता-पिता या दादा-दादी के लिए नई हो, हो सकता है वह आपके लिए पुरानी हो, या जो उनके लिए पुरानी हो, वह आपके लिए नई हो अपने परिवार या परिजनों से चर्चा करके नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए-

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उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


वाद-विवाद

आपस में हॉकी का खेल हो जाए। यह भी तो आखिर एक विद्या है।

क्या हॉकी जैसा खेल भी विद्या है? इस विषय पर कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसे आयोजित करने के लिए कुछ सुझाव आगे दिए गए हैं-

  • कक्षा में पहले कुछ समूह बनाएँ। फिर पर्ची निकालकर निर्धारित कर लीजिए कि कौन समूह पक्ष में बोलेंगा, कौन विपक्ष में
  • आधे समूह इसके पक्ष में तर्क दीजिए. आधे समूह इसके विपक्ष में
  • सभी समूहों को बोलने के लिए 5-5 मिनट का समय दिया जाएगा।
  • ध्यान रखें कि प्रत्येक समूह का प्रत्येक सदस्य चर्चा करने, तर्क देने आदि कार्यों में भाग अवश्य ले


अच्छाई और दिखावा

हर एक मनुष्य अपने जीवन को अपनी बुद्धि के अनुसार अच्छे रूप में दिखाने की कोशिश करता था।

अपने समूह में निम्नलिखित पर चर्चा कीजिए और चर्चा के बिंदु अपनी लेखनपुस्तिका में लिख लीजिए-

() हर व्यक्ति अपनी बुद्धि के अनुसार स्वयं को अच्छा दिखाने की कोशिश करता है। स्वयं को अच्छा दिखाने के लिए लोग क्या-क्या करते हैं?
(
संकेत- मेहनत करना, कसरत करना, साफ-सुथरे रहना आदि)

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


() क्यास्वयं को अच्छा दिखानेमें औरस्वयं के अच्छा होने में कोई अंतर है? कैसे ?

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


परिधान तरह-तरह के

कोट उतार डाला

कोटएक परिधान का नाम है। कुछ अन्य परिधानों के नाम और चित्र नीचे दिए गए हैं। परिधानों के नामों को इनके सही चित्र के साथ मिलाइए। इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? लिखिए


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उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


आपकी परीक्षाएँ

हम सभी अपने जीवन में अनेक प्रकार की परीक्षाएँ लेते और देते हैं। आप अपने अनुभवों के आधार पर कुछ परीक्षाओं के उदाहरण बताइए। यह भी बताइए कि किसने, कब, कैसे और क्यों वह परीक्षा ली।
(
संकेतजैसे, किसी को विश्वास दिलाने के लिए उसके सामने साइकिल चलाकर दिखाना, स्कूल या घर पर कोई परीक्षा देना, किसी को किसी काम की चुनौती देना आदि।)

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।

आज की पहेली

आज आपकी एक रोचक परीक्षा है। यहाँ दिए गए चित्र एक जैसे हैं या भिन्न? इन चित्रों में कुछ अंतर हैं। देखते हैं आप कितने अंतर कितनी जल्दी खोज पाते हैं।

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उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


झरोखे से

पाठ में दिए गए क्यू.आर. कोड के माध्यम से आप एक और कहानी पढ़ेंगे। इस कहानी में भी कोई किसी की परीक्षा ले रहा है। यह कहानी हमारे देश के बहुत होनहार बालक और उसके गुरु चाणक्य के बारे में है। इसे हिंदी के प्रसिद्ध लेखक जयशंकर प्रसाद ने लिखा है।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


खोजबीन के लिए

पुस्तक में दिए गए क्यू. आर. कोड की सहायता से आप प्रेमचंद के बारे में और जान-समझ सकते हैं, साथ ही उनकी अन्य कहानियों का आनंद भी उठा सकते हैं.—

  • ईदगाह
  • नादान दोस्त
  • दो बैलों की कथा

उत्तर


विद्यार्थी स्वयं करें।


Chapter 11

Chapter 11 चेतक की वीरता Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

अब हम इस कविता पर विस्तार से चर्चा करेंगे। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

() नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए-

(1) चेतक शत्रुओं की सेना पर किस प्रकार टूट पड़ता था?

  • चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था।
  • चेतक शत्रु की सेना को चारों ओर से घेरकर उस पर टूट पड़ता था।
  • चेतक हाथियों के दल के समान बादल के रूप में शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
  • चेतक नदी के उफान के समान शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।

उत्तर

चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था। ()


(2) ‘लेकर सवार उड़ जाता था।इस पंक्ति मेंसवारशब्द किसके लिए आया है?

  • चेतक कवि
  • महाराणा प्रताप
  • शत्रु
  • मल्हार

उत्तर

महाराणा प्रताप ()


() अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?

उत्तर

प्रथम प्रश्न के उत्तर के रूप में हमनेचेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता थाको इसलिए चुना क्योंकि कविता में चेतक के शत्रुओं पर इसी प्रकार टूटने का वर्णन किया गया है। दुसरे प्रश्न के उत्तर के रूप में हमनेमहाराणा प्रतापको चुना है क्योंकि चेतक अपने सवारमहाराणा प्रतापको लेकर उड़ जाता था।


पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर समझिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? कक्षा में अपने विचार साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

() “निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।

उत्तर

इस पंक्ति में महाराणा प्रताप के घोड़े के निर्भीक और फुर्तीला होने का वर्णन है। चेतक महाराणा प्रताप को लेकर ढालों के मध्य से निडर होकर तलवारों और खड्गों से तेज़ गति से दौड़ता हुआ सभी बाधाओं से उन्हें बचाता था।


() “भाला गिर गया, गिरा निषंग, हय-टापों से खन गया अंग

उत्तर

चेतक की बुद्धिमानी, वीरता और फुर्तीलेपन का शत्रु सेना पर ऐसा प्रभाव पड़ता था कि उनके भाले, तलवार तथा तरकश आदि धरे रह जाते थे। घोड़े के टापों के प्रहार से दुश्मन के अंग क्षत-विक्षत हो जाते थे।


मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही भावार्थ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

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पंक्तियाँ

भावार्थ

1. राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था।

1. शत्रु की सेना पर भयानक बज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता।

2. वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था।

2. हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे दौड़ लगा रहा था मानो हवा और चेतक में प्रतियोगिता हो रही हो

3. जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था।

3. शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता एक छोर से दूसरे छोर पर ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में दौड़ रहा हो।

4. राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था।

4. चेतक की फुर्ती ऐसी कि लगाम के थोड़ासा हिलते ही सरपट हवा में उड़ने लगता था।

5. विकराल बज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया।

5. वह राणा की पूरी निगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता अर्थात वह उनका भाव समझ जाता था।

उत्तर

पंक्तियाँ

भावार्थ

1. राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था।

2. हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे दौड़ लगा रहा था मानो हवा और चेतक में प्रतियोगिता हो रही हो

2. वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था।

3. शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता एक छोर से दूसरे छोर पर ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में दौड़ रहा हो।

3. जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था।

4. चेतक की फुर्ती ऐसी कि लगाम के थोड़ासा हिलते ही सरपट हवा में उड़ने लगता था।

4. राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था।

5. वह राणा की पूरी निगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता अर्थात वह उनका भाव समझ जाता था।

5. विकराल बज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया।

1. शत्रु की सेना पर भयानक बज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता।


शीर्षक

यह कविताहल्दीघाटीशीर्षक काव्य कृति का एक अंश है। यहाँ इसका शीर्षकचेतक की वीरतादिया गया है। आप इसे क्या शीर्षक देना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर 

हाँ! यह कविता हल्दीघाटी काव्यकृति का एक अंश है।

इसका शीर्षकचेतक की वीरतासटीक है क्योंकि इस अंश में चेतक के शौर्य, फुर्तीलेपन और समझदारी का वर्णन है। फिर भी यदि और शीर्षक देना है तो वह भी चेतक के बिना अधूरा होगा—“महाराणा प्रताप और चेतकइस शीर्षक का स्थान ले सकता है।


कविता की रचना

चेतक बन गया निराला था।
पड़ गया हवा को पाला था।
राणा प्रताप का कोड़ा था
या आसमान पर घोड़ा था

रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द बोलने-लिखने में थोड़े मिलते-जुलते हैं। इस तरह की तुकांत शैली प्रायः कविता में आती है। कभी-कभी कविता अतुकांत भी होती है। इस कविता में आए तुकांत शब्दों की सूची बनाइए।

उत्तर

तुकांत शब्दों की सूची-
निराला-पाला, कोड़ा-घोड़ा,
चालों-मालों, ढालों-करवालों, यहाँ-वहाँ,
जहाँ-कहाँ, जहर-ठहर, निषंग-अंग, दंग-रंग


शब्द के भीतर शब्द

या आसमान का घोड़ा था
आसमानशब्द के भीतर कौन-कौन से शब्द छिपे हैं-
आस, समान, मान, सम, आन, नस आदि

अब इसी प्रकार कविता में से कोई पाँच शब्द चुनकर उनके भीतर के शब्द खोजिए।

उत्तर

चौकड़ीचौक, कड़ी
बादलबाद, दल
मस्तकमस्त, तक
दिखलायादिख, लाया, आया
करवालकर, रव, आल
विकरालकर, कराल


पाठ से आगे

आपकी बात


जो तनिक हवा से बाग हिली



लेकर सवार उड़ जाता था।


() ‘हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चलाकविता को प्रभावशाली बनाने में इस तरह के प्रयोग काम आते हैं। कविता में आए ऐसे प्रयोग खोजकर परस्पर बातचीत करें।

उत्तर

हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चलाकविता को प्रभावशाली बनाने में इस तरह के प्रयोग काम आते हैं। ऐसे अन्य प्रयोग निम्नलिखित हैं-

राणा की पुतली फिरी नहीं तब
तक चेतक मुड़ जाता था।
कौशल दिखलाया चालों मे
उड़ गया भयानक भालों में।
है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं
वह वहीं रहा है वहाँ नही।
बढ़ते नद-सा वह लहर गया
वह गया गया फिर ठहर गया।

उपर्युक्त पंक्तियों की रचनात्मक विशेषताओं को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थी स्वयं चर्चा करें।


() कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए। इस पर आपस में बात कीजिए।

उत्तर

कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए। कोई भी युद्ध चाहे वह वाक् युद्ध हो या बाणयुद्ध हो, परिणाम विनाश ही होता है। इससे हानि केवल किसी एक पक्ष को ही नहीं उठानी पड़ती, अपितु दोनों ही पक्षों का नुकसान होता है। हार हो या जीत हो, किसी को कम तो किसी को ज़्यादा नुकसान अवश्य होता है। संबंधों में कड़वाहट आती है। समाज और देश को तोड़ कर रख देता है। इसका फायदा नकारात्मक शक्तियों को मिलता है। विकास रुक जाता है। सामरिक युद्ध में प्रयोग किए जाने वाले हथियार इतने विनाशकारी हैं कि उनका प्रयोग पूरी मानव जाति के लिए खतरा है। मानव समाज के ताने-बाने को बचाने के लिए समस्याओं को आपसी बातचीत के माध्यम से सुलझाने का प्रयत्न करना चाहिए युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता


समानार्थी शब्द

कुछ शब्द समान अर्थ वाले होते हैं, जैसेहय, अश्व और घोड़ा। इन्हें समानार्थी शब्द कहते हैं।

यहाँ पर दिए गए शब्दों से उस शब्द पर घेरा बनाइए जो समानार्थी हों-

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उत्तर

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आज की पहेली

बूझो तो जानें

तीन अक्षर का मेरा नाम, उल्टा सीधा एक समान
दिन में जगता, रात में सोता, यही मेरी पहचान।।

उत्तर

जलज


एक पक्षी ऐसा अलबेला, बिना पंख उड़ रहा अकेला।
बाँध गले में लंबी डोर, पकड़ रहा अंबर का छोर

उत्तर

पतंग


रात में हूँ दिन में नहीं, दीये के नीचे हूँ ऊपर नहीं
बोलो बोलोमैं हूँ कौन?

उत्तर

अंधेरा


मुझमें समाया फल, फूल और मिठाई
सबके मुँह में आया पानी मेरे भाई।

उत्तर

गुलाबजामुन


सड़क है पर गाड़ी नहीं, जंगल है पर पेड़ नहीं
शहर है पर घर नहीं, समंदर है पर पानी नहीं।

उत्तर

मानचित्र


खोजबीन के लिए

प्रश्न 1. महाराणा प्रताप कौन थे? उनके बारे में इंटरनेट या पुस्तकालय से जानकारी प्राप्त करके लिखिए।

उत्तर

महाराणा प्रताप मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के एक प्रसिद्ध राजा थे। उनका जन्म 9 मई 1540 को उदय सिंह द्वितीय और जयवंताबाई के घर हुआ था। उनके छोटे भाई शक्ति सिंह और जगमाल सिंह थे। महाराणा प्रताप का विवाह बिजोलिय की अजबदे पंवार से हुआ था 1572 में उदय सिंह की मृत्यु के बाद मेवाड़ की गद्दी पर कौन बैठेगा, इस पर कुछ समय के लिए खींचतान हुई महाराण प्रताप के अन्य सौतेले भाई भी मेवाड़ की गद्दी के लिए होड़ में थे। हालाँकि उनके पिता के दरबार के वरिष्ठ रईस चाहते थे कि प्रताप ही राजगद्दी संभाले क्योंकि वे ही उदय सिंह द्वितीय के सबसे बड़े पुत्र थे। इस प्रकार 1 मार्च 1972 को 32 वर्ष की आयु में महाराणा प्रताप को ऐत की पदी सुट्टी एस. बिहार तारा।


उदय सिंह द्वितीय के शासनकाल में मेवाड़ का उपजाऊ पूर्वी आधा हिस्सा विस्तारवादी मुगल साम्राज्य ने हथिया लिया था। पश्चिमी आधा हिस्सा सिसोदिया राजपूतों के पास था। सन् 1572 में ही मुगल सम्राट अकबर ने उन्हें मुगल साम्राज्य का जागीरदार बनने के लिए मनाने के अनेक प्रयास किए। उस क्षेत्र के अन्य राजपूत राजाओं ने मुगलों की जागीरदारी स्वीकार कर ली थी। किंतु महाराणा प्रताप ने अकबर के सामने व्यक्तिगत रूप से समर्पण करने से इनकार कर दिया था। इसलिए युद्ध तो होना ही था
पहले हल्दीघाटी के सकेर पहाड़ी दर्रे में हुए युद्ध में हारकर महाराणा प्रताप को पीछे हटना पड़ा। फिर भी मुगलों की यह जीत अधूरी थी क्योंकि वे प्रताप या उनके परिवार के किसी भी सदस्य को पकड़ नहीं पाए थे।

सन् 1582 में महाराणा प्रताप ने मुगलों पर हमला करके देवर में मुगल चौकी पर कब्जा कर लिया। इसके बाद उन्होंने उमलगढ़, उदयपुर और गोगुंडा को फिर प्राप्त कर लिया वहाँ पर नई राजधानी चांवड़ का निर्माण किया।
महाराणा प्रताप का निधन 19 जनवरी 1597 को 56 वर्ष की अवस्था में हुआ। महाराणा प्रताप का मुगल साम्राज्य के खिलाफ लगभग अकेले और अन्य राजपूत राज्यों की सहायता के बिना संघर्ष राजपूत वीरता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। उनके गुरिल्ला युद्ध पद्धति का अनुकरण स्वयं छत्रपति शिवाजी ने भी किया।


प्रश्न 2. इस कविता में चेतक एकघोड़ाहै। पशु-पक्षियों पर आधारित पाँच रचनाओं को खोजिए और अपनी कक्षा की दीवार- पत्रिका पर लगाइए।

उत्तर

पशु-पक्षियों पर आधारित रचनाएँ:

1. शीर्षकउन्मुक्तता

जा! उड़ जाओ! ले उन्मुक्त श्वास
अपना व्यक्तित्व विकास करो।
पंखों को खोलो, बनाकर सशक्त
नग, पद सागर को पार करो

अब तक बेबस अस्तित्व रहा
बंधन पिंजरा ही बसेरा था
दाना-पानी तक सिमटा था
जीवन पर निशिदिन पहरा था

हाँ, ध्यान रहे जग नभचर का
हैं कुटिल निर्दयी व्याघ्र वहाँ
खग भक्षक, धरते निर्ममता
छल, छद्म प्रवंचक अधम वहाँ

उन्मुक्तता ना इनको भाएगी
सुंदरता रास ना आएगी।
निश्छल उड़ान छल पाएगी
नरपशुता जाल बिछाएगी।

द्युत चपल दामिनी बनो
योग्य कुशल विहंगावली बनो।
बाघ, गीध से वीर बनो
स्पृहा रखो, बरणीय बनो ।।


2. शीर्षकपिंजरे का पंछी

मैं बरखा की बूँदों-सा बादलों में रहता हूँ,

पवन के झोंको में मैं मेघों की भाँति बहता हूँ,

डैनों को अपने फैलाए नभ पर मैं बिचरता हूँ,

मैं पिंजरे का नहीं आसमान की चिड़ियाँ हूँ

मैं जब जी चाहे सोता हूँ जब जी चाहे उठता हूँ,
घोंसले को संयम से तिनका तिनका संजोता हूँ,
धन की खातिर ना सुदंर लम्हों की खातिर जीता हूँ,
मैं पिंजरे का नहीं आसमान की चिड़िया हूँ।

पैरों में मेरे बेड़ी है पंखों पर कतरन के निशान,
जीवन में बाकी बसबंदिश, लाचारी और अपमान,
पिंजरे में कैद बेबस मैं सपना एकल बुनता हूँ,
मैं पिंजरे का नहीं आसमान की चिड़िया हूँ।


3. शीर्षकचिड़िया

चिड़िया रानी चिड़िया रानी

तुम हो पेड़ों की रानी।।

सुबह-सवेरे उठ जाती हो

ना जाने क्या गाती हो

क्या तुम भी पढ़ने जाती हो?
या नौकरी करने को जाती हो?
शाम से पहले आती हो।
बच्चो का दाना लाती हो ।।

भर-भर चोंच खिलाती दाना
चूँ-चूँ चहक सूनाती गाना ।।


4. शीर्षकपशु-पक्षी

भगवान ने इनसान बनाया
फिर पशु-पक्षी से इस प्रकृति को सजाया
क्या खूब चित्रकारी की पशु-पक्षी पर
रंगों को आकार दिया ज़मीन पर
संतुलित किया संसार हमारा
भिन्न-भिन्न पशु-पक्षी द्वारा
पशु-पक्षी हैं मित्र हमारे
बहुत कुछ हमको मिलता उनके द्वारे
दूध से हमको ताकतवर बनाते
उनसे हमको ठंड से बचाते
इनसे जीवन में है खुशहाली
इनके बगैर ये जीवन है खाली
कुत्ता, बिल्ली, कौवा, गाय
संग हमारे नाचेंगाए
शेर, चीता, हाथी, बंदर
रहते सब जंगल के अंदर
दुनिया की इस सुंदरता को बचाना हम सबको है


5. शीर्षकगौरैया

गौरैया……

याद है, कभी तुम आती थी

मेरे घर में

बैठती थी……..

शहतूत के पेड़ की शाखाओं पर

फुदकती थी……

आँगन में

एक नन्हा सा घोंसला बनाती थी

कभी खिड़की के ऊपर,

कभी रोशनदान में

बहुत बार देखा था मैंने

तुम्हें दाना खिलाते हुए……

अपने शावकों को


नाराज हो क्या मुझसे
जो अब आती ही नहीं
होना भी चाहिए
यह हक है तुम्हारा
क्योंकि अब मेरे घर में
तो शहतूत का पेड़ है
आँगन है
खिड़की है
रोशनदान है
वो क्या है
मेरे शहर का विकास
तुमसे ज़्यादा ज़रूरी था
प्यारी गौरैया…….


Chapter 12

Chapter 12 हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

आइए, अब हम इस पाठ को थोड़ा और निकटता से समझ लेते हैं। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी। आइए इन गतिविधियाँ को पूरा करते हैं।

मेरी समझ से

() नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए

(1) हिरन समूह में क्यों खड़े थे?

  • भागने पर उन्हें सिंह के आक्रमण का डर था।
  • वे भाग चुके हिरणों के लौटने की प्रतीक्षा में थे।
  • वे बीच खड़े असावधान जिराफ़ की रक्षा कर रहे थे।
  • सिंह उनसे उदासीन थे, अतः उन्हें कोई खतरा नहीं था।

उत्तर

भागने पर उन्हें सिंह के आक्रमण का डर था। ()


(2) मॉरिशस छोटे पैमाने पर भारतवर्ष ही है। कैसे?

  • गन्ने की खेती अधिकतर भारतीयों द्वारा की जाती है।
  • अधिकतर जनसंख्या भारत से जाने वालों की है।
  • सभी भारतवासी परी तालाब पर एकत्रित होते हैं।
  • भारत की बहुत-सी विशेषताएँ वहाँ दिखाई देती हैं।

उत्तर

भारत की बहुत-सी विशेषताएँ वहाँ दिखाई देती हैं। ()


() अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

"भारत में बैठे-बैठे हम यह नहीं समझ पाते कि भारतीय संस्कृति कितनी प्राणवती और चिरायु है। किंतु, मॉरिशस जाकर हम अपनी संस्कृति की प्राणवत्ता का ज्ञान आसानी से प्राप्त कर लेते हैं।"

उत्तर

कुशल नाविक प्रतिकूल परिस्थितियों में ही पहचाना जाता है। धारा की दिशा में तो साधारण नाविक भी नाव की संचालन कर लेता है। ठीक इसी प्रकार से भारत में रहते हुए भारतीय संस्कृति का अनुपालन करना आसान है। यहाँ इसके लिए उपर्युक्त वातावरण उपलब्ध है। अतः यहाँ अपनी संस्कृति के प्रति निष्ठा बनाए रखना सहज है। किंतु मॉरिशस जैसे दूरस्थ देश में अपनी संस्कृति को अक्षुण्ण रखना आसान नहीं था। वहाँ भारतीय मान्यताओं पर प्रहार निरंतर किया जा रहा था। प्रलोभन भी दिए जा रहे थे। ऐसे में भारतीय संस्कृति के प्रति भारतीयों का समर्पण सराहनीय था। भारतीयों को अपनी सांस्कृतिक विशेषताओं के सामने सारे प्रलोभन तुच्छ नज़र आते थे। यही भारतीय संस्कृति की प्राणवत्ता ( जीवित रखने की इच्छा) की पहचान है। अंततः इन पंक्तियों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया है कि भारतीय संस्कृति मॉरिशस की धरती पर पुष्पित और पल्लवित होने में सफल रही।


सोच-विचार के लिए

इस यात्रा-वृत्तांत को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन- पुस्तिका में लिखिए-


() “ नैरोबी का नेशनल पार्क चिड़ियाघर नहीं है नेशनल पार्क और चिड़ियाघर में क्या अंतर है?

उत्तर

नेशनल पार्क वह स्थान होता है, जहाँ पशु-पक्षियों को रहने और विचरण करने के लिए प्राकृतिक स्थान उपलब्ध होता है जबकि चिड़ियाघर में पशु-पक्षियों के रहने के लिए कृत्रिम आवास बनाए गए होते हैं।


() “हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी बदतर समझे गए।

वे कौन थे जिन्होंने लेखक और अन्य लोगों को पेड़-पौधों और खरपात से भी बदतर समझ लिया था? उन्होंने ऐसा क्यों समझ लिया था ?

उत्तर

नैरोबी नेशनल पार्क के सिंहों ने लेखक और उसके पर्यटक साथियों को पेड़-पौधे और खरपात से भी बदतर समझ लिया था। मानव जाति के प्रति उनकी उपेक्षा का भाव स्वाभाविक भी था। हम मानव प्रति क्षण अपने आनंद के लिए उनकी सरहद और शांति दोनों को भंग करते हैं। जबकि पेड़-पौधे . और खरपात उनकी दिनचर्या को सुखद बनाते हैं।



() “मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं।

पाठ में इस कथन के समर्थन में कौन-सा तर्क दिया गया है?

उत्तर

जीवन की तीन मूलभूत आवश्यकताएँ होती हैं- रोटी, कपड़ा और मकान। इन तीनों के लिए अर्थ की आवश्यकता पड़ती है। अर्थ कृषि, व्यापार, उद्योग आदि से ही अर्जित किया जा सकता है। ऊख की खेती और चीनी के उद्योग को मॉरिशस का प्रमुख उद्योग बनाने में भारतीयों की अहम भूमिका बताई गई है। अतः पाठ में दिया गया तर्क सही और स्वाभाविक है।


() “उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला भारत से गए लोगों ने मॉरिशस को हिंदुस्तान जैसा कैसे बना दिया है?

उत्तर

भारतीयों ने मॉरिशस को सांस्कृतिक रूप से एक छोटा-सा हिंदुस्तान बना दिया है। इसका सर्वप्रथम कारण है, वहाँ की कुल जनसंख्या के 67 प्रतिशत लोगों का भारतीय खानदान का होना। दूसरा कारण है, यहाँ की पूजा पद्धति, मान्यताएँ, रहन-सहन, पहनावा आदि जो परंपरागत भारतीय सभ्यता-संस्कृति को प्रतिबिंवित करते हैं। स्वाभाविक है, इनकी सोच किसी--किसी गहरे तल में एक होती होगी वह सोच भारतीय है। अतः लेखक का वहाँ की धरती पर जाकर एक छोटे-से हिंदुस्तान की तरह अनुभव करना स्वाभाविक है।


मिलकर करें मिलान

पाठ में से कुछ शब्द चुनकर स्तंभ 1 में दिए गए हैं। उनसे संबंधित वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर शब्दों का मिलान उपयुक्त वाक्यों से कीजिए

इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।


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स्तंभ- 1

स्तंभ-2

1. अफ्रीका

1. यह अफ्रीका महाद्वीप के एक देशकेन्याकी राजधानी है।

2. नैरोबी

2. यह श्रीराम के जीवन पर आधारित अमर ग्रंथरामचरितमानसलिखने वाले कवि का नाम है।

3. रक्तचाप

3. यह एशिया के बाद दुनिया का सबसे बड़ा महाद्वीप है।

4. बी. . . सी.

4. यह रक्त वाहिनियों अर्थात नसों में बहते रक्त द्वारा उनकी दीवारों पर डाले गए दबाव का नाम है।

5. भूमध्य रेखा

5. यह दो भाषाओं के मिलने से बनी नई भाषा का नाम है।

6. देशांतर रेखा

6. यहब्रिटिश ओवरसीज एयरवेजे कॉरपोरेशननाम का छोटा रूप है। यह एक बहुत पुरानी विदेशी विमान कंपनी थी।

7. तुलसीदास

7. यह पृथ्वी के चारों ओर एक काल्पनिक वृत्त है जो पृथ्वी को दो भागों में बाँटता है- उत्तरी भाग और दक्षिणी भाग।

8. क्रेयोल

8. यह बाँस का एक मज़बूत डंडा होता है जिसे काँवट या बहंगी भी कहा जाता है, जिसके दोनों सिरों पर बँधी हुई दो टोकरियों या छीकों में यात्री गंगाजल या अन्य वस्तुएँ भरकर ले जाते हैं।

9. काँवर

9. ये ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ हैं। ये उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाती हैं।

उत्तर

स्तंभ- 1

स्तंभ-2

1. अफ्रीका

3. यह एशिया के बाद दुनिया का सबसे बड़ा महाद्वीप है।

2. नैरोबी

1. यह अफ्रीका महाद्वीप के एक देशकेन्याकी राजधानी है।

3. रक्तचाप

4. यह रक्त वाहिनियों अर्थात नसों में बहते रक्त द्वारा उनकी दीवारों पर डाले गए दबाव का नाम है।

4. बी. . . सी.

6. यहब्रिटिश ओवरसीज एयरवेजे कॉरपोरेशननाम का छोटा रूप है। यह एक बहुत पुरानी विदेशी विमान कंपनी थी।

5. भूमध्य रेखा

7. यह पृथ्वी के चारों ओर एक काल्पनिक वृत्त है जो पृथ्वी को दो भागों में बाँटता है- उत्तरी भाग और दक्षिणी भाग।

6. देशांतर रेखा

9. ये ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ हैं। ये उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाती हैं।

7. तुलसीदास

2. यह श्रीराम के जीवन पर आधारित अमर ग्रंथरामचरितमानसलिखने वाले कवि का नाम है।

8. क्रेयोल

5. यह दो भाषाओं के मिलने से बनी नई भाषा का नाम है।

9. काँवर

8. यह बाँस का एक मज़बूत डंडा होता है जिसे काँवट या बहंगी भी कहा जाता है, जिसके दोनों सिरों पर बँधी हुई दो टोकरियों या छीकों में यात्री गंगाजल या अन्य वस्तुएँ भरकर ले जाते हैं।


यात्रावृत्तांत की रचना


इतने में कोई मील-भर की दूरी पर हिरनों का एक झुंड दिखाई पड़ा। अब दो जवान सिंह उठे और दो ओर को चल दिए। एक तो थोड़ा-सा आगे बढ़कर एक जगह बैठ गया, लेकिन दूसरा घास के बीच छिपता हुआ मोर्चे पर आगे बढ़ने लगा इन वाक्यों को पढ़कर ऐसा लगता है मानो हम लेखक की आँखों से स्वयं वह दृश्य देख रहे हैं। मानो हम स्वयं भी उस स्थान की यात्रा कर रहे हैं, जहाँ का वर्णन लेखक ने किया है। यह इस यात्रावृत्तांत की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। यदि आप इस यात्रावृत्तांत को थोड़ा और ध्यान से पढ़ेंगे तो आपको और भी बहुत-सी विशेषताएँ पता चलेंगी

इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और इसकी रचना पर ध्यान दीजिए। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें आपस में साझा कीजिए और लिख लीजिए। जैसे- लेखक ने बताया है कि वह एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे और कब पहुँचा

उत्तर

इस पाठ की कुछ प्रमुख रचनात्मक विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
(
) लेखक की सिंहों से मुलाकात का वर्णन।
(
) लेखक द्वारा सिंहों और हिरनों के झुंड की गतिविधियों का वर्णन।
(
) लेखक के द्वारा मॉरिशस की भौगोलिक स्थिति का वर्णन।
(
) लेखक के द्वारा शिवरात्रि का वर्णन।


अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

() “ मॉरिशस वह देश है, जहाँ बनारस भी है, गोकुल भी है और ब्रह्मस्थान भी।

मॉरिशस में लोगों ने गली-मोहल्लों के नाम इस तरह के क्यों रखे होंगे?

उत्तर

इस विषय पर अपने मित्रों के साथ चर्चा करते समय निम्नलिखितं बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित कर सकते हैं-

  • भारतीयों की जनसंख्या अधिक होने के कारण।
  • भारतीयों के धार्मिक होने के कारण।
  • देश-प्रेम की भावना
  • अपनी आस्था और परंपरा के प्रति अटूट विश्वास


() “कोई सातआठ सिंह लेटे या सोए हुए थे और उन्हें घेरकर आठ-दस मोटरें खड़ी थीं।

उत्तर

आपने पढ़ा कि केन्या का राष्ट्रीय पार्क पर्यटकों से भरा रहता है। पर्यटक जंगली जानवरों को घेरे रहते हैं। क्या इसका उन पशुओं पर कोई प्रभाव पड़ता होगा ? अपने उत्तर के कारण भी बताइए
(
संकेत- राष्ट्रीय पार्क के बंदरों, सिंहों का व्यवहार भी बदल गया है।)
संकेत के आधार पर विद्यार्थी स्वयं करें।


() “हिरनों का एक झुंड दिखाई पड़ा, जिनके बीच एक जिराफ़ बिल्कुल बेवकूफ़ की तरह खड़ा था।

सिंहों के आस-पास होने के बाद भी जिराफ़ क्यों खड़ा रहा होगा?

उत्तर

चर्चा- संकेत:

  • हिरन के झुंड के बीच सुरक्षित महसूस करने के कारण।
  • जिराफ़ को स्वयं पर विश्वास होने के कारण।
  • जिराफ़ सिंह से भागकर दूर नहीं जा सकता, इस कारण
  • आमतौर पर शेर, हिरन और जिराफ़ में से शिकार के लिए पहले हिरन का चुनाव करते हैं।


() “मॉरिशस के मध्य में एक झील है, जिसका संबंध हिंदुओं ने परियों से बिठा दिया है और उस झील का नाम अब परीतालाब हो गया है।

उत्तर

उस झील का नामपरी- तालाबक्यों पड़ा होगा? चर्चा-संकेत-

  • उस झील का नाम परीतालाब इसलिए पड़ा होगा क्योंकि यह स्थान इतना सुंदर है कि ऐसा प्रतीत होता है कि यहाँ परियाँ वास करती हैं।
  • हिंदू मान्यताओं से संबंध जोड़ने की मानसिकता के कारण।


() आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि लगभग 50 साल पहलेपरीतालाबका नाम बदलकरगंगातालाबकर दिया गया है। मॉरिशस के लोगों ने यह नाम क्यों रखा होगा ?

उत्तर

चर्चा-संकेत:

  • भारत की सबसे पवित्र गंगा नदी से संबंध जोड़ने के लिए।
  • भारतीयों की गंगा नदी में आस्था होने के कारण।


शब्दों की बात


नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, पुस्तकालय, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।

संज्ञा के स्थान पर

() “हिरनों ने ताड़ लिया कि उन पर सिंहों की नज़र पड़ रही है। अतएव वे चरना भूलकर चौकन्ने हो उठे।

उत्तर

इन पंक्तियों में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन वाक्यों में ये शब्द किनके लिए उपयोग किए गए हैं? ये शब्दहिरनोंके लिए उपयोग में लाए गए हैं। आप जानते ही हैं किहिरनयहाँ एक संज्ञा शब्द है। जो शब्द संज्ञा शब्दों के स्थान पर उपयोग में लाए जाते हैं, उन्हेंसर्वनामकहते हैं।

अब नीचे दिए गए वाक्यों में सर्वनाम शब्दों को पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए-




  1. हाँ, बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं, लेकिन गांधी टोपी उस दिन उन्हें भी पहननी पड़ती है
  2. भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। वे अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्वीप में भगवान ने उन्हें भेज दिया था, उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला



() ऊपर दिए गए दोनों वाक्यों को सर्वनाम की जगह संज्ञा शब्द लगाकर लिखिए।

उत्तर

  1. हाँ, बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं, लेकिन गांधी टोपी उस दिन बच्चों को भी पहननी पड़ती है
  2. भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। भारतीय अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्वीप में भगवान ने भारतीयों को भेज दिया था, उस द्वीप को भारतीयों ने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।


पहचान पाठ के आधार पर


आपने इस यात्रावृत्तांत में तीन देशों के नाम पढ़े हैंभारत, केन्या और मॉरिशस। पुस्तकालय या कक्षा में उपलब्ध मानचित्र पर भारत को तो आप सरलता से पहचान ही लेंगे। पाठ में दी गई जानकारी के आधार पर बाकी दोनों देशों को पहचानिए।

उत्तर

छात्र/छात्राएँ पुस्तकालय पर कक्षा में उपलब्ध मानचित्र पर पाठ में दी गई जानकारी के आधार पर भारत केन्या और मॉरिशस देशों की पहचान करें।


पाठ से आगे

आपकी बात

() “वहाँ जो कुछ देखा, वह जन्मभर कभी नहीं भूलेगा।क्या आपने कभी ऐसा कुछ देखा, सुना या पढ़ा है जिसके बारे में आपको लगता है कि आप उसे कभी नहीं भूल सकेंगे? उसके बारे में अपने समूह में बताइए

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


() “हमें अफ्रीका के शेरों से मुलाकात कर लेनी चाहिए।

मुलाकातशब्द का अर्थ है- ‘मिलना लेकिन यहाँमुलाकातशब्द का भाव है- शेरों को पास से देखना इसके लिएअपनी आँखों से देखना’, ‘सजीव देखना’, 'भेंट करना' आदि शब्दों का प्रयोग भी किया जाता है। अपनी बात को और अधिक सुंदर और अनोखा रूप देने के लिए शब्दों के इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं।

आपने अब तक किन-किन पशु-पक्षियों सेमुलाकातकी है? वह मुलाकात कहाँ हुई थी? बताइए

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


() “यह ऐसी सफलता की बात है, जिस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।” आपको किन-किन बातों पर गर्व होता है? बताइए

(संकेत- ये बातें आपके बारे में हो सकती हैं, आपके परिवार के बारे में हो सकती हैं और किसी अन्य व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी आदि के बारे में भी हो सकती हैं।) विद्यार्थी स्वयं करें।

उत्तर 

विद्यार्थी स्वयं करें।


कक्षा और घर की भाषाएँ

":प्रायः सभी भारतीय भोजपुरी बोलते अथवा उसे समझ लेते हैं। यहाँ तक कि भारतीयों के पड़ोस में रहने वाले चीनी भी भोजपुरी बखूबी बोल लेते हैं।"

भारत एक बहुभाषी देश है। भारत में लगभग सभी व्यक्ति एक से अधिक भाषाएँ बोल या समझ लेते हैं।

आप कौन-कौन सी भाषाएँ बोलसमझ लेते हैं? आपके मित्र कौन-कौन सी भाषाएँ बोलसमझ लेते हैं? इसके बारे में यहाँ दी गई तालिका को पूरा कीजिए-

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(संकेत- इस तालिका को पूरा करने के लिए आपको अपने मित्रों और परिजनों से पूछताछ करनी होगी। पहले भाषाओं के नाम लिखने हैं, बाद में उन नामों को गिनकर उनकी कुल संख्या लिखनी है | )

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


प्रशंसा या सराहना विभिन्न प्रकार से

यह द्वीप हिंद महासागर का मोती है, भारतसमुद्र का सबसे खूबसूरत सितारा है।

इस पाठ में लेखक ने मॉरिशस की सराहना में यह वाक्य लिखा है | सराहना करने के लिएदिनकरने द्वीप की तुलना मोती और तारे से की है।

किसी की सराहना अनेक प्रकार से की जा सकती है। आप आगे दी गई तालिका को पूरा कीजिए। पहले नाम लिखिए, फिर इनकी प्रशंसा में एक-एक वाक्य लिखिए। शर्त यह है कि प्रत्येक बार अलग तरह से प्रशंसा करनी है-


सराहना की तालिका



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उत्तर

सराहना की तालिका


नाम

प्रशंसा या सराहना का वाक्य

स्वयं

अ०ब०स० कुमार

मैं अपने परिवार का भविष्य हूँ।

परिजन

चंद्रेश कुमार

ये हमारे लिए उपवन के फूल की तरह हैं।

शिक्षकं

श्री सुकेश भट्टाचार्य

ये हमारे जीवन को आकार / प्रकार देने वाले चित्रकार हैं।

मित्र

रमन सिंह

वे मेरे मित्र ही नहीं बल्कि अभिभावक तुल्य भी हैं।

पशु

सुनहरी गाय

ये कामधेनु है

स्थान

संगम, प्रयागराज

गंगा, यमुना तथा सरस्वती ( लुप्त ) नदियों के संगम स्थल पर प्रयागराज अवस्थित है।

सब्ज़ी

आलू

यह सब्ज़ियों का राजा है।

पेड़

आम

यह फलों का राजा है।


चित्रात्मक सूचना ( इंफोग्राफिक्स)

नीचे दिए गए चित्र को देखिए। इसमें चित्रों के साथ-साथ बहुत कम शब्दों में कुछ जानकारी दी गई है। इसेचित्रात्मक सूचनाकहते हैं

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() इसचित्रात्मक सूचनाके आधार पर मॉरिशस के बारे में एक अनुच्छेद लिखिए।

उत्तर

जब मॉरिशस में गूँजा जय हिंद

मॉरिशस गणराज्य बनने से पूर्व हिंद महासागर में स्थित एक द्वीप था। यह क्रमशः पुर्तगाली, फ्रांसीसी एवं ब्रिटिश शासन के अधीन रहा। यहाँ ब्रिटिश शासन 1810-1968 तक रहा। इस दौरान भारत में भी ब्रिटिश सत्ता कायम थी। भारत की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने मॉरिशस के ऊख के खेतों में मज़दूर के रूप में काम करने के लिए भारतीयों को वहाँ ले जाने का निर्णय किया। फलत: पहली बार नवंबर 1834 को एटलस नाम का एक जहाज भारतीय मज़दूरों को लेकर मॉरिशस पहुँचा। इसलिए उस दिन कोइंडियन अराइवल डेके रूप में मनाया जाता है। इस प्रकार से धीरे-धीरे मॉरिशस में भारतीयों की संख्या बढ़कर कुल आबादी के 68 प्रतिशत हो गई। इनमें से अधिकतर लोग बिहार के थे। हालाँकि तमिल, तेलुगु और मराठियों की तादाद भी अच्छी-खासी थी। इसी कारण वहाँ की संस्कृति में भोजपुरीहिंदी गीतों और फ़िल्मों का काफी योगदान है। वहाँ की संस्कृति और परंपराओं में भारतीयता स्पष्ट रूप से नज़र आती है। हालाँकि सन् 1967 के आम चुनाव में जीतकर सर शिवसागर राम गुलाम वहाँ के पहले प्रधानमंत्री बने वे भारतीय मूल के थे। अतः भारतीयों में इनको लेकर काफी उत्साह था। मॉरिशस के शीर्ष पद पर हिंद का सपूत प्रतिष्ठित हुआ। सही अर्थों में यही वह पल था जब मॉरिशस में गूँजा उठा जय हिंद !


() अपनी पसंद के किसी विषय पर इसी प्रकार कीचित्रात्मक सूचनाकी रचना कीजिए, जैसे- आपका विद्यालय, कोई विशेष दिवस, आपके जीवन की कोई विशेष घटना आदि।

(संकेतयह कार्य आप अपने समूह में मिलकर कर सकते हैं। इसके लिए आप किसी कागज़ पर चित्र चिपका सकते हैं और सूचना को कलात्मक रूप से कम शब्दों में लिख सकते हैं। चित्र बनाए भी जा सकते हैं। आप यह कार्य कंप्यूटर या मोबाइल फोन की सहायता से भी कर सकते हैं।)

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


हस्ताक्षर


आप जानते ही हैं कि यह पाठ हिंदी के प्रसिद्ध लेखक रामधारी सिंहदिनकरने लिखा है। वे अपने नाम को कुछ इस प्रकार लिखते थे-

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अपनी पहचान प्रकट करने के लिए अपने नाम को किसी विशेष प्रकार से लिखने को हस्ताक्षर कहते हैं। हस्ताक्षर का प्रयोग व्यक्ति को जीवनभर अनेक कार्यों के लिए करना होता है। आपके विद्यालय में भी आपसे हस्ताक्षर करवाए जाते होंगे। आप प्रार्थना-पत्रों के अंत में भी अपने हस्ताक्षर करते होंगे।
हो सकता है अभी आपने अपने हस्ताक्षर निर्धारित किए हों। यदि नहीं भी किए हैं तो कोई बात नहीं। आप चाहें तो आज भी अपने हस्ताक्षर निर्धारित कर सकते हैं।

नीचे दिए गए स्थान पर अपने हस्ताक्षर पाँच बार कीजिए। ध्यान रखें कि आपके हस्ताक्षर एक जैसे हों, अलग-अलग हों।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


पत्र

यहाँदिनकरका लिखा एक पत्र दिया जा रहा है। इसे पढ़िए और प्रश्नों के उत्तर लिखिए। पत्र पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपने समूह में मिल कर खोजिए-

नई दिल्ली
8-7-67
मान्यवर चतुर्वेदी जी,
आपका कृपा-पत्र मिला मेरा स्वास्थ्य इधर बहुत गिर गया है और संयम के बावजूद तेज़ी से सुधर नहीं रहा है। मेरा चित्त अभी भी दबा हुआ है। ऐसी अवस्था में मैंने दो सप्ताह के लिए मॉरिशस जाना स्वीकार कर लिया है। 15 जुलाई को प्रस्थान करना है। लौटना शायद 5 अगस्त तक हो
आपके आशीर्वाद की कामना करता हूँ
आपका दिनकर
सफ़दरजंग लेन, नई दिल्ली

() पत्र किसने लिखा है?

उत्तर

पत्र दिनकर जी ने लिखा है।


() पत्र किसे लिखा गया है?

उत्तर

पत्र चतुर्वेदी जी को लिखा गया है।


() पत्र किस तिथि को लिखा गया है ?

उत्तर

पत्र 8 जुलाई सन् 1967 को लिखा गया है।


() पत्र किस स्थान से लिखा गया है ?

उत्तर

पत्रसफ़दरजंग लेन, नई दिल्ली से लिखा गया है।


() पत्र पाने वाले के नाम से पहले किस शब्द का प्रयोग किया गया है ?

उत्तर

पत्र पाने वाले के लाम से पहलेमान्यवरशब्द का प्रयोग किया गया है।


() पत्रलेखक ने अपने नाम से पहले अपने लिए क्या शब्द लिखा है?

उत्तर

पत्रलेखक ने अपने नाम से पहले अपने लिएआपकाशब्द लिखा है।


उलझन सुलझाओ

() “जहाज़ नैरोबी से चार बजे शाम को उड़ा और पाँच घंटों की निरंतर उड़ान के बाद जब वह मॉरिशस पहुँचा, तब वहाँ रात के लगभग दस बज रहे थे।

जहाज़ नैरोबी से शाम 4 बजे उड़ा तो उसे 5 घंटों की उड़ान के बाद रात 9 बजे मॉरिशस पहुँचना चाहिए था। लेकिन वह पहुँचा लगभग दस बजे क्यों?

उत्तर

आप इसका कारण पता करने के लिए अपने शिक्षकों या इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
वस्तुतः नैरोबी और मॉरिशस के मानक समय में लगभग एक घंटे का अंतर है। जब नैरोबी में नौ बजते हैं तो मॉरिशस में 10 बजे होते हैं।


() नीचे दो घड़ियों के चित्र दिए गए हैं। एक घड़ी भारत के समय को दिखा रही है। दूसरी घड़ी दिखा रही है कि उसी समय मॉरिशस में कितने घंटे और मिनट हुए हैं। इन घड़ियों के अनुसार नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए-


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  1. भारत में क्या समय हुआ है?
  2. मॉरिशस में क्या समय हुआ है?
  3. मॉरिशस और भारत के समय में कितने घंटे और मिनट का अंतर है?
  4. सूर्योदय भारत में पहले होगा या मॉरिशस में?
  5. जिस समय भारत में दोपहर के 12 बजे होंगे, उस समय मॉरिशस की घड़ियाँ कितना समय दिखा रही होंगी?

उत्तर

  1. भारत की घड़ी में 5:20 मिनट हुए हैं।
  2. मॉरिशस की घड़ी में 3:50 मिनट हुए हैं।
  3. मॉरिशस और भारत के समय में 1 घंटा 30 मिनट का अंतर है।
  4. भारत में पहले सूर्योदय होगा
  5. 10:30 मिनट


आज की पहेली

आज हम आपके लिए एक अनोखी पहेली लाए हैं। यहाँ एक वाक्य दिया गया है। आपको पता करना है कि इसका क्या अर्थ है-

येला मालथ येला घौलश 

मेरा ............


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उत्तर

मेरा भारत मेरा गौरव


खोजबीन के लिए

नीचे दी गई रचनाओं को पुस्तक में दिए गए क्यू. आर. कोड की सहायता से पढ़ें, देखें समझें-


चाँद का कुर्ता
मिर्च का मज़ा
राष्ट्रकवि रामधारी सिंहदिनकरकी जीवनी
हिमालय के पर्वतीय प्रदेश की मनोरम यात्रा

उत्तर

छात्र/छात्राएँ क्यू. आर. कोड (QR Code) की सहायता से स्वयं करें।


Chapter 13

Chapter 13 पेड़ की बात Class 6 NCERT Solutions

पाठ से

मेरी समझ से

() नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है ? उसके सामने तारा () बनाइए-

(1) “जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया होपौधे को कौनसा भेद पता लग गया ?

  • उसे उल्टा लटकाया गया है।
  • उसे किसी ने सज़ा दी है।
  • बच्चे को गमला रखना नहीं आया।
  • प्रकाश ऊपर से रहा है।

उत्तर

उसे उल्टा लटकाया गया है। ()


(2) पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं?

  • हमारे जैसे ही साँस लेते हैं।
  • हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण करते हैं।
  • हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं।
  • धरती पर हमारे साथ ही जन्मे हैं।

उत्तर

हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं। ()


() अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण सहित बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।

 

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

() “पेड़-पौधों के रेशे- रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं।
ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश ताप बाहर प्रकट होता है, वह सूर्य की ही ऊर्जा है।

उत्तर

चूँकि सूर्य की किरणों के स्पर्श से ही पेड़-पौधे पल्लवितपुष्पित होते हैं, इसलिए पेड़-पौधों के रेशेरेशे में सूर्य का प्रकाश व्याप्त है। स्पष्ट है कि ईंधन को जलाने पर जो ताप बाहर निकलता है, वह सूर्य द्वारा प्रदत्त प्रकाश ही है।


() “मधुमक्खी तितली के साथ वृक्ष की चिरकाल से घनिष्ठता है। वे दल-बल सहित फूल देखने आती हैं।

उत्तर

मधुमक्खी एवं तितली के साथ पेड़-पौधों की घनिष्ठता दीर्घ काल से है। वृक्ष अपने फूलों में शहद का संचय करके रखते हैं। मधुमक्खी और तितली बड़े चाव से मधुपान करती हैं। पौधों, मधुमक्खियों एवं तितलियों के बीच यह रिश्ता अनंत काल से चला रहा है। मधुमक्खी के आगमन से पौधों का भी उपकार होता है। मधुमक्खियाँ एक फूल के पराग कण दूसरे फूल पर ले जाती हैं। पराग कण के बिना फूल पक नहीं सकता।


मिलकर करें मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ वाक्यांश नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

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वाक्यांश

अर्थ या संदर्भ

1. बीज का ढक्कन दरक गया

1. मटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर-सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं।

2. उसेअंगारकवायु कहते हैं

2. जीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधारशक्ति या महत्वपूर्ण है।

3. पत्ते सूर्य ऊर्जा के सहारेअंगारकवायु से अंगार निःशेष कर डालते हैं

3. अपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न-संतुष्ट।

4. प्रकाश ही जीवन का मूल-मंत्र है

4. साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु- कार्बन डाईऑक्साइड

5. जैसे फूल फूल के बहाने स्वयं हँस रहा हो

5. सूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं।

6. इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैं

6. बीज के दोनों दलों में दरार गई या फट गई।

उत्तर

वाक्यांश

अर्थ या संदर्भ

1. बीज का ढक्कन दरक गया

6. बीज के दोनों दलों में दरार गई या फट गई।

2. उसेअंगारकवायु कहते हैं

4. साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु- कार्बन डाईऑक्साइड

3. पत्ते सूर्य ऊर्जा के सहारेअंगारकवायु से अंगार निःशेष कर डालते हैं

5. सूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं।

4. प्रकाश ही जीवन का मूल-मंत्र है

2. जीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधारशक्ति या महत्वपूर्ण है।

5. जैसे फूल फूल के बहाने स्वयं हँस रहा हो

3. अपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न-संतुष्ट।

6. इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैं

1. मटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर-सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं।

सोच-विचार के लिए


पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए-
(
) बीज के अंकुरित होने में किस-किस का सहयोग मिलता है?
(
) पौधे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?

उत्तर :
(
) बीज के अंकुरित होने में हवा, प्रकाश, पानी तथा मिट्टी की प्रमुख भूमिका होती है।
(
) पेड़-पौधे केवल तरल द्रव्य या वायु से अपना भोजन ग्रहण करते हैं। पेड़-पौधे जड़ के द्वारा माटी से रसपान करते हैं। माटी में पानी डालने पर उनके भीतर बहुत से द्रव्य गल जाते हैं। पेड़-पौधे वे ही तमाम द्रव्य सोखते हैं। जड़ को पानी मिलने पर पेड़ का भोजन बंद हो जाता है और पेड़ मर जाता है।

लेख की रचना

इस लेख में एक के बाद एक विचार को लेखक ने सुसंगत रूप से प्रस्तुत किया है। गमले को औंधा लटकाना या मूली काटकर बोना जैसे उदाहरण देकर बात कहना इस लेख का एक तरीका है। अपने तथ्य को वास्तविकता या व्यावहारिकता से जोड़ना भी इस लेख की विशेषता है।
(
) जैसे लेखक नेपेड़ की बातकही है वैसे ही अपने आस-पास की चीजें देखिए और किसी एक चीज़ पर लेख लिखिए, जैसे- गेहूँ की बात
(
) उसे कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर :
विद्यार्थी स्वयं करें।

अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए

() “इस तरह संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।वृक्ष के समाप्त होने के बाद क्या होता है?

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


() पेड़-पौधों के बारे में लेखक की रुचि कैसे जागृत हुई होगी ?

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रवाह चार्ट

बीज से बीज तक की यात्रा का आरेख पूरा कीजिए

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उत्तर

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अंकुरण

मिट्टी के किसी भी पात्र में मिट्टी भरकर उसमें राजमा या चने के 4-5 बीज बो दीजिए

  • हल्का-सा पानी छिड़क दीजिए
  • 3-4 दिन तक थोड़ा-थोड़ा पानी डालिए।
  • अब इसमें आए परिवर्तन लेखन पुस्तिका में लिखिए।

(संकेतएक दिन में पौधे की लंबाई कितनी बढ़ती है, कितने पत्ते निकले, प्रकाश की तरफ पौधे मुड़े या नहीं आदि।).

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।


शब्दों के रूप


नीचे दिए गए चित्र को देखिए

यहाँ मिट्टी से जुड़े कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं तो उसकी विशेषता बता रहे हैं। अब आप पेड़, सर्दी, सूर्य जैसे शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्द बॉक्स बनाकर लिखिए

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उत्तर

(i) पेड की विशेषता बताने वाले शब्द-

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(ii) सर्दी की विशेषता बताने वाले शब्द-

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(iii) सूर्य की विशेषता बताने वाले शब्द

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पाठ से आगे

मेरे प्रिय

नीचे दी गई तालिका में प्रत्येक के लिए अपनी पसंद के तीन-तीन नाम लिखिए।

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उत्तर

फूल

पक्षी

वृक्ष

पुस्तक

खेल

1. प्रसून

1. पंछी

1. तरु

1. किताब

1. मज़ाक

2. कुसुम

2. खग

2. पादप

2. पोथी

2. मनोरंजन

3. सुमन

3. विहग

3. पेड़

3. विद्यासागर

3. समय बिताना


आज की पहेली

इस शब्द सीढ़ी में पाठ में आए शब्द हैं। उन्हें पूरा कीजिए और पाठ में रेखांकित कीजिए

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उत्तर

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खोजबीन के लिए

इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप जगदीशचंद्र बसु के बारे में और जान-समझ सकते हैं-

  • जगदीशचंद्र बसु
  • जगदीशचंद्र बसुएक विलक्षण और संवेदनशील वैज्ञानिक


उत्तर

विद्यार्थी इंटरनेट के माध्यम से लेखक जगदीशचंद्र बसु के विषय में जानकारी प्राप्त करेंगे।


पढ़ने के लिए

आओ बच्चो तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिंदुस्तान की

आओ बच्चो, तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिंदुस्तान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम्। वंदे मातरम्।
उत्तर में रखवाली करता पर्वतराज विराट है
दक्षिण में चरणों को धोता सागर का सम्राट है
जमुना जी के तट को देखो गंगा का ये घाट है
बाट-बाट में हाट-हाट में यहाँ निराला ठाठ है
देखो, ये तस्वीरें अपने गौरव की अभिमान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम्। वंदे मातरम्।

ये है अपना राजपूताना नाज इसे तलवारों पे
इसने सारा जीवन काटा बरछी तीर कटारों पे
ये प्रताप का वतन पला है आज़ादी के नारों पे
कूद पड़ी थी यहाँ हज़ारों पद्मिनियाँ अंगारों पे
बोल रही है कण-कण से कुर्बानी राजस्थान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम्। वंदे मातरम्।

देखो, मुल्क मराठों का ये यहाँ शिवाजी डोला था
मुगलों की ताकत को जिसने तलवारों पे तोला था
हर पर्वत पे आग जली थी हर पत्थर एक शोला था
बोली हर-हर महादेव की बच्चा-बच्चा बोला था
शेर शिवाजी ने रखी थी लाज हमारी शान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम्। वंदे मातरम्।

जलियाँवाला बाग ये देखो, यहीं चली थी गोलियाँ
ये मत पूछो किसने खेली यहाँ खून की होलियाँ
एक तरफ़ बंदूकें दन-दन एक तरफ़ थी टोलियाँ
मरनेवाले बोल रहे थे इंकलाब की बोलियाँ
यहाँ लगा दी बहनों ने भी बाज़ी अपनी जान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम्। वंदे मातरम्

ये देखो बंगाल यहाँ का हर चप्पा हरियाला है
यहाँ का बच्चा-बच्चा अपने देश पे मरनेवाला है
ढाला है इसको बिजली ने भूचालों ने पाला है
मुट्ठी में तूफ़ान बँधा है और प्राण में ज्वाला है
जन्मभूमि है यही हमारे वीर सुभाष महान की
इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की
वंदे मातरम्। वंदे मातरम्।


कवि प्रदीप







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