नवीन यज्ञोपवीत

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नवीन यज्ञोपवीत धारण करने के लिए स्नान करके आसन पर बैठ जाएँ फिर आचमन कर के, नौ तन्तुओं में क्रमशः ॐकार, अग्नि, सर्प, सोम, पितर, प्रजापति, वायु, यम और विश्वदेव की तथा तीन ग्रन्थियों में क्रमशः ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र की भावना करके विनियोग मंत्र पढ़े –

ॐ यज्ञोपवीतमिति परमेष्ठी ऋषिः, त्रिष्टुप् छन्दः, लिङ्गोक्ता देवता, श्रोतस्मार्त कर्मानुष्ठानाधिकारसिद्धये यज्ञोपवीतपरिधाने विनियोगः।

यज्ञोपवीत धारण का मंत्र –
ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत् सहजं पुरस्तात्।
आयुष्यमग्र्यं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः॥
 यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वा यज्ञोपवीतेनोपनह्यामि।
इस मंत्र को पढ़कर एक जोड़ा यज्ञोपवीत पहन ले। फिर कम-से-कम बीस बार गायत्री-मंत्र का जप करे। इसके बाद पुराने जनेऊ को ऊतार कर समुद्रं गच्छ स्वाहा या (एतावद्दिनपर्यन्तं ब्रह्म त्वं धारितं मया। जीर्णत्वात् त्वत्वपरित्यागो गच्छ सूत्र यथासुखम्) – बोल कर जलाशय में फेंक दे।

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