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भारतीय सनातन संस्कृति में जाप का महत्त्व JAAP IN INDIAN CULTURE SANSKRITI

जाप की भूमिका   जाप अर्थात जप एक ऐसी विधा है जिसमें हम किसी एक नाम अथवा काम को बहुत बार आवृति करके करते है | जैसे आपने आदि कवि वाल्मीकि के विषय में सुना होगा की उन्होंने राम राम ऐसा कह कर , अर्थात इसको बार बार बोल बोल कर , सालों तक इसी को बोल बोलके रामायण का ज्ञान अर्जित किया | ऐसे ही जाप के ऐसे किस्से हमारी संस्कृति में भरे पढ़ें है |बहुत से ऐसी बातों से भारतीय संस्कृति में आस्था रखने वाले विचारकों ने इस जाप को अनेकों रूप दे दिये | जैसे हर व्यक्ति को अथवा मस्तिष्क पर ज़ोर देने वाले व्यक्ति को ये अनुभव होने लगा कि , भारतीय संस्कृति में जिन 33 कोटि देवताओं की बात की गयी है वो सभी कुछ न कुछ लाभ जरूर देते हैं | किस प्रकार से किया जाता है जाप  :- आज के संदर्भ  में  अगर देखें तो व्यक्ति  किसी भी कार्य को करने से पूर्व ही फल की इच्छा करने लग जाता है , मानव हर कार्य को दैवीय शक्ति के द्वारा करवाना चाहता है | वो अपनी संस्कृति का पूर्णतया लाभ लेना चाहता है यदि किसी को इस संस्कृति में लाभ प्राप्त ना हुआ हो तो वो अन्य धर्म तक स्वीकार करने लग जाता है | अब बात करते हैं कि किस ...

सर्जरी के आविष्कारक महर्षि सुश्रुत

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सर्जरी के आविष्कारक महर्षि सुश्रुत 🙏 महर्षि सुश्रुत सर्जरी के आविष्कारक माने जाते हैं... आज से 2600 साल पहले उन्होंने अपने समय के स्वास्थ्य वैज्ञानिकों के साथ प्रसव, मोतियाबिंद, कृत्रिम अंग लगाना, पथरी का इलाज और प्लास्टिक सर्जरी जैसी कई तरह की जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किए।  आधुनिक विज्ञान केवल 400 वर्ष पूर्व ही शल्य क्रिया करने लगा है, लेकिन सुश्रुत ने 2600 वर्ष पर यह कार्य करके दिखा दिया था। सुश्रुत के पास अपने बनाए उपकरण थे जिन्हें वे उबालकर प्रयोग करते थे।  महर्षि सुश्रुत द्वारा लिखित ‘सुश्रुत संहिता' ग्रंथ में शल्य चिकित्सा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।  इस ग्रंथ में चाकू, सुइयां, चिमटे इत्यादि सहित 125 से भी अधिक शल्य चिकित्सा हेतु आवश्यक उपकरणों के नाम मिलते हैं और इस ग्रंथ में लगभग 300 प्रकार की सर्जरियों का उल्लेख मिलता है। शल्य चिकित्सा ऋषियों का ज्ञान है ,न कि मॉडर्न मेडिकल साइंस।

सूर्य ग्रहण 2020

आज योग दिवस है और आज ही के दिन हमारी धरती सूर्य ग्रहण को भी ग्रहण कर रही है ।  देश में सूर्य ग्रहण या कोई भी ग्रहण एक उत्सव अथवा एक धार्मिक विचारों से बनाया जाता है  सूर्य ग्रहण होने से मानव जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है ।  आखिर ऐसा क्या है जो सूर्य ग्रहण का लाभ मनुष्य मात्र को ही मिलता है । कैसे संभव हो पाया ये ?   कैसे पता लगा की इंसान का जीवन ग्रहण के बाद परिवर्तित होता है ।  चलिए  जानते है इसे एवं विश्लेशण करते हैं इसका ।  सृष्टि के प्रारम्भ में जब मानव की आयु आज के संदर्भ में बहुत अधिक थी उसी काल में मानव मस्तिष्क से भी उतना ही शक्तिशाली था जितना की सम्पूर्ण शरीर से ।  मानव अपने मस्तिष्क से ऐसे अनेकों शोध करता था जो की मानवता के पक्ष में होते थे ।  उन्हीं में से एक शोध, उसका, हमारे सौरमंडल पर भी आधारित था  ।  मानव सौरमंडल का हमेशा अध्ययन करता था । गौरतलब है कि उन दिनों आज जैसे आधुनिक साधन नहीं थे तथापि तब भी मानव नक्षत्रों ग्रहों के नामकरण कर चुका था । ऐसे में उसमें सोचने अथवा चिंतन करने की क्षमता भी विकसित हुई ऐसे काल में हुए पर...