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छंद – Chhand Ki Paribhasha, Prakar, Bhed, aur Udaharan पढ़ो और समझो

 छंद – Chhand Ki Paribhasha, Prakar, Bhed, aur Udaharan (Examples) – Hindi Grammar छन्द जिस रचना में मात्राओं और वर्णों की विशेष व्यवस्था तथा संगीतात्मक लय और गति की योजना रहती है, उसे ‘छन्द’ कहते हैं। ऋग्वेद के पुरुषसूक्त के नवम् छन्द में ‘छन्द’ की उत्पत्ति ईश्वर से बताई गई है। लौकिक संस्कृत के छम्दों का जन्मदाता वाल्मीकि को माना गया है। आचार्य पिंगल ने ‘छन्दसूत्र’ में छन्द का सुसम्बद्ध वर्णन किया है, अत: इसे छन्दशास्त्र का आदि ग्रन्थ माना जाता है। छन्दशास्त्र को ‘पिंगलशास्त्र’ भी कहा जाता है। हिन्दी साहित्य में छन्दशास्त्र की दृष्टि से प्रथम कृति ‘छन्दमाला’ है। छन्द के संघटक तत्त्व आठ हैं, जिनका वर्णन निम्नलिखित है- चरण छन्द कुछ पंक्तियों का समूह होता है और प्रत्येक पंक्ति में समान वर्ण या मात्राएँ होती हैं। इन्हीं पंक्तियों को ‘चरण’ या ‘पाद’ कहते हैं। प्रथम व तृतीय चरण को ‘विषम’ तथा दूसरे और चौथे चरण को ‘सम’ कहते हैं। वर्ण ध्वनि की मूल इकाई को ‘वर्ण’ कहते हैं। वर्णों के सुव्यवस्थित समूह या समुदाय को ‘वर्णमाला’ कहते हैं। छन्दशास्त्र में वर्ण दो प्रकार के होते हैं-‘लघु’ और ‘गुरु’।...

अलंकार हिंदी व्याकरण सबसे पहले जान लें

 Table of Contents अलंकार की परिभाषा अलंकार के भेद शब्दालंकार– (2) यमक अलंकार (3) श्लेष अलंकार अर्थालंकार– (1) उपमा अलंकार (2) रूपक अलंकार अलंकार – परिभाषा, भेद, उदाहरण ,प्रकार : अलंकार – परिभाषा, भेद, उदाहरण , प्रकार : अलंकार – परिभाषा, भेद, उदाहरण, प्रकार जो शब्द वाक्यांश को अलंकृत करें वह अलंकार कहलाता है।  Aलंकार की परिभाषा, भेद, उदाहरण TGT PGT HINDI  अलंकार की परिभाषा अलंकार का अर्थ है– अलंकृत करना या सजाना। अलंकार सुन्दर वर्णो से बनते हैं और काव्य की शोभा बढ़ाते हैं। ‘अलंकार शास्त्र’ में आचार्य भामह ने इसका विस्तृत वर्णन किया है। वे अलंकार सम्प्रदाय के प्रवर्तक कहे जाते हैं। अलंकार के भेद (1) शब्दालंकार– ये वर्णगत, वाक्यगत या शब्दगत होते हैं; जैसे-अनुप्रास, यमक, श्लेष आदि। (2) अर्थालंकार– अर्थालंकार की निर्भरता शब्द पर न होकर शब्द के अर्थ पर आधारित होती है। मुख्यतः उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, अतिशयोक्ति, दृष्टांत, मानवीकरण आदि मुख्य अर्थालंकार हैं। (3) उभयालंकार–जहाँ काव्य में शब्द और अर्थ दोनों से चमत्कार या सौन्दर्य परिलक्षित हो, वहाँ उभयालंकार होता है। श...

बिम्ब विधान bimb Kay hai ||हिंदी साहित्य || काव्यशास्त्र || hindi shaitya me bimb

  दोस्तों आज की पोस्ट में हिंदी साहित्य में काव्यशास्त्र के महत्वपूर्ण विषय बिम्ब विधान (bimb) के बारे में  अच्छी तरह से समझाया गया है ,हमें आशा है कि आप इसे अच्छे से समझेंगे | बिम्ब क्या होते है ? बिम्ब विधान(bimb vidhan) ⇒ काव्य में कार्य के मूर्तीकरण के लिए सटीक बिम्ब योजना होती है। ⇔ ’बिम्ब’ शब्द अंग्रेजी के ’इमेज’ शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। जिसका अर्थ है -मूर्त रूप प्रदान करना। ⇒ काव्य में बिम्ब को वह शब्द चित्र माना जाता है जो कल्पना द्वारा ऐन्द्रिय अनुभवों के आधार पर निर्मित होता है। ⇔ बिम्ब पदार्थ नहीं है, वरन् उसकी प्रतिकृति या प्रतिच्छवि है। सृष्टि नहीं पुनस्सृष्टि है। ⇒  सी.डी. लेविस –  ’काव्य बिम्ब एक ऐसा भावात्मक चित्र है जो रूपक आदि का आधार ग्रहण कर भावनाओं को तीव्र करता हुआ काव्यानुभूति को सादृश्य तक पहुँचाने में समर्थ है।’ ⇒  डाॅ. नगेन्द्र –  ’काव्य बिम्ब शब्दार्थ के माध्यम से कल्पना द्वारा निर्मित एक ऐसी मानस छवि है जिसके मूल में भाव की प्रेरणा रहती है।’ Tgt pgt Hindi ke liye बिम्ब के तीन मूलभूत तत्व  हैं – कल्पना भाव ऐन्द्रिकता ⇒ बिम...