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क्या वो आदमी था ?

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   गुप्त अंग दिख रहे थे ,उसका पैजामा फटा हुआ था, वह कहां जा रहा था उसको कोई पता नहीं ,उसको कहां जाना है इसका भी पता नहीं   बात है उन दिनों की जब मैं दसवीं कक्षा में पढ़ता था,   हॉस्टल से घर आकर मैं ,अपने घर से तुरंत निकल कर चला गया, क्योंकि आते समय मैंने एक ऐसा दृश्य देखा जो मुझे अंतर्मन से व्यथित कर गया | मैंने घर में अपना सामान रखा ,उसमें घर में कोई नहीं था  | इसलिए मैंने फटाफट सामान रख और फिर से पीछे की ओर चला गया |  मेरे घर के साथ में मिलता एक जंगल है | जंगल के बीचो बीच से सड़क निकलती है बस उसी सड़क के किनारे मैंने उसे देखा था । कहानी अंत तक जरूर पढें एवं कमेन्ट करें     आकाश एकदम काला दिख रहा था और बारिश का मौसम भी था बिजली चमक रही थी  और वह अपना हाथ इधर उधर चला रहा था | मैं जब उसके पास पहुंचा, मैंने उसे बुलाया चाचा क्या बात है ? आप कहां जा रहे हो ? मैंने ऐसे उनसे एक दो बार पूछा - लेकिन कोई जवाब मुझे नहीं मिला | मुझे ऐसा लगा जैसे मैं पत्थर से बात कर रहा हूं तभी मेरा प्रश्न है कि क्या वह आदमी था ?  जी हां वह आदमी ही था ईश्व...