Navagraha mantra
1. सूर्य मंत्र: बीज मंत्र: ॐ ह्रीं ह्रौं सूर्याय नमः। आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च॥ हिरण्येन सविता रक्षेन देवो यति भुवनानि पश्यन्। सूर्यमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि, नमस्करोमि॥ अर्थ: हे सूर्य देव ! आप ऊषाकाल की रश्मियों रूपी स्वर्णिम रथ पर आरूढ़ होकर घने अंधकार युक्त अंतरिक्ष पथ से भ्रमण करते हुए, देवों और मनुष्यों को अपने-अपने वर्तमान कार्य-व्यापार में लगाते हुए तथा संपूर्ण लोकों को निरीक्षण करते हुए अर्थात् प्रकाशित करते हुए आवागमन करते हैं। 2. चन्द्र मंत्र: बीज मंत्र: ॐ ऐं क्लीं सोमाय नमः। इमं देवा असपत्न ग्वं सुवध्वं महते क्षत्राय , महते ज्यैष्ठ्याय महते जानराज्यायेन्द्रिस्येन्द्रियाय। इममममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश एष वोमी राजा , सोमोऽस्माकं ब्राह्मणाना ग्वं राजा। चन्द्रमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि नमस्करोमि॥ अर्थ: हे चन्द्र देव अथवा हे देवगणों! आप हम ब्राह्मणों के राजा आह्लादक चन्द्रमा के समान अमुक पिता के पुत्र, एवं अमुक माता के इस पुत्र को, महान क्षात्रवल के संपादक के लिए, महान राज्य पद के लिए, श्रेष्ठ जनराज्य के लिए, इन्द्र देव के समान ऐश्वर्य...